Durga Dutt
Health & Wealth
हमारा नया प्रोडक्ट #पुनर्नवा #
आनंद लिजिए ASCLEPIUS द्वारा बनाए गए एक और जीवन वर्धक शानदार आयुर्वेद का।
Awpl 2.0 👊👊✌️
🔥जलवा जारी था, जलवा जारी हैं, और जारी रहेगा !!🔥
अभी तो 34 मे से सिर्फ 8 विजय रथ हुए है और अभी से पूरी इंडस्ट्री हिल चुकी है | दोस्तो आगे आगे देखो होता है क्या, अभी 26 विजय रथ बाकी है।
कुर्सी की पेटी बांध ले और इस नए .0 # के सफर का आनंद ले और अपने जीवन को कामयाब और खुशहाल बनाए । आइए मिलकर जश्न मनाते है हर विजय रथ मे।
पहले यूनिक साइंटिफिक रिसर्च बेस्ड प्रॉडक्ट बनाना और लोगो को फ्री मे बांटना , फिर इनकम कैंपिंग बढ़ाना और दोस्तो आज एक और खुशखबरी हम सब के लिए डायमंड बनने के बाद अब रॉयल्टी बोनस भी, ऐसे ना जाने कितने धमाकेदार अनाउंसमेंट और होने बाकी है।
2025 की शुरुवात पहली डायमंड रॉयल्टी बोनस और बढ़ी हुई साप्ताहिक कैपिंग 2 लाख के साथ और भी बहुत कुछ ।
मै तैयार हु क्या आप तैयार है ???
जन्मभूमिः प्रथमं भवति
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 💐💐🪷
*आइए देश को बीमारी और बेरोज़गारी से मुक्त करने का प्रण लेते है*
जय जन्म भूमि, जय भारत , जय Awpl 🪷🙏
03/07/2024
आंख खोल के पढ़ लिजिए। लेकिन मन की😊
हाथरस की घटना****** 🤔
अपूज्या यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादरः ।
त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षं,मरणं भयम् ॥
( पद्मपुराणम् / खण्ड ६)
अर्थात-
जहां पर अयोग्यों को पूजा जाता है और विद्वानों का निरादर किया जाता है।
वहां तीन चीजें प्रवेश कर जाती है
1- भुखमरी 2- मृत्यु 3- भय
जब तक भारत में ये मंडलेश्वर, मठाधीश, फलाने नंद, ढिमके नंद, अदरक बाबा, लहसुन बाबा, अलाने बापू, फलाने धाम सरकार, श्री श्री 420 जैसे ऐश्वर्यपूर्ण जीवन भोगने वाले धर्मधूर्त बाबों की फौज रहेगी तब तक लोग ऐसे ही कीड़ों की तरह मरते रहेंगे।
जिस देश में वेद, उपनिषद, भगवदगीता जैसे महाग्रंथ और राम, कृष्ण, शिव, बुद्ध, महावीर जैसे प्रज्ञापुरुषों का दिखाया मार्ग मौजूद है, उसके बावजूद धर्म के इन धंधेबाजों की दुकान चल रही है तो सिर्फ इस देश की कामचोर और डरपोक जनता के कारण जो बिना करे धरे ऐश्वर्य चाहती है और इन बाबाओं को ईश्वर का बिचौलिया मानती है।
घर पर तो शांति से राम का नाम लिया नहीं जाता और इन बाबों के पैरों को भगवान की तरह चाटते हैं।
जब तक ये ढोंगी बाबे रहेंगे, ऐसे हादसे आगे भी होते ही रहेंगे।
इतनी मौतों का जो जिम्मेदार है उसका सिंहासन बत्तीसी देखिए और जो मूर्ख इनकी सभाओं में ग्ए थे उन्हें जमीन पर चटाई भी नसीब नहीं थी
वो सब जमीन पर हगने की मुद्रा में बैठे थे।
चलो मान लिया तुम मूर्ख हो तुम्हें ज्ञान की आवश्यकता है तो जो यंहा वंहा धक्के खाते फिरते हो और हजारों फूंक देते हो उससे बेहतर है कि अपने घर के कुलपुरोहित को जरा सा भी दान दक्षिणा दे दो तो वो तुम्हें ज्ञान से लबालब भर दे और उसका भी परिवार चलता रहे अगर मैं पूछ लूं की आखिरी बार घर में सत्यनारायण की कथा कब की थी तो सबको सांप सूंघ जाएगा। 🙋♂
23/06/2024
हमारा विनाश कब शुरू हुआ?
1.हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया!
2. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश में जर्सी गाय लायी गई और भारतीय स्वदेशी गाय का अमृत रूपी दूध छोड़कर जर्सी गाय का विषैला दूध पीना शुरु किया!
3. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन भारतीयों ने दूध, दही,मक्खन, घी आदि छोड़कर शराब पीना शुरू किया!
4. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने गन्ने का रस छोड़कर पेप्सी, कोका कोला पीना शुरु किया था जिसमें 12 तरह के कैमिकल होते हैं और जो कैंसर, टीबी, हृदय घात का कारण बनते हैं!
5. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने शुद्ध देशी तेल खाना छोड़ दिया था और रिफाइंड आयल खाना शुरू किया था जो रिफाइंड ऑयल हृदय घात, आदि का कारण बन रहा है!
6. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश के युवाओं ने नशा शुरू किया था बीडी, सिगरेट, गुटखा, गांजा, अफीम, आदि शुरू किया था जिससे से कैंसर बढ रहा है!
7. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ जिस दिन देश में 84 हजार नकली दवाओं का व्यापार शुरु हुआ और नकली दवाओं से लोग मर रहे हैं!
8. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन देश वासियों ने अपने स्वदेशी भोजन छोड़कर पीजा, बर्गर, जंक फूड खाना शुरू किया था जो अनेक बीमारियों का कारण बन रहा है!
9. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने अनुशासित और स्वस्थ दिनचर्या को छोड़कर मनमानी दिनचर्या शुरू की थी ।
10. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने घरों में एलुमिनियम के बर्तन व घर में फ्रिज लाया था।
11. हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन भारतीय जीवन शैली को छोड़कर विदेशी जीवन शैली शुरू की थी।
12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों के विपरीत कार्य करना शुरू किया था ।
13. लोग घर मे तो काम नही करते पर जिम जाकर हार्टअटैक से मर रहे है क्योंकि बॉडी को दिखाना भी है जिसके लिए अलग अलग प्रकार के दवाई और पावडर का सेवन कर रहे जो धीरे-धीरे हार्ट अटैक और किडनी डैमेज का कारण बनता जा रहा है।
14. पहले के जमाने में लोग स्वस्थ इसलिए रहते थे क्योंकि प्रकृति के हिसाब से चलते थे सुबह दोपहर शाम रात का काम प्रकृति के हिसाब से करते थे अब सुबह उठते नहीं और रात को सोते नहीं जिससे पूरा सिस्टम ही खत्म हो गया है जो धीरे-धीरे बीमारियों का जड़ बन रहा है
15. आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों में भोजन का समय सूर्यास्त के बाद बताया गया है पर आजकल 11:00 बजे 12:00 बजे रात को भोजन किया जाता है जिससे पेट तो निकल ही रहे हैं शरीर पचा नहीं पता और धीरे-धीरे बीमारियों का घर बनते जा रहे हैं
नोट :- हमारे विनाश के अनेक कारण हैं। आज लोग कैंसर, टीबी, हृदय घात, शुगर, किडनी फेल, हाई वीपी, लो वीपी, अस्थमा आदि गंभीर बीमारियों से मर रहे हैं!!
विचार तो करना पड़ेगा।
आपके सुखद स्वस्थ जीवन का साथी ।
Your success partner
Durga Dutt
🤙7631966268
*बूझो तो जानें*
अंधे को आंख होते ही वो सबसे पहले किसको खुद से दूर करता है।
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एक लघु नैतिक कहानी.
एक लड़का अपने बूढ़े दादा के पास गया और पूछा,
"दादाजी, क्या आप मुझे कोई नैतिक शिक्षा वाली कहानी सुना सकते हैं?"
बूढ़े दादाजी ने एक पल के लिए सोचा, फिर अपना गला साफ किया और उससे कहा कि बैठ जाओ और जो कहानी सुनानी है उसे सुनो।
"सारा नाम की एक अंधी लड़की थी। उसके माता-पिता उसी कार दुर्घटना में मारे गए थे, जिस दुर्घटना में वह छोटी लड़की अंधी हो गई थी।
उसकी दादी उसे गांव ले गईं और उसका पालन-पोषण किया। सारा का कोई दोस्त नहीं था। उसकी एकमात्र साथी उसकी छड़ी थी उसकी छड़ी ने उसके लिए बहुत मदद की थी।
इससे उसे अपने परिवेश में घूमने और किसी पर निर्भर हुए बिना जगह-जगह जाने में मदद मिली।
चाहे कुछ भी हो, इसने उसे कभी निराश नहीं किया या जानबूझकर उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई। उसकी छड़ी हमेशा उसे मुस्कुराने पर मजबूर कर देती थी।
बाद में, एक अमीर, सुंदर आदमी सारा के प्यार में पड़ गया और उससे शादी करने का फैसला किया। वह उसकी दृष्टि वापस लाने के लिए उसे देश के सबसे अच्छे अस्पतालों में से एक में ले गया सौभाग्य से, सर्जरी सफल रही और सारा को फिर से दिखना शुरू हो गया...'' कहानी ख़त्म हुई
जैसे ही बूढ़े दादा रुके, लड़का थोड़ा भ्रमित होकर फुसफुसाया,
"लेकिन कहानी में कोई नैतिक शिक्षा नहीं है, दादाजी। इसमें सीखने के लिए कुछ भी नहीं है।"
बूढ़े दादा ने कहा,
"मैं बेटा आपको कुछ बताऊं। जैसे ही अंधी सारा की दृष्टि वापस आई, उसने कुछ फेंक दिया। क्या आप जानते हो बेटा कि उसने क्या फेंक दिया?"
लड़के ने एक पल सोचा, फिर अपना सिर हिलाया और बुदबुदाया,
"मुझे नहीं पता... आप बताओ।"
बूढ़े दादाजी मुस्कुराये और बोले,
"उसने अपनी छड़ी फेंक दी। वह छड़ी जिसने जीवन भर उसकी मदद की थी। उसकी एकमात्र साथी। सिर्फ इसलिए कि उसकी दृष्टि वापस आ गई, वह भूल गई कि किसने उसके साथ खड़े होकर उसकी मदद की जब कोई नहीं था। वह वह सब कुछ भूल गई जो छड़ी ने उसके लिए किया था ।"
उस क्षण, बूढ़े दादा ने लड़के के कंधे को थपथपाया, आह भरी और फिर जारी रखा,
"सुनो बेटा ... जिंदगी ऐसी ही है। कटु सत्य यह है कि हम लोगों को तब याद करना बंद कर देते हैं जब वे हमारे काम के नहीं रह जाते। हम जो सबसे आम गलती करते हैं वह उन लोगों को भूल जाते हैं जो हमारे साथ खड़े थे और हमारी मदद करते थे जब हम उनके साथ थे जब हमारे जीवन का ख़राब समय था ।
उनके कार्य और बलिदान उल्लेखनीय हैं, लेकिन हम निश्चित रूप से उन्हें चुकाने का अवसर चूक जाते हैं। हम अपने माता-पिता, यहां तक कि हमारे भाई-बहनों, दोस्तों और उन लोगों के बलिदानों को भी भूल जाते हैं जिन्होंने अतीत में हमारी मदद की है।
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