Mahadev ki bhakti

Mahadev ki bhakti

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1991

03/07/2026

एक बार समस्त देवता और ऋषि एक भयंकर संकट में घिर गए। चारों ओर अंधकार छा गया और किसी को कोई उपाय नहीं सूझा। तब सभी ने कैलाश पर विराजमान भगवान शिव का स्मरण किया। भोलेनाथ ने अपनी करुणा से तीसरा नेत्र खोला, जिससे अज्ञान का अंधकार मिट गया और सत्य का प्रकाश फैल गया। उन्होंने किसी से बदले में कुछ नहीं माँगा, केवल धर्म, सत्य और करुणा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। तभी से कहा जाता है कि जो सच्चे मन से "ॐ नमः शिवाय" का जप करता है, उसके जीवन के भय, दुख और भ्रम धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद सदैव अपने भक्तों पर बना रहता है।
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03/07/2026

महादेव, जिन्हें भगवान शिव के नाम से भी जाना जाता है, सृष्टि के संहारक और कल्याणकारी देवता हैं। वे करुणा, तपस्या और शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। उनके गले में सर्प, मस्तक पर चंद्रमा और जटाओं से बहती गंगा उनकी दिव्यता को दर्शाती है। महादेव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। हर हर महादेव।FacebookMarketing

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