Dr. Abhishek's Wellness Centre

Dr. Abhishek's Wellness Centre

Share

With deep expertise in pulse diagnosis, Panchakarma, and he

Dr. Abhishek – A Visionary in Ayurveda and Social Service
Dr. Abhishek is a renowned Ayurvedic expert and dedicated social worker whose mission-driven approach has transformed thousands of lives.

27/09/2025

🌸 नवरात्रि व्रत और स्वास्थ्य : एक गहन दृष्टिकोण 🌸

“यदि जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाना है, तो प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर चलना ही सबसे बड़ा उपाय है।”

---

🌿 प्रकृति और स्वास्थ्य का गहरा रिश्ता

मनुष्य का शरीर प्रकृति का ही अंश है। जब हम अपने खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली को प्रकृति से जोड़कर जीते हैं, तो रोग अपने आप दूर रहते हैं।
लेकिन यदि हम प्रकृति के नियमों को तोड़ते हैं तो —
👉 हृदय (Heart)
👉 गुर्दे (Kidney)
👉 यकृत (Liver)
👉 मस्तिष्क (Brain)
जैसे जीवन के मूल स्तंभ अंग बीमार हो जाते हैं और असमय मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

---

🕉️ नवरात्रि व्रत का वास्तविक उद्देश्य

बहुत लोग नवरात्रि को केवल धार्मिक दृष्टि से देखते हैं, परंतु आयुर्वेद और जीवन विज्ञान के अनुसार व्रत का असली उद्देश्य है:
✅ शरीर की शुद्धि
✅ पाचन तंत्र को विश्राम
✅ मानसिक और आध्यात्मिक शांति
✅ शरीर की रीसेट प्रक्रिया को सक्रिय करना

जब हम व्रत रखते हैं और हल्के, कार्बोहाइड्रेट-युक्त, सात्त्विक आहार लेते हैं तो शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और पाचन प्रणाली को आराम मिलता है। यह आराम ही हमारे पाचन अंगों को पुनः मजबूत और संतुलित बनाता है।

---

🍎 व्रत के दौरान क्या खाएँ?

फल, दूध, दही

साबूदाना, शकरकंद

सिंघाड़ा, कुट्टू

नारियल पानी और नींबू पानी

ये सभी खाद्य पदार्थ पचने में हल्के हैं और शरीर को ऊर्जा व ताजगी प्रदान करते हैं।

---

⚠️ व्रत सबके लिए नहीं है!

व्रत रखने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन लोग सुरक्षित रूप से व्रत रख सकते हैं और किसे बचना चाहिए।

✅ व्रत रख सकते हैं:

सामान्य स्वास्थ्य वाले लोग

युवा व मध्यम आयु (15–60 वर्ष)

जिनकी शारीरिक शक्ति और पोषण अच्छा है

❌ व्रत से बचना चाहिए:

65 वर्ष से अधिक व्यक्ति, जिनके शरीर से वसा और उसकी गुणवत्ता घट चुकी हो

जिनके चेहरे पर झुर्रियाँ और शरीर में कमजोरी साफ झलकती हो

हृदय, किडनी, लिवर या मस्तिष्क के मरीज

अल्पपोषण और अत्यधिक दुर्बलता वाले लोग

---

❤️ हृदय और व्रत का संबंध

हृदय को धड़कने के लिए निरंतर ऊर्जा (वसा) की आवश्यकता होती है। वृद्धावस्था में यह वसा घट जाती है। ऐसे में यदि वृद्ध व्यक्ति व्रत रखते हैं तो —

हृदय की ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है

हार्ट अटैक (Heart Attack) या

हार्ट फेल्योर (Heart Failure) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है

👉 इसीलिए यह ज़रूरी है कि बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को व्रत से बचाया जाए।

---

🌸 निष्कर्ष

नवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेदिक विज्ञान का अद्भुत वरदान है।
यदि सही व्यक्ति सही तरीके से व्रत करे तो:
✅ शरीर शुद्ध होता है
✅ पाचन तंत्र मजबूत होता है
✅ मानसिक शांति मिलती है
✅ और जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है

लेकिन यदि गलत व्यक्ति (जैसे बहुत वृद्ध या हृदय रोगी) व्रत रखते हैं, तो यह आस्था उनके लिए खतरा भी बन सकती है।

27/09/2025

डायलिसिस बनाम आयुर्वेदिक चिकित्सा – एक सच्चाई
✍️ डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र
---
आज के समय में किडनी रोगियों के लिए सबसे बड़ा डर होता है डायलिसिस।
डायलिसिस में मरीज को हर हफ्ते कई घंटे मशीन से जोड़ा जाता है। नसों में सुइयां चुभाई जाती हैं, शरीर से खून बाहर निकालकर मशीन के द्वारा फिल्टर किया जाता है और फिर शरीर में डाला जाता है। इस प्रक्रिया में –
तीव्र दर्द और पीड़ा होती है।
समय (4 से 6 घंटे प्रति सत्र, हफ्ते में 2–3 बार) बर्बाद होता है।
मरीज थकावट, चक्कर, उल्टी और मानसिक तनाव से गुजरता है।
---
आयुर्वेद का विकल्प
आयुर्वेद में किडनी रोग को केवल एक मशीन तक सीमित नहीं किया जाता। यहां शरीर और मन दोनों को समान महत्व दिया जाता है।
मरीज को अभ्यंग (तेल से मसाज) दिया जाता है जिससे शरीर रिलैक्स होता है।
औषधियां, जिन्हें विशेष तेल या काढ़े में प्रोसेस किया जाता है, त्वचा और शरीर के माध्यम से सोख ली जाती हैं और किडनी तक अपना असर पहुँचाती हैं।
यह प्रक्रिया दर्द रहित और आरामदायक होती है।
---
आयुर्वेद के खिलाफ साजिश
पश्चिमी चिकित्सा जगत ने हमेशा आयुर्वेद को धीमा और बेअसर बताने की कोशिश की है।
असलियत यह है कि –
आयुर्वेद शरीर को मूल से ठीक करता है, समय तो लगता है लेकिन रोग जड़ से मिटता है।
डायलिसिस तेज है लेकिन जीवनभर का बोझ है।
जबकि आयुर्वेद सहज, प्राकृतिक और टिकाऊ चिकित्सा है।
यह भी सच है कि कई बार जानबूझकर आयुर्वेद को “धीमा, दर्द युक्त और अवैज्ञानिक” बताकर दुष्प्रचारित किया गया, ताकि लोग आधुनिक महंगी चिकित्सा पर निर्भर रहें।
---
पुनर्नवा और गोखरू का महत्व
अगर सही समय पर और उचित प्रोसेसिंग से पुनर्नवा काढ़ा और गोखरू काढ़ा दिया जाए तो यह –
सूजन कम करता है।
यूरिया और क्रिएटिनिन को नियंत्रित करता है।
किडनी की कोशिकाओं को नवजीवन प्रदान करता है।
आज भी हजारों मरीज इस साधारण लेकिन प्रभावशाली आयुर्वेदिक चिकित्सा से लाभान्वित हो रहे हैं।
---
संपर्क
Dr. Abhishek’s Wellness Centre
रानीजोत, बरगाँव, गोंडा
📞 9919941200

27/09/2025

"उपवास का डर और दिल की हकीकत"

आजकल एक नई ख़बर घूम रही है –
"Intermittent Fasting यानी व्रत से दिल पर खतरा है, हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है!"
और सबसे मज़ेदार बात?
👉 यह "बड़ी खोज" अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताई है।

अब भाई, यह बात भी उतनी ही मज़ेदार है जितनी यह कहना कि –
"प्यास लगने पर पानी पीना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।"

📌 सच तो यह है कि आयुर्वेद ने हज़ारों साल पहले ही लघन (उपवास/व्रत) को चिकित्सा पद्धति माना है।
लेकिन अफ़सोस! अगर यह रिसर्च किसी विदेशी जर्नल में छप जाती, तो शायद हमारे कुछ "मॉडर्न भक्त" इसे आँख मूँदकर सत्य मान लेते।

---

🤔 अब दिल की असली बात सुनिए

दिल की मांसपेशियां (Heart Muscles) ग्लूकोज़ को कभी अपनी असली ऊर्जा नहीं मानतीं।
बल्कि उन्हें चाहिए विद्युत ऊर्जा, और यह ऊर्जा दिल को मिलती है –
Triglycerides और Fat से, जिन्हें शरीर Ketones में बदलता है।

यानी, जब आप व्रत करते हैं, तो दिल अपने असली भोजन (Fat → Ketone → Energy) को मज़े से खाता है।
तो अब सोचिए – हार्ट पर बोझ किससे बढ़ता है?
🍔 जंक फूड और कोला से,
या फिर 🥛 उपवास और लघन से?

--

अगर व्रत से हार्ट अटैक होना होता, तो हमारे दादी-दादा, जो साल में 100 से भी ज़्यादा व्रत रखते थे, ज़िंदा ही न होते।

असल में समस्या यह है कि जिन्हें व्रत करना ही नहीं आता, वही सबसे ज़्यादा रिसर्च करते हैं कि व्रत खतरनाक है!

27/09/2025

🌿 किडनी फ़ेल होने पर आयुर्वेदिक समाधान 🌿

किडनी हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को शुद्ध करने और अनावश्यक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है।
जब Blood Urea Nitrogen (BUN) और Creatinine का स्तर बढ़ जाता है, तो यह संकेत है कि किडनी पर गंभीर दबाव है और उसका कामकाज प्रभावित हो चुका है।

👉 आधुनिक चिकित्सा पद्धति में केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट या डायलिसिस पर ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
👉 ऐसा इसलिए क्योंकि आधुनिक दवाइयाँ मृत रसायनों (Dead Chemicals) से बनी होती हैं, जो केवल अस्थायी राहत देती हैं।

✅ आयुर्वेद का दृष्टिकोण

आयुर्वेद मानता है कि जीवित तत्वों को केवल जीवित चीजें ही संतुलित कर सकती हैं।
इसलिए यहाँ पर शोधन (Detoxification) और शमन औषधि (Balancing Herbs) का उपयोग किया जाता है, जिससे –

शरीर की प्राकृतिक संरचना (Prakriti) पुनः स्थापित होती है।

किडनी के भीतर की सूजन और अवरोध कम होते हैं।

पेशाब की रुकावट, सूजन, थकान आदि लक्षणों में सुधार होता है।

रोग बिना किसी दुष्प्रभाव (Side Effects) के पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

🌱 किडनी हेल्थ के लिए उपयोगी सुझाव

1. पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं – लेकिन अत्यधिक नहीं, शरीर की क्षमता अनुसार।

2. अत्यधिक नमक और जंक फूड से परहेज़ करें।

3. गोखरू, पुनर्नवा, गिलोय, वरुणादि क्वाथ जैसे आयुर्वेदिक योग किडनी को मज़बूती देते हैं।

4. नियमित योग व प्राणायाम करें – विशेषकर भ्रामरी और अनुलोम-विलोम।

5. तनाव कम करें – क्योंकि मानसिक असंतुलन भी किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

🌟 आयुर्वेदिक चिकित्सा से लाभ

कोई साइड इफेक्ट नहीं।

शरीर की इम्यूनिटी और ताकत में वृद्धि।

डायलिसिस की आवश्यकता कम या समाप्त हो सकती है।

स्थायी और संपूर्ण उपचार संभव।

27/09/2025

कमर दर्द कई कारणों से हो सकता है, मुख्य रूप से –

संभावित कारण

नसों में सूजन (Inflammation)

नस दबने से (Sciatica, Slip Disc आदि)

कमज़ोरी या कैल्शियम / विटामिन D की कमी

लंबे समय तक बैठना / गलत पोस्चर

भारी सामान उठाना

---

आयुर्वेदिक सुझाव (Tips)

गर्म तेल से मालिश – विशेषकर नारियल, तिल या सहजन तेल से।

अभ्यंग और पोटली स्वेदन – सूजन व दर्द कम करने में सहायक।

त्रिफला व गुग्गुल प्रिपरेशन – कब्ज व सूजन कम करने के लिए।

सादा, हल्का और पचने योग्य भोजन लें।

कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार जैसे – दूध, दही, तिल, हरी सब्ज़ियां।

योग व प्राणायाम – भुजंगासन, मकरासन, शलभासन (बिना दर्द के अनुसार)।

अत्यधिक झुकना या वजन उठाना टालें।

27/09/2025

🩸 O Negative Blood Group – ज़िंदगी और मौत के बीच का रहस्य

क्या आप जानते हैं?
👉 दुनिया में सिर्फ 6-7% लोग ही O Negative ब्लड ग्रुप वाले होते हैं।
👉 यह ब्लड ग्रुप Universal Donor है – मतलब आप किसी की भी जान बचा सकते हैं।
👉 लेकिन सच्चाई यह है कि आप खुद के लिए सबसे असुरक्षित हैं…
क्योंकि आपको सिर्फ O Negative ही मिल सकता है।

⚠️ Emergency में अक्सर मरीज की जान बचाने के लिए सबसे पहले O Negative Blood ही माँगा जाता है।
😮 सोचिए, अगर ज़रूरत के वक्त यह ब्लड न मिले तो क्या होगा?

🤰 गर्भवती महिलाओं में अगर माँ O Negative और बच्चा Positive हो तो “Rh incompatibility” जानलेवा हो सकती है। केवल Anti-D Injection ही इसे रोक सकता है।

27/09/2025

⚠️ मोटापा – कई बीमारियों की जड़ ⚠️

❌ हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है
❌ डायबिटीज़ का मुख्य कारण
❌ हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक की आशंका
❌ सांस लेने में तकलीफ़ और नींद की समस्या
❌ जोड़ों में दर्द और शरीर में थकान
❌ आत्मविश्वास और सक्रियता कम करता है

👉 समय रहते मोटापे पर नियंत्रण करें
👉 अपनाएँ आयुर्वेदिक इलाज और प्राकृतिक जीवनशैली

15/05/2025

डायबिटिक फूट और पुराने घावों का आयुर्वेदिक समाधान

डायबिटीज़ एक गंभीर रोग है जो समय के साथ कई जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है, जिनमें से सबसे आम और खतरनाक समस्या है डायबिटिक फूट। यह समस्या तब होती है जब पैरों में रक्त संचार कम हो जाता है और घाव जल्दी नहीं भरते। यह स्थिति संक्रमण और कभी-कभी अंग विच्छेदन (amputation) तक का कारण बन सकती है।

अगर आप या आपके किसी प्रियजन को डायबिटिक फूट या किसी पुराने घाव से परेशानी है, तो अब चिंता की आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेद में इसका पूर्ण समाधान उपलब्ध है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा के लाभ:

प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से संक्रमण नियंत्रण

रक्त संचार में सुधार

घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करना

बिना सर्जरी के उपचार

विशेषज्ञ से संपर्क करें: डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा
B.Sc., B.A.M.S., C.K.S.
आयुर्वेद व पंचकर्म विशेषज्ञ
फोन: 9919941200

अब अपने घावों को नजरअंदाज़ न करें। आयुर्वेद की शक्ति से पाएं संपूर्ण और सुरक्षित इलाज।

---

#डायबिटिकफूट #पुरानेघाव #आयुर्वेदिकउपचार #डॉअभिषेककुमार #आयुर्वेद #पंचकर्म #घरेलूपचार

29/04/2025

#आयुर्वेदिकउपचार बवासीर (पाइल्स) और उसका आयुर्वेदिक उपचार
बवासीर क्या है?

बवासीर या अर्श एक आम लेकिन कष्टदायक रोग है जिसमें गुदा (मलद्वार) के अंदर या बाहर सूजन या मस्से हो जाते हैं। यह रक्तस्रावी (ब्लीडिंग) या गीली (non-bleeding) दोनों प्रकार की हो सकती है।

मुख्य कारण

पुरानी कब्ज़

तैलीय, मसालेदार व भारी भोजन

लंबे समय तक बैठना

मलत्याग में ज़ोर लगाना

मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली

लक्षण

मलत्याग के समय खून आना

गुदा में मस्सों का निकलना

जलन, दर्द और खुजली

बैठने या चलने में परेशानी

आयुर्वेद में उपचार

1. औषधीय उपचार

त्रिफला चूर्ण – कब्ज़ के लिए

अरशोघ्न वटी – मस्सों को सुखाने हेतु

अभयारिष्ट – पाचन शक्ति बढ़ाने हेतु

हेमार्ज वटी – रक्तस्राव रोकने हेतु

2. पंचकर्म चिकित्सा
बस्ती (एनिमा थेरेपी)

क्षारसूत्र चिकित्सा – मस्सों को धीरे-धीरे हटाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया

स्वेदन और अभ्यंग – सूजन कम करने हेतु

3. घरेलू उपाय

गुनगुने पानी में बैठकर स्नान (सिट्ज बाथ)

एलोवेरा जेल या नारियल तेल का लेप

बथुआ या नीम का रस सेवन

Dr. Abhishek's Wellness Centre — बवासीर उपचार में विश्वसनीय नाम

Dr. Abhishek's Wellness Centre बवासीर के आयुर्वेदिक इलाज में मशहूर एवं विशेषज्ञ केंद्र है। यहाँ आपको मिलता है:

व्यक्तिगत निदान

आधुनिक पंचकर्म सुविधाएँ

आयुर्वेद विशेषज्ञों की देखरेख में औषधीय चिकित्सा

घर बैठे ऑनलाइन परामर्श की सुविधा

यदि आप बवासीर से परेशान हैं, तो आज ही अपने जीवन को बदलें – प्राकृतिक, सुरक्षित और स्थायी समाधान के लिए Dr. Abhishek's Wellness Centre पर विश्वास करें।

+91 9919941200
+91-956504004

Kanti Villa, Opp – Chintu Baba Mandir, Madhavpuram, Bargaon – Gonda (U.P.) India

#बवासीर_का_इलाज


#बवासीर_से_मुक्ति




#पंचकर्म_थेरेपी
#स्वस्थ_आंतें

#आयुर्वेद_से_इलाज





#आयुर्वेदिक_उपचार

24/04/2025

डायबिटीज़ की एलोपैथिक दवाओं के दीर्घकालिक प्रभाव और आयुर्वेदिक समाधान

डायबिटीज़ (मधुमेह) के इलाज में मेटफॉर्मिन, ग्लिमिप्राइड, सीटाग्लिप्टिन जैसी एलोपैथिक दवाएं आमतौर पर उपयोग की जाती हैं। हालांकि, इन दवाओं का लंबे समय तक सेवन कुछ आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

🧪 एलोपैथिक दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव

1. मेटफॉर्मिन और विटामिन B12 की कमी

2. ग्लिमिप्राइड और रक्त कोशिकाओं पर प्रभाव

3. सीटाग्लिप्टिन के सामान्य दुष्प्रभाव

🧘‍♀️ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: रसायन और शोधन चिकित्सा

आयुर्वेद में मधुमेह (मधुमेह) को प्रमेह के अंतर्गत माना जाता है, और इसके उपचार में रसायन (पुनर्यौवन) और शोधन (शुद्धिकरण) चिकित्सा प्रमुख हैं।

1. रसायन चिकित्सा

2. शोधन चिकित्सा

✅ निष्कर्ष

📞 संपर्क करें
📱 9919941200

#डायबिटीज़ #मधुमेह #आयुर्वेद #रसायनचिकित्सा #शोधनचिकित्सा #स्वास्थ्य #विटामिनB12 #एलोपैथिकदवाएं #आयुर्वेदिकउपचार #प्राकृतिकचिकित्सा #स्वस्थजीवन

Want your business to be the top-listed Beauty Salon in Gonda?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Address

Gonda
Gonda
271002