R T A. U. Sharma
Insan tab tak ladta rahta hai jab tak uske sarer sai pran nahi nekl jatai yahi satya hai bake sab metya hai
04/05/2026
गुलामी किसी को भी नहीं पसन्द है पर उसकी जरूरतें उससे कहा क्या न करा लें ये सबको पता होना ही चाहिए
फिर वो कोई भी व्यक्ति हो सकता है
आती बात समझ में वर्ना दूं कान के नीचे
01/05/2026
हारा हुआ इंसान हर जगह हारता है लेकिन उसे हराने वाले भी अपने लोग ही होते हैं
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
दारू जरूरी है चाहे सब मिट जाये@दवा जरुरी है चाहे सब विक जाये@ मजहब जरूरी है चाहे कूच हो जाये@पैसा जरुरी है चाहे रिस्तै खत्म हो जाये@प्यार जरुरी है चाहे मां बाप भाई बहन छूट जाय@राजनीती जरुरी है चाहे जग बैरी हो जाये@पैसा जरुरी है ताकि प्यार परवान चढ़ जाये@जिम्मेदारी बहुत जरूरी है इसलिए जीना भी मजबूरी है
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