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digital दुनिया

09/09/2024
29/07/2024

I am fine

01/05/2024

" ा_रिश्ता"
मैं बिस्तर पर से उठा, अचानक छाती में दर्द होने लगा। मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसे विचारों के साथ मैं आगे वाली बैठक के कमरे में गया। मैंने देखा कि मेरा पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त था।
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मैंने पत्नी को देखकर कहा- "मेरी छाती में आज रोज से कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, डाॅक्टर को दिखा कर आता हूँ।"
"हाँ मगर सँभलकर जाना, काम हो तो फोन करना" मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं।
मैं एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, पसीना मुझे बहुत आ रहा था, ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं हो रही थी।
ऐसे वक्त्त हमारे घर का काम करने वाला ध्रुव साईकिल लेकर आया, साईकिल को ताला लगाते ही, उसने मुझे सामने खड़ा देखा।
"क्यों सा'ब ऐक्टिवा चालू नहीं हो रही है?
मैंने कहा- "नहीं..!!"
आपकी तबीयत ठीक नहीं लगती सा'ब,
इतना पसीना क्यों आ रहा है?
सा'ब इस हालत में स्कूटी को किक नहीं मारते, मैं किक मार कर चालू कर देता हूँ। ध्रुव ने एक ही किक मारकर ऐक्टिवा चालू कर दिया, साथ ही पूछा-
"साब अकेले जा रहे हो?"
मैंने कहा- "हाँ"
उसने कहा- ऐसी हालत में अकेले नहीं जाते,
चलिए मेरे पीछे बैठ जाइये।
मैंने कहा- तुम्हें एक्टिवा चलानी आती है?
"सा'ब गाड़ी का भी लाइसेंस है, चिंता छोड़कर बैठ जाओ"
पास ही एक अस्पताल में हम पहुँचे। ध्रुव दौड़कर अंदर गया और व्हील चेयर लेकर बाहर आया।
"सा'ब अब चलना नहीं, इस कुर्सी पर बैठ जाओ"।
ध्रुव के मोबाइल पर लगातार घंटियां बजती रहीं, मैं समझ गया था। फ्लैट में से सबके फोन आते होंगे कि अब तक क्यों नहीं आया? ध्रुव ने आखिर थक कर किसी को कह दिया कि ीं_आ_सकता।
ध्रुव डाॅक्टर के जैसे ही व्यवहार कर रहा था, उसे बगैर बताये ही मालूम हो गया था कि सा'ब को हार्ट की तकलीफ है। लिफ्ट में से व्हील चेयर ICU की तरफ लेकर गया।
डाॅक्टरों की टीम तो तैयार ही थी, मेरी तकलीफ सुनकर। सब टेस्ट शीघ्र ही किये।
डाॅक्टर ने कहा- "आप समय पर पहुँच गये हो, इसमें भी आपने व्हील चेयर का उपयोग किया, वह आपके लिए बहुत फायदेमन्द रहा।"
अब किसी की राह देखना आपके लिए बहुत ही हानिकारक है। इसलिए बिना देर किए हमें हार्ट का ऑपरेशन करके आपके ब्लोकेज जल्द ही दूर करने होंगे। इस फार्म पर आप के स्वजन के हस्ताक्षर की ज़रूरत है। डाॅक्टर ने ध्रुव की ओर देखा।
मैंने कहा- "बेटे, दस्तखत करने आते हैं?"
उसने कहा-
"सा'ब इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझ पर न डालो।"
"बेटे तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तुम्हारे साथ भले ही लहू का सम्बन्ध नहीं है, फिर भी बगैर कहे तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। वह जिम्मेदारी हकीकत में मेरे परिवार की थी। एक और जिम्मेदारी पूरी कर दो बेटा। मैं नीचे सही करके लिख दूँगा कि मुझे कुछ भी होगा तो जिम्मेदारी मेरी है। ध्रुव ने सिर्फ मेरे कहने पर ही हस्ताक्षर किये हैं", बस अब... ..
" ाँ_घर_फोन_लगा_कर_खबर_कर_दो"।
बस, उसी समय मेरे सामने मेरी पत्नी का फोन ध्रुव के मोबाइल पर आया। वह शांति से फोन सुनने लगा।
थोड़ी देर के बाद ध्रुव बोला- "मैडम, आपको पगार काटने का हो तो काटना, निकालने का हो तो निकाल देना मगर अभी अस्पताल में ऑपरेशन शुरु होने के पहले पहुँच जाओ। हाँ मैडम, मैं सा'ब को अस्पताल लेकर आया हूँ, डाक्टर ने ऑपरेशन की तैयारी कर ली है और राह देखने की कोई जरूरत नहीं है"।
मैंने कहा- "बेटा घर से फोन था?"
"हाँ सा'ब।"
मैंने मन में पत्नी के बारे में सोचा, तुम किसकी पगार काटने की बात कर रही हो और किसको निकालने की बात कर रही हो? आँखों में आँसू के साथ ध्रुव के कन्धे पर हाथ रखकर मैं बोला- "बेटा चिंता नहीं करते।"
"मैं एक संस्था में सेवायें देता हूँ, वे बुज़ुर्ग लोगों को सहारा देते हैं, वहां तुम जैसे ही व्यक्तियों की ज़रूरत है।"
"तुम्हारा काम बरतन कपड़े धोने का नहीं है, तुम्हारा काम तो समाज सेवा का है, बेटा पगार मिलेगा।
#इसलिए_चिंता_बिल्कुल_भी_मत_करना।"
ऑपरेशन के बाद मैं होश में आया, मेरे सामने मेरा पूरा परिवार नतमस्तक खड़ा था। मैं आँखों में आँसू लिये बोला- "ध्रुव कहाँ है?"
पत्नी बोली- "वो अभी ही छुट्टी लेकर गाँव चला गया। कह रहा था कि उसके पिताजी हार्ट अटैक से गुज़र गये है,
15 दिन के बाद फिर आयेगा।"
अब मुझे समझ में आया कि उसको मेरे अन्दर उसका बाप दिख रहा होगा।
हे प्रभु, मुझे बचाकर आपने उसके बाप को उठा लिया?
पूरा परिवार हाथ जोड़कर, मूक, नतमस्तक माफी माँग रहा था।
एक मोबाइल की लत (व्यसन) एक व्यक्ति को अपने दिल से कितना दूर लेकर जाती है, वह परिवार देख रहा था। यही नहीं मोबाइल आज घर-घर कलह का कारण भी बन गया है। बहू छोटी-छोटी बातें तत्काल अपने माँ-बाप को बताती है और माँ की सलाह पर ससुराल पक्ष के लोगों से व्यवहार करती है, जिसके परिणाम स्वरूप वह बीस-बीस साल में भी ससुराल पक्ष के लोगों से अपनत्व नहीं जोड़ पाती।
डाॅक्टर ने आकर कहा- "सबसे पहले यह बताइये ध्रुव भाई आप के क्या लगते हैं?"
मैंने कहा- "डाॅक्टर साहब, कुछ सम्बन्धों के नाम या गहराई तक न जायें तो ही बेहतर होगा, उससे सम्बन्ध की गरिमा बनी रहेगी, बस मैं इतना ही कहूँगा कि वो आपात स्थिति में मेरे लिए फरिश्ता बन कर आया था।"
पिन्टू बोला- "हमको माफ़ कर दो पापा, जो फर्ज़ हमारा था, वह ध्रुव ने पूरा किया, यह हमारे लिए शर्मनाक है। अब से ऐसी भूल भविष्य में कभी भी नहीं होगी पापा।"
"बेटा, #जवाबदारी_और_नसीहत (सलाह) लोगों को देने के लिये ही होती है।
जब लेने की घड़ी आये, तब लोग बग़लें झाँकते हैं या ऊपर नीचे हो जाते हैं।
अब रही मोबाइल की बात...
बेटे, एक निर्जीव खिलौने ने जीवित खिलौने को गुलाम बनाकर रख दिया है। अब समय आ गया है कि उसका मर्यादित उपयोग करना है।
नहीं तो....
#परिवार_समाज_और_राष्ट्र को उसके गम्भीर परिणाम भुगतने पडेंगे और उसकी कीमत चुकाने के लिये तैयार रहना पड़ेगा।"
अतः बेटे और बेटियों को बड़ा #अधिकारी या #व्यापारी बनाने के साथ साथ एक #अच्छा_इन्सान बनायें।
🙏🙏🙏🙏
पता नहीं, किन महानुभाव ने लिखी है, लेकिन मेरे दिल को इतना छू गयी कि शेयर करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया l

23/04/2024

शादियो में सब काम निपटाकर फ्रेश होने जाने की कहने बालों का भी अलग ही स्वेग है। असल मे ये मेरी नजर में सबसे मेहनती इंसान होते है।
सुबह से देर रात तक लगातार लगे रहते है। इनका शरीर टूटकर निढाल हो जाता है फिर भी ये टेंट बाले को जगह बताने से लेकर , हलवाई को गुटखा चाय तो फूफा को पाणी , जीजा को सिगरेट तक सब व्यवस्था करते है। भात के भातई , रिश्तेदार और गाँव बाले ,
बरात के दिन सारे बरातियो को खाना खिलाकर गांव बालों को निपटाकर भी चैन से नहीं बैठते । क्योंकि उनको पता है सुबह भी अपण को ही करना है इसलिए सबको फ्रि करके तुरंत 1 बाल्टी मे सब्जी , एक धामा में पुडी छोड़कर सबको भंडारे में पहुंचा देते है। फिर फ्रेश होने जाते है । 1 घंटे बाद इनके शरीर मे पुन एक जोश उमंग का ज्वालामुखी दौड़ जाता है तो खाना खाकर 2 सिगरेट पीकर पूरी शादी का समीकरण बिठाते है ।
कल की रणनीति बनाकर ही सोते है। सबसे ज्यादा विश्वासपात्र यही लोग होते है। जबकि इनको समाज और परिवार मे .......बोला जाता है।
में हमेशा ऐसे लोगों के पक्ष में रहा हू। आप भी इनका सच्चा सम्मान मिलने तक शेयर या कापी पेस्ट करते रहे।🥰✌️Copy by Meghraj Meena Narouli Dang ✍️👇
शादियो में सब काम निपटाकर फ्रेश होने जाने की कहने बालों का भी अलग ही स्वेग है। असल मे ये मेरी नजर में सबसे मेहनती इंसान होते है।
सुबह से देर रात तक लगातार लगे रहते है। इनका शरीर टूटकर निढाल हो जाता है फिर भी ये टेंट बाले को जगह बताने से लेकर , हलवाई को गुटखा चाय तो फूफा को पाणी , जीजा को सिगरेट तक सब व्यवस्था करते है। भात के भातई , रिश्तेदार और गाँव बाले ,
बरात के दिन सारे बरातियो को खाना खिलाकर गांव बालों को निपटाकर भी चैन से नहीं बैठते । क्योंकि उनको पता है सुबह भी अपण को ही करना है इसलिए सबको फ्रि करके तुरंत 1 बाल्टी मे सब्जी , एक धामा में पुडी छोड़कर सबको भंडारे में पहुंचा देते है। फिर फ्रेश होने जाते है । 1 घंटे बाद इनके शरीर मे पुन एक जोश उमंग का ज्वालामुखी दौड़ जाता है तो खाना खाकर 2 सिगरेट पीकर पूरी शादी का समीकरण बिठाते है ।
कल की रणनीति बनाकर ही सोते है। सबसे ज्यादा विश्वासपात्र यही लोग होते है। जबकि इनको समाज और परिवार मे .......बोला जाता है।
में हमेशा ऐसे लोगों के पक्ष में रहा हू। आप भी इनका सच्चा सम्मान मिलने तक शेयर या कापी पेस्ट करते रहे।🥰✌️

16/04/2024

रात मैं पत्नी के साथ होटल में रुका था। सुबह दस बजे मैं नाश्ता करने गया। क्योंकि नाश्ता का समय साढ़े दस बजे तक ही होता है, इसलिए होटल वालों ने बताया कि जिसे जो कुछ लेना है, वो साढ़े दस बजे तक ले ले। इसके बाद बुफे बंद कर दिया जाएगा।

कोई भी आदमी नाश्ते में क्या और कितना खा सकता है? पर क्योंकि नाश्ताबंदी का फरमान आ चुका था इसलिए मैंने देखा कि लोग फटाफट अपनी कुर्सी से उठे और कोई पूरी प्लेट फल भर कर ला रहा है, कोई चार छोले भटुरे का ऑर्डर कर रहा है। कोई इडली, डोसा उठा लाया तो एक आदमी दो-तीन गिलास जूस के उठा लाया। कोई बहुत से टोस्ट प्लेट में भर लाया और साथ में शहद, मक्खन और सरसो की सॉस भी।

मैं चुपचाप अपनी जगह पर बैठ कर ये सब देखता रहा ।

एक-दो मांएं अपने बच्चों के मुंह में खाना ठूंस रही थीं। कह रही थीं कि फटाफट खा लो, अब ये रेस्त्रां बंद हो जाएगा।

जो लोग होटल में ठहरते हैं, आमतौर पर उनके लिए नाश्ता मुफ्त होता है।

मतलब होटल के किराए में सुबह का नाश्ता शामिल होता है।

मैंने बहुत बार बहुत से लोगों को देखा है कि वो कोशिश करते हैं कि सुबह देर से नाश्ता करने पहुंचें और थोड़ा अधिक खा लें ताकि दोपहर के खाने का काम भी इसी से चल जाए।

कई लोग इसलिए भी अधिक खा लेते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मुफ्त का है, तो अधिक ले लेने में कोई बुराई नहीं।

कई लोग तो जानते हैं कि वो इतना नहीं खा सकते, लेकिन वो सिर्फ इसलिए जुटा लेते हैं कि कहीं कम न पड़ जाए। दरअसल हर व्यक्ति अपनी खुराक पहचानता है। वो जानता है कि वो इतना ही खा सकता है। पर वो लालच में फंस कर ज़रूरत से अधिक जुटा लेता है। मैं चुपचाप अपनी कुर्सी से सब देखता रहा।

साढ़े दस बज गए थे। रेस्त्रां बंद हो चुका था। लोग बैठे थे। टेबल पर खूब सारी चीजें उन्होंने जमा कर ली थीं।पर अब उनसे खाया नहीं जा रहा था। कोई भला दो-तीन गिलास जूस कैसे पी सकता है? बहुत सारे टोस्ट। कई बच्चे मां से झगड़ रहे थे कि उन्हें अब नहीं खाना। मांएं भी खा कर और खिला कर थक चुकी थीं। और अंत में एक-एक कर सभी लोग टेबल पर जमा नाश्ता छोड़ कर धीरे-धीरे बाहर निकलते चले गए। मतलब इतना सारा जूस, फल, ब्रेड सब बेकार हो गया।

यही है ज़िंदगी।

हम सब अपनी भूख से अधिक जुटाने में लगे हैं। हम सभी जानते हैं कि हम इसका इस्तेमाल नही कर पाएंगे। हम जानते हैं कि हमारे बच्चे भी इसे नहीं भोग पाएंगे। पर हम अपनी-अपनी टेबल पर ज़रूरत से अधिक जुटाते हैं।

जब हम जुटाते हैं तो हम इतने अज्ञानी नहीं होते कि हम नहीं जानते कि हम इन्हें पूरी तरह नहीं खा पाएंगे। हम जानते हैं कि हम इन्हें छोड़ कर दबे पांव शर्माते हुए रेस्त्रां से बाहर निकल जाएंगे, सबकुछ टेबल पर छोड़ कर।

उतना ही जमा कीजिए, जितने की आपको सचमुच ज़रुरत है।

ये दुनिया एक रेस्त्रां है। कोई इस रेस्त्रां में सदा के लिए नहीं बैठ सकता।

कोई इस रेस्त्रां में लगातार नहीं खा सकता।

सबके खाने की सीमा होती है। रेस्त्रां में सबके रहने की भी अवधि तय होती है।

उतना ही लीजिए, जिसमें आपको आनंद आए। उतना ही जुटाइए जितने से आपकी ज़रूरत पूरी हो सके।

बाकी सब यहीं छूट जाता है। चाहे नाश्ता हो या कुछ और...

हम में से बहुत से लोग संसार रूपी रेस्त्रां से बहुत से लोगों को टेबल पर ढेर सारी चीज़ें छोड़ कर जाते हुए देखते हैं। पर फिर भी नहीं समझते कि हमें कितने की ज़रूरत है।

हम जानते हैं कि हम भी सब छोड़ जाएंगे, लेकिन जुटाने के चक्कर में, जो है, हम उसका स्वाद लेना भी छोड़ देते हैं

Photos from digital kalakar's post 01/03/2024

परम मित्र, अच्छी प्रतिभा के धनी, समाज सेवी, कांट्रेक्टर श्री बृजेन्द्र चौधरी जी (बबलू जी ) अंबेडकर कॉलोनी निवासी करौली को जन्म दिन की बहुट बहुत बहुत एवम शुभकामनाएं

23/02/2024

Happy birthday 🎂 ललित जी

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