Manish singh Public Blog
सच्ची,प्रमाणिक पर सत्य व कड़वी सत्य बातों का सफर.....
03/07/2023
आज कल एक नई बीमाड़ी का शिकार हो गया हूँ, वो है लोगों को जानने की, उसके बीते जीवन को पढ़ने की तथा समझने की। कि वो, क्या बदलाव लाते तो आज वो यहाँ नही होते जहाँ है आज।
जरा सोचियेगा, एक ही कक्षा, समान शिक्षा, समान शिक्षक, एक समान जिंदगी, पर आगे चल कर कोई सरकार का बड़ा मुलाजिम, कोई बड़ा व्यापारी तो कोई रोड पर मजदूरी को मजबूर।
जरा सोचिए यदि रावण सीता का अपहरण न करता तो? यदि महाभारत युद्ध से पहले दुर्योधन कृष्ण को बंदी न बनाता तो? तो साफ है व्यक्ति का निर्णय ही उस व्यक्ति किरदार तय करता है। आप जो सोचते है वही आप करने की चाह भी रखते हैं, फिर तो वैसे ही करते है जब आपको अनुकूल मौका मिलता है तब और फिर कहानी सुरु वही से शुरू हो जाता है। जैसा आप करेंगे वैसे ही माहौल बना लेंगे, फिर आप वही करना चाहेंगे जो आप ने पहले भी किया है। फिर क्या है बार बार करेंगे जो आपकी पहचान होगी।अंत मे आप वही होंगे जैसा आपने सोचा था।
स्पस्ट टूर पर प्रदर्शित करने की कोशिश करता हूँ एक लड़का छोटा था पर देशहीत में सोचता था वैसे उसने ज्यादा सोचा नही पर पर तिरंगे को शान और भारत की भूमि को माँ मंटा था। एक बार शिक्षक ने भी बताया था जन्म देने वाली माँ वो जिसे आप मा कहते है पर पालन पोषण करने वाली मा तो हमारी धरती मतलब हमारा देश है जहां अन्न उपजते है घर है, स्कूल व अस्पताल है। वो छोटा था तो भारत माता की जय बोलना अच्छा लगता था उसे। फिर क्या था RSS के शाखा में जय घोष भारत माता की सुनी तो, वह भी शामिल हो गया। बड़ा होते तक तो कट्टर संघी हो गया । कही भी किसी भारतीयों पर जुल्म होतो आवाज उठाने में हिचकता नही । सभी भारतीयों को भाई व बहन समझने लगा। उनके ख़ुशी के लिए खुद को अर्पण करने लगा।
एक बार एक बड़ा भूकंप आया काफी लोग पीड़ित हुए तो इसने जमकर सेवा की । फिर क्या था लोगों का चहेता हो गया फिर सभी मित्रों और बुजर्ग के समझाने पर दलगत हो गया। लोकप्रियता हासिल थी ही और सेवा भाव बढ़ता गया। लोगों ने प्रांत के मुख्यमंत्री घोसित कर दिया। अब तो सत्ता का शक्ति भी हाथ मे थी फिर कहाँ रुका। सेवा भाव मे तो मन लगता ही था अब तो दोगुनी जोश से चल पड़ा । तब एक ऐसा वक्त आया जब रस्सी तो नही टूटी पर पत्थर पर गहरी निशान लग चुका था। अब तो एक बड़ा समुदाय भी साथ खड़ा हो गया क्योंकि पिछले कर्म ही आपका व्यवहार न जाता है, प्रधानमंत्री बन गए और रुचिपूर्वक खुद की रुचि के अनुरूप और ज्यादा सेवा में लग गया भारत ही जिंदगी बना ली और लोगों ने प्रधानमंत्री का पहचान।
यदि उन्हें बचपन से तिरंगे के प्रति समर्पण वाली सोच नही होती तो कभी शाखा नही जाता न ही कट्टर संघी बनता नही वो वहाँ होता जहाँ आज वो है।
तो रुकिए जीवन मे कुछ नया करने से पहले उसके अंत का अनुमान करें यदि अनुमान लगा कर वो न मिले जो वो पाना चाहता है।तो वैसा कभी न करे जो आपको पसंद न हो। वैसा कोई कार्य न करें जिससे आपके रुचि में कमी आई करो वही जो आपको एक बेहतर मंजिल दे। युही बे मतलब के जीवन से बेहतर है आज ही रुको और वो करो जिसमे आपकी रुचि और आपकी मंजिल दोनों स्पस्ट दिखती है। सच जीवन जीने का मजा आ जायेगा।आप चार गुनी रफ्तार से मंजिल जरूर पाओगे।
आज कल एक नई बीमाड़ी का शिकार हो गया हूँ, वो है लोगों को जानने की, उसके बीते जीवन को पढ़ने की तथा समझने की। कि वो, क्या बदलाव लाते तो आज वो यहाँ नही होते जहाँ है आज।
जरा सोचियेगा, एक ही कक्षा, समान शिक्षा, समान शिक्षक, एक समान जिंदगी, पर आगे चल कर कोई सरकार का बड़ा मुलाजिम, कोई बड़ा व्यापारी तो कोई रोड पर मजदूरी को मजबूर।
जरा सोचिए यदि रावण सीता का अपहरण न करता तो? यदि महाभारत युद्ध से पहले दुर्योधन कृष्ण को बंदी न बनाता तो? तो साफ है व्यक्ति का निर्णय ही उस व्यक्ति किरदार तय करता है। आप जो सोचते है वही आप करने की चाह भी रखते हैं, फिर तो वैसे ही करते है जब आपको अनुकूल मौका मिलता है तब और फिर कहानी सुरु वही से शुरू हो जाता है। जैसा आप करेंगे वैसे ही माहौल बना लेंगे, फिर आप वही करना चाहेंगे जो आप ने पहले भी किया है। फिर क्या है बार बार करेंगे जो आपकी पहचान होगी।अंत मे आप वही होंगे जैसा आपने सोचा था।
स्पस्ट टूर पर प्रदर्शित करने की कोशिश करता हूँ एक लड़का छोटा था पर देशहीत में सोचता था वैसे उसने ज्यादा सोचा नही पर पर तिरंगे को शान और भारत की भूमि को माँ मंटा था। एक बार शिक्षक ने भी बताया था जन्म देने वाली माँ वो जिसे आप मा कहते है पर पालन पोषण करने वाली मा तो हमारी धरती मतलब हमारा देश है जहां अन्न उपजते है घर है, स्कूल व अस्पताल है। वो छोटा था तो भारत माता की जय बोलना अच्छा लगता था उसे। फिर क्या था RSS के शाखा में जय घोष भारत माता की सुनी तो, वह भी शामिल हो गया। बड़ा होते तक तो कट्टर संघी हो गया । कही भी किसी भारतीयों पर जुल्म होतो आवाज उठाने में हिचकता नही । सभी भारतीयों को भाई व बहन समझने लगा। उनके ख़ुशी के लिए खुद को अर्पण करने लगा।
एक बार एक बड़ा भूकंप आया काफी लोग पीड़ित हुए तो इसने जमकर सेवा की । फिर क्या था लोगों का चहेता हो गया फिर सभी मित्रों और बुजर्ग के समझाने पर दलगत हो गया। लोकप्रियता हासिल थी ही और सेवा भाव बढ़ता गया। लोगों ने प्रांत के मुख्यमंत्री घोसित कर दिया। अब तो सत्ता का शक्ति भी हाथ मे थी फिर कहाँ रुका। सेवा भाव मे तो मन लगता ही था अब तो दोगुनी जोश से चल पड़ा । तब एक ऐसा वक्त आया जब रस्सी तो नही टूटी पर पत्थर पर गहरी निशान लग चुका था। अब तो एक बड़ा समुदाय भी साथ खड़ा हो गया क्योंकि पिछले कर्म ही आपका व्यवहार न जाता है, प्रधानमंत्री बन गए और रुचिपूर्वक खुद की रुचि के अनुरूप और ज्यादा सेवा में लग गया भारत ही जिंदगी बना ली और लोगों ने प्रधानमंत्री का पहचान।
यदि उन्हें बचपन से तिरंगे के प्रति समर्पण वाली सोच नही होती तो कभी शाखा नही जाता न ही कट्टर संघी बनता नही वो वहाँ होता जहाँ आज वो है।
तो रुकिए जीवन मे कुछ नया करने से पहले उसके अंत का अनुमान करें यदि अनुमान लगा कर वो न मिले जो वो पाना चाहता है।तो वैसा कभी न करे जो आपको पसंद न हो। वैसा कोई कार्य न करें जिससे आपके रुचि में कमी आई करो वही जो आपको एक बेहतर मंजिल दे। युही बे मतलब के जीवन से बेहतर है आज ही रुको और वो करो जिसमे आपकी रुचि और आपकी मंजिल दोनों स्पस्ट दिखती है। सच जीवन जीने का मजा आ जायेगा।आप चार गुनी रफ्तार से मंजिल जरूर पाओगे।
26/03/2022
आम जीवन
आम जीवन से स्पष्ट है, ज़्यादातर लोगों की जीवनशैली। चुकी हम भारत से है और भारत मे अब लगभग 10% लोग अमीर हैं, 35% लोग गरीब और 55% लोग मध्यम वर्गीय परिवार के रहते हैं। और निम्न वर्गीय एवम मध्यम वर्गीय परिवार में ज्यादे का फासला नही है तो आसानी से आम लोग बोलकर अमीर और गरीब लोगों में फ़र्क कर दिया करते है।
मैंने भारत के तीन चौथाई भुभाग को अध्धयन करने की कोशिशें की है। मुझे तो सिर्फ़ थोड़ा ही फर्क लगा है निम्न वर्गीय और मध्यम वर्गीय लोगों में वो ये है कि जो रोज या कल तक कि जीवन के खुद को खःपा रहे है निम्न वर्ग , जो महीने और छह महीने या साल तक के लिये निश्चिंत है मध्यम वर्ग है।
आज से एक प्रयास करूँगा, दोनों ही वर्गों के लोंगो की जुबानी शत प्रतिशत आप तक पहुंचाऊंगा पर आप भी क्या जानना चाहोगे उनसे । मुझे उन प्रश्नों को मेरे comment box लिखें ताकि आपकी बात भी उन तक रख सकू.....
आगे ज़ारी
18/06/2021
बाल मजदूरी की ओर भारत
कोरोना महामारी के बाद भारत के आर्थिक स्थिति बिगड़ गयी। लोग बेरोजगार हो गए जो महानगरों से लौटे तो पुनः वापस नही आ पाये। जिससे लोग आर्थिक स्थिति में भी कमजोर हो गए जिसके कारण बाज़ार में भी तंगी बनी रही। गरीबी बढ़ने के कारणों में फ़ैक्टरियों का बन्द होना भी पूरा असरदार रहा। गरीब दो जून के रोटी के लिये भी मुहताज हो रहे है जिसके कारण गरीब लोग अपने बच्चों को जान बूझकर भी आजीविका के लिए मजदूरी करने लिये भेजने लगे।
भारत वैसे भी बाल मजदूरी के लिए बदनाम था 2001 से 2011 तक जहां इसकी संख्या लगभग 50 लाख से नीचे था वही अब ये 2020 तक 90 लाख तक पहुंच गया।अब कोरोना महामारी के बाद इसकी संख्या में भारी इजाफा होने का आशंका जताई जा रही है। यदि आर्थिक विकास में थोड़ी ही रुकावट दिखा तो यह संख्या लगभग 1 करोड़ से भी बढ़ जाएगा। किसी भी देश के विकास में युवाओं का योगदान सरवोपरि है। क्योंकि युवा ही देश के निर्माता होते है।
आज के लिये जरूर यह सोचनीय मुद्दा हैकी 140 लोगों में लगभग एक बच्चा बाल मज़दूर बन रहे है। कहीं न कही यूनिसेफ और ईओल ( अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन) की अनदेखी साफ व स्पस्ट दिख रहा है जिसके कारण बालमजदूरी को लगातार बढ़ावा ही मिल रहा है।वही सरकार को भी कई अहम कदम उठाने चाहिए। आज बच्चों के स्कूल जाने पर वहां डेमिल मुहहैया कराया जाता है ठीक उसी तरह छोटे बच्चे से 10वी कक्षा तक सरकार सभी गरीब परिवार के बच्चों को आश्रय, शिक्षा , स्वास्थ्य व भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए। 10वी के बाद जीवन यापन व जीवन निर्वहन के लिए समय समय पर सरकार उन्हें स्किल ट्रैनिंग भी दें।ताकि आगे भी राष्ट्र सुदृढ़ीकरण में मददगार साबित हो।
कई और भी सलाह सरकार को मुहहैया कराया गया है जिनपर सरकार सिर्फ कदम उठाकर एक मुक्कमल मुकाम तक पहुँचे यही सभी बुद्धिजीवियों का कामना है। आपके राय हमे कमेंट बॉक्स में जरूर प्रेषित करें।
14/06/2021
Real means of life.
We are living life in same surface with same automotive life speed, in that some one spending their days fastly, few of us just cheating themselves and very few have their certain path to follow their task in same timeframe. Really it's totally upon to us how you are going to spend your time of life. Some of best author wrote in their books what is real means of life and how you would spend, because it's very precious.
Know who you are --
All the creatures have a certain types of extra ordinary power, you must find your specialty, in which field your are tremendously fine ,non easy to compare you to be same like them. In ramayana vir hanuman realized themselves and taken risk to fly in sky without fear of falling.
We must know our strengths and powerful abilities with your interest, because your interesting work will not bring laziness and painful culture in working place.
Define clearly what you want to be-----
Every one have path what they want to be but say to your self when this work will finish that you will go to enjoy that achievement. Make Little little goal and achieve them at any cost then enjoy celebration for improving your courage and confidence for getting another work goals.
Use kaisen theory,;-
Rome was not build in day means short works but regularly will bring you huge change. We know well in one day can't lose our fat in one day exercises but we have to do, so we should this
To be continue.....
13/04/2021
दीदी की रक्त रंजित राजनीति
भारत के चुनाव में होने वाले हत्या, कत्ल का आंकड़ों का विश्लेषण नेशनल क्राइम रिसर्च बयूरो के अनुसार सभी राज्यों के अनुपात में बंगाल सबसे ऊपर है । आंकड़ों में 2017 में 15, 2018 में 12 तथा 2019 में 96 एवम 2020-21 में अब तक 86 मौतें हो चुकी है।
दी हिन्दू, व अन्य समाचार पत्रों के अनुसार भाजपा के 83 व तृण मूल के 3 व्यक्ति की आहुति पज़द चुकी है। अन्य राज्यों में भी भाजपा ने चुनाव में सामिल हुई पर इस तरह की कोई खबर अब तक नही मिली अर्थात 2014 से अब तक भाजपा के समर्थन के बदले मृत्यु का फरमान सिर्फ और सिर्फ बंगाल में ही सुनाई दिया है।
ममता बनर्जी की राजनीतिक जीवन में ऐसे कई कत्लों के आलेख समाचार पत्रों में अंकित है इसका प्रमुख कारण है कि अल्पसंख्यक समुदाय को बल ज्यादा दिया जाता रहा है जिसके कारण हिंदुओं के दमन में सफलता मिली है। रोहिंग्या समुदाय व अल्पसंख्यक समुदाय के वृद्धि के कारण हिंदुओं को दमन किया जा रहा है तथा उन्हें विस्थापित करने के लिए इस तरह की घटनाओं को जोड़ दिया जा रहा है।
बिहार के एक पुलिस अधिकारी श्री अश्विनी कुमार के हत्या पर भी जोड़ देकर दीदी के कार्यकलापों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कई सभाएं की है।
आप भी अपना मत जरूर रखें।
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