Pt.Rajendra Dubey
Sr. News Editor, Dainik Bhaskar
01/07/2026
क्या चंपत राय ईमानदार है?
इस सवाल के जवाब से पहले एक छोटी-सी कहानी पढ़िए -
एक बार एक राज्य में राजा ने ब्राह्मण भोज कराया। जब भोजन बन रहा था तो खीर में चील ने मरा हुआ सांप गिरा दिया। ये जहरीली खीर राजा ने ब्राह्मणों को परोसी और सारे ब्राह्मणों की मौत हो गई। अब शनि देव को ब्रह्म हत्या का दंड देना था, लेकिन ये समझ नहीं आ रहा था कि किसे दें। सांप को, चील को, हलवाई को या राजा को। देवताओं ने शनि देव को इंतजार करने को कहा। कुछ साल बीत गए। साधुओं का एक जत्था फिर राज्य में आया। रास्ते में एक बुजुर्ग महिला सब्जी बेच रही थीं। साधुओं ने भोजन की इच्छा जताते हुए राजमहल का रास्ता पूछा। महिला ने रास्ता बताते हुए कहा- ध्यान से जाना गुरुजी, ये वहीं राजा है, जिसके भोजन से कई ब्राह्मणों की मौत हो चुकी थी। जब महिला ये बोल रही थी तो उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी, मानों मन ही मन आनंदित हो रही हों। बस, ये देखकर शनिदेव को ब्रह्म हत्या की दोषी मिल गई और दंड महिला को दिया गया, क्योंकि किसी बुरे काम में रस लेना से भी पाप के भागीदार बन जाते हैं।
यानी हमारे हर कर्म का हिसाब-किताब है। इसका पाप-पुष्य भोगना ही पड़ेगा। यश-अपयश मिलेगा ही।
फिर चंपत राय के माथे पर दान चोरी का कलंक भगवान श्रीराम की इच्छा के बगैर नहीं लग सकता। अब सरकार और कुछ लोग भले ही चंपत राय को दूध का धुला माने, लेकिन हकीकत ये ही है कि वे अपने पापों की वजह से कलंक भोग रहे हैं, ऐसा कलंक जो उनके कई जन्म लेने के बाद भी खत्म नहीं होगा।
इसलिए जो चंपत राय को सही मानते हैं, मेरा उनसे निवेदन है कि वे ईश्वर के न्याय को मानने छोड़ दें...
21/05/2026
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