Manas Arogya
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मेरा स्वास्थ मेरी जिम्मेदारी
क्या आप बिना दवा खाए जीना चाहते हैं?
तो दवा को भोजन नहीं, भोजन को दवा बनाना सीखें स्वयं के डॉक्टर बने, स्वयं के स्वास्थ्य के लिए इतना तो करें
01/06/2026
क्या आप भोजन खा रहे हैं या पेट पर 'अपच का टैक्स' लगा रहे हैं? ⚠️ चबाने के विज्ञान (Mastication) और असाधारण ऊर्जा का सबसे बड़ा रहस्य। जानें पृष्ठ 105-106 का सत्य.
मेरा स्वास्थ्य मेरी ज़िम्मेदारी
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 105-106)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 54
💎 शृंखला: Premium Editorial Wellness Series
आदरणीय साधकों,
'नो ब्रेकफास्ट प्लान' के पृष्ठ 105-106 पर डॉ. एडवर्ड डेवी स्वास्थ्य विज्ञान का एक ऐसा सूत्र देते हैं जो हमारी खाने की आदतों को पूरी तरह बदल देगा। वे प्रसिद्ध खोजी 'होरेस फ्लेचर' का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि असली शक्त्ति भोजन की मात्रा में नहीं, बल्कि उसे चबाने के तरीके में है।
जल्दी में खाया गया नाश्ता = विष:
जब हम सुबह बिना कड़क भूख के, घड़ी देखकर जल्दी-जल्दी नाश्ता गले से नीचे उतारते हैं, तो लार (Saliva) को भोजन के साथ मिलने का समय ही नहीं मिलता। ऐसा बिना पचा भोजन पेट में जाकर केवल सड़ता है, गैस पैदा करता है और शरीर की प्राण-शक्ति को थका देता है।
होरेस फ्लेचर का चमत्कारी प्रयोग:
किताब के इस पृष्ठ पर स्पष्ट है कि जब भोजन के प्रत्येक ग्रास को मुंह में ही पूरी तरह पानी बना दिया जाए, तो शरीर की आधी से ज्यादा बीमारियां (यहाँ तक कि बरसों पुराना पुराना कफ/नजला) अपने आप समाप्त हो जाती हैं। ऐसा करने से मानसिक स्पष्टता और शारीरिक हल्कापन अद्भुत रूप से बढ़ जाता है।
पाचन को विश्राम:
सुबह का उपवास (No Breakfast) आपके पाचन तंत्र को वह जरूरी विश्राम देता है जिससे आपकी प्राण-शक्ति जाग्रत रहती है। जब आप भोजन करें, तो उसे पूरी तृप्ति और शांति से चबाकर करें।
निष्कर्ष:
"मुंह को ही पहली भट्टी बनने दीजिए। भोजन को इतना चबाएं कि वह पेट में जाने से पहले अमृत बन जाए। सुबह का उपवास ही इस शक्ति का आधार है।"
क्या आप भी भोजन करते समय मोबाइल या टीवी देखते हुए जल्दी-जल्दी खाते हैं?
आज से ही भोजन को शांत मन से चबाकर खाने और सुबह की प्राण-शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए कमेंट में "सजग आहार का संकल्प" लिखकर अपनी सहमति दें! 🙏👇
📢 एडिटorial वेलनेस शृंखला: दवामुक्त्त जीवन की नई सुबह
📲 विशेष वैज्ञानिक स्वास्थ्य मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें:
👉 9821755832 (डॉ. भरत सोलंकी)
👉 9870392277 (डॉ. हेमांगी सोलंकी)
तप-सेवा-सुमिरन-समर्पण 🙏
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31/05/2026
क्या आपका नाश्ता पेट में पच रहा है या सड़ रहा है? ⚠️
सड़ते हुए भोजन से जन्मी क्रोनिक बीमारियों का सबसे बड़ा वैज्ञानिक खुलासा। जानें पृष्ठ 107-108 का सत्य।
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 107-108)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 55
💎 शृंखला: Premium Editorial Wellness Series
आदरणीय साधकों, 'नो ब्रेकफास्ट प्लान' के पृष्ठ 107-108 पर
डॉ. एडवर्ड डेवी चिकित्सा जगत का एक ऐसा सत्य बताते हैं जो आपको अंदर से हिला देगा। हम जिसे सुबह का 'पोषक नाश्ता' कहते हैं, वह वास्तव में बीमारियों का गोदाम कैसे बन जाता है?
पेट में भोजन की सड़न:
डॉ. डेवी के अनुसार, यदि रात का भोजन अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है, और सुबह बिना 'कड़क भूख' के आप फिर से कुछ खा लेते हैं, तो वह भोजन पचता नहीं है, बल्कि पेट की गर्मी में 'सड़ने' (Ferment) लगता है।
बीमारियों की जड़:
यह सड़न आपके खून को दूषित करती है। यही वह मुख्य कारण है जिससे शरीर में यूरिक एसिड, बैड कोलेस्ट्रॉल, गैस, डायबिटीज और त्वचा के रोग जन्म लेते हैं। हम दवाओं से बीमारी को दबाते हैं, जबकि बीमारी की असली जड़ हर सुबह हमारे पेट में डाली जा रही है।
आंतरिक हीलर का जाग्रत होना:
जैसे ही आप सुबह का नाश्ता बंद करते हैं, पेट शांत होता है। तब आपके भीतर बैठा 'आंतरिक डॉक्टर' सक्रिय होकर बरसों पुरानी बीमारियों और जमी हुई गंदगी को जड़ से उखाड़ फेंकना शुरू कर देता है।
निष्कर्ष:
"सड़ते हुए भोजन से बीमारियों को मत सींचिए। सुबह का उपवास (No Breakfast) आपके भीतर के डॉक्टर को काम करने का अवसर देता है।"
क्या आपने सुबह का नाश्ता छोड़ने के बाद अपनी गैस, एसिडिटी या वजन में कोई सकारात्मक सुधार महसूस किया है?
अपने स्वास्थ्य लाभ को कमेंट में "आंतरिक डॉक्टर जाग्रत" लिखकर अवश्य साझा करें! 🙏👇
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30/05/2026
भोजन शक्ति देता है या शक्त्ति छीनता है? 🛡️
जानिए सुबह के 'कठिन परिश्रम' और 'पाचन' के बीच का वैज्ञानिक संघर्ष। पृष्ठ 105-106 का रहस्य।
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 105-106)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 54
💎 शृंखला: Premium Editorial Wellness Series
क्या आपने कभी सोचा है कि भारी नाश्ता करने के बाद आपको सुस्ती क्यों आती है?
'नो ब्रेकफास्ट प्लान' के पृष्ठ 105-106 पर डॉ. एडवर्ड डेवी एक क्रांतिकारी सत्य उजागर करते हैं:
पाचन:
शरीर का सबसे कठिन श्रम:
हम समझते हैं कि भोजन हमें तत्काल शक्ति देगा। लेकिन सत्य यह है कि भोजन को पचाने के लिए शरीर को बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा (Vital Force) खर्च करनी पड़ती है। पाचन कोई 'फ्री' प्रक्रिया नहीं है, यह एक 'भारी श्रम' है।
ऊर्जा का बँटवारा:
यदि आप सुबह काम शुरू करने से ठीक पहले नाश्ता करते हैं, तो आपकी प्राण-शक्ति बँट जाती है। अब उसे दो मोर्चों पर लड़ना है—बाहर आपके काम के साथ और अंदर आपके भोजन के साथ। यही कारण है कि आप जल्दी थक जाते हैं।
उपवास की शक्त्ति:
बिना नाश्ते के काम करने वाला व्यक्त्ति अधिक शक्त्तिशाली होता है क्योंकि उसकी पूरी जीवन-ऊर्जा उसके मस्तिष्क और शरीर के अंगों को उपलब्ध होती है। सुबह का खाली पेट आपकी बैटरी को 'डिस्चार्ज' नहीं, बल्कि 'प्रोटेक्ट' (सुरक्षित) करता है।
निष्कर्ष:
"शक्त्ति भोजन में नहीं, उसे बचाने वाली प्राण-शक्त्ति में है।
सुबह का उपवास ही वास्तविक कर्मयोग है।"
क्या आपने कभी अनुभव किया है कि खाली पेट रहने पर आप अधिक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ काम कर पाते हैं?
अपने इस अनुभव को कमेंट में "प्राण-शक्त्ति जाग्रत" लिखकर पुष्टि करें! 🙏👇
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29/05/2026
नियम प्रकृति का, चुनाव आपका! ⚖️
क्या सुबह का भोजन आपकी आंतरिक शुद्धि का सबसे बड़ा दुश्मन है?
जानें पृष्ठ 101-102 का परम सत्य।
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 101-102)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 52
💎 शृंखला: Premium Editorial Wellness Series
प्रभुजी, क्या आप जानते हैं कि सुबह के समय जब आप पूरी ऊर्जा से काम करने की योजना बना रहे होते हैं, तब आपका शरीर अंदर से अपनी सबसे बड़ी 'सफाई क्रांति' चला रहा होता है? डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 101-102 पर प्रकृति के इस दिव्य नियम का उद्घाटन करते हैं:
झूठी भूख बनाम शुद्धि (Elimination Mode):
सुबह उठने के बाद शरीर का प्राथमिक कार्य भोजन पचाना नहीं, बल्कि रातभर में जमा हुए विषैले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालना है। यह शरीर का 'डिटॉक्स मोड' है। जिसे हम सुबह की तीव्र भूख समझते हैं, वह वास्तव में भूख नहीं, बल्कि भोजन की पुरानी 'आदत' (Habit Hunger) है।
प्रकृति के नियम में बाधा:
जैसे ही हम इस सफाई के समय (Elimination Period) में भारी नाश्ता पेट में डालते हैं, शरीर को विवश होकर शुद्धि का काम बीच में ही रोकना पड़ता है। पूरी प्राण-शक्त्ति कचरा साफ करने के बजाय भोजन पचाने में लग जाती है। परिणाम? वही अशुद्धि अंदर सड़कर भविष्य में गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती है।
फ्रीडम बनाम बंधन:
सुबह का उपवास (No Breakfast) आपके अंगों को वह 'फ्रीडम' देता है जिससे वे गहराई से खुद को हील कर सकें। सुबह का भोजन उस दिव्य व्यवस्था पर 'बंधन' लगा देता है।
निष्कर्ष:
"सुबह शरीर को भोजन नहीं, 'सफाई का समय' चाहिए। ब्रेकफास्ट (Breakfast) को छोड़कर शरीर को अंततः 'वेस्ट-फास्ट' (Toxin Elimination) करने दीजिए।"
क्या आप सुबह केवल घड़ी देखकर नाश्ता करते हैं या सच में पेट की पुकार सुनकर? प्रकृति के इस नियम का आदर करने के लिए कमेंट में "आंतरिक शुद्धि का संकल्प" लिखकर अपनी यात्रा शुरू करें! 🙏👇
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28/05/2026
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
थकान का असली कारण: भोजन पचाना या ऊर्जा का दिवालियापन? जानें पृष्ठ 99-100 का रहस्य।
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 99-100)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 51
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क्या दोपहर होने से पहले ही आपका शरीर टूटने लगता है और सुस्ती छा जाती है?
डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 99-100 पर इसका एक चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण बताते हैं:
पाचन का श्रम:
भोजन को पचाने के लिए आपके मस्तिष्क और स्नायु तंत्र (Nervous System) को अपनी पूरी ताकत पेट की भट्टी में झोंकनी पड़ती है। सुबह का नाश्ता आपकी बैटरी को चार्ज नहीं करता, बल्कि सुबह-सुबह ही उसे आधा खाली कर देता है।
स्नायु तंत्र का दिवालियापन:
जब तंत्रिका तंत्र दिनभर केवल पचाने के काम में उलझा रहता है, तो वह शरीर के अंगों की मरम्मत (Healing) नहीं कर पाता। यही कारण है कि लगातार खाते रहने वाले लोग हमेशा थके हुए और अस्वस्थ रहते हैं।
अद्भुत पुनरुत्थान:
जैसे ही आप सुबह का नाश्ता छोड़ते हैं, आपके नर्वस सिस्टम की बची हुई असीम ऊर्जा शरीर की अंदरूनी गंदगी को साफ करने और कोशिकाओं को नया जीवन देने में लग जाती है।
निष्कर्ष:
"पाचन को विश्राम दीजिए, स्नायु तंत्र को शक्त्ति दीजिए। सुबह का उपवास ही आपकी वास्तविक ऊर्जा का कवच है।"
क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि भारी नाश्ता करने के ठीक एक घंटे बाद आपको गहरी उबासी और सुस्ती आने लगती है?
इस सुस्ती को हराने के लिए कमेंट में "प्राण-शक्त्ति जाग्रत" लिखकर संकल्प लें! 🙏👇
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27/05/2026
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
आपके शरीर का गुप्त खजाना: जानें पृष्ठ 97-98 का वैज्ञानिक रहस्य!
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 97-98)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 50
डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 97-98 पर बताते हैं कि प्रकृति ने हमारे भीतर ऊर्जा का एक अद्भुत 'बैंक अकाउंट' बनाया है:
ऊर्जा का रिजर्व फंड:
रात को जो भोजन आपने किया था, शरीर ने उसे पचाकर सुबह के लिए शुद्ध ईंधन के रूप में संभाल कर रख लिया है। सुबह उठते ही आपको नया भोजन ठूंसने की कोई आवश्यकता नहीं है।
आंतरिक अंगों की मुक्त्ति:
जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते, तो आपका लिवर, आंतें और पेट राहत की सांस लेते हैं। पाचन तंत्र को मिलने वाला यह विश्राम ही आपके शरीर का कायाकल्प (Cell Regeneration) करता है।
अद्भुत स्फूर्ति:
इस संचित ऊर्जा के सहारे जब आप सुबह का काम करते हैं, तो आप खुद को हल्का, फुर्तीला और मानसिक रूप से अधिक प्रखर महसूस करते हैं।
निष्कर्ष:
"भीतर के खजाने पर भरोसा रखें। सुबह पेट को आराम दें और अपनी प्राण-शक्ति को काम करने दें!"
क्या आपने कभी महसूस किया है कि जिस सुबह आप बिना कुछ खाए अपने काम में व्यस्त रहते हैं, उस दिन आपको थकान बहुत कम होती है?
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26/05/2026
जब भूख बनती है अमृत: जानें पृष्ठ 95-96 का परम सत्य!
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 95-96)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 49
डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 95-96 पर हमें समझाते हैं कि 'नो ब्रेकफास्ट प्लान' आपको कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि आपके भोजन को अमृत बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
भीतरी शुद्धि की पराकाष्ठा:
जब आप सुबह का नाश्ता छोड़कर केवल ग्रीन जूस या पानी पर रहते हैं, तो शरीर अपने भीतर जमा पुराने टॉक्सिंस और जिद्दी वसा को ईंधन बनाकर जला देता है।
सच्ची भूख का आनंद:
दोपहर तक आते-आते आपके भीतर जो भूख जागृत होती है, वह जीभ की लत नहीं, बल्कि आपके शरीर की हर कोशिका की वास्तविक पुकार होती है।
अमृत भोजन:
इस दिव्य भूख की अवस्था में खाया गया सीजनल-रीजनल-ओरिजिनल भोजन साक्षात् अमृत बन जाता है। पेट में कोई गैस, एसिडिटी या भारीपन नहीं होता;
केवल शुद्ध ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष:
"सुबह का संयम ही दोपहर के भोजन को औषधि बनाता है। प्रकृति के इस चक्र को पहचानें!"
क्या आपने महसूस किया है कि सुबह का नाश्ता न करने के बाद दोपहर के भोजन का स्वाद और आनंद कई गुना बढ़ जाता है?
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26/05/2026
Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 Chandulal Savalia, Hemangi Solanki, Shakuntla Nathany
25/05/2026
सुबह की कमजोरी या केवल आदत की तरंग?
जानें पृष्ठ 93-94 का अद्भुत सत्य!
मेरा स्वास्थ्य मेरी पहली जिम्मेदारी! 🛡️
📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 93-94)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 48
प्रभुजी, डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 93-94 पर सुबह के उस 'डर' का इलाज बताते हैं जो हर नए साधक को सताता है:
भीतरी ईंधन चालू है:
सुबह उठने के बाद आपको किसी बाहरी नाश्ते की जरूरत नहीं है। आपके शरीर के बैंक में पहले से ही प्रचुर मात्रा में शुद्ध ऊर्जा जमा है। बिना खाए काम करने पर शरीर इसी दिव्य ईंधन का उपयोग करता है।
आदत का छलावा:
सुबह 8 या 9 बजे जो पेट में मरोड़ या कमजोरी लगती है, वह भूख नहीं है। वह केवल सालों पुरानी 'नाश्ता करने की आदत' का एक मानसिक ट्रिगर है।
सरल समाधान:
जब भी सुबह ऐसी नकली भूख लगे, बस थोड़ा सा गुनगुना पानी या ग्रीन जूस पी लें। आप देखेंगे कि कुछ ही मिनटों में कमजोरी गायब हो जाएगी और आप स्फूर्ति से भर जाएंगे।
निष्कर्ष:
"आदत के छलावे से बचें, ग्रीन जूस या गुनगुने पानी से भीतरी डॉक्टर को जगाएं। सुबह का समय शक्त्ति संचय का है!"
क्या आपने भी 'नो ब्रेकफास्ट प्लान' के शुरुआती दिनों में सुबह 9 बजे के आसपास कमजोरी महसूस की थी?
और
क्या पानी पीने के बाद वह अपने आप ठीक हो गई? अपना अनुभव कमेंट में "पानी का जादू" लिखकर जरूर साझा करें! 🙏👇
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24/05/2026
With Lalbhai Kapdi – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
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