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Up homgaourd bharti 2026
15/04/2026
सोचिये जिस उम्र में हम कॉलेज लाइफ़ एंजॉय करते हैं, उस उम्र में वीर गब्बर सिंह ने देश के लिये अपनी जान दे दी. प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था. बटालियन द्वितीय गढ़वाल राइफ़ल की कमान 20 वर्षीय गब्बर सिंह को दी गई थी।
उत्तराखंड के इस वीर सपूत ने जर्मनी के 350 सैनिक और अधिकारियों को अकेले ही युद्ध में बंदी बना लिया था. इस युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए सिर्फ 20 साल की उम्र में गब्बर सिंह नेगी वीरगति को प्राप्त हुए और तभी से उत्तराखंड वासियों को उनकी वीरता के किस्से सुनने को मिल रहे हैं. यह वही किस्से हैं, जिनको सुनकर उत्तराखंड के जवान देश सेवा के लिए प्रेरित होते हैं।
युद्ध में अपनी शौर्यता दिखाते हुए 1915 में वो महज़ 20 साल की उम्र में देश के लिये कुर्बान हो गये. कम उम्र में उन्होंने देश के लिये जो जोश और हिम्मत दिखाई, वो हर किसी के बस की बात नहीं थी. युद्ध के मैदान में उनकी होशियारी और बहादुरी सबको चकित कर गई. इसलिये उनकी वीरता ने अंग्रेज़ों को भी हैरान कर दिया था।
गब्बर सिंह नेगी की बहादुरी को देखकर अंग्रेज भी दंग थे. उन्हें मरणोपरांत ब्रिटेन के सर्वोच्च सैनिक सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया. उनका एक मेमोरियल लंदन में भी बनाया गया है, जहां पर उनके जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
उनकी बहादुरी की वजह से ही युद्ध में ब्रिटिश सी को बढ़त मिली थी. गांव में उनके जन्मदिवस पर एक मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें उनकी वीरता के किस्से लोगों को सुनाए जाते हैं. यह परंपरा 1925 से लगातार चली आ रही है।💐💐🇮🇳🇮🇳
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10/02/2026
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