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25/10/2020
घी क्यों और कितना खाएं?
इस विषय पर संक्षिप्त परन्तु तृप्त करने योग्य जानकारी।
चाय, हृदय रोगी, मोटापा, जोड़ो के दर्द से मुक्ति सुंदर त्वचा के इक्छुक अवश्य पढ़ें
बिना घी की रोटी खाने वालों
आपको मुर्ख बनाया गया है,
जानिए .....सच्चाई क्या है
दोस्तों, हर घर से एक आवाज जरुर आती है, “मेरे लिए बिना घी की रोटी लाना”, आपके घर से भी आती होगी, लेकिन घी को मना करना सीधा सेहत को मना करना है।
लोगो तला हुआ या चिकनाहट वाले भोजन में अंतर नही पता अतः वह घी से दूरी बना लेते है।
पहले के जमाने में लोग सामान्य दिनचर्या में घी का निसंकोच प्रयोग करते थे। घी का मतलब देसी गाय का वैदिक विधि से बिलोने से बना शुद्द देशी घी।
घी को अच्छा माना जाता था और कोलेस्ट्रोल और हार्ट अटैक जैसी बीमारियाँ कभी सुनने में भी नही आती थी।
लेकिन फिर शुरू हुई घी का योजनाबद्ध नकारात्मक एवं गलत प्रचार। बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर अपने बेकार और अनावश्यक उत्पादों का बाजार खड़ा कराने के लिए लोगों में घी के प्रति भ्रम फैलाया और कहा कि
"घी से मोटापा आता है, कोलेस्ट्रोल बढता है, और हार्ट अटैक आने की सम्भावना बढती है।"
जबकि ये पूर्णतः गलत है।
जानने योग्य बात यह है कि यदि गोघृत वैदिक पद्दति से बना है तो उसका पिघले स्वरूप (Melting Point) में रहने का तापमान हमारे शरीर के समान्य से कम होता है अतः शरीर के यह कभी जमा नही होता।
परंतु यदि गाय के दूध से भी घी गलत विधि से बनाया गया है या भैंस, विदेशी नस्ल की गाय जैसा दिखने वाले जीव के दूध से बने घी का melting point शरीर के तापमान से अधिक होता है। इसीलिए यदि आप शारीरिक श्रम कम करते है तो यह आपको अवश्य बीमार करेगा।
सत्य तो है यह कि कॉलेस्ट्रोल नाम का भूत वर्षो पहले विदेशी बाजार द्वारा रचा गया षड्यंत्र था जो अब इन्होंने स्वीकार भी किया है कि दुनिया के किसी भी खाद्य पदार्थ में कोलेस्ट्रॉल होता ही नही है।
अच्छा या खराब कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर मे ही बनता है जो निर्भर करता है कि हम कैसा घी औऱ तेल खा रहे है और उसका पाचन कितने प्रभावी रूप से शरीर करता है।
यदि शुद्ध बिलोने वाला वैदिक गोघृत शरीर मे जाएगा तो वह अच्छा कोलेस्ट्रॉल ही बनेगा।
जबकि रिफाइंड और दुसरे वनस्पति तेल और बाजारू घी ख़राब कोलेस्ट्रॉल बनाते है। जिस से लोग बीमार होंगे तो ही डॉक्टरों का धंधा चलेगा।
इसी सोच के साथ इन विदेशी लुटेरी कंपनियों के साथ ये डॉक्टर भी मिल गए। अब इस मार्किट में कुछ स्वदेशी कंपनियां भी आ गई है। और धीरे धीरे लोगों के दिमाग में यह बात घर कर गई कि घी खाना बहुत ही नुकसानदायक है।
घी न खाने में गर्व का अनुभव करने लगे कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक (Health Conscious) है। क्योकि जब आप एक ही झूठ को बार बार टीवी पर दिखाओगे तो वो लोगो को सत्य लगने लगता है।
जबकि घी खाना हानि नही बहुत ही अत्यंत लाभदायक है। घी हजारों गुणों से भरपूर है, खासकर गाय का घी तो खुद में ही अमृत है।
घी हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल को बढाता नही बल्कि कम करता है।
घी मोटापे को बढाता नही बल्कि शरीर के ख़राब फैट को कम करता है।
घी एंटीवायरल है और शरीर में होने वाले किसी भी इन्फेक्शन को आने से रोकता है।
घी का नियमित सेवन ब्रेन टोनिक का काम करता है।
विशेषकर बढ़ते बच्चों की फिजिकल और मेंटली ग्रोथ के लिए ये बहुत ही जरुरी है।
ये जो उठते और बैठते आपके शरीर की हड्डियों से चर मर की आवाज आती है इसकी वजह आपकी हड्डियों में लुब्रिकेंट की कमी है, अगर आप घी का नियमित सेवन करते है तो ये आपकी मांसपेशियों को मजबूत करता है और आपकी हड्डियों को पुष्ट करता है.
घी हमारे रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) को बढाता है।
घी हमारे पाचन क्रिया को भी सुदृढ रखता है जो आजकल सबसे बड़ी समस्या है। जिस कारण आज हर दूसरा व्यक्ति कब्ज का रोगी है जो कई रोगों की जननी है।
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अब हम बात करते है कि घी को कितना और कैसे खाए?
- घी नया खाना चाहिए अर्थात आज का बना आज ही खा लिया जाए तो सर्वोत्तम। अन्यथा बनने के 90 दिन के अंदर का उस घी का सेवन कर लेना उचित है। उसके बाद उसकी सुगंध बदलेगी और वह औषधि के उपयोग में आएगा।
- शहर में कार्यरत एक सामान्य व्यक्ति के लिए प्रतिदिन आयु के अनुसार 2 से 4 छोटी चम्मच घी पर्याप्त है।
- गर्भवती महिला के लिए प्रसव के पूर्व तो लाभदायक है परंतु प्रसव के बाद तो यह अमृततुल्य है। जिसक भारत मे अलग अलग क्षेत्रो में खाने के भिन्न भिन्न व्यंजन है।
- इसे आप सब्ज़ी, दाल में अवश्य डाले।
- घी और काली मिर्च का मेल विष को काटता है अतः खेतो में प्रयोग होने वाले विष का प्रभाव समाप्त करने के लिए सब्ज़ी में ऊपर से घी एवं कालीमिर्च का प्रयोग अवश्य करें।
- रात में गाय के दूध में फेंटकर पीने से अद्भुत लाभ है।
- चाय जैसे नशे के आदि लोग चाय छोड़ दे तो उचित परंतु फिर भी यदि चाय नही छूटती तो उसमें एक चम्मच यह शुद्ध घृत डाल कर अवश्य पीजिए।
- बच्चो के भोजन में इसका प्रयोग उदारता से करें।
- यदि आपको शुद्ध देसी गाय का दूध उपलब्ध है तो छाछ, दही या मक्खन का सेवन करें। घी की मात्रा आपको तब कम चाहिए। और यदि आपको गाय के दूध उपलब्ध नही है तो तब गलत दूध न मंगवाकर घी का सेवन अधिक करें।
- एकादशी पर धार्मिक दृष्टि से न सही शारीरिक दृष्टि से ही उपवास करें। उस दिन 50 से 100 ग्राम गुनगुना घी पीकर दिन भर गुनगुने या गर्म पानी का सेवन करें। जीवन मे कभी कैंसर, जोड़ो का दर्द से मुक्ति के अतिरिक्त अनगिनत लाभ होंगे।
- घी को पका कर या बिना पकाए दोनों तरीके से खा सकते है। चाहे तो इसमें खाना पका लें या फिर बाद में खाने के ऊपर डालकर खा लें। दोनों ही तरीके से घी बहुत ही फायदेमंद है।
- भाद्रपद माह अथवा भादवे के महीने के घी का सेवन अवश्य करें।
- आप सबसे अच्छा, सुंदर एवं युवा दिखना चाहते हैं तो घी अवश्य खाएं क्योंकि घी एंटीओक्सिडेंट जोकि आपकी त्वचा को हमेशा चमकदार और मुलायम रखता है।
लिखने को बहुत कुछ है परंतु अभी के लिए इतना ही।
आपके अपने और आसपास के सभी लोगों की एवं विशेषकर बच्चो के उत्तम स्वास्थ्य के लिए यह जानकारी उनके साथ अवश्य साँझा करे।
और जो बिना घी की रोटी खाते है उनको ये जरुर भेजे
ऐसा घी यदि संभव हो तो घर पर ही बनाएं *राजू जैथी* प्राकृतिक जीवन शैली को समर्पित
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस --इस रोग में व्यक्ति अपनी गर्दन को हिलाने- डुलाने,घुमाने-फिराने में असमर्थ हो जाता है ।अर्थात गर्दन में बहुत तेज दर्द होता है ।पहले यह रोग 40 साल के बाद होता था परंतु आजकल इस रोग का उम्र से कोई संबंध नहीं है ।इस रोग का मुख्य कारण है गलत तरीके से उठना-बैठना, सोना एवं टीवी,कंप्यूटर ,मोबाइल का गलत तरीके से देखना। इन सभी कारणों से गर्दन की मांसपेशियाँ एवं गर्दन की हड्डी के जोड़ प्रभावित होते हैं जोकि इस रोग का मुख्य कारण बनते हैं। इसका एक दूसरा कारण शरीर में कैल्शियम की कमी होना भी है। इस बीमारी से छुटकारा पाने का उपाय है रात को सोते समय वैद्यनाथ महानारायण तेल की गर्दन पर मालिश करें तथा वैद्यनाथ लाक्षादि गुग्गुल की दो-दो गोली सुबह- दोपहर -शाम गर्म पानी या दूध के साथ सेवन करें। इस औषधि का कम से कम 3 से 6 महीने तक अवश्य सेवन करें। इस दवा का कोई साइड इफेक्ट या रिएक्शन नहीं है।
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हमारी जीभ वो चीज मांगती है जो हमारे लिवर को पसन्द नहीं है | हमारा लिवर जो मांगता है वो हमारी जीभ को पसन्द नहीं आता है |
हमारा लिवर क्या मांगता है?
हमारा लिवर वो भोजन मांगता है जो जीवित अवस्था में हो जैसे फल,और कच्ची खाने योग्य हरी सब्जियां सलाद और अंकुरित अनाज, मेवा आदि | अर्थात हमारा लिवर वो भोजन मांगता है जो प्राकर्तिक रूप से खाने योग्य है, जिन्हें अप्राकृतिक रूप से पकाया नहीं जाता अर्थात जिनका सम्बन्ध घी तेल और आग से नहीं होता है जिन्हें आप बिना घी तेल और आग का प्रयोग किये बिना खा सकते हैं | प्राकर्तिक रूप से जीवित भोजन खाओगे तो कभी भी बीमार नहीं पड़ोगे | इसका उदाहरण पशु और पक्षी हैं जो जीवित प्राकर्तिक भोजन खाते हैं और स्वस्थ जीवन व्यतीत करते हैं |
स्वस्थ रहने के लिए हमेशा प्राकर्तिक भोजन ग्रहण करें |
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