Difa Ayurveda & Hijama center

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Ayurvedic-Skin, Hair & Pain management center, Sexual health solution.

Facilities-Panchkarma,Hijama,Leech therapy, PRP& Tatto and Permanent hair removal through Laser & Hydrofacial

02/08/2026
08/07/2026

क्या PCOS वास्तव में केवल ओवरी की बीमारी है?
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कनिका की कहानी, बदलती वैज्ञानिक सोच और आयुर्वेद की कालातीत दृष्टि

"आप बिल्कुल ठीक हैं। आपकी सारी रिपोर्ट सामान्य हैं।"

यह वाक्य सुनकर यदि किसी महिला को वास्तव में राहत मिलती, तो शायद यह लेख लिखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

लेकिन सच यह है कि भारत की लाखों-करोड़ों महिलाएँ वर्षों से इसी वाक्य को सुनती आ रही हैं, जबकि उनका शरीर लगातार संकेत देता रहता है कि सब कुछ सामान्य नहीं है।

थकान है...

वजन बढ़ रहा है...

बाल झड़ रहे हैं...

चेहरे पर मुहाँसे हैं...

मासिक धर्म में परिवर्तन है...

फिर भी रिपोर्ट "नॉर्मल" है।

क्या वास्तव में सब सामान्य है?

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कनिका—एक लड़की नहीं, एक पीढ़ी की कहानी

22 वर्षीय कनिका नोएडा में इंजीनियरिंग की छात्रा है।

तीन वर्षों से वह लगातार थकान महसूस करती है। जिम जाती है, संतुलित भोजन करती है, फिर भी वजन बढ़ रहा है। बाल पतले हो रहे हैं और मुहाँसे कम होने का नाम नहीं ले रहे।

वह एक नहीं, चार चिकित्सकों के पास जाती है।

किसी ने तनाव बताया।

किसी ने कहा—रिपोर्ट सामान्य है।

किसी ने अल्ट्रासाउंड किया और कहा—ओवरी में सिस्ट नहीं है, इसलिए PCOS नहीं है।

किसी ने केवल लाइफस्टाइल बदलने की सलाह दी।

लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि उसके शरीर में वास्तव में क्या हो रहा है।

कनिका काल्पनिक है, पर उसकी कहानी वास्तविक है।

क्या समस्या नाम में ही छिपी थी?

हाल के वर्षों में अनेक शोधकर्ताओं ने यह प्रश्न उठाया है कि Polycystic Ovarian Syndrome (PCOS) नाम स्वयं इस रोग की वास्तविक प्रकृति को सही ढंग से व्यक्त नहीं करता।

यही कारण है कि इसे अधिक उपयुक्त नाम Polymetabolic–Endocrine–Ovarian Syndrome (PMOS) जैसे शब्दों से समझाने का प्रस्ताव सामने आया है।

यह केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं है।

यह सोच का परिवर्तन है।

PCOS नाम क्यों भ्रम पैदा करता है?

Polycystic

यह शब्द बताता है कि ओवरी में बहुत-सी सिस्ट हैं।

जबकि अधिकांश मामलों में अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाली संरचनाएँ वास्तविक सिस्ट नहीं, बल्कि विकसित न हो पाए फॉलिकल होते हैं।

Ovarian

इस शब्द से लगता है कि बीमारी की शुरुआत ओवरी से होती है।

लेकिन आधुनिक शोध बताते हैं कि कई महिलाओं में ओवरी स्वयं समस्या की जड़ नहीं, बल्कि पूरे हार्मोनल एवं मेटाबॉलिक असंतुलन का प्रभाव झेलने वाला अंग होती है।

असली कहानी कहाँ से शुरू होती है?

यदि शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो जाए, तो अग्न्याशय सामान्य से अधिक इंसुलिन बनाने लगता है।

उच्च इंसुलिन स्तर ओवरी तक पहुँचकर हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है।

परिणामस्वरूप—

- अंडोत्सर्जन प्रभावित होता है।
- एंड्रोजन बढ़ सकते हैं।
- वजन बढ़ सकता है।
- मुहाँसे हो सकते हैं।
- बाल झड़ सकते हैं।
- मासिक धर्म अनियमित हो सकता है।

इस दृष्टि से देखा जाए तो ओवरी कारण नहीं, परिणाम का स्थान बन जाती है।

केवल अल्ट्रासाउंड पर्याप्त क्यों नहीं?

अल्ट्रासाउंड केवल ओवरी की संरचना दिखाता है।

वह इंसुलिन रेजिस्टेंस नहीं दिखाता।

वह मेटाबॉलिक असंतुलन नहीं दिखाता।

वह कोशिकाओं की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता नहीं बताता।

इसीलिए किसी महिला का अल्ट्रासाउंड सामान्य होने का अर्थ यह नहीं कि उसकी समस्या काल्पनिक है।

आधुनिक जीवन और प्राचीन शरीर

मानव विकास का इतिहास बताता है कि हमारा शरीर ऐसे वातावरण में विकसित हुआ जहाँ भोजन सीमित था।

ऊर्जा बचाकर रखना जीवन रक्षा का साधन था।

विशेष रूप से महिलाओं में यह क्षमता अधिक विकसित हुई ताकि गर्भावस्था और स्तनपान के समय पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध रहे।

लेकिन आज—

हर समय भोजन उपलब्ध है।

बार-बार स्नैकिंग है।

चीनी है।

रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट हैं।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन है।

कम शारीरिक श्रम है।

हमारा वातावरण बदल गया है।

हमारा डीएनए नहीं।

यहीं से आधुनिक मेटाबॉलिक विकार जन्म लेते हैं।

आयुर्वेद ने क्या कहा था?

आयुर्वेद ने कभी भी रोग को केवल किसी एक अंग की बीमारी नहीं माना।

आचार्यों ने स्पष्ट कहा—

"रोग सम्पूर्ण शरीर की समग्र विकृति है।"

जब अग्नि मंद होती है, जब कफ और मेद बढ़ते हैं, जब स्रोतस अवरुद्ध होते हैं, तब शरीर अनेक प्रकार के लक्षण उत्पन्न करता है।

आयुर्वेद इसलिए केवल ओवरी का उपचार नहीं करता।

वह अग्नि, दोष, धातु, स्रोतस, आहार और विहार—सभी का मूल्यांकन करता है।

यही इसकी समग्रता है।

उपचार का सबसे महत्वपूर्ण आधार

यदि समस्या मेटाबॉलिक है, तो समाधान भी मेटाबॉलिक होना चाहिए।

- संतुलित एवं प्राकृतिक भोजन
- पर्याप्त प्रोटीन
- नियमित शारीरिक गतिविधि
- समय पर भोजन
- पर्याप्त नींद
- तनाव नियंत्रण
- अनावश्यक स्नैकिंग से बचाव
- चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार वजन एवं इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार

इन उपायों से अनेक महिलाओं में लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।

सबसे बड़ी सीख

किसी महिला की रिपोर्ट सामान्य हो सकती है।

लेकिन उसका अनुभव असामान्य हो सकता है।

रिपोर्ट मशीन देखती है।

रोगी अपना शरीर महसूस करती है।

चिकित्सा का उद्देश्य केवल रिपोर्ट सामान्य करना नहीं, बल्कि रोगी के अनुभव को समझना भी है।

आधुनिक विज्ञान निरंतर विकसित होता है। नई खोजें हमारी समझ को समृद्ध बनाती हैं। आयुर्वेद हमें स्मरण कराता है कि शरीर को कभी केवल एक अंग के रूप में नहीं, बल्कि एक समग्र जीवित तंत्र के रूप में देखना चाहिए।

जब विज्ञान और समग्र दृष्टि साथ चलते हैं, तभी चिकित्सा वास्तव में रोगी-केंद्रित बनती है।

प्रश्न पूछिए।

अपने शरीर की आवाज़ सुनिए।

और किसी भी "सामान्य रिपोर्ट" को अंतिम सत्य मानने से पहले सम्पूर्ण व्यक्ति को समझने का प्रयास कीजिए।

04/07/2026

NCISM ने फिर किया स्पष्ट — प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सकों को जांच एवं चिकित्सा प्रक्रियाओं के उपयोग का अधिकार

भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध एवं सोवा-रिग्पा) के चिकित्सकों के अधिकारों को लेकर National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) ने एक बार फिर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। यह पत्र उन शिकायतों के संदर्भ में जारी किया गया, जिनमें कई डायग्नोस्टिक सेंटर आयुष चिकित्सकों द्वारा लिखे गए OBS Ultrasound के प्रिस्क्रिप्शन को स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे।

इस विषय को National Integrated Medical Association (NIMA) ने NCISM के समक्ष उठाया था। शिकायत में बताया गया कि कुछ जिलों में Chief District Medical Officer (CDMO) के आदेशों का हवाला देकर आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों द्वारा लिखे गए OBS Ultrasound के प्रिस्क्रिप्शन अस्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे चिकित्सकों और मरीजों दोनों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

NCISM ने अपने 24 जून 2026 के पत्र में पुनः स्पष्ट किया कि NCISM Ethics and Registration Regulations, 2023 के Regulation 19(2) एवं 19(3) के अनुसार भारतीय चिकित्सा पद्धति के पंजीकृत चिकित्सकों को अपनी योग्यता (Qualification), प्रशिक्षण (Training) तथा निर्धारित पाठ्यक्रम (Syllabus) के अनुरूप चिकित्सा उपकरणों, जांचों एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का उपयोग, परामर्श एवं प्रिस्क्रिप्शन देने का अधिकार प्राप्त है।

Regulation 19(2) के अनुसार यदि किसी चिकित्सा उपकरण या जांच का प्रशिक्षण चिकित्सक के पाठ्यक्रम अथवा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण का हिस्सा है, तो वह उसका उपयोग कर सकता है।

Regulation 19(3) के अनुसार चिकित्सक अपनी योग्यता एवं प्रशिक्षण के दायरे में आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे सकता है, जांच लिख सकता है तथा संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रियाएं कर सकता है।

इसके अतिरिक्त NCISM Act, 2020 की धारा 34(3)(b) का भी उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा है कि राज्य के विधि अनुसार राज्य रजिस्टर में पंजीकृत भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों को प्राप्त अधिकार एवं प्रैक्टिस के विशेषाधिकार सुरक्षित हैं।

यह स्पष्टीकरण केवल आयुर्वेद चिकित्सकों के अधिकारों की पुष्टि ही नहीं करता, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि बिना वैधानिक आधार के उनके वैध प्रिस्क्रिप्शन को अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी से बचाने तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सभी चिकित्सकों को अपने राज्य के प्रचलित कानूनों, पंजीकरण की शर्तों तथा अपनी योग्यता एवं प्रशिक्षण की सीमा के भीतर ही चिकित्सा कार्य एवं जांच संबंधी प्रिस्क्रिप्शन जारी करने चाहिए। NCISM का यह पत्र भी इन्हीं सीमाओं के अंतर्गत अधिकारों की पुष्टि करता है।
#आयुर्वेद #आयुष #डॉक्टरों_का_सम्मान #रोगी_हित #भारतीय_चिकित्सा_पद्धति

01/07/2026

🌿 राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं 🌿
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"मरीज़ की मुस्कान ही एक डॉक्टर की असली पहचान है।"

जो हर दर्द को समझता है,
हर धड़कन को सुनता है,
और बिना थके लोगों की सेवा करता है —
वो सिर्फ़ डॉक्टर ही हो सकता है।

आज का दिन समर्पित है उन सभी महान आत्माओं को,
जो अपने ज्ञान, समर्पण और करुणा से
हमें स्वस्थ जीवन का वरदान देते हैं।

🙏 धन्यवाद डॉक्टर साहब / साहिबा —
आप हमारे जीवन के असली हीरो हैं। 🙏

— Difa Ayurveda & Hijama Center, Agra

Difa Ayurveda & Hijama center Difa Arogya Chikitsalya Sadabad DrMohammad Shahid DR.Noor Mohammad -Social worker A

28/05/2026

केवल आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट ही बेच सकेंगे आयुर्वेदिक दवा.........................................................

28/05/2026

🌙✨ ईद उल अज़हा मुबारक ✨🌙

अल्लाह तआला आपकी हर कुर्बानी, हर दुआ और हर नेक इरादे को कबूल फरमाए।
यह मुबारक दिन आपके और आपके परिवार के जीवन में खुशियाँ, बरकत, अच्छी सेहत और सुकून लेकर आए। 🤲💖

🕋 आपको और आपके पूरे परिवार को ईद उल अज़हा की दिल से मुबारकबाद।


Dr. Noor Mohammad
Asst. Professor
Difa Ayurveda and Hijama Center, Agra

#ईदमुबारक #खुशियां #बरकत

25/05/2026

🧔‍♂️ क्या आप यौन दुर्बलता से परेशान हैं?
🤫 क्या इस बारे में किसी से कहने में शर्म महसूस होती है?

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डॉ. नूर मोहम्मद (BAMS, M.D. AYU., Hijama Expert)
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Noor Mohammad DR.Noor Mohammad -Social worker Difa Foundation Difa Ayurveda & Hijama center Difa Arogya Chikitsalya Sadabad

19/05/2026

Congratulations to all after completing hands on course of cosmetology and tricology at Difa Ayurveda agra

Photos from Difa Ayurveda & Hijama center's post 19/05/2026

3 Days Ayurvedic Cosmetology and Trichology
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Of
15 to 17 May 2026

& Hijama center Agra द्वारा
जो 3 Days hands on training course पूरा होने पर सभी चिकित्सकों को Dr.Noor Mohammad ने Trophy and Diploma Certificate बांटे गए.

सभी चिकित्सकों को बहुत बहुत बधाई.
Congratulations to all Doctors...

1-NS chadda (Muradpur,Ghaziabad)
2- Alihussain (Assam)

*Our Aim to
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Difa Ayurveda And Hijama Center Mishra Market Opp. Jay Hospital Nehru Nagar Agra
Agra
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Monday 1pm - 7pm
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