Dr N.P.Dubey
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पारीजात (Parijat)/ हरसिंगार, जिसे वैज्ञानिक रूप से
न्यक्टैंथिस आर्बोर्ट्रिस्टिस (Nyctanthes arbor-tristis) कहा जाता है, भारत का एक अत्यंत पवित्र और औषधीय वृक्ष है।
1. धार्मिक महत्व:
देववृक्ष: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वृक्ष समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक है, जिसे इंद्र द्वारा स्वर्ग में स्थापित किया गया था।
बाराबंकी का परिजात: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गाँव में एक प्राचीन पारिजात वृक्ष स्थित है, जिसे महाभारत काल का माना जाता है। मान्यता है कि अर्जुन इसे स्वर्ग से कुंती के लिए लाए थे।
2. मुख्य विशेषताएँ:
रात में खिलना: इसके फूल रात में खिलते हैं और सूर्योदय से पहले खुद ही झड़ जाते हैं। इसीलिए इसे 'नाइट जैस्मीन' (Night Jasmine) या 'हरसिंगार' भी कहा जाता है।
फूलों की बनावट: इसके फूल सफेद रंग के होते हैं जिनकी डंडी (नली) नारंगी होती है। ये फूल अत्यंत सुगंधित होते हैं।
अनोखी परंपरा: हिंदू धर्म में यह एकमात्र ऐसा फूल है जिसे जमीन से उठाकर भगवान पर चढ़ाना शुभ माना जाता है।
3. औषधीय लाभ:
गठिया (Arthritis): इसके पत्तों का काढ़ा जोड़ों के दर्द और सायटिका (Sciatica) के इलाज में रामबाण माना जाता है।
बुखार: लंबे समय से चले आ रहे बुखार (जैसे मलेरिया या डेंगू) को ठीक करने के लिए इसके पत्तों का उपयोग किया जाता है।
त्वचा रोग: इसके बीजों और पत्तों का लेप त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है।
चांगेरी एक बहुत ही फायदेमंद औषधीय पौधा है, जिसे पाचन, लिवर, त्वचा और इम्यूनिटी के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा यह भूख बढ़ाने में मदद करता है और विटामिन सी व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होता है। चांगेरी का सेवन पेट की आग को मजबूत करता है और भूख बढ़ाता है।
( छुई-मुई /लाजवंती) का पौधा अपनी स्पर्श-संवेदनशील पत्तियों के लिए जाना जाता है और इसका उपयोग आयुर्वेद में कई औषधीय कामों के लिए होता है, जैसे त्वचा रोगों (मुंहासे, सोरायसिस, सूजन), सांप-बिच्छू के विष के असर को कम करने, डायबिटीज, बवासीर, पेशाब संबंधी समस्याओं (यूरिन इन्फेक्शन), खांसी, और मानसिक तनाव (माइग्रेन, अवसाद) के इलाज में, साथ ही इसे वास्तु में भी शुभ माना जाता है।
जपा / गुड़हल
Marigold /गेंदा
शिवलिंगी (Bryonia laciniosa) एक औषधीय लता है, जिसके बीज शिवलिंग के आकार के होते हैं, इसलिए यह नाम पड़ा; यह आयुर्वेद में प्रजनन क्षमता बढ़ाने, बांझपन दूर करने, हार्मोन संतुलन और बुखार व पाचन समस्याओं के लिए प्रसिद्ध है, पर इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए क्योंकि यह एक तीव्र औषधि है और इसके गलत प्रयोग से नुकसान हो सकता है।
12/12/2025
Hydrastis canadensis Q मुख के ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia) में सहायक होती है, लेकिन यह मुख्य इलाज नही है इसके साथ हमारे द्वारा मरीज की सारी जानकारी लेने के बाद कुछ और दवा दी जाती है । अगर हम काहे समय से आप इलाज नही लेते एक जानकार डॉक्टर से तो ल्यूकोप्लाकिया एक गंभीर समस्या हो सकती है—कभी-कभी कैंसर-प्रीकर्सर भी—इसलिए केवल होम्योपैथी मे कुशल डॉक्टर चुने डॉक्टर द्वारा लि गई जानकारी बहुत जरूरी है।
मुख के अंदर मोटे, सफेद, पनपने वाले पैच
Hydrastis Q का प्रयोग उन पैच में किया जाता है जो:
~पीलापन लिए हुए हों
~छूने पर कड़क महसूस हों
~बार-बार बनते हों
~मुंह में बार-बार छाले, जलन, दर्द, खाना खाते समय तकलीफ़
म्यूकस झिल्ली की कमजोरी व Chronic catarrhal condition
ये दवा म्यूकस मेम्ब्रेन को साफ रखने और chronic irritation कम करने में उपयोगी होती है।
Hydrastis Q का सामान्य प्रयोग-विधि
⚠ यह डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
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