All Ayurvedic
A Natural Way to Healthy Life हज़ारो वर्षो से चली आ रही भारतीय परम्परा से जुड़े, आइये आयुर्वेद को जाने और निरोग रहे।
07/06/2026
कच्चा प्याज खाने के क्या लाभ हैं? (आयुर्वेद अनुसार)
* शरीर को शीतलता प्रदान करने में सहायक
कच्चे प्याज को आयुर्वेद में शीतल गुण वाला माना गया है, जो ग्रीष्म ऋतु में शरीर की उष्णता को संतुलित करने में सहायक हो सकता है।
* जल संतुलन बनाए रखने में मददगार
प्याज में प्राकृतिक रूप से जल की मात्रा अधिक होती है, जिससे शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायता मिल सकती है।
* पाचन शक्ति के लिए लाभकारी
यह दीपनीय एवं पाचन को सहयोग देने वाला माना जाता है, जिससे भूख और पाचन क्रिया को समर्थन मिल सकता है।
* हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
आधुनिक अध्ययनों के अनुसार प्याज में पाए जाने वाले कुछ तत्व सामान्य हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
* रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहयोग
प्याज में एंटीऑक्सीडेंट एवं अन्य प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा क्षमता को समर्थन दे सकते हैं।
* त्वचा स्वास्थ्य के लिए सहायक
गर्मी के मौसम में शरीर की अधिक उष्णता से होने वाली कुछ त्वचा समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है।
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ
• चरक संहिता - आहार एवं ऋतुचर्या वर्णन
• अष्टांग हृदयम् - ऋतुचर्या अध्याय
• भावप्रकाश निघंटु - पलाण्डु (प्याज) वर्णन
• सुश्रुत संहिता - आहार द्रव्य गुण वर्णन
* नोट: यदि किसी प्रकार की एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो तो योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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#कच्चा_प्याज #गर्मी_में_स्वास्थ्य
07/06/2026
* बार-बार पेशाब आना और पेशाब में जलन?
आयुर्वेद के अनुसार इसे हल्के में न लें!
आयुर्वेद में बार-बार टॉयलेट आना, पेशाब में जलन, गर्मी महसूस होना या पेशाब करते समय असहजता को मुख्य रूप से बढ़े हुए “पित्त दोष” और मूत्रवह स्रोतस की गड़बड़ी से जोड़ा जाता है।
जब शरीर में अत्यधिक गर्मी, तीखा भोजन, कम पानी पीना, देर रात जागना या तनाव बढ़ जाता है, तब यह समस्या अधिक दिखाई दे सकती है।
🌿 आयुर्वेद के अनुसार उपयोगी उपाय:
1️⃣ नारियल पानी
नारियल पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देने में सहायक माना जाता है।
यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और पित्त शांत करने में उपयोगी हो सकता है।
2️⃣ धनिया का पानी
1 चम्मच साबुत धनिया रातभर पानी में भिगो दें।
सुबह इसे छानकर खाली पेट पिएँ।
आयुर्वेद में धनिया को शीतल प्रकृति का माना गया है।
3️⃣ आंवला सेवन
आंवला पित्त शांत करने और शरीर को ठंडक देने में उपयोगी माना जाता है।
आप आंवला रस, मुरब्बा या चूर्ण सीमित मात्रा में ले सकते हैं।
4️⃣ जौ का पानी (Barley Water)
जौ को आयुर्वेद में मूत्र संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना गया है।
यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम करने में सहायक माना जाता है।
5️⃣ ठंडी तासीर वाले आहार लें
खीरा, तरबूज, लौकी, नारियल पानी, छाछ आदि का सेवन करें।
❌ इन चीजों से बचें:
• बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले
• तला-भुना भोजन
• कम पानी पीना
• देर रात तक जागना
• ज्यादा चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक
🧘♀️ जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी:
✔ पर्याप्त नींद लें
✔ तनाव कम करें
✔ शरीर को डिहाइड्रेट न होने दें
✔ लंबे समय तक पेशाब रोककर न रखें
⚠️ तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:
• पेशाब में खून आए
• तेज बुखार हो
• कमर या पेट में तेज दर्द हो
• समस्या कई दिनों तक बनी रहे
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ:
चरक संहिता – पित्त दोष एवं मूत्रवह स्रोतस
अष्टांग हृदयम्
सुश्रुत संहिता
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07/06/2026
🌿 रोज़ की राहत, कब्ज़ को दूर करने का आयुर्वेदिक उपाय 🌿
आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ (विबंध) मुख्यतः वात दोष बढ़ने के कारण होता है। सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपायों से इसे संतुलित किया जा सकता है।
🔸 कब्ज़ दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय
💧 गुनगुना पानी
सुबह खाली पेट 1–2 गिलास गुनगुना पानी पिएँ।
🌿 त्रिफला चूर्ण
रात को सोने से पहले 3–5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।
🧈 घी का सेवन
भोजन में 1–2 चम्मच गौघृत शामिल करें।
🥗 फाइबर युक्त आहार
हरी सब्जियाँ, फल, सलाद और मल्टीग्रेन आहार लें।
🏃 नियमित दिनचर्या
समय पर भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएँ और हल्का व्यायाम करें।
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ (Reference)
• चरक संहिता, सूत्रस्थान 11/34–35
• सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 15/24–25
• भावप्रकाश निघंटु, मलावरोध प्रकरण
✨ आयुर्वेद अपनाएँ, स्वस्थ और संतुलित जीवन पाएँ ✨
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07/06/2026
आँखें थकी हुई हैं, धुंधला दिखाई देता है?
एक आयुर्वेदिक उपाय जो आपके नेत्रों के लिए उपयोगी माना जाता है
* आजकल घंटों टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, धूल-मिट्टी का संपर्क, देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। आयुर्वेद में नेत्रों की देखभाल को विशेष महत्व दिया गया है।
त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन (आंख धोना)
त्रिफला जल कैसे बनाएं?
✅ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें।
✅ 1 गिलास उबले हुए और ठंडे किए गए पानी में रातभर भिगो दें।
✅ सुबह इस पानी को साफ सूती कपड़े या महीन फिल्टर से अच्छी तरह छान लें।
✅ केवल पूरी तरह स्वच्छ और छना हुआ जल ही उपयोग करें।
* उपयोग कैसे करें?
✅ छने हुए त्रिफला जल से आंखों को हल्के से धो सकते हैं।
✅ उपयोग के समय पानी स्वच्छ और सामान्य तापमान का होना चाहिए।
✅ आवश्यकता अनुसार किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयोग करें।
त्रिफला जल के संभावित लाभ
✔ आंखों को ताजगी प्रदान करने में सहायक माना जाता है।
✔ नेत्रों में होने वाली थकान को कम करने में मदद कर सकता है।
✔ धूल-मिट्टी के कारण होने वाली असुविधा में लाभदायक माना जाता है।
✔ नेत्र स्वच्छता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
✔ आयुर्वेद में नेत्र स्वास्थ्य के लिए त्रिफला का विशेष महत्व बताया गया है।
सावधानियां
* आंखों में तेज दर्द, संक्रमण, लालिमा या गंभीर समस्या होने पर स्वयं उपचार न करें।
* त्रिफला जल को अच्छी तरह छानना आवश्यक है।
* अस्वच्छ जल का उपयोग आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।
* किसी भी प्रकार की एलर्जी या परेशानी होने पर उपयोग बंद करें और चिकित्सकीय सलाह लें।
* यदि धुंधला दिखाई देना लगातार बना रहे तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
* आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुveda में त्रिफला (हरितकी, विभीतकी और आमलकी) को नेत्रों के लिए हितकारी बताया गया है। उचित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नेत्रों की नियमित देखभाल को भी नेत्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ
📖 चरक संहिता – चक्षुष्य (नेत्र हितकारी) द्रव्यों का वर्णन
📖 सुश्रुत संहिता – नेत्र रोग एवं नेत्र चिकित्सा वर्णन
📖 अष्टांग हृदयम् – दिनचर्या एवं नेत्र संरक्षण संबंधी निर्देश
📖 भावप्रकाश निघंटु – त्रिफला के गुण एवं उपयोग
* यह सामान्य आयुर्वेदिक जानकारी है। आंखों में लगातार धुंधलापन, दर्द, पानी आना या दृष्टि में कमी होने पर योग्य नेत्र विशेषज्ञ या आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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* #त्रिफला #आयुर्वेद #स्वस्थजीवन #आंखोंकीदेखभाल #नेत्रस्वास्थ्य #पाचनस्वास्थ्य #स्वस्थभारत
06/06/2026
* त्रिफला चूर्ण - पाचन के लिए अमृत समान
त्रिफला चूर्ण क्या है?
त्रिफला तीन फलों -. हरड़ (हरितकी), बहेड़ा (विभीतकी) और आंवला (आमलकी) से बना एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योग है।
आयुर्वेद में इसे पाचन तंत्र को शुद्ध, संतुलित और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी माना गया है।
* पाचन के लिए त्रिफला चूर्ण के लाभ
✅ पाचन को बेहतर बनाता है
अग्नि (Digestive Fire) को प्रबल करता है और भोजन के पाचन में सहायता करता है।
✅ कब्ज से राहत दिलाता है
मल को मुलायम बनाकर प्राकृतिक रूप से पेट साफ रखने में सहायक माना जाता है।
✅ गैस, अपच और एसिडिटी में लाभकारी
वात को संतुलित कर गैस, भारीपन और अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है।
✅ शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक
आम (विषैले अवशेष) को बाहर निकालने में मदद करता है और शरीर को अंदर से शुद्ध रखता है।
✅ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
आंवला में मौजूद गुण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में उपयोगी माने जाते हैं।
🌿 घटक द्रव्य 🌿
• हरड़ (हरितकी)
• बहेड़ा (विभीतकी)
• आंवला (आमलकी)
* सेवन विधि
1/2 से 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ रात को सोने से पहले लें।
(चिकित्सक की सलाह अनुसार सेवन करें)
📚 आयुर्वेद अनुसार संदर्भ
• चरक संहिता
• भावप्रकाश निघंटु
• सुश्रुत संहिता
“आयुर्वेद की शक्ति, आपके स्वास्थ्य की रक्षा”
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#त्रिफला #आयुर्वेद #स्वस्थजीवन #पाचन
06/06/2026
🌿 बालों के लिए भृंगराज के आयुर्वेदिक लाभ 🌿
✨ बालों का गिरना कम करने में सहायक
✨ नए बाल उगाने में मददगार
✨ सिर की रूसी को कम करे
✨ बालों की जड़ों को मजबूत बनाए
✨ समय से पहले बाल सफेद होने से बचाए
✨ सिर की खुजली और जलन में आराम दे
✨ बालों को चमकदार और मुलायम बनाए
📚 संदर्भ:
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघंटु (केशवर्धन अध्याय)
🌿 SONGARA ALL AYURVEDIC 🌿
06/06/2026
गर्मी में पानी की कमी से बचना है?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर को रखें ठंडा, हाइड्रेटेड और एनर्जेटिक 💧☀️
गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में पानी और जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह स्थिति पित्त दोष बढ़ाती है, जिससे कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द, थकान, मुंह सूखना और शरीर में जलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा और हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है।
💧 पानी की कमी पूरी करने के आयुर्वेदिक उपाय
1️⃣ थोड़ा-थोड़ा पानी बार-बार पिएँ
एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने की बजाय दिनभर में थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर माना गया है।
मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है।
2️⃣ नारियल पानी का सेवन करें
नारियल पानी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने में मदद करता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।
3️⃣ बेल, आम पना और शिकंजी पिएँ
ये पारंपरिक भारतीय पेय शरीर को ठंडक देते हैं और लू से बचाने में मदद करते हैं।
4️⃣ तरबूज, खीरा और खरबूजा खाएँ
इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेट रहता है।
5️⃣ छाछ का सेवन करें
आयुर्वेद में छाछ को पाचन सुधारने और शरीर को ठंडा रखने वाला माना गया है।
इसमें थोड़ा भुना जीरा और पुदीना मिलाकर पीना लाभकारी हो सकता है।
6️⃣ धूप में निकलते समय सावधानी रखें ☀️
तेज धूप में लंबे समय तक रहने से शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो सकता है।
हल्के सूती कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें।
7️⃣ कैफीन और ज्यादा तला-भुना भोजन कम करें
अधिक चाय, कॉफी और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी और पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।
🌱 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में शरीर की शक्ति कम होने लगती है और पित्त दोष बढ़ता है। इसलिए ठंडे, तरल और हल्के भोजन का सेवन लाभकारी माना गया है।
📚 Reference
Charaka Samhita
Ashtanga Hridayam
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06/06/2026
* रोज़ सिर्फ 15 मिनट का अभ्यंग आपके शरीर, त्वचा और मन को बदल सकता है!
* आयुर्वेद में अभ्यंग (तेल मालिश) को केवल एक ब्यूटी रूटीन नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ, मजबूत और संतुलित रखने वाली महत्वपूर्ण दिनचर्या माना गया है।
* अभ्यंग क्या होता है?
“अभ्यंग” आयुर्वेद की एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें पूरे शरीर पर गुनगुने औषधीय तेल से हल्के हाथों से मालिश की जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित रखने, त्वचा को पोषण देने और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना गया है।
📖 आयुर्वेद में अभ्यंग का महत्व
अष्टांग हृदयम् और चरक संहिता में अभ्यंग को “दैनिक दिनचर्या” (दिनचर्या) का महत्वपूर्ण भाग बताया गया है।
नियमित अभ्यंग करने वाला व्यक्ति शरीर में स्थिरता, अच्छी नींद, त्वचा की चमक और शक्ति बनाए रखने में मदद पा सकता है।
🌼 अभ्यंग के प्रमुख फायदे (Benefits of Abhyang)
1. शरीर में रक्त संचार बेहतर करने में सहायक
तेल मालिश से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होने में मदद मिल सकती है, जिससे शरीर हल्का और सक्रिय महसूस होता है।
2. वात दोष को शांत करने में लाभकारी
आयुर्वेद के अनुसार वात दोष बढ़ने पर शरीर में सूखापन, जोड़ों में दर्द, चिंता, अनिद्रा और थकान बढ़ सकती है।
अभ्यंग वात को शांत करने में विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।
3. त्वचा को पोषण और चमक देने में मददगार
तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करने, रूखापन कम करने और प्राकृतिक ग्लो बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
4. तनाव और मानसिक थकान कम करने में सहायक
हल्की तेल मालिश शरीर और मन को रिलैक्स करने में मदद करती है।
इससे तनाव, बेचैनी और मानसिक थकान कम महसूस हो सकती है।
5. अच्छी नींद में सहायक
रात में पैरों और सिर पर हल्का तेल लगाने से शरीर को आराम मिलता है और नींद बेहतर आने में मदद मिल सकती है।
6. मांसपेशियों और जोड़ों को आराम
अभ्यंग शरीर की अकड़न और थकान कम करने में मदद कर सकता है, खासकर अधिक काम या व्यायाम करने वालों के लिए।
7. बढ़ती उम्र के प्रभाव कम करने में सहायक
आयुveda में नियमित अभ्यंग को “एजिंग स्लो” करने वाली दिनचर्या माना गया है क्योंकि यह शरीर में स्निग्धता बनाए रखने में मदद करता है।
* किस प्रकृति वाले को कौन सा तेल उपयोग करना चाहिए?
* वात प्रकृति वाले लोग
लक्षण: रूखी त्वचा, ठंड अधिक लगना, चिंता, गैस, जोड़ों में दर्द
✔️ तिल का तेल (Sesame Oil)
✔️ बादाम तेल
✔️ अश्वगंधा युक्त तेल
➡️ गर्म और स्निग्ध तेल वात को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं।
🔥 पित्त प्रकृति वाले लोग
लक्षण: शरीर में गर्मी, चिड़चिड़ापन, अधिक पसीना, त्वचा में जलन
✔️ नारियल तेल
✔️ चंदन तेल
✔️ ब्राह्मी तेल
➡️ ठंडी तासीर वाले तेल पित्त को शांत करने में मदद करते हैं।
🌧️ कफ प्रकृति वाले लोग
लक्षण: भारीपन, आलस, वजन बढ़ना, चिकनाई
✔️ सरसों का तेल
✔️ त्रिफला युक्त तेल
✔️ हल्के गर्म तेल
➡️ गर्म और तीक्ष्ण गुण वाले तेल कफ कम करने में सहायक माने जाते हैं।
* अभ्यंग करने का सही समय
🌞 सुबह स्नान से पहले अभ्यंग करना सबसे अच्छा माना जाता है।
✔️ तेल को हल्का गुनगुना करें
✔️ पूरे शरीर पर हल्के हाथों से 10–20 मिनट मालिश करें
✔️ उसके बाद गुनगुने पानी से स्नान करें
अभ्यंग कैसे करें?
1️⃣ सबसे पहले सिर और पैरों में तेल लगाएँ
2️⃣ गोलाकार गति में जोड़ों की मालिश करें
3️⃣ लंबी स्ट्रोक्स से हाथ-पैरों की मालिश करें
4️⃣ पेट पर क्लॉकवाइज दिशा में हल्के हाथों से मालिश करें
5️⃣ मालिश के बाद कुछ समय आराम करें
⚠️ किन परिस्थितियों में अभ्यंग नहीं करना चाहिए?
❌ तेज बुखार होने पर
❌ अपच या उल्टी-दस्त होने पर
❌ शरीर में अत्यधिक भारीपन होने पर
❌ तुरंत भोजन के बाद
❌ गंभीर त्वचा संक्रमण होने पर
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ (References)
📖 अष्टांग हृदयम् – दिनचर्या अध्याय
📖 चरक संहिता – सूत्र स्थान
📖 सुश्रुत संहिता
✨ आयुर्वेद के अनुसार नियमित अभ्यंग शरीर, मन और त्वचा तीनों को संतुलित रखने में सहायक माना गया है।
यह केवल मालिश नहीं, बल्कि स्वयं की देखभाल और स्वास्थ्य का एक सुंदर पारंपरिक तरीका है।
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05/06/2026
🌿 कफ दोष को कम करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार 🌿
आयुर्वेद के अनुसार कफ दोष ठंडा, भारी, स्थिर, चिकना और श्लेष्मा बढ़ाने वाला होता है।
जब शरीर में कफ बढ़ जाता है तो आलस्य, वजन बढ़ना, बार-बार सर्दी-जुकाम, सुस्ती और पाचन धीमा होने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
✨ कफ दोष के सामान्य लक्षण:
• शरीर में भारीपन
• अधिक नींद आना
• सुस्ती और आलस्य
• बार-बार कफ या सर्दी-जुकाम होना
• वजन बढ़ना
• भूख कम लगना और पाचन धीमा होना
कफ दोष को कम करने के आयुर्वेदिक उपाय:
1. आहार (Diet)
• हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला भोजन करें
• जौ, बाजरा, मूंग दाल, कुल्थी, रागी का सेवन करें
• अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, हल्दी जैसी चीज़ें लें
• दही, ठंडी चीज़ें, मीठा और तला-भुना कम करें
2. दिनचर्या (Daily Routine)
• सुबह जल्दी उठें और रोज व्यायाम करें
• सूर्य नमस्कार, कपालभाति, त्रिकोणासन करें
• दिन में सोने से बचें
• सूखे ब्रश या गरशन से शरीर की मालिश करें
3. आयुर्वेदिक औषधियाँ
• त्रिकटु चूर्ण
• पंचकोल चूर्ण
• गुग्गुलु
• अदरक और तुलसी की चाय
4. पंचकर्म (Detox Therapy)
• वमन कर्म
• उद्वर्तन (हर्बल पाउडर मसाज)
• नस्य
5. जीवनशैली (Lifestyle)
• सक्रिय और सकारात्मक जीवन अपनाएँ
• रोज योग और प्राणायाम करें
• हल्का भोजन करें और जल्दी सोएँ
महत्वपूर्ण सुझाव:
कफ दोष को संतुलित करने के लिए नियमितता, व्यायाम और सही आहार सबसे अधिक जरूरी हैं।
किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।
📚 संदर्भ (Reference):
• चरक संहिता
• सुश्रुत संहिता
• अष्टांग हृदयम्
• भावप्रकाश निघंटु
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#कफदोष #आयुर्वेद #स्वस्थजीवन #घरेलूनुस्खे #प्राकृतिकउपचार
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