Naam Japo
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“राधा नाम में ही मेरा जीवन है 🙏
प्रेम ही परम सत्य है — यही सिखाया पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने।
हर श्वास में ‘राधे राधे’, हर क्षण में भक्ति।
मन, वचन और कर्म से श्री राधा के चरणों में समर्पित 💖”
"राधा नाम में लय" श्रवण, कथन और सुमिरन का दिव्य संगम
एक सत्य, दो मार्ग: 'दास-सोहम' और 'शिवोहम'
"दिव्य दृष्टि: ज्ञान और मानस चक्षु से सत्य की पहचान" - ज्ञान चक्षु हमें संसार की असारता और सत्य का मार्ग दिखाते हैं, जबकि मानस चक्षु हमें उस सत्य (परमात्मा) से मिला देते हैं।
"ब्रह्म भूता प्रसन्नात्मा" - तुम सनातन परब्रह्म परमात्मा के अंश हो।
महा प्रेम की अवस्था: यह वह स्थिति है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है और केवल भक्ति का रस शेष रहता है।
"दुख-चिंता का अंत: प्रभु के चरणारविंद"
🙏भगवान वह ढाल हैं जो भक्त को संसार के दुखों, चिंताओं और यहाँ तक कि मृत्यु के भय से भी बचा लेते हैं। शरणगति में जो 'विश्राम' है, वह करोड़ों जन्मों की तपस्या में भी नहीं है। बस एक बार कह दो, 'मैं आपकी हूँ'।🙏
"संसार का चिंतन या प्रभु की साधना? मन को वश में करने का रहस्य" - मन को वश में करना है तो इसे संसार के चिंतन से हटाकर साधना और नाम जप के अमृत में डुबोना होगा। भोगों में लिप्त मन कभी योगी नहीं बन सकता।
"मन को जीतने की कला: सत्संग, नाम जप और स्वाध्याय" - मन एक चंचल बालक की तरह है; इसे सत्संग और नाम जप रूपी अमृत पिलाकर शांत और अनुशासित किया जा सकता है। जब यह पवित्र हो जाता है, तो साक्षात ईश्वर का निवास बन जाता है।
"मन को मोड़ने की कला: नाम, लीला और कीर्तन" - हमारा मन एक दर्पण की तरह है; इसके सामने जो रखोगे, वही दिखाई देगा। संसार रखोगे तो मोह बढ़ेगा, प्रभु को रखोगे तो प्रेम बढ़ेगा। चुनाव हमारा है।
"नाम जप की सामर्थ्य: मन और बुद्धि का परिवर्तन" - नाम जप वह चुंबक है जो लोहे जैसे कठोर और मलिन मन को भी खींचकर परमात्मा के स्वरूप में समाहित कर देता है। बस जपते रहिए, बुद्धि स्वयं शुद्ध होकर श्री जी के चरणों में झुक जाएगी।
"धर्म की कमाई और नाम जप: मुक्ति का सरल मार्ग" - "भक्ति का अर्थ संसार से भागना नहीं, बल्कि संसार के हर कण में और हर रिश्ते में भगवान को देखना और धर्मपूर्वक अपना कर्तव्य निभाना है।"
"अनन्य आश्रय: एक नाम और प्रभु का मिलन" - अनन्यता वह चाबी है जो साक्षात ईश्वर के द्वार खोल देती है। अन्य का भरोसा छोड़ना ही, अनन्य होने की पहली सीढ़ी है।
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