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13/11/2022
02/11/2022

टू-फिंगर टेस्ट पर क्यों लगा बैन? रेप के मामलों में अब कैसे होगा मेडिकल? जानें सबकुछ
सुप्रीम कोर्ट ने टू-फिंगर टेस्ट को लेकर अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने टू-फिंगर टेस्ट को अवैज्ञानिक बताया है. बेंच ने कहा कि टू-फिंगर टेस्ट पीड़िता को फिर से प्रताड़ित करने जैसा है. फिंगर टेस्ट पर बवाल क्यों है? यौन हिंसा के मामलों की जांच कैसे की जाती है?

Two Finger Test: रेप और यौन हिंसा के मामलों की जांच के लिए होने वाले 'टू-फिंगर टेस्ट' को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इसे 'अवैज्ञानिक' बताया है. साथ ही ये भी कहा है कि पीड़िताओं का टू-फिंगर टेस्ट करना उन्हें फिर से प्रताड़ित करना है. अदालत ने मेडिकल की पढ़ाई से भी टू-फिंगर टेस्ट हटाने को कहा है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने ये फैसला झारखंड सरकार की याचिका पर सुनाया है. झारखंड हाईकोर्ट ने रेप और मर्डर के आरोपी शैलेंद्र कुमार राय उर्फ पांडव राय को बरी कर दिया था. झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए शैलेंद्र राय को दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ये धारणा गलत है कि सेक्सुअली एक्टिव महिला के साथ रेप नहीं हो सकता. अदालत ने टू-फिंगर टेस्ट पर फिर से रोक लगा दी और चेतावनी दी कि अगर कोई ऐसा करता है तो उसे दोषी ठहराया जाएगा.

- टू-फिंगर टेस्ट में पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में दो उंगलियां डाली जाती हैं. इससे डॉक्टर ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि पीड़िता सेक्सुअली एक्टिव है या नहीं.

- इस टेस्ट के जरिए प्राइवेट पार्ट के बाहर एक पतली झिल्ली को जांचा जाता है, जिसे हाइमन कहते हैं. अगर हाइमन होता है तो पता चलता है कि महिला सेक्सुअली एक्टिव नहीं है. लेकिन हाइमन को नुकसान पहुंचा होता है तो इससे महिला के सेक्सुअली एक्टिव होने की बात सामने आती है.

- हालांकि, ये धारणा पूरी तरह सही नहीं है. मेडिकल साइंस में भी ऐसा सामने आ चुका है कि खेलकूद और दूसरे कारणों से भी हाइमन को नुकसान पहुंच सकता है.

- टू-फिंगर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ही रोक लगा दी थी. लेकिन उसके बावजूद ये होता रहा है. झारखंड में शैलेंद्र कुमार राय के मामले में भी हाईकोर्ट ने टू-फिंगर टेस्ट के आधार पर ही उसे बरी कर दिया.

मार्च 2014 में आई थी गाइडलाइन

- सुप्रीम कोर्ट की ओर से टू-फिंगर टेस्ट पर रोक लगाए जाने के बाद मार्च 2014 में स्वास्थ्य मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च ने रेप और यौन हिंसा की शिकार महिलाओं की जांच के लिए गाइडलाइंस जारी की थीं.

- इन गाइडलाइंस में 'टू-फिंगर टेस्ट' पर साफ रोक लगा दी गई थी. इसमें लिखा था कि टू-फिंगर टेस्ट करना गैरकानूनी है और ऐसा नहीं किया जा सकता है.

- गाइडलाइंस में लिखा था कि हाइमन के टूटने या न टूटने से साबित नहीं होता कि महिला के साथ यौन हिंसा हुई है या वो सेक्सुअली एक्टिव है. क्योंकि साइकिल चलाने, घुड़सवारी करने या खेलकूद से भी हाइमन टूट सकती है.

कैसे पता चलेगा कि यौन हिंसा या रेप हुआ है या नहीं?

- इसके लिए पीड़ित महिला की फॉरेंसिक जांच की जाती है. लेकिन इसके लिए भी उसकी सहमति जरूरी है. यौन हिंसा के मामले में अगर महिला खुद से भी डॉक्टर के पास जाती है तो उसकी जांच करने से मना नहीं किया जा सकता है. इतना ही नहीं, अगर पीड़िता पुलिस में शिकायत नहीं करना चाहती और अपनी जांच करवाना चाहती है, तो भी ऐसा करने से इनकार नहीं किया जा सकता.

- अगर पीड़िता सहमति देने की स्थिति में नहीं है, तो रिश्तेदार की सहमति ली जाती है. ऐसे मामलों में डॉक्टर पीड़िता के कपड़ों, सिर के बाल, प्यूबिक हेयर, शरीर पर लगी दूसरी चीजें, लार, प्राइवेट पार्ट से सैम्पल, मुंह से लिए गए सैम्पल और खून के सैम्पल लेते हैं. इसके अलावा पीड़िता के शरीर पर लगे चोट के निशान, उसे शराब या नशीला पदार्थ दिया गया है या नहीं, किसी हथियार का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, ये सारी बातें नोट की जाती हैं.

- अगर पीड़िता कुछ हफ्तों बाद आती है तो उससे पूछा जाता है कि क्या यौन हिंसा के बाद उसने सेक्स किया था या नहीं? इसी तरह स्पर्म का पता लगाने के लिए वेजाइना का स्वैब ले जाते समय भी पीड़िता से पूछा जाना चाहिए कि उसने हिंसा से एक हफ्ते पहले सेक्स किया था या नहीं? क्योंकि ऐसे मामलों में स्पर्म बड़ा और अहम सबूत होता है.

- इसके अलावा ये भी जांचा जाता है कि महिला के साथ किस तरह की यौन हिंसा हुई है. यौन हिंसा के समय कंडोम का इस्तेमाल हुआ या नहीं. सारी बातें ध्यान से लिखी जाती हैं. बाद में पीड़िता के शरीर से मिले सैम्पल को आरोपी के सैम्पल से मिलान किया जाता है.

कमेटी ने भी की थी सिफारिश

- 16 दिसंबर 2012 को राजधानी दिल्ली में चलती बस में मेडिकल स्टूडेंट के साथ 6 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था. इस मामले ने देश को झक झोरकर रख दिया था. इसके बाद क्रिमिनल लॉ में भी सुधार की मांग उठने लगी थी.

- इसे निर्भया कांड के नाम से जाना जाता है. निर्भया कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी. इस कमेटी ने जनवरी 2013 में ही अपनी रिपोर्ट दे दी थी. इस रिपोर्ट में कमेटी ने टू-फिंगर टेस्ट पर पूरी तरह से रोक लगाने की सिफारिश की थी

27/01/2021

भारत में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए जितने बड़े कानून बन रहे हैं, अपराध उतने ही ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं। क्यों? न्यायपालिका, पुलिस और महिलाओं से जुड़ी हस्तियों का मानना है कि केवल कड़े कानून बनाने से कुछ नहीं होगा। उन्हें उतनी ही सख्ती से लागू भी किया जाना चाहिए और अपराधियों में उनका डर भी बैठना चाहिए।

खत्म हो रहा कानून का डर

शिवकुमार शर्मा, पूर्व न्यायाधीश

देश में बलात्कार के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन जहां तक मेरा मानना है कि इन घटनाओं की मुख्य वजह लोगों में कानून का डर खत्म होना है। यह बात सभी जानते हैं कि यदि मैंने कुछ गलत किया, तो सजा होगी, लेकिन उनमें कानून का डर कहां है? वे जानते हैं कि पकड़े जाने पर वे आसानी से छूट जाएंगे।

अपराध को कम करने के लिए लोगों में भय का भाव लाना होगा। आज अपराधी जेल चला भी जाता है, तो उसे वहां वह सारी सुविधाएं मिलती हैं, जो उसे बाहर मिलती थीं। अपराधी को अहसास कराना होगा कि यदि मैंने कुछ गलत किया, तो कानून उसे गिरफ्त में लेगा ही।

आसान हो न्याय प्रक्रिया
देश की अदालतों में हजारों बलात्कार के मामले दबे पड़े हैं। देश में न्याय की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि पीडित हताश होने लगे हैं। न्याय की प्रक्रिया को आसान करना होगा, तभी हर व्यक्ति को समय से न्याय मिल पाएगा। आज बलात्कार के मामलों को जल्द से जल्द निपटाने की जरूरत है।

मामलों में सजा सुनाई जाने लगी, तो फिर अपराधियों में कानून का एक खौफ हो जाएगा। वह गुनाह करने से पहले सौ बार सोचेगा। आज बलात्कार पीडिता को मेडिकल चेकअप कराने के लिए भी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।

निभाएं जिम्मेदारी
पुलिस को भी अपनी जिम्मेदारी सही- तरीके से निभानी होगी। कॉलेजों के बाहर अपनी गतिविधि बढ़ानी होगी और राह चलते लड़कियों पर फब्तियां कसने वालों पर कड़ाई से कार्रवाई करनी होगी। ऎसा होने लगा, तो इस तरह की घटनाओं में कमी जरूर आएगी।

लड़कियों के लिए हेल्पलाइन की सुविधा हो, जिस पर सूचना मिलने पर पुलिस फौरन हरकत में आए। आज देश में कई जगहों पर हेल्पलाइन की सुविधा तो है, लेकिन फोन करने पर कोई उठाता ही नहीं है।

पाश्चात्य संस्कृति के प्रति लगाव ने भी बलात्कार को बढ़ावा दिया है। आज के युवा भारतीय संस्कृति को भूलते जा रहे है। इनके पहनावे बदलते जा रहे हैं। आप गौर करेंगे, तो पाएंगे कि भारत के दक्षिणी राज्यों में रेप व छेड़खानी की घटनाएं कम हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि वहां के युवा आधुनिकता की दौड़ में भी अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं।

कानून को लागू भी करें
कविता कृष्णनन, राष्ट्रीय सचिव, ऑल इंडिया प्रोग्रसिव वूमेन एसोसिएशन

बलात्कार की घटनाओं को रोकने के लिए कानून तो बना दिया गया, लेकिन हमें देखना होगा कि इस बीच महिलाओं के प्रति लोगों में संवेदना कितनी बढ़ी है? सरकार ने कानून तो बना दिया, लेकिन उसे क्रियान्वित नहीं कर पाई है। दिल्ली गैंगरेप की घटना के विरोध में जो आंदोलन हुआ था, उसमें यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आजादी नहीं छीनी जानी चाहिए।

नहीं बदली सोच
आज भी सरकार का नजरिया महिलाओं के प्रति नहीं बदला है। उदाहरण के तौर पर, मध्यप्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस पेट्रोलिंग योजना बनाई गई। इसके बाद पुलिस उन महिलाओं को भी पकड़ने लगी, जो अपने पुरूष साथी के साथ स्वेच्छा से पार्को में बैठी थीं।

आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्वेच्छा से बने सम्बंध को भी यौन उत्पीड़न माना जाने लगा है। मैं इस बात का सख्त विरोध करती हूं कि पाश्चात्य संस्कृति की वजह से यौन अपराधों में बढ़ोतरी हुई है।

भारत में पहले भी बलात्कार की घटनाएं होती थीं। हजारों बच्चों का बचपन में ही विवाह कर दिया जाता था। कई बçच्चयों की मौत तो उनके पति द्वारा "बलात्कार" करने से हो गई। जहां तक पहनावे का सवाल है, बलात्कार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। समाज में पुरूषों का शुरू से ही वर्चस्व रहा है।

बदलाव की जरूरत
आज सामाजिक ताने-बाने को बदलने की जरूरत है, इसमें ही महिलाओं का हित है। मेरा मानना है कि हमारे देश में बलात्कार की घटनाएं यौन आकर्षण की वजह से नहीं होती हैं, इसके पीछे पुरूषों का महिलाओं पर प्राधिकार होता है। यह प्राधिकार केवल यौन मामलों में ही नहीं, अन्य मामलों में भी देखने को मिलता है। पिता या भाई भी बेटी और बहन पर अपना अधिकार दिखाते हैं।

लोगों से अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को मां और बहन की तरह देखो। यहां भी हम महिलाओं के अधिकारों को ही छीनते हैं। हमें जरूरत है, उन्हें इंसान की तरह देखने की। पीडित जब रिपोर्ट लिखवाने पहुंचती है, तो उससे अपराधी जैसा व्यवहार किया जाता है।

देश में न्याय की प्रक्रिया काफी धीमी है। आज कोर्ट और जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए बजट बढ़ाना होगा, लेकिन इस तरफ सरकार की कोई भी इच्छाशक्ति नहीं दिखती है।

27/01/2021

दोस्तों, आज हमारे देश भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बलात्कार(रेप) है। प्रतिदिन न्यूज़ पेपर, न्यूज़ चैनल इन ख़बरों से भरे रहते हैं। दिल भी दुखता है, मन भी दुखता है। सोचते हैं कि क्या हम कुछ कर नहीं सकते। हम सब बेबस से नजर आते हैं। लोग अपनी सभ्यता को भूलकर हैवानियत की सभ्यता जीने में लगे हुए हैं।

लोग सोशल मीडिया साइट्स पर और अनेक जगह मोमबत्ती जलाकर, रैली निकालकर इसके खिलाफ प्रदर्शन करते हैं फिर भी ना जाने क्यों इस समस्या का हल नहीं हो पता है। ये क्या सिर्फ हमारी सर्कार की कमी है? क्या हमारे कानून की कमी है? क्या उन अच्छे लोगों को कमी है जो जुल्म सहन करते है या फिर उनकी कमी है जो सब कुछ करके भी आराम से रहते हैं।
बलात्कार(रेप) की समस्या से बचने के सिर्फ 2 उपाय अगर लागु हो जाये तो यह 100% नहीं तो 90% तक इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

1. संस्कार- Sanskar
हम कहते हैं कि अपने बच्चो को अच्छे संस्कार दें। ये करें वो करें। बिलकुल गलत बात है। पहले हमें खुद इस काबिल बनना पड़ेगा कि हम दूसरों को संस्कार दे सकें। लोगों को बता सकें। मैंने जितना अध्ययन किया है उसमे ब्रह्मचारी जब तक रहे तो स्वामी विवेकानंद की तरह जियें, और गृहस्थ होने के बाद भगवान राम के जैसा जीवन जिए। मैं शर्त लगाकर कह सकता हूँ जिसने अपने जीवन में रामायण उतार ली वो ऐसा घिनोना काम करने के बारे में तो सपने में भी नहीं सोच सकता है। श्री राम भगवान ने जीवन में सिर्फ सीता माता के अलावा किसी दूसरी नारी को सपने में भी नहीं देखा। राम जी तो भगवान हैं, लेकिन लक्ष्मण जी ने कभी भी परायी स्त्री के बारे में न कभी सोचा, न कभी देखा।

रामायण सुनकर अपना बेस स्ट्रांग बनाइये। अपने को इस काबिल करो कि भगवान राम न बन सको तो कोई बात नहीं, कम से कम हराम मत बनिए।

2. सख्त कानून–
जुर्म साबित हो जाने पर अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये। फांसी की सजा क्यों नहीं देते, चलो फांसी देना प्रावधान नहीं है तो उसे नपुंसक बनाकर उम्रकैद क्यों नहीं देते? चौराहे पर सरे आम गोली क्यों नहीं मार देते। जब तक कानून का डर नहीं होगा तब तक गलत काम तो होते ही रहेंगे। ऐसी गन्दी हरकत करते समय अपराधी की रूह काँप जानी चाहिए। इसके बारे में सोचते ही उसकी नींद उड़ जानी चाहिए।

समझ नहीं आता जब नोट बंदी, सर्जिकल स्ट्राइक एक दिन में की जा सकती है तो कठोर कानून क्यों नहीं बनाया जा सकता? सब कुछ हो सकता है देश में बस करने वाला चाहिए। जब बुरे लोग अपनी हैवानियत दिखा सकते हैं तो अच्छे लोग मिलकर क्यों नहीं उन्हें रोक पाते?

इसके अलावा कुछ लोग कहते हैं, सेक्स एजुकेशन लगवाइये, बच्चों के बालिग होते ही शादी करवा दो। कुछ लोग कहते हैं कि लड़कियों को जीन्स नहीं पहननी चाहिए, छोटे कपडे नहीं पहनने देना चाहिए बल्कि सूट सलवार पहनना चाहिए। ये सब गलत धारणा है। वैसे मेरा अपना मानना है पुरुष हो या स्त्री, उसे अपना तन तो ढककर ही रखना चाहिए, फिर भी यदि कोई मन मुताबिक कपडे पहनना चाहिए तो वो स्वतंत्र है। क्योंकि हमारा दिमाग अच्छा तो कम सोचता है बुरा ही ज्यादा सोचता है।
इसलिए अपनी सोच को पवित्र रखिये, स्वामी विवेकानंद की जीवनी पढ़िए, मैं तो कहूंगा कि भारत देश बहुत महान है, पहले भी था, केवल कुछ लोगों ने इसे बुरा बनाने का सोच लिया है। आज कल टीवी पर, इंटरनेट पर सब कामुकता की अधिकता वाली चीजें दिखाई जाती है।

छोटे छोटे बच्चे भी ऐसी ऐसी बात और हरकतें कर देते हैं कि देखने वाला सोचता ही रह जाता है। और उसके माता पिता हँसते है कि मेरा बेटा, मेरी बेटी कितनी समझदार हो गई है। लेकिन थोड़ा सोचना क्या बच्चे समय से पहले बड़े नहीं हो रहे हैं। ये इंटरनेट, ये स्मार्टफोन, ये ऐसी वैसी मूवीज, सब इन बुरे विचारों को अपने मन में लाने का एक साधन है।

इसलिए अगर आपको सच्ची में देश सेवा करनी है तो कुछ मत करिये, सबसे पहले अपने आप को सुधार लीजिये, उसके बाद लोगों को सुधारिये। मन में अच्छे विचार रखिये। सभी महिलाओं का सम्मान करिये। दुसरो में अपनी माँ, बहिन और बेटियों को देखिये। अच्छे संस्कार पाइये। मैं ये तो नहीं कहूंगा की आप लोगों को सुधारिये, बस खुद सुधर जाइये। क्योंकि ये सब गलत कर्म करने वाला भी तो इंसान है, बस उसके अंदर की इंसानियत गायब और हैवानियत जाग गई है। फिर से वेद पढ़िए, पुराण पढ़िए, ये सब नहीं कर सकते तो रामचरितमानस पढ़िए। ये भी नहीं पढ़ सकते तो कोई बात नहीं, राम कथा सुनिए, सुन भी नहीं सकते तो टीवी पर, यूट्यूब पर रामायण देखिये। आपके अंदर के सारे विचार अच्छे विचारों में बदल जायेंगे।

08/01/2021

भारत में महिलाओं के साथ अपराध आम बात है। सड़क पर, बस या ट्रेन में अक्सर ऐसे वाकये होते हैं जब मनचलों के चलते लड़कियां परेशान और शर्मसार हो जाती है। लेकिन जरा सी सूझ बूझ ऐसे अपराधियों को न केवल पकड़वा सकती है बल्कि दूसरों के लिए भी मिसाल बन सकती है कि इस मौके पर कैसे हिम्मत दिखानी चाहिए।

ऐसा ही एक वाकया कोलकाता में हुआ जहां एक लड़की की सूझ बूझ और हिम्मत ने मनचले को पकड़वा दिया। लड़की की सूझ बूझ की पुलिस भी तारीफ कर रही है और जैसे जैसे ये खबर वायरल हो रही है, लोग लड़की की सराहना कर रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता के पोर्ट इलाके में 23 साल की एक लड़की बस में सफर कर रही थी। लड़की को बीएनआर अस्पताल इलाके में जाना था। बस में काफी लोग थे लेकिन लड़की ने गौर किया कि एक युवक अपने मोबाइल से लड़की की तस्वीरें खींच रहा है।

लड़की ने चुपचाप 100 नंबर पर डायल किया और फोन उठते ही लड़के को ललकारा। दूसरी तरफ से हैल्पलाइन पर बस में हो रही बातचीत की आवाज जा रही थी और पुलिस ने लोकेशन खोज कर पीछा करना शुरू किया। फोन चालू था, लड़की ने युवक से कहा कि फोटो क्यों खींच रहे हो। तब युवक ने कहा कि वो फोटो नहीं खींच रहा। लड़की ने कहा कि फोन दिखाओ, पता चल जाएगा। युवक ने सफाई दी कि वो लड़की के फोटो नहीं बल्कि अपनी सेल्फी खींच रहा था। तब भी लड़की नहीं मानी और युवक से लगातार फोन मांगती रही। युवक घबराकर बस से उतरना चाह रहा था लेकिन वो लड़की की बातों और सवाल जवाब में इतना उलझ गया कि उससे लड़ने लगा। वो युवती को धक्का देकर बस से उतरने की कोशिश करता लेकिन लड़की ने उसका रास्ता बंद कर डाला। जैसे ही बस बीएनआर क्रॉसिंग पर पहुंची, पीछे से आई पुलिस की जीप ने बस को टेकओवर किया और बस में घुसकर आरोपी युवक को पकड़ लिया। दरअसल लड़की ने आरोपी को लड़ाई झगड़े में इतना उलझा लिया और फोन भी ऑन रखा ताकि पुलिस उस लोकेशन तक पहुंच सके। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, उसके फोन को जांच के लिए फोरेंसिक डिपार्टमेंट में भेजा गया है। उधर पुलिस ने लड़की की सूझबूझ और हिम्मत की तारीफ करते हुए कहा है कि अगर हर ल़ड़की ऐसी कोशिश करे तो मनचलों को सबक सिखाया जा सकेगा और वो ऐसी हरकत दोहराने की हिम्मत भी नहीं कर सकेंगे।

04/01/2021

हाथरस में बिटिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के चारों आरोपियों को अलीगढ़ जेल से हाथरस कोर्ट लाया गया। इस दौरान कड़ी सुरक्षा रही। यहां विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट में इनकी पेश थी। चारों आरोपियों को पेशी के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस अलीगढ़ जेल ले गई। इस दौरान आरोपियों को परिजनों से नहीं मिलने दिया।इस मामले में अब विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में 29 जनवरी को सुनवाई होगी। चारों आरोपियों को आरोप पत्र की प्रतिलिपि दी गई। आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने प्रतिलिपि ली है। सीबीआई की डीएसपी सीमा पाहुजा भी कोर्ट में मौजूद रही। परिजनों को आरोपियों से नहीं मिलने देने पर महिलाएं रोते हुए वहां से चली गई। बता दें कि सीबीआई ने 67 दिन की विवेचना के बाद इस बहुचर्चित कांड में अपनी चार्जशीट विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में दाखिल की थी। इसमें सुनवाई की तिथि चार जनवरी नियत है। यहां सीबीआई ने इसलिए चार्जशीट दाखिल की थी, क्योंकि चार्जशीट में एससी-एसटी उत्पीड़न की धारा भी शामिल है।

सीबीआई ने बिटिया के गांव के ही चारों युवक संदीप, रामू, लवकुश व रवि के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में चारों आरोपी अलीगढ़ जेल में बंद हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि यह मामला आगे सीबीआई की विशेष अदालत में चले या हो सकता है कि आगे भी यहीं इसकी सुनवाई हो। वहीं चारों आरोपियों को जेल से कोर्ट लाया गया है।

वहीं इस मामले में कई आरोपों से घिरे डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार का तबादला कर दिया गया है। डीएम के खिलाफ कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार को शासन ने मिर्जापुर में डीएम के रूप में नियुक्त किया है। वे यहां करीब 22 महीने तैनात रहे। उनका तबादला साल के आखिरी दिन किया गया। उधर तबादले पर बिटिया की भाभी ने कहा कि डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार मिर्जापुर में भी ऐसी घटना करवा सकते हैं, जैसी हमारे साथ कराई। वहां भी किसी परिवार की लड़की के शव को जलवा सकते हैं। हो सकता है कि वहां भी किसी परिवार को उसकी लड़की की लाश ही न सौंपने दें, इसलिए शासन को उन्हें बर्खास्त करना चाहिए।

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