Ram ji
सीताराम चरण रति मोरे!
अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे!
04/01/2026
मन संतोष सुनत कपि बानी।
भगति प्रताप तेज बल सानी॥
आसिष दीन्हि राम प्रिय जाना।
होहु तात बल सील निधाना॥
अजर अमर गुननिधि सुत होहू।
करहुँ बहुत रघुनायक छोहू॥
करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना।
निर्भर प्रेम मगन हनुमाना॥
भक्ति, प्रताप, तेज और बल से सनी हुई हनुमान जी की वाणी सुनकर सीता जी के मन में संतोष हुआ। उन्होंने श्री राम जी के प्रिय जानकर हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि हे तात! तुम बल और शील के निधान होओ॥
हे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापे से रहित), अमर और गुणों के खजाने होओ। श्री रघुनाथजी तुम पर बहुत कृपा करें। 'प्रभु कृपा करें' ऐसा कानों से सुनते ही हनुमान जी पूर्ण प्रेम में मग्न हो गए॥
🙏🏻⛳‼️जय सियाराम ‼️⛳🙏🏻
04/01/2026
राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।
बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥
राम-नाम का आश्रय लिए बिना जो लोग मोक्ष की आशा करते हैं अथवा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चारों परमार्थों को प्राप्त करना चाहते हैं वे मानो बरसते हुए बादलों की बूँदों को पकड़ कर आकाश में चढ़ जाना चाहते हैं। भाव यह है कि जिस प्रकार पानी की बूँदों को पकड़ कर कोई भी आकाश में नहीं चढ़ सकता वैसे ही राम नाम के बिना कोई भी परमार्थ को प्राप्त नहीं कर सकता।
🙏🏻⛳‼️जय सियाराम ‼️⛳🙏🏻
04/01/2026
जपहिं नामु जन आरत भारी।
मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥
राम भगत जग चारि प्रकारा।
सुकृती चारिउ अनघ उदारा॥
(संकट से घबराए हुए) आर्त भक्त नाम जप करते हैं, तो उनके बड़े भारी बुरे-बुरे संकट मिट जाते हैं और वे सुखी हो जाते हैं। जगत् में चार प्रकार के (1-अर्थार्थी - धनादि की चाह से भजनेवाले, 2-आर्त - संकट की निवृत्ति के लिए भजनेवाले, 3-जिज्ञासु - भगवान को जानने की इच्छा से भजनेवाले, 4-ज्ञानी - भगवान को तत्त्व से जानकर स्वाभाविक ही प्रेम से भजनेवाले) रामभक्त हैं और चारों ही पुण्यात्मा, पापरहित और उदार हैं।
🙏🏻⛳‼️जय सियाराम ‼️⛳🙏🏻
03/01/2026
भक्ति भक्त भगवंत गुरु चतुर नाम बपु एक
इनके पद बंदन किएँ नासत बिघ्न अनेक
(१) भक्ति का मार्ग बताने वाले संत ‘गुरु’, (२) भजनीय ‘भगवान्’, (३) भजन करनेवाले ‘भक्त’ तथा (४) संतों के उपदेश के अनुसार भक्त की भगवदाकार वृत्ति ‘भक्ति’ है । नाम से चार हैं, किन्तु तत्त्वतः एक ही हैं अर्थात इनमे से किसी एक का भी आश्रय लेने मात्र से भगवान की प्राप्ति हो जाती है
🙏🏻‼️हरे कृष्ण‼️ 🙏
03/01/2026
बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु।
राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु॥
गोस्वामी जी कहते है कि सच्चा भक्त भगवान पर अटूट विश्वास रखता है, बिना भगवान पर विश्वास किये प्रभु कृपा प्राप्त करना सम्भव ही नहीं है, भगवान राम की कृपा के बिना स्वप्न में भी चैन नहीं मिलता इसलिये प्रभु श्रीराम पर अखंड विश्वास रखते हुए भक्ति करना ही सब प्रकार से लाभकारी है..
🙏🏻‼️जय सियाराम‼️ 🙏
03/01/2026
सब साधन को एक फल, जेहिं जान्यो सो जान।
ज्यों त्यों मन मंदिर बसहिं, राम धरें धनु बान॥
सब साधनों का यही एकमात्र फल है कि जिस-किसी प्रकार से भी हो, धनुष-बाण धारण करने वाले श्री राम जी मन-मंदिर में निवास करने लगें। जिसने इस रहस्य को जान लिया, वही यथार्थ जानने वाला है।
🙏🏻‼️जय सियाराम‼️ 🙏
03/01/2026
कासी बिधि बसि तनु तजे, हठि तनु तजें प्रयाग।
तुलसी जो फल सो सुलभ, राम नाम अनुराग॥
तुलसीदास जी कहते हैं कि काशी में विधिवत् निवास करके शरीर त्यागने पर और तीर्थराज प्रयाग में हठ से शरीर छोड़ने पर जो मोक्षरूपी फल मिलता है, वह राम नाम में अनुराग होने मात्र से सुगमता से मिल जाता है।
🙏🏻‼️जय सियाराम ‼️🙏
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