Daily Need Tips

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सेहत और स्वास्थय संबधित तरीके और निदान

23/04/2026

#कलौंजी __ मौत को छोड़कर हर मर्ज की दवा –
(कलयुग में धरती की संजीवनी)

कहते हैं पुराने ज़माने में हकीम और वैद्य इसे अपने इलाज का सबसे मजबूत हथियार मानते थे।
आज भी गांव की दादियां और नानियां कहती हैं –

अगर घर में कलौंजी है, तो अस्पताल का रास्ता भूल जाओ"

छोटी-सी काली बीजियां, लेकिन ताकत इतनी कि आपकी पूरी सेहत का पहरेदार बन जाएं।

कलौंजी का इतिहास,,,,

कलौंजी का जिक्र आयुर्वेद, यूनानी और इस्लामी तिब्ब — तीनों में मिलता है।
मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा अपनी त्वचा और बालों के लिए कलौंजी तेल का इस्तेमाल करती थी।
यहां तक कि फिरऔनों के मकबरों में भी कलौंजी के बीज मिले हैं — यानी इसकी पहचान हज़ारों साल पुरानी है।

कलौंजी का स्वाद और प्रकृति

स्वाद में हल्का कड़वा और मिर्ची जैसा तीखापन

प्रकृति में गर्म — यानी शरीर को अंदर से ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता देता है

सेवन के तरीके

कलौंजी का इस्तेमाल आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई तरह से कर सकते हैं —

1️⃣ सुबह शहद के साथ – 1 छोटा चम्मच कलौंजी पाउडर + 1 चम्मच शहद, खाली पेट लें
2️⃣ चाय में डालकर – सर्दी-जुकाम में बहुत असरदार
3️⃣ रोटी में मिलाकर – आटे में 1-2 चम्मच कलौंजी मिलाएं, हेल्दी और स्वादिष्ट
4️⃣ दूध के साथ – ताकत और इम्यूनिटी के लिए
5️⃣ तेल बनाकर – बालों और जोड़ों के लिए वरदान

कलौंजी के चमत्कारी फायदे

(मौत को छोड़कर लगभग हर मर्ज में असर)

डायबिटीज कंट्रोल – ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करता है

BP नॉर्मल – हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों में मददगार

बाल झड़ना बंद – गंजापन तक में असर

त्वचा को निखारे – पिंपल, दाग-धब्बे खत्म

लकवा में राहत – पुराने नुस्खों में शामिल

कान दर्द – 2 बूंद कलौंजी तेल से तुरंत आराम

सर्दी-जुकाम और अस्थमा – सांस की नली साफ

गठिया और जोड़ों का दर्द – सूजन और दर्द दोनों कम

आंखों की रोशनी बढ़ाए – मोतियाबिंद में भी लाभदायक

तनाव और चिंता कम – दिमाग को शांति

नींद मीठी और गहरी – अनिद्रा में फायदा

गैस और अपच खत्म – पाचन तंत्र को मजबूत

याददाश्त तेज – बच्चों से बुजुर्गों तक असरदार

सावधानियां.....

गर्भवती महिलाएं इसका सेवन न करें

अधिक मात्रा में खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है

एलर्जी वाले लोग पहले थोड़ा इस्तेमाल करके देखें

निष्कर्ष

कलौंजी कोई आम बीज नहीं, ये आपके शरीर का प्राकृतिक बॉडीगार्ड है।
अगर इसे रोज़ाना सही तरीके से अपनाया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।

हेल्थ मंत्र:

छोटे-से बीज में छुपा है सेहत का खजाना,
कलौंजी अपनाओ, बीमारियों को दूर भगाओ...

23/04/2026

#काला_नमक...
(अचूक दवा)
https://www.facebook.com/share/v/1BjgBxNDgv/

15/03/2026

@ #सचेत_रहे_उम्र_के_साथ...

🚨 शरीर का दर्द एक अलार्म है, इसे कभी म्यूट (Mute) न करें!

कई बार हम छोटे-मोटे दर्द को थकान या 'गैस की समस्या' समझकर टाल देते हैं। लेकिन छाती का दर्द, अचानक उठा भयंकर सिरदर्द या पिंडलियों (Calf) में सूजन के साथ दर्द शरीर के अंदर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का सीधा इशारा हो सकते हैं।
इन समस्याओं से बचने के तरीके और शुरुआती राहत के लिए

आसान घरेलू उपाय यहाँ दिए गए हैं: 👇

🛡️ दर्द और बीमारियों से कैसे बचें? (Prevention Tips)
हाइड्रेशन का ध्यान रखें 💧: खून को गाढ़ा होने (Blood Clot) और सिरदर्द से बचाने के लिए दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी ज़रूर पिएं।
पोषक तत्वों की कमी न होने दें 🥗: नसों की कमजोरी और पैरों में झुनझुनी से बचने के लिए अपनी डाइट में विटामिन B12, विटामिन D और कैल्शियम शामिल करें।
सही पॉश्चर बनाए रखें 🪑: कंप्यूटर पर काम करते समय या मोबाइल चलाते समय अपनी रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखें।
एक्टिव रहें 🏃‍♂️: रोज़ाना 30 मिनट की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और मांसपेशियों में ऐंठन नहीं होती।

🌿 शुरुआती राहत के लिए घरेलू उपाय (Gharelu Upay)

(नोट: ये उपाय केवल सामान्य दर्द के लिए हैं)
मांसपेशियों, पीठ या पिंडलियों में दर्द 🦵: एक बाल्टी हल्के गर्म पानी में 2 चम्मच सेंधा नमक (Epsom Salt) डालकर सिकाई करें। इससे सूजन और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।

दांत का दर्द 🦷: रुई के एक छोटे टुकड़े में 2 बूंद लौंग का तेल (Clove Oil) लगाकर दर्द वाले दांत पर रखें। हल्के गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करना भी इन्फेक्शन को रोकता है।

पेट में सामान्य ऐंठन या दर्द 🫄: एक कप पानी में अदरक उबालकर पिएं, या आधा चम्मच अजवाइन को चुटकी भर काले नमक के साथ गुनगुने पानी से फांक लें।

हल्का सिरदर्द या गर्दन का दर्द 🤕: स्क्रीन से ब्रेक लें और पुदीने (Peppermint) या नीलगिरी (Eucalyptus) के तेल से माथे और गर्दन की हल्की मालिश करें।

पैरों या तलवों में जलन/सुन्नपन 🦶: रात को सोने से पहले सरसों या तिल के तेल को हल्का गर्म करके तलवों की 5-10 मिनट मालिश करें।

⚠️ बेहद जरूरी डिस्क्लेमर (Disclaimer) 👨‍⚕️
यह जानकारी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए है। इमेज में बताए गए दर्द (जैसे- छाती में दर्द जो बांह तक जाए, गर्दन में अकड़न के साथ बुखार, या अचानक भयंकर सिरदर्द) मेडिकल इमरजेंसी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों में समय बिल्कुल बर्बाद न करें और तुरंत डॉक्टर या अस्पताल जाएं।

25/02/2026

#त्रिकुटा_चूर्ण...
अजवाइन+मेथी दाना+ काली जीरी

तीन औषधियों का ये मिश्रण इन 18 असाध्य रोगों का काल है., बुढ़ापे में भी रहेगी जवानी ...।।

बार बार रोगी उपचार हेतु एलोपैथिक चिकित्सक के पास जाता है.

एलोपैथिक उपचार करवाने पर भी जब उसे स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखता, वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुडता है।आयुर्वेदिक उपचार करवाने के उपरांत रोगी को रोग ठीक होने का भान होता है।

तब वह यह विचार करने लगता है, कि अच्छा होता यदि मैं आरंभ से ही आयुर्वेदिक उपचार करवाता।

इसलिए ऐसा ना हो तथा हानिकारक दुष्प्रभावों से बचने के लिए, रोग के आरंभ में ही आयुर्वेदिक उपचार करवाना आवश्यक है।


इन 3 औषधियों की बहुत उपयोगी दवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री :

250 ग्राम मैथीदाना,,,,

100 ग्राम अजवाईन,,,,,

50 ग्राम काली जीरी,,,,,

तैयार करने का तरीका :.....
उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें।

औषधि को सेवन करने का तरीका,,,,,
रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी (हल्का गर्म) के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

इन 18 रोगों में फायदेमंद है,,,,

गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा।

हड्डियाँ मजबूत होगी।

आँखों रौशनी बढ़ेगी।

बालों का विकास होगा।

पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।

शरीर में खुन दौड़ने लगेगा।

कफ से मुक्ति।

हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी।

थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।

स्मरण शक्ति बढ़ेगी।

स्त्री का शरीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा।

कान का बहरापन दूर होगा।

भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी।

शरीर की सभी खून की नलिकाएं शुद्ध हो जाएगी।

दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा।

शारीरिक कमजोरी दूर तो मर्दाना ताक़त बढ़ेगी।

डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा।

जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्यवर्धक बनेगी। जीवन जीने योग्य बनेगा।
कृपया ध्यान दे :

कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गलत है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी या आयुर्वेद की दुकान से मिल जाएगी, यह स्वाद में हल्की कड़वी होती है, नीचे जो फोटो है वो कालीजीरी (Purple Fleabane) का है, जिसका नाम अलग-अलग भाषाओं में कुछ इस तरह से है।

हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।

संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।

मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।

गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।

बंगाली बनजीरा।

अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन

कालीजीरी -

कालीजीरी को आयुर्वेद में सोमराजि, सोमराज, वनजीरक, तिक्तजीरक, अरण्यजीरक, कृष्णफल आदि नाम से जानते हैं। हिंदी भाषा में इसे कालीजीरी, बाकची और बंगाल में सोमराजी कहते हैं।

कालीजीरी किसी भी तरह के जीरे से अलग है। इंग्लिश में इसे पर्पल फ़्लीबेन कहते हैं पर यह कलोंजी Nigella sativa से बिल्कुल भिन्न है। कलोंजी को भी इंग्लिश में ब्लैक क्यूमिन ही कहते है। इसी प्रकार बाकची, या सोमराजी एक और पौधे के बीज को, सोरेला कोरीलिफ़ोलिया (Psoralea corylifolia) को कहते है।
आयुर्वेद के बहुत से विशेषज्ञ सोरेला कोरीलिफ़ोलिया को ही बावची या सोमराजी मानते हैं पर बंगाल में कालीजीरी को सोमराजी नाम से जानते और प्रयोग करते हैं।

कालीजीरी स्वाद में कड़वा और तेज गंद्ध वाला होता है, इसलिए इसे किसी भी तरह के भोजन बनाने में प्रयोग नहीं किया जाता। इसको केवल एक दवा की तरह ही प्रयोग किया जाता है। लैटिन में इसका नाम, सेंट्राथरम ऐनथेलमिंटिकम या वरनोनिया ऐनथेलमिंटिकम है।

इसके वैज्ञानिक नाम में 'ऐनथेलमिंटिकम' इसके प्रमुख आयुर्वेदिक प्रयोग को बताता है। ऐनथेलमिंटिकम का मतलब है, शरीर से परजीवियों को नष्ट करने वाला। आयुर्वेद में इसे कृमिनाशक की तरह प्रयोग किया जाता है।

इसका सेवन और बाह्य प्रयोग चर्म रोगों के इलाज, जैसे की श्वित्र (leukoderma) सफ़ेद दाग, खुजली, एक्जिमा, आदि। इसे सांप या बिच्छु के काटे पर भी लगाते हैं। कालीजीरी का क्षुप, पूरे देश में परती जमीन पर पाया जाता है। इसके पत्ते शल्याकृति किनारेदार होते हैं। बारिश के मौसम के बाद इसमें मंजरी निकलती है। जिसमे काले बीज आते है।

काली जीरी आकार में छोटी और स्वाद में तेज, तीखी होती है। इसका फल कडुवा होता है। यह पौष्टिक एवं उष्ण वीर्य होता है। यह कफ, वात को नष्ट करती है और मन व मस्तिष्क को उत्तेजित करती है। इसके प्रयोग से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और खून साफ होता है। त्वचा की खुजली और उल्टी में भी इसका प्रयोग लाभप्रद होता है।

यह त्वचा के रोगों को दूर करता है, पेशाब को लाता है एवं गर्भाशय को साफ व स्वस्थ बनाता है। यह सफेद दाग (कुष्ठ) को दूर करने वाली, घाव और बुखार को नष्ट करने वाली होती है। सांप या अन्य विषैले जीव के डंक लगने पर भी इसका प्रयोग लाभकारी होता है।

कालीजीरी के 13 फायदे :

यह कृमिनाशक और विरेचक है।

यह गर्म तासीर के कारण श्वास, कफ रोगों को दूर करती है।

मूत्रल होने के कारण यह मूत्राशय, की दिक्कतों और ब्लड प्रेशर को कम करती है।

यह हिचकी को दूर करती है।

यह एंटीसेप्टिक है चमड़ी की बिमारियों जैसे की खुजली, सूजन, घाव, सफ़ेद रोग, आदि सभी में बाह्य रूप से लगाई जाती है।

जंतुघ्न होने के कारण शरीर के सभी प्रकार के परजीवियों को दूर करती है।

काली जीरी को चमड़ी के रोगों में नीम के काढ़े के साथ मालिश या खादिर के काढ़े के आंतरिक प्रयोग के साथ करना चाहिए।

भयंकर चमड़ी रोगों में, काली जीरी + काले तिल बराबर की मात्रा में लेकर, पीस कर 4 ग्राम की मात्रा में सुबह, एक्सरसाइज की बाद पसीना आना पर लेना चाहिए। ऐसा साल भर करना चाहिए।
श्वेत कुष्ठ जिसे सफ़ेद दागभी कहते है, उसमे चार भाग काले जीरी और एक भाग हरताल को गोमूत्र में पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए। इसी को काले तिलों के साथ खाने को भी कहा गया है। (भैषज्य रत्नावली)

पाइल्स या बवासीर में, 5 ग्राम कालाजीरालेकर उसमे से आधा भून कर और आधा कच्चा पीसकर, पाउडर बनाकर तीन हस्से कर के दिन में तीन बार खाने से दोनों तरह की बवासीर खूनी और बादी में लाभ होता है।

पेट के कीड़ों में इसके तीन ग्राम पाउडर को अरंडी के तेल के साथ लेना चाहिए।

खुजली में, सोमराजी + कासमर्द + पंवाड़ के बीज + हल्दी + दारुहल्दी + सेंधा नमक को बराबर मात्रा में मिलकर, कांजी में पीसकर लेप लगाने से कंडू, कच्छु (खुजली) आदि दूर होते हैं।

कुष्ठ में, कालीजीरी + वायविडंग + सेंधानमक + सरसों + करंज + हल्दी को गोमूत्र में पीस कर लगना चाहिए।

कालीजीरी के सेवन की मात्रा :

इसको 1-3 ग्राम की मात्रा में लें। इससे अधिक मात्रा प्रयोग न करें।

आवश्यक सावधानियाँ :

कृमिनाशक की तरह प्रयोग करते समय किसी विरेचक का प्रयोग करना चाहिए।

कालीजीरी के प्रयोग में सावधानियां

यह बहुत उष्ण-उग्र दवा है।

गर्भावस्था में इसे प्रयोग न करें।

यह वमनकारक है।

अधिक मात्रा में इसका सेवन आँतों को नुकसान पहुंचाता है।

यदि इसके प्रयोग के बाद साइड इफ़ेक्ट हों तो गाय का दूध / ताजे आंवले का रस / आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए।

नोट,,, काला जीरा और कलौंजी अलग-अलग मसाले हैं, हालाँकि इन्हें अक्सर एक ही समझा जाता है। कलौंजी, जिसे निगेला सतीवा या काला बीज भी कहते हैं, बटरकप परिवार से आता है और इसके छोटे, काले बीजों का उपयोग व्यंजनों और पारंपरिक दवाओं में होता है। वहीं, काला जीरा या तो निगेला सतीवा (जो कलौंजी के समान ही है) या !बुनिअम बाल्बोकैस्टेनम पौधे से आता है, जिसका स्वाद जीरे जैसा होता है और जो भारतीय, मध्य पूर्वी और लैटिन अमेरिकी व्यंजनों में इस्तेमाल होता है।
कलौंजी (Kalonji)
वैज्ञानिक नाम: निगेला सतीवा

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28/12/2025

🍯 गुड़ (Jaggery) खाने के फायदे

गुड़ न सिर्फ मिठास देता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।

✅ गुड़ खाने के प्रमुख फायदे
🟢खून की कमी (एनीमिया) में लाभकारी
गुड़ में आयरन भरपूर होता है, जिससे हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद मिलती है।
🟢पाचन तंत्र मजबूत करता है
भोजन के बाद थोड़ा गुड़ खाने से गैस, कब्ज और एसिडिटी में राहत मिलती है।
🟢इम्युनिटी बढ़ाता है
गुड़ में मौजूद मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
🟢सर्दी-खांसी में फायदेमंद
सर्दियों में गुड़ खाने से गले की खराश, खांसी और जुकाम में आराम मिलता है।
🟢डिटॉक्स में सहायक
गुड़ शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन) बाहर निकालने में मदद करता है, खासकर लीवर को साफ करता है।
🟢ऊर्जा देता है
गुड़ तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है, कमजोरी और थकान में लाभकारी है।
🟢ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद
इसमें पोटैशियम होता है जो रक्तचाप संतुलन में सहायक है।
🟢महिलाओं के लिए लाभकारी
पीरियड्स के दर्द और कमजोरी में गुड़ बहुत फायदेमंद माना जाता है।
🟡 गुड़ कैसे खाएं?
भोजन के बाद 1 छोटा टुकड़ा
मूंगफली या चना के साथ
सर्दियों में तिल-गुड़ के लड्डू
⚠️ ध्यान रखें
डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में ही सेवन करें
ज्यादा मात्रा नुकसानदायक हो सकती है

04/10/2025

#घमेरी_पौधा...
(जिसे कई जगहों पर घमेंरी, घमेरी, या घमेंरी बेल कहा जाता है) आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में उपयोग किया जाने वाला एक औषधीय पौधा है। यह शरीर की कई समस्याओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। इसके पत्ते, जड़ और फल औषधि रूप में काम आते हैं।

घमेरी पौधे के फायदे :-

1. पाचन तंत्र के लिए लाभकारी:-

घमेरी का सेवन अपच, कब्ज और भूख न लगने की समस्या को दूर करता है।

पेट की गैस और एसिडिटी को कम करने में मददगार है।

2. त्वचा रोगों में उपयोगी:-

इसके पत्तों का लेप लगाने से खुजली, फोड़े-फुंसी और घमौरियों में राहत मिलती है।

त्वचा पर होने वाले संक्रमण और चकत्तों को शांत करता है।

3. बुखार और संक्रमण में सहायक:-

इसके काढ़े का सेवन करने से बुखार और शरीर में संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है।

4. रक्त शुद्धि में लाभकारी:-

घमेरी के पत्तों का रस खून की अशुद्धियों को दूर करने और त्वचा को साफ रखने में मदद करता है।

5. श्वसन तंत्र के लिए अच्छा:-

खांसी, जुकाम और बलगम को कम करने में सहायक है।

अस्थमा और सांस की समस्या में भी उपयोग किया जाता है।

6. घाव भरने में मददगार:-

इसके पत्तों का लेप लगाने से चोट और घाव जल्दी भरते हैं।

सूजन और दर्द में राहत देता है।

7. महिला रोगों में उपयोगी:-

मासिक धर्म की अनियमितता और दर्द में राहत के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

08/03/2025

अजीनोमोटो क्या है??👇👇👇
अजीनोमोटो को हम इसके रासायनिक नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट के नाम से भी जानते है।

इसका इस्तेमाल ज्यादातर चीन की खाद्य पदार्थो में
खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. ..
पहले हम अधिकांशतः घर पर बने खाने को खाते थे,
लेकिन अब लोग चिप्स, पिज्ज़ा, मोमोज,अंडा रोल, मैगी और भी अनेकों फास्ट फूड खाने को ज्यादा पसंद करने लगे है,जो कि इनमें अजीनोमोटो का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है,

इनमें भी अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है.
इसका इस्तेमाल कई डिब्बाबंद फ़ास्ट फ़ूड सोया सॉस, टोमेटो सॉस, संरक्षित मछली जैसे सभी संरक्षित खाद्य उत्पादों में किया जाता है।

अजीनोमोटो को पहली बार 1909 में जापानी जैव रसायनज्ञ किकुनाए इकेडा के द्वारा खोजा गया था.
उन्होने इसके स्वाद को मामी के रूप में पहचाना जिसका अर्थ होता है,सुखद स्वाद

कई जापानी सूप में इसका इस्तेमाल होता है.
इसका स्वाद थोडा नमक के जैसा होता है. देखने में यह चमकीले छोटे क्रिस्टल के जैसा होता है.
इसमें प्राकृतिक रूप से एमिनो एसिड पाया जाता है,किन्तु
आज दुनिया के हर कुक खाने में स्वाद को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते है, अजीनोमोटो का इस्तेमाल असुरक्षित माना गया है, इसका इस्तेमाल पहले चीन की रसोई में होता था,
लेकिन अब ये धीरे धीरे हमारे भी घरों की रसोई में अपना पैठ बना चुका है,अपने समय को बचाने के लिए जो हम 2 मिनट में नुडल्स को तैयार कर ग्रहण करते है इस तरह के अधिकांशतः खाद्य पदार्थो में यह पाया जाता है जो धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है।

यह एक प्रकार से नशे की लत जैसा होता है अगर आप एक बार अजीनोमोटो युक्त भोजन को ग्रहण कर लेते है,
आप उस भोजन को नियमित खाने की इच्छा रखने लगेंगे. ..इसके सेवन से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ जाती है जब आप अजीनोमोटो मिले पदार्थो का सेवन करते है, तो रक्त में ग्लूटामेट का स्तर बढ़ जाता है. जिस की वजह से इसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

अजीनोमोटो को एक धीमा हत्यारा🔥 भी कहा जा सकता है,यह
आँखों की रेटिना को नुकसान पहुंचाता है साथ ही यह थायराईड और कैंसर जैसे रोगों के लक्षण पैदा कर सकता है।

अजीनोमोटो से युक्त खाद्य पदार्थो का अगर नियमित सेवन किया जाये तो यह माइग्रेन पैदा कर सकता है जिसको हम अधकपाली भी कहते है,
इस बीमारी में आधे सिर में हल्का हल्का दर्द होते रहता अजीनोमोटो के अधिक सेवन से मोटापे के बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है हमारे शरीर में मौजूद लेप्टिन हॉर्मोन,
हमे भोजन के अधिक सेवन को रोकने के लिए हमारे मस्तिष्क को संकेत देते है।

अजीनोमोटो के सेवन से हम ज्यादा भोजन कर जल्द ही मोटापे से ग्रस्त हो सकते है, और कई गम्भीर बिमारी से भी ग्रस्त हो सकतें हैं।

ध्यान दीजिए 👉फास्ट फूड के तो सभी दीवाने हैं ही लेकिन बाजार से नहीं बल्कि अपने घर पर देशी तरीके से बनाकर खायें।

निवेदन: आगे शेयर जरूर करें 🙏

01/03/2025

■ " चूना अमृत है " ..■
〰〰〰〰〰〰〰
चूना जो आप पान में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर
देते है ।

जैसे किसी को पीलिया हो जाये माने जॉन्डिस
उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना ;
गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है ।
और ये ही चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है -

■ अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो
साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे; और
जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अच्छी दवा है ये चूना ।

■ बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है -

■ गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए,
दही नही है तो दाल में मिला के खाओ,
दाल नही है तो पानी में मिला के पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है ।

■ जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे
उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना

■ जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज
उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे
हो जायेंगे ।

■ बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना ।
हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंध हुआ उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना; गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना । जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है ।

■ गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए
अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये
तो चार फायदे होंगे -

■ पहला फायदा :-
माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा,

■ दूसरा :-
बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त
होगा ,

■ तीसरा फ़ायदा :-
बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया ,

■ चौथा सबसे बड़ा लाभ :-
बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत Intelligent और Brilliant होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।
चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , ■ कमर का दर्द ठीक करता है ,

■ कंधे का दर्द ठीक करता है,

■ एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चुने से ठीक होता है ।
कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दुरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है - ये चूना ही ठीक करता है
उसको; रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है ।
अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है ।
चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।

■ मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है ,

■ मुंह में अगर छाले हो गए है
तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।

■ शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए ,

■ एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना ,
चूना पीते रहो गन्ने के रस में , या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है ,
बहुत जल्दी खून बनता है -

एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह
खाली पेट ।

भारत के जो लोग चूने से पान खाते है, बहुत होशियार लोग
है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है ..
तो चूना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चूने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था केन्सर करता है,

● पान में सुपारी मत डालिए ● सोंट डालिए उसमे ,
● इलाइची डालिए ,
● लौंग डालिए.
● केशर डालिए ;
ये सब डालिए पान में चूना लगा के पर तम्बाकू नही , सुपारी नही और कत्था नही ।
■ घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये

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