Bihar ka ladla story maker
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28/08/2023
मेरी जिंदगी की असली कहानी एक कहानी
21/08/20223 को मैं पटना से भरूच के लिए घर से निकल गया जो कि गुजरात में है याहा मैं काम करण का इरादा से आया था! काम मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा फिर गोवा के लिए निकल गया | भरूच स्टेशन पर आते हाय मैंने खाना खाया और स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार करणे लग गया मेरी वेस भूसा कुछ अच्छी नहीं थी टीशर्ट या हाफ पेंट ही पहना था तभी मेरी नज़र एक बेहद खूबसूरत लड़की पर गई जो मुझे कपि देर से देख रही थी मुझे वी उसका चेहरा जाना पहचान सा लगा | मैं कुछ बाते करू उसके साथ तभी एक 2 साल का छोटा बच्चा एक आंटी लेकर आई और लड़की को दे दी | फिर वो लड़की बोली क्या हुआ मा आदित्य पॉटी कर दिया है क्या और मुस्कुराहट भरी नजर से मेरी तरफ देखी | फिर मैं तो समझ गया की ये लड़की मुझे जानती है मगर मुझे उसका चेहरा बिल्कुल भी याद नहीं है मेरी ट्रेन 3 घंटे लेट थी इसलिए मैं बिंदास बैठा था और उसके बारे में याद करणे की कोसिस कर रहा था फिर मैं अपने मोबाइल को चालाने लगा कुछ 10/15 मिनट बाद वह मेरे बगल की सीट पर आके बैठ गई और धीरे से बोली तुम बिल्कुल भी नहीं बदले
मैं घबराते हुये बोला := जी मैडम आप कोन (वह मेरी महिला मित्र यह जो 2017 में पंजाब के कॉलेज के समय दोस्त बनी थी मुझे याद आया
फिर उसने पूछा आदित्य तुम्हारे बाल सफेद हो गया है?
मैं सरमाते हुए और मुस्कुरा के बोला 2 दिन धूप में बैठा रह गया फिर सारे सफेद हो गया
वह अपने बेटे को मुझे देते हुए बोली तुम्हारा ही नाम रखी हू इसका तुमसे ज्यादा ये शैतान बहुत परेशान करता है इसके पापा जब से गुजरे हैं तब से परेशान और भी बढ़ गई है थोरी उदास होकर बोली
मैंने अचानक से पूछा वो कैसे हुआ
थोरी रोते हुये बोली कार एक्सीडेंट मे पति और ससुर जी का देहांत हो गया 1 साल पहले |
मैं खामोश हो गया फिर वो कॉलेज के दिनों की बात करने लगी कितनी खुश थी कोई टेंशन नहीं था हम दोनों कैंटीन में कैसे मिले बहुत सारी बात हुई वो हैदराबाद की थी उसने ऑफर किया हैदराबाद चलो मेरे पेट्रोल पंप का काम तुम देख लेना मैं साफ मना कर दिया क्योंकि ये मेरी बहुत नजदीक के दोस्त यह तभी मेरी ट्रेन की अलार्म बाजी थोरी देर में पहुचने वली थी फिर उसने मेरा नंबर मंगा और पूछा जरूरी परने पर मेरी मदद करोगी कभी मैं भी हा कर दीया और बैग उठा कर जाने की तायारी करणे लगा
फिर उसने गले लगा लिया और रोने लगी मेरी ट्रेन स्टेशन पर आ गई थी कैसे भी मैं उसको मना कर रेलगाड़ी में बैठ गया और मैं जिंदगी का नया सफर की तरफ चल दिया
Meri life ki sachhi ghatna
एक कहानी अपनी जिंदगी की :-
21अप्रैल को हम छपरा मे गए थे कुछ कपड़े लेने थे!
कपड़ा देख ही रहा था तो सामने उसी दुकान मे 2016 से बनी एक महिला मित्र दिखी एक बच्चे और अपनी ननद के साथ मै तो देख के छुपने की कोशिश मे था क्योंकि हम चप्पल और लोअर मे थे लेकिन उसने कैसे देख लिया फिर वों मेरे बगल मे आ गयी और पहला शब्द बोली क्या नेताजी क्या खबर है कैसे है फिर मैंने मुस्कुराते हुए जबाब दिया तुम्हारे जैसा नहीं है लेकिन ठीक ही है फिर और बातें होने लगी एक बात थी वों सुंदर गजब लग रही थी पहलें से ज्यादा आकर्षक लग रही थी और उसका ड्रेस भी बहुत इम्प्रेसिव थी मैं तो गौर से देखा तो देखता रह गया तो वों मुस्कुराते हुए बोली की अब तुम भी किसी से शादी कर लो आदित्य उम्र हो गया है फिर मैं बोला की मैं सन्यासी हु फिर वों बोली बड़का त सन्यासी फिर मुझे अचानक पहले की कहानी सब याद आने लगी बात करने मे आज भी वही टोन था जो मुझे बेहद पसंद था
एक बात तो है किसी एक की बात करने और चैट करने की आदत आपको अगर बेहद पसंद हो जाती है- तो आपको अन्य लड़की से बात ज्यादा हो न पाता है या आप कर न पाते है ऐसा मेरे साथ भी हुआ है होता है अब किसी लड़की से चैट या बात करने मे वों मज़ा न आता है जो मज़ा उससे आता था |
प्यार तो होता कई बाऱ है ये सत्य है लेकिन बेहद पसंद एक ही होता है फिर बाद मे कोई उसका जगह को भरपाई के लिए ही होता है |
फिर उसके परिवार के बारे मे बात हुआ उसके हस्बैंड का बात हुआ उसके बच्चे को देखे फिर उसको देखे तो वों समझ गयी की मैं दुःखी हु फिर उसने कहाँ बताओ क्या दिक्क़त है ये वों ऐसे तो वों मेरा सब परेशानी जानती ही थी फिर भी मेरे मुँह से सुनना चाहती थी लेकिन मैंने न बोला मैंने कहाँ सब ठीक है फिर उसने जाते जाते कही की आदित्य मैं तुमको कितना बाऱ शादी के लिए बोली लेकिन तुमको तो उस समय दूसरा का भूत चढ़ गया था मैं कुछ न बोला हसते मुस्कुराते रहा तो बोली आजतक न बदले हो अपने बारे मे गलत या सही मान लोगो जबाब न दोगे सिर्फ राजनितिक मुद्दा पे ही तुम बहस करोगे फिर उसने बोला की आओ कभी पटना घर पे मैंने कहाँ की देखेंगे कभी लेकिन अभी इन दिनों नहीं
तो उसने बोला की शादी करोगे मेरे ननद से तो बोलो मैं हिनको भेजूंगी मैंने कुछ न बोला बस बतही कह कर निकल गया |
लेकिन उसके बाद मुझे अफसोस हुआ और लगा की हम जो फैसला न लें पाते है वही मुझे बाद मे दर्द देता है
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