Desi rider
�Road Runner by Passion�
Splendor Lover by heart �
बेबाक सवाल है—अगर अपने बिज़नेस और काम से पहचान बनानी है, तो उसी पर फोकस करो।
मुसलमानों को टारगेट करके गाली देना और विवाद खड़ा करके फेम पाने की कोशिश क्यों?
फेम पाना है तो अपने काम से पाओ, अपनी मेहनत से पाओ और कुछ करके दिखाओ।
किसी धर्म को टारगेट करके सस्ती लोकप्रियता हासिल करना कोई उपलब्धि नहीं है।
और अगर ऐसी बयानबाज़ी पर पुलिस एक्शन ले रही है, तो सवाल ये भी है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए—बयान किसी के भी खिलाफ हो, कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए।
विरोध करो, सवाल करो, अपनी बात रखो—लेकिन धर्म को निशाना बनाकर नहीं। 🇮🇳
#बेबाकबात #सवालजरूरीहै #सच्चीबात #अपनीबात #धर्मकेनामपरनफरत #समानता #संविधान #कानूनसबकेलिएबराबर
हिजाब भी पहनना है और कांवड़ यात्रा भी जाना है? ये कैसी भक्ति है या सिर्फ सोशल मीडिया पर फेम पाने का ड्रामा? 🤦♂️🔥
एक तरफ अपनी पूरी पहचान बनाए रखना और दूसरी तरफ महादेव के नाम पर कैमरे के सामने फुटेज पाना—यह दोहरा रवैया समझ से बाहर है।
आस्था सहूलियत या अटेंशन पाने का जरिया नहीं होती! अगर किसी को किसी धर्म या भगवान पर विश्वास है, तो ढोंग और नौटंकी छोड़कर सादगी से रहे, ना कि हर जगह कैमरे के लिए ड्रामा करे! 💯
13/08/2026
मुसलमानों में अगर कहीं सबसे ज्यादा बेहयाई अगर आपको देखने को मिलेगी तो वह उन औरतों में मिलेगी जो नामी हिजाब पहनती हैं
यानी कि वह हिजाब तो फिकर से पहनते हैं लेकिन उन्हें हिजाब और शरीयत की और दीन ए इस्लाम की जरा सी भी जानकारी नहीं है.
आज सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा जिसमें एक स्कूल में कुछ हिजाब पहनी लड़कियां लड़कों के साथ में ऐसे खेल रही है जिसे मानो वह कोई साथ में पढ़ने वाले स्टूडेंट नहीं बल्के और ही कुछ हो😔
ये किस से जंग लड़ेंगे
जो लोग दिन-रात एक समुदाय और उनके धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाकर नफरत फैलाने में लगे रहते हैं, वे इस वीडियो पर चुप क्यों हैं?
मदरसों और अल्पसंख्यकों पर सवाल उठाने वाले नेता अब जवाब दें कि मंदिर परिसर में खुलेआम स्वचालित हथियारों (Automatic Rifles) से फायरिंग की ट्रेनिंग और प्रदर्शन कहां का हिस्सा है? क्या यह कानून-व्यवस्था और शांति के लिए खतरा नहीं है?
जब बात देश की सुरक्षा, शांति और न्याय की हो, तो नियम और कानून सबके लिए बराबर होने चाहिए—चाहे कोई भी धर्म या संगठन हो। नफरती राजनीति और दोहरे मापदंड (Double Standards) अब बंद होने चाहिए!
दोहरा रवैया और ढोंग की हद! 🔥
जब कोई आम मुस्लिम लड़की अपनी पसंद या पहचान के लिए हिजाब या बुर्का पहनकर स्कूल-कॉलेज जाती है, तो यही लोग आपत्ति जताते हैं और विरोध करते हैं। तब इन्हें बुर्के से परेशानी होती है।
लेकिन आज जब वही बुर्का इनके राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे में सही बैठता है, तो इन्हें कोई ऐतराज नहीं होता!
यदि किसी ने एक विचारधारा या धर्म को छोड़ दिया है और दूसरे रास्ते को चुना है, तो उसे उसी नए धर्म के सिद्धांतों और पहचान को अपनाना चाहिए। लेकिन केवल ध्यान खींचने (लाइमलाइट) और पब्लिसिटी के लिए पुराने प्रतीकों का इस्तेमाल करना क्या सही है?
यह पूरी तरह से दोहरा रवैया है। जब किसी चीज़ को गलत मानकर छोड़ दिया, तो उसी का सहारा लेकर दिखावा क्यों?
कवाड़ यात्रा के नाम पे ये किया हो रहा है यूपी पुलिस को दिख रहा है की नहीं! जल्दी से जल्दी इसपर कोई करवाई होना चाहिए!
इसपर कोई करवाई नहीं होगा! यही लोगो पे यूपी पुलिस फूल बरसाती है और विधायक जी पैर दबाते हैं
खान सर से पर्सनल दुश्मनी है तो उनसे कानूनी तौर पर लड़िए, लेकिन अपनी निजी रंजिश में मुस्लिम समुदाय और मदरसों को निशाना बनाना बंद कीजिए! जब खुद पॉडकास्ट में गए थे तब वह सही था, और बाद में जब खान सर गए तो एंकर 'बिकाऊ' और पॉडकास्ट 'झूठा' हो गया? खुद जाओ तो सच और दूसरा जाए तो पैसे का खेल—यह दोहरा रवैया बंद कर शिक्षक की तरह कोर्ट में लड़ाई लड़िए, राजनीति मत चमकाइए! और अपना दिमाग का इलाज करवाएं जा कर!
09/08/2026
जैसे न्यायपालिका में
साबित होने तक
हर व्यक्ति संवैधानिक रूप से निर्दोष है…
वैसे ही अतीक अहमद के बेटे
संवैधानिक रूप से भी निर्दोष हैं…
मरहूम अतीक अहमद साहब के बारे में
लोगों की अपनी-अपनी राय हो सकती है,
लेकिन अतीक अहमद ने
अपनी औलाद को जो तरबियत दिया है,
उसकी एक झलक कल देखने को मिली…
सालों से जेल में बंद
उमर अहमद पैरोल पर बाहर आए
अपने छोटे भाई का नमाज़-ए-जनाज़ा खुद पढ़ाया…
छोटे भाई को आख़िरी सफ़र पर विदा करना
आसान नहीं होता…
मुश्किल वक़्त में भी
उन्होंने जो सब्र व हिम्मत दिखाई,
वह एक मिसाल है…
अल्लाह तआला
मुश्किल वक़्त में
सबको सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए…आमीन!
08/08/2026
इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन। 🤲
मरहूम अतीक अहमद के तीनों बेटे—उमर, अली और अहज़म—अपने छोटे भाई अबान के अंतिम सफ़र में शामिल हुए।
एक परिवार के लिए इससे ज़्यादा दर्दनाक मंज़र और क्या होगा… 💔
अल्लाह अबान की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें अपनी रहमत में जगह दे और पूरे ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। 🤲🤲
शिक्षा के मंदिरों पर ताले और कानून को हाथ में लेने वालों पर चुप्पी?
आस्था के नाम पर पिस्टल और तमंचे लहराना आखिर कौन सी भक्ति है? 5 मिनट की नमाज़ पर सवाल उठाने वाला प्रशासन खुलेआम तमंचा लहराने वालों पर खामोश क्यों है? क्या क़ानून और नियम सबके लिए एक समान नहीं होने चाहिए?
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