Journalist Vipin Baniyal

Journalist Vipin Baniyal

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Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Journalist Vipin Baniyal, Health/Beauty, lane no 5 shivkunj kedarpur dehradun uttrakhand, Dehra Dun.

-यह पेज खास तौर पर, हिमालयी लोक गीत-संगीत, आंचलिक फिल्में, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि के साथ ही सम सामायिक विषयों की महत्वपूर्ण, दिलचस्प व मौलिक जानकारी देने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है।
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08/10/2026

स्वर्गीय हीरा सिंह राणा अपने जीवनकाल में संघर्षों की भट्टी में तपते ही रहे। उनके गीतों में जीवन के संघर्ष, दुःख-तकलीफ शिद्दत से दिखाई पड़ते हैं। राणा जी के गीतों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का डॉ अजय ढौंडियाल भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह प्रस्तुति प्रभावित करती है।
DrAjay Dhoundiyal

28/09/2026

-राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के हाथों ढोली फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। अब जग्वाल इस फिल्म के रिलीज होने की है। फिल्म का शीर्षक गीत 'ढोली त्वै बिन सिद्धी नी' स्पष्ट कर देता है कि फिल्म की दिशा क्या होगी । डॉ नंदकिशोर हटवाल ने यह गीत ऐसे लिखा है, जैसे कोई गागर में सागर भर दे। ऊपर से नेगीदा का संगीत और उनका कंठ, सोने पे सुहागा जैसा । ढोली देखने की अब तीव्र इच्छा है।

Photos from Journalist Vipin Baniyal 's post 23/09/2026

आम आदमी का 'कुल जमा' क्या, कुछ सफलताए, विफलताएं, स्पर्श, आवाज ... .!

विपिन बनियाल
-श्रुति वत्स ने अपने पहले कविता संग्रह का नाम बहुत ठोक-बजाकर रखा है- 'कुल जमा '। वह इसके शीर्षक के चयन की परतों उधेड़कर कहती हैं-आम आदमी की जिंदगी में कुल जमा क्या होता है। कुछ सफलताएं, कुछ विफलताएं, कुछ स्पर्श, कुछ आवाज, कुछ सपने आदि-आदि। अपनी 107 छोटी-बड़ी कविताओं में उन्होंने आम इंसान की कुल जमा चीजों को सामनेे रखनेे की ईमानदार कोशिश की है। इस कोशिश में प्रकृति के रंग निखरे हैं, प्रेम-संवेदना की कोंपल भावनाएं फूटी हैं, सामाजिक विसंगतियों कोे आईना दिखा है। महिलाओं की स्थिति पर खास बात हुई है। और भी तमाम सारी बातें श्रुति वत्स केे इस कविता संग्रह का हिस्सा बनी हैं।
सबसे पहले प्रेम-संवेदना की बात करना उचित रहेगा। श्रुति वत्स क्या खूब लिखा है-कल मेेरे शहर में बारिश थी/कल बूंदों ने तुझको छुआ होगा/कल कोई सहर हुई होगी/कल चांद को कुछ हुआ होगा। एक अन्य कविता में श्रुति कहती हैं-मुझे छिटक देना चांद की छलनी से/किसी घाटी में जुगनुओं की तरह/मेरे शब्दों को लिख देना/पेड़ की झड़ती हुई सूखी पत्तियोें पर/मुझे तोड़ना/रेत के एक-एक कण की तरह/मेरी राख को मल देना/एक अघोरी की देह पर/मुझे पिघलते हुए बहा देना/गांव के उस किनारे वाले तालाब में/मेरे रोम-रोम से बुन देना/उसके बिस्तर की चादर।
श्रुति वत्स के लेखन में महिला विमर्श को खास जगह है। उनके कविता संगह में कई-कई कविताएं केवल और केवल महिलाओं की स्थिति पर है। वह अपनी कविताओं में बंधनों को तोड़ने और प्रगतिशील होने का आह्वान करती हुई भी दिखाई देती हैं। औरतों की मौजूदा स्थिति पर श्रुति खफा दिखती हैं’ वह लिखती हैं-औरतों के चैराहे नहीं होते/जहां चार औरतें करती हों/देश-दुनिया की बातें/औरतों की होती है चहारदीवारी/जिनके बीच, करती हैं वो/सुबह की चाय से लेकर रात की तरकारी का इंतजाम।
शोेषण, असमानता, अन्याय पर अपनी बात कहतेे हुए वह प्रकृति और इंसान की स्थिति को बखूूबी जोड़ती है। इन लाइनों पर गौैर फरमाएं-सुनो देखो, कभी रिसते पहाड़ों को/भरभराकर टूटती चट्टानों को/और फिर देखना कूड़ा बीनते हाथोें को/रिसकर फट चुकी उनकी दरारों को/एक सा दुख पाओगे/आकार में/विस्तार में/भीतर के टकराव में।
रिश्तों की पवित्रता पर बाजारवाद की परत चढ़ते हुए जितना आपनेे-हमनेे देखा है, श्रुति वत्स उससेे आगे जाकर कुछ कहने की कोशिश करती हैं। कहती हैं-अब सब कुछ बाजार है यहां/दुकानों मे सजे सामान/तोहफों में लिपटे ताल्लुकात/खुदा की इबादत/खबरों की इबारत/औलाद की पैदाइश/औकात की नुमाइश/आशनाई का जश्न/मुहब्बतों का गम/यहां सब कुछ बाजार है। अपने पहले कविता संग्रह में श्रुति वत्स ने तमाम सारी बातों को बेलाग, बेलौस लिखा है। 'कुल जमा ', यह भावनाओें का प्रभावशाली प्रकटीकरण है।

'सरकारी सेवा में रहते हुए यह प्रयास महत्वपूर्ण'
-श्रुति वत्स नरेंद्रनगर में बीडीओ के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति प्रख्यात लोक गायक रजनीकांत सेमवाल हैं। श्रुति वत्स के काव्य संग्रह कुल जमा का लोकार्पण बुधवार को काबीना मंत्री सुबोध उनियाल ने यमुना कालोनी स्थित अपने सरकारी आवास में किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए साहित्य सृजन आसान नहीं है, लेकिन युवा अधिकारी श्रुति की साहित्य के प्रति लगन ने इस कार्य को संभव कर दिया। कुल जमा की रचियता श्रुति ने अपने काव्य संग्रह की रूप रेखा को सामने रखा। साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने काव्य संग्रह की समीक्षा की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार गजेंद्र नौटियाल, बीना बैंजवाल, नीता कुकरेती, चार धाम महा पंचायत के महासचिव डाॅ बृजेश सती, प्रकाशक प्रबोध उनियाल प्रमुख रूप से उपस्थित थे। संचालन सैयद सादाब अली ने किया।

Udankaar.com

21/09/2026

आंदी जांदी सांस छे तू ... मदन मोहन डुकलान की ऐसी रचना है, जिसमें प्रेम और भावनाओं की गहरी व सशक्त अभिव्यक्ति है। आलोक मलासी की धुन इसकी खूबसूरती को और बढ़ाती है। सोने पे सुहागा तब हो जाता है जब नेगीदा का कंठ इस गीत को नसीब होता है। डुकलान के गजल संग्रह हवे जाज सी उडदन सुख के मौके पर नेगीदा ने 23 वर्ष पहले रिलीज अनुज जोशी की फिल्म तेरी सौं के इस गीत को गाया, तो कार्यक्रम में खुशनुमा अहसास भर गया ।
# AndiJandiSonsh Madan Mohan Duklan

19/09/2026

गीत-गजल की त्रिवेणी में आनंद की डुबकी, मदन मोहन डुकलान की गजलों के बहाने गढ़वाली साहित्य पर विमर्श

विपिन बनियाल
-सचमुच, यह गीत-गजल की त्रिवेणी का सा अहसास था। कई-कई धाराएं आकर मिलीं और एकाकार हो गईं। माहौल ऐसा बना, जहां पर हर किसी ने परम आनंद की डुबकी लगाई। छोटे-छोटे वाक्यों से बड़ी-बड़ी बात कह देने वाले उत्कृष्ट लिखवार मदन मोहन डुकलान का यह न्यौता उन सभी केे लिए था, जो गढ़वाली बोली-भाषा में कही गई हर बात को प्यार करते हैं। चाहे फिर यह गीत-गजल या किसी भी अन्य रूप में क्यों न हो।
दोहरी खुशी की वजह साफ थी। एक, पिछले 40 वर्षो से गढ़वाली साहित्य की साधना में जुटे मदन मोेहन डुकलान की एक और किताब का विमोचन हुआ, जिसे नाम दिया गया है-हवे जाज सी उड़दन सुख। यह एक गजल संग्रह है, जिसमें उनकी बेहतरीन गजलों को स्थान मिला है। दो, डुकलान का जलमबार भी साथ ही था। दोहरी खुशी थी, तो दून लायब्रेरी मेें कार्यक्रम भी दो चरणों में हुआ। पहले चरण में, मदन मोहन डुकलान की 40 वर्षों की गढ़वाली साहित्य की यात्रा पर चर्चा हुई। इस क्रम में उनकी चिट्ठी पत्री का बार-बार जिक्र आया। प्रेम सहित अन्य सभी विषयों पर उनके गीतों की चर्चा हुई।
इस चरण में पहाड़ के यशस्वी कलाकार नरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व पुलिस महानिदेशक व साहित्यकार अनिल रतूड़ी, पदमश्री प्रीतम भरतवाण, प्रख्यात संस्कृतिकर्मी गणेश खुगशाल गणि के साथ ही गढ़वाली के भाषाविद् डाॅ जगदंबा प्रसाद कोटनाला की खास मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बताया। एक तरफ, मदन मोहन डुकलान की साहित्य यात्रा के जानेे-अनजाने पहलुओं पर विमर्श चलता रहा, वहीं इसकेे ही समानांतर गढ़वाली बोली-भाषा केे उत्थान, उसकी कठिनाई आदि विषयों कोे भी छुआ गया।
दूसरे चरण में, मदन मोहन डुकलान की गजलों को जब नेगीदा, किशन महिपाल, आलोक मलासी, संगीता ढौंडियाल, डाॅ कुसुम भट्ट औैर गिरीश सुंद्रियाल जैसे कलाकारों का कंठ मिला, तो ये गजलें और भी निखर गईं। मां का भावपूर्ण जिक्र हुआ-मेरी मां, तेरू मोल क्वी नी दे सकदू। या फिर, आंख्यू मा सीणा . . .की बात हुई। आज डाल्यूं मुडि छैल नी च की तकलीफ भी उभरी, तो लाशो मां पहाड़ की खौफनाक तस्वीर भी दिखी। कबि घाम, कबि छैल के जरिये जिंदगी में दुख-सुख की अनिवार्य मौजूदगी का दर्शन भी छलक कर बाहर आया। हवाई जहाज की तरह सुख के अल्पकालिक और दुख के लंबी रेलगाड़ी की तरह दीर्घकालिक होने की उस बात को भी सामने रखा गया, जो कि मदन मोहन डुकलान की कलम से बड़ी गंभीरता से निकली है। आंदी-जांदी सांस छै तू के बगैर काफी कुछ अधूरा रह जाना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आंदी-जांदी सांस को हर किसी ने महसूस किया। जीवन में संघर्ष के क्षणों में मजबूत सहारा बनने वाली डुकलान की यह लाइनें सब को फिर से हिम्मत दे गई-कट ही जाला, खैरी का दिन, रे मन किले उदास छै तूू।

udankaar.com

Photos from Journalist Vipin Baniyal 's post 19/09/2026

विदेशी धरती पर एशियाई खेलों की तैयारी में जी-जान से जुटी है पहाड़ की बेटी अंकिता ध्यानी

विपिन बनियाल
-अमेरिका के कोलोराडो में इन दिनों पहाड़ की बेटी अंकिता ध्यानी जमकर पसीना बहा रही है। कोच साइमन स्कॉट की देख-रेख में वह एशियाई खेलों की तैयारी में व्यस्त है। जाहिर तौर पर चुनौती बड़ी है। ट्रैक पर अंकिता का मुकाबला दिग्गज धावकों से होना है। मगर उसके हौसले में कमी नहीं है। उसकी आंखों में पदक का सपना पल रहा है। जापान एशियाई खेलों में इस बार वह तीन हजार मीटर स्टीपलचेज के इवेंट में देश के लिए दौडे़गी। यह इवेंट 29 सितंबर को है।
अंकिता ध्यानी की आंखों में पदक का सपना आज का नहीं है। इससे पहले, जब 2022 में पहली बार एशियाई खेलों में वह दौड़ी, तब भी यह सपना था। इसके बाद, 2024 के पेरिस ओलंपिक में भी इस सपने के साथ अंकिता ट्रैक पर दौड़ी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई थी। अब जापान एशियाई खेलों में एक बार फिर वह ट्रैक पर जी-जान लगाने के लिए तैयार है।
कोलोराडो-अमेरिका से फोन पर बातचीत के दौरान अंकिता ध्यानी ने कहा-इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में पदक जीतना उनका सबसे बड़ा सपना है। अच्छे प्रदर्शन में वह कोई कमी नहीं छोडे़गी। एशियाई खेलों के लिए अंकिता ध्यानी ने इस वर्ष जून माह में क्वालीफाई किया था। उसके बाद से वह कोलोराडो-अमेरिका में तैयारी कर रही है। अंकिता के अनुसार-तैयारी अच्छी चल रही है। मेरा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और देश के लिए पदक जीतना है।
उत्तराखंड के पौड़ी जिले के छोटे से गांव मरूडा से निकली अंकिता ध्यानी की उपलब्धियां कहीं बड़ी है। राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में अंकिता ने कई पदक जीते हैं। यरूशलम मेें आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स में वह पहले स्थान पर रही थी। वह महिलाओं की दो हजार मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में वर्तमान में राष्ट्रीय रिकार्ड धारक हैं।
अंकिता कहती है-हमारे देश के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। अब एशियाई खेलों में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। अंकिता के प्रदर्शन पर उत्तराखंड की भी निगाहें टिकी होंगी। अंकिता की शिक्षिका रिद्धि सेमवाल भट्ट का कहना है-हमें उम्मीद है, वह बेहतर करेगी।

'खेल रत्न मेरी लिए बड़ी उपलब्धि'

-उत्तराखंड सरकार ने पिछले दिनों खेल दिवस के मौके पर अंकिता ध्यानी को खेल रत्न प्रदान किया है। हालांकि अमेरिका में होने के कारण वह इस पुरस्कार को लेने नहंी पहुंच पाई। उनके माता-पिता ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। अंकिता कहती हैं-खेल रत्न मिलना मेेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। वह कहती हैं-उत्तराखंड में खेल सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, लेकिन गांव और पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छे मैदान, सिंथेटिक ट्रैक, कोच और नियमित प्रतियोगिताएं और बढ़नी चाहिए, ताकि प्रतिभाओं को प्रशिक्षण के लिए बाहर न जाना पडे़।

Loksatya
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Udankaar - पहाड़ का नया सवेरा 18/09/2026

विद लव, आपकी सैयारा : जिंदगी . . .नेटवर्ट से जुड़ा सबक असल में जी गईं जूही

विपिन बनियाल
-जूही बब्बर सोनी के चर्चित नाटक 'विद लव, आपकी सैयारा ' के कई सबक हैं। एक सबक जिंदगी औैर मोबाइल के नेटवर्क से जुड़ा है। इसका सार ये ही है कि मोबाइल के नेटवर्क की तरह जिंदगी का प्रवाह भी कभी-कभी बाधित होता है। मगर चीजों के दोबारा शुरू होने का इंतजार जरूरी है। जिंदगी फिर उस गति से ही चलती है, जिस गति से नेटवर्क रिकनेक्ट होने पर मोबाइल।
देहरादून के स्टेज पर अपने चर्चित नाटक के मंचन के दौरान सैयारा का यह सबक जूही बब्बर सोनी ने न सिर्फ दिया, बल्कि जिया भी। दरअसल, नाटक के मंचन के दौरान कुछ एक मौके ऐसे आए, जबकि तकनीकी या अन्य व्यवधान ने उनका तारतम्य बिगाड़ दिया। जूही स्टेज छोड़कर चली गईं। फिर स्टेज पर लौटीं, तो उसी जगह और प्रभाव से नाटक को शुरू किया, जहां पर वह उसे छोड़कर गई थीं। जूही ने साबित किया, कि उनकी अदाकारी को यूं ही उत्कृष्ट नहीं कहा जाता। मां नादिरा जहीर बब्बर और पिता राज बब्बर से अभिनय की जिन बारीकियों को उन्होंने सीखा है, वह देहरादून के स्टेज पर जमकर निखरकर सामने आईं।
जूही बब्बर सोनी को उनके जिन चुनिंदा नाटकों ने सबसे ज्यादा शोहरत दिलाई है, उसमें विद लव, आपकी सैयारा प्रमुख रूप से शामिल है। इसकी परिकल्पना नादिरा बब्बर की है, जबकि इसे लिखा और निर्देशित जूही ने खुद किया है। इस नाटक की मुख्य किरदार सैयारा भी जूही बब्बर सोनी ही है। देश-विदेश में इस नाटक के 130 से ज्यादा शो किए जा चुके हैं। एक आजाद ख्याल महिला सैयारा के पात्र को सामने रखते हुए महिला सशक्तीकरण की जिस आवाज को जूही इस नाटक में बुलंद करती है, वह कमाल का है। कहीं-कहीं लगता है, कि यह कहानी, यह नाटक पुरूषों के कतई खिलाफ है। हालांकि नाटक के आखिर में सैयारा इसका जोरदार खंडन भी करती है।
सैयारा की कहानी का लब्बोलुआब क्या है। यदि ये पूछा जाए, तो कहना होगा कि यह महिलाओं को लेकर समाज, खास तौैर पर पुरूषों के दकियानूूसी विचार औैर व्यवहार दोनों को जोरदार तरीके से खारिज करती हैं। नाटक की कहानी ऐसी है, कि यह दर्शकों को कभी गुदगुदाती है, कभी झकझोर देती है। सैयारा के किरदार को स्टेज पर जीवंत करते हुए जूही बब्बर सोनी तो गजब ही ढा देती हैं। डेढ़ घंटे इस नाटक में पूरी एक कहानी चलती है और इस कहानी के साथ पिन ड्राप साइलेंस के साथ चलते हैं दर्शक। कभी हैरान तो कभी विचारशील होकर। कभी हल्के-फुल्के पलों का आनंद भी लेते हैं दर्शक। कहानी कहते-कहते जूही बब्बर सोनी जिस तरह से दर्शकों से सीधे कनेक्ट होती हैं, उसका तो कहना ही क्या। महिला विमर्श करते हुए नाटक ये ही संदेश देता है कि बेटियों को आगे बढ़ाओ, उन्हें दकियानूसी बातों में मत जकड़ों, उनकी जिंदगी को रूकने मत दो। उसे खुलकर जीने दो।
जूही बब्बर सोनी की इस खास प्रस्तुति के लिए देहरादून में स्टेज सजाया था संस्कृति विभाग ने। दून विश्वविद्यालय का रंगमंच विभाग इसमें सहयोगी बना। नाटक को प्यार करने वाले हर वर्ग की इसमें मौजूदगी रही। जूही बब्बर सोनी की प्रस्तुति से बेहद प्रभावित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय की वीसी प्रो सुरेखा डंगवाल ने जूही एंड टीम को एक बार फिर से देहरादूून आनेे का न्यौता दिया है। दून विश्वविद्यालय केे रंगमंच को समर्पित विशेष कार्यक्रम में आनेे वाले दिनों में जूही एंड पार्टी फिर से देहरादूून में नमूदार होगी और कहेगी - 'विद लव, आपकी सैयारा '।

Udankaar - पहाड़ का नया सवेरा पहाड़ का नया सवेरा

17/09/2026

पदमश्री प्रीतम भरतवाण को जन्मदिन की शुभकामनाएं

Pritam Bhartwan

14/09/2026

-नेयो फरस्वाण, मीना राणा और प्रदीप फरस्वाण ने सौण भादो, रुणझुण बरखा और खुद को अपने इस गीत में बखूबी समेटा है। यह गाना उतना ही अच्छा है, जितनी सावन भादो की रिमझिम बारिश होती है।
NE-YO

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