Vaid Aman Cheema

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22/02/2025

★ श्री अमनामृत सागर -अनुभूत नुस्खे -भाग -53

Hyper- Acidity Herbal Treatment

अम्लपित्त का हर्बल इलाज

अम्लपित्त नाशक नुस्खा :-

मुलहठी चूर्ण,
आमलकी रसायन,
अविपत्तिकर चूर्ण
तीनों 80-80 ग्राम,

गिलोय सत्व 25 ग्राम,
प्रवाल पिष्टी 25 ग्राम ,
शंख भस्म 25 ग्राम ,
सोडा कार्ब 50 ग्राम मिलाकर रख लें ।

सुबह-शाम 1-3 ग्राम भोजन से पहले ताजे जल से लें।
दवा खाने के कुछ ही मिनटों में जितना तेज़ाब है , नीचे चला जाता है, रोगी आराम महसूस करने लगता है।

अम्लपित्त के कारण होने वाले रोगियों के लिए वरदान है। एक बार अवश्य बनाएं, इस्तेमाल करें। वैद्य भाईयों के लिए मेरी तरफ से तोहफा।‌

अपने अनुभव जरूर शेयर करें, धन्यवाद

फिर मिलते हैं ...

लेखक आपका अपना शुभचिंतक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
Call & WhatsApp 9915136138

19/02/2025

★ स्वर्ण भस्म -भाग- 67

Alzheimer यानि याददाशत की कमजोरी
( भूलने की बिमारी ) पर मेरे दो अनुभूत प्रयोग

दोस्तों आजकल की भागदोड़ भरी जिंदगी में टेंशन , थकान , खान-पान , काम का बोझ आदि ऐसे कई कारण है जिससे दिमाग बहुत कमजोर हो जाता है । आदमी की याददाशत कमजोर हो जाती है । कहीं अपनी चीजें रखकर भूल जाता है । बाजार सामान लेने जाता है तो 10 में से 4 काम भूल जाता है । किसी से वायदा करके भूल जाता है । इस रोग के कारण बहुत सी परेशानियों का सामना करना पढ़ता है । जिससे आदमी और संबंधित बहुत दु:खी रहने लगते है । आधुनिक विज्ञान में इसका कोई पक्का इलाज नही, आपका तन,मन, धन, समय खराब तो होगा ही सेहत का भी नुक्सान होगा । इसलिए आप घबराएं नही , आयुर्वेद में इसका सफल इलाज है । मैं आपको अपने अनुभूत नुस्खे बता रहा हुँ , जो कि आप के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते है । आपकी भूलने की बिमारी ठीक होगी।

• Alzheimer नुस्खा -1

ब्राह्मी घनसत्व-- 30 ग्राम ,
अशवगंधा घनसत्व-- 30 ग्राम ,
बच चूर्ण - 15 ग्राम
अभ्रक भस्म - 3 ग्राम सहस्त्र
प्रवाल पिष्टी - 5 ग्राम ,
रजत भस्म -2.5 ग्राम
स्वर्ण भस्म - 250mg

सबको कसकर घुटाई करके एकजान करलें । फिर इसकी पुड़िया बनाकर रख लें । सुबह-शाम गाय के दूध से 1-1पुड़िया ग्रहण करें ।

कुछ ही दिनों के सेवन से आशातीत लाभ मिलेगा ।

2. साथ में खाने के बाद ½ कप पानी में सारसत्वारिष्ट अशवगंधारिष्ट 2-2 चम्मच मिलाकर लें ।

3. पेट साफ रखें , इसके लिए रात को त्रिफला चूर्ण या पंचसकार चूर्ण गर्म जल या दूध से सोते समय एक चम्मच लें ।
4. ब्राह्म रसायन 1-2 चम्मच सुबह खाली पेट चांदी का वर्क लगाकर खाएं ।

• Alzheimer नुस्खा -2

स्वर्ण भस्म -300mg,
रजत भस्म - 2 ग्राम
ब्राह्मी वटी गोल्ड - 3 ग्राम ,
स्मृतिसागर रस - 3 ग्राम ,
त्रिबंग भस्म - 2 ग्राम ,
अभ्रक भस्म 3 ग्राम सहस्त्र,
सिद्ध मकरध्वज 2 ग्राम ,
अशवगंधा घन - 10 ग्राम,
शंखपुष्पी घनसत्व- 10 ग्राम,

सबको मिलाकर फिर आठ घंटे घुटाई करके हम
फिर इसे पुड़िया बनाकर रख लेते हैं। सुबह-शाम दूध से पुडिया सेवन करवाते हैं। ।

अगर यह नुस्खा चाहिए तो आप हमसे मंगवा भी सकते है।

2016 से यह दोनों योग इस्तेमाल कर रहा हूं। बहुत लोगों को लाभ मिला । आप में से जो लोग परेशान हैं वह इसे एक बार जरूर इस्तेमाल करें।
इस नुस्खें में शोध किया गया है । दवाओं की मात्रा में अदल-बदल किया है। जोकि पहले से और बेहतर हो गया है।

लेखक
सदैव आपका अपना शुभचिंतक
Vaid Amandeep Singh Cheema,
Calling & WhatsApp 9915136138

12/02/2025

★स्वर्ण भस्म - भाग- 66

सत् श्री अकाल जी

यह पोस्ट पुरुषों के लिए है।

बचपन की गलतियां , नादानियां , गलत संगत , गलत खान-पान आदि की वजह से जब जवान लड़के हस्तमैथुन करने है तो वीर्य पतला होकर आदमी शीघ्रपतन नामर्दी का शिकार होकर जब संभोग रत होता है तो मैदान में चारों कोने चित्त होता है तो तरह -तरह के चिकित्सक के पास जाकर इलाज करवाता है। सही निदान , सही दवा , सही परहेज आदि न हो पाने के कारण जब आराम नही मिल पाता तो मरीज आत्महत्या की तरफ भागता है। उसका किसी भी काम में मन नही लगता । शादी से , औरत नाम से डरने लगता है। इस समय आयुर्वेद ही आपका साथ देता है। इसी तरह के मरीजों के लिए बहुत अच्छा नुस्खा बता रहा हुं । यह नुस्खा गर्म तासीर वाले ले सकते है।

|| • अमन अमृत योग ( हीरा भस्म युक्त ) • ||
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1. स्वर्ण बंग - आपके वीर्य को शुद्ध करने के लिए बहुत अच्छा कार्य करेगी -50 mg.
2. रजत भस्म 20 mg. यह रंग रुप को निखारती है। वीर्य, बल , बुद्धि को बढ़ाती है।
3. मुक्ता पिष्टी - 20 mg. यह हस्तमैथुन के कारण नसों में पढ़ी गर्मी को शांत करती है। वीर्य को शुद्ध करके पतलापन दूर करती है । दिल दिमाग को ताकत देती है ।
4. त्रिबंग भस्म-50 mg . यह दवा शुक्राणु बढ़ाती है। शुक्रवाहिनी ग्रंथियों को ताकत देती है‌। गर्मी दूर करती है। वीर्य गाढ़ा करती है। मधुमेह में‌ भी लाभकारी है। धांत , स्वप्नदोष को भी ठीक करती है।
5. सिद्ध मकरध्वज -20 mg. नसों में आई कमजोरी को दूर करती है। नामर्दी में बहुत लाभकारी है। मर्दाना गुण पैदा करती है ।
6.प्रवाल पिष्टी -40mg कैल्शियम, वीर्य की गर्मी , शुक्राणु बढ़ाने में बहुत लाभकारी है।
7. काले कौंच की गिरी - 50mg शुक्राणु, नामर्दी , शीघ्रपतन, वीर्य की कमी को खत्म करती है।
8. पहाड़ी इमली बीज -50 mg यह वीर्य को गाढ़ा करती है। ताकतवर है।
9.हीरा भस्म - 10 mg. यह दवा की पावर 10 गुणा बढ़ा देती है। ताकत का भंडार इसमें समाया हुआ है। मेरे योगों में हीरा , सोना का जरुर इस्तेमाल होता है। इसीलिए महंगे बनते है। रिजल्ट बहुत ही शानदार आते है। जिस भी दवा में यह मिला दिए जाते है। उसकी पावर बहुत बढ़ जाती है। लंबे समय तक दवा असर रखती है। सेवन करने वाला कई-2 बार संभोग करके भी थकता नही है।

लेखक - चिकित्सक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
Whatsapp & Calling -9915136138

06/02/2025

★ श्री अमनामृत सागर -अनुभूत नुस्खे -भाग -48

Ayurvedic immunity Powerboster

हर साल कोई न कोई वायरस , फ्लू देश - विदेश मैं फैलता है । इस वर्ष भी वायरस का बोलबाला है। जिसकी शुरुआत चीन से हुई है। चीन में अपनी दहस्त फैलाने के बाद , देश -विदेश से होता हुआ अब भारत में भी फैल रहा है।
सबसे जरूरी बात अपने पाठकों को बता दूं कि कोई भी वायरस तब तक आदमी को नुक्सान नहीं पहुंचा सकता जबतक immunity power बिल्कुल ठीक हो । यह दवाएं शरीर को बिमारियों से लड़ने की ताकत बहुत बढ़ा देती है । इसलिए आप इनका सेवन‌ योग्य चिकित्सक की देख-रेख सलाह अनुसार कर सकते हैं । किसी अच्छी कंपनी की दवा ही प्रयोग करें।

1.च्यवनप्राश एक चम्मच साथ में गिलोय घनवटी दो-दो गोली दिन में एक बार ताजा जल से लें ।

2.आमलकी रसायन 100 ग्राम ,
गिलोय का चूर्ण -50ग्राम ,
मुलेठी -25 ग्राम ,
दालचीनी -25 ग्राम
मिश्री -200ग्राम

सबको मिलाकर रख लें ।
2-2 ग्राम ताजे जल से सुबह शाम सेवन करें।

3. तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच ,
अदरक का रस एक चम्मच
शहद एक चम्मच दिन में एक बार ले सकते है।

4. महासुदर्शन घनवटी दो गोली
त्रिभुवन कीर्ति रस आधी गोली गुनगुने पानी से लें।

5. गिलोय घन वटी दो गोली ,
संजीवनी वटी एक गोली ताजा जल के साथ लें ।

6.महालक्ष्मी विलास रस 1 गोली,
महामृत्युंजय रस 1 गोली ,
सितोपलादि चूर्ण 2ग्राम + अश्वगंधा चूर्ण 1ग्राम मिलाकर दूध के साथ लें। ज्यादा कमजोरी की हालत में इस दवा का प्रयोग कर सकते हैं।

7. अभ्रक भस्म सहस्त्र 2 ग्राम ,
मल्ल सिंदूर 1 ग्राम ,
फिटकरी भस्म 2 ग्राम ,
सिद्ध मकरध्वज 2 ग्राम ,
गिलोय का सत् 2 ग्राम
यह योग किसी अच्छे चिकित्सक द्वारा ही तैयार करवाएं , इसमें कूपीपक्व रसायन है , जो कि बहुत सावधानी से तैयार किए जाते है‌। फिर इस्तेमाल किए जाते हैं। अतः साधारण जन इनका सेवन बिना चिकित्सक की सलाह से न करें। अगर तैयार करना हो तो चिकित्सक से ही तैयार करवाएं ।

सबसे पहले मल्ल सिंदूर और सिद्ध मकरध्वज को इतना खरल करें कि यह चमक रहित हो जाएं, फिर बाकी की दवाएं मिलाकर 21 पुड़िया बना लें। सुबह दोपहर शाम एक एक पुड़िया शहद , शहद + अदरक रस के साथ लें।

उपरोक्त सभी नुस्खों में से जो दवा आसानी से आपको मिलें उनमें से किसी एक नुस्खे का ही इस्तेमाल करें।

सदैव आपका अपना
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
Call & Whatsapp 9915136138

पोस्ट चोरी ‌न करें। शेयर करके लोगों तक पहुंचाने का पुण्य करें।©

09/01/2025

★स्वर्ण भस्म - भाग -63

*लकवा ,फालिज -पक्षाघात Paralysis कष्टकारी रोग*

लकवा को फालिज या पक्षाघात Paralysis कहते है।
बहुत लोग इस रोग से प्रेशान है । इस रोग से रोगी अपने घर वालों के लिए बोझ बनकर रह जाता है । अपने काम खुद करने की बहुत दिक्कत हो जाती है ।जिनके बच्चे छोटे , कमाई का कोई साधन नही , उनके लिए तो दु:खों का पहाड़ टूट पढ़ता है । यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होने वाली है । इस पोस्ट में मैं कुछ घरेलु उपाय और मेरी अनुभूत आयुर्वेदिक चिकित्सा लिखूंगा ।

ध्यान से पढ़े ।

मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मस्तिष्क का वह भाग शरीर के जिन अंगों को अपना आदेश नहीं भेज पाता वे अंग हिलडुल नहीं सकते और मस्तिष्क (दिमाग) का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। यह स्नायुविक रोग है तथा इसका संबध रीढ़ की हड्डी से भी है।लकवा रोग से पीड़ित रोगी के शरीर का एक या अनेकों अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। लकवा बांये अंग में ज्यादा खतरनाक है ।

लकवा आलसी जीवन जीने से ही नहीं, बल्कि इसके विपरीत अति भागदौड़, क्षमता से ज्यादा परिश्रम या व्यायाम, अति आहार ,ज्यादातर प्रौढ़ आयु में ,युवावस्था में की गई गलतियाँ-भोग-विलास में अति करना, मादक द्रव्यों का सेवन करना, आलसी रहना आदि कारणों से शरीर का स्नायविक संस्थान धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, इस रोग के आक्रमण की आशंका भी बढ़ती जाती है।

पक्षाघात तब होता है , जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है।

*लकवा के पाँच प्रकार है ,जो निम्नलिखित अनुसार है।*

अर्दित,एकांगवात,सर्वागवात,अर्धांगवात,बाल पक्षाघात

१)अर्दित - सिर्फ चेहरे पर लकवे का असर होने को अर्दित (फेशियल पेरेलिसिस) कहते हैं। अर्थात सिर, नाक, होठ, ढोड़ी, माथा तथा नेत्र सन्धियों में कुपित वायु स्थिर होकर मुख को पीड़ित कर अर्दित रोग पैदा करती है।

२)एकांगघात - इसे एकांगवात भी कहते हैं। इस रोग में मस्तिष्क के बाह्यभाग में विकृति होने से एक हाथ या एक पैर कड़ा हो जाता है और उसमें लकवा हो जाता है। यह विकृति सुषुम्ना नाड़ी में भी हो सकती है। इस रोग को एकांगघात (मोनोप्लेजिया) कहते हैं।

३)सर्वांगवात - इसे सर्वांगवात रोग भी कहते हैं। इस रोग में लकवे का असर शरीर के दोनों भागों पर यानी दोनों हाथ व पैरों, चेहरे और पूरे शरीर पर होता है, इसलिए इसे सर्वांगघात (डायप्लेजिया) कहते हैं।

४)अर्धांगवात - इस रोग में कमर से नीचे का भाग यानी दोनों पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं। यह रोग सुषुम्ना नाड़ी में विकृति आ जाने से होता है। यदि यह विकृति सुषुम्ना के ग्रीवा खंड में होती है, तो दोनों हाथों को भी लकवा हो सकता है। जब लकवा 'अपर मोटर न्यूरॉन' प्रकार का होता है, तब शरीर के दोनों भाग में लकवा होता है।

५)बाल पक्षाघात - बच्चे को होने वाला पक्षाघात एक तीव्र संक्रामक रोग है। जब एक प्रकार का विशेष कृमि सुषुम्ना नाड़ी में प्रविष्ट होकर वहाँ खाने लगता है, तब सूक्ष्म नाड़ियाँ और माँसपेशियां आघात पाती हैं, जिसके कारण उनके अधीनस्थ शाखा क्रियाहीन हो जाती है। इस रोग का आक्रमण अचानक होता है और प्रायः 6-7 माह की आयु से ले कर 3-4 वर्ष की आयु के बीच बच्चों को होता है।

* पक्षाघात की घरेलु चिकित्सा*

•लहसुन की कली 8-10 लेकर पीसकर ,शहद से चाटें ।

•लहसुन का आचार या चटनी भी ले सकते है ।

•आक के पत्तों का आचार बनाकर भी प्रयोग कर सकते है । इसकी मैंने पहले स्पैशल पोस्ट भी की थी ।

•सरसों के तैल 100ml में लहसुन 20gmऔर अजवायन 20gm को जला कर छानकर , मालिश के लिए प्रयोग करें ।

•एरण्ड पत्र, धतूरा पत्र, मदार पत्र, नागफनी का रस 50-50ml निकालकर कपड़े से निचोड़ लें । फिर 200ml सरसों के तैल में डालकर धीमी आग पर चढ़ाकर जब तक तैल मात्र न रह जाएं , तब तक पकाएं । फिर ठंडा होने पर छानकर प्रयोग में लें । इस तैल की सुबह-शाम मालिश करें । यह जोड़ो का दर्द , लकवा में बहुत उपयोगी है । आँखों से बचाएं ।

*पक्षाघात पर मेरी अनुभूत आयुर्वेदिक चिकित्सा*

*पक्षाघात नाशक मेरा सिद्ध योग*

PARALYSIS GO -WITH GOLD

वृहत वात चिंतामणि रस -3ग्राम
योगेंद्र रस - 3ग्राम
खंजनकारी रस -15गोली
एकांगवीर रस-6ग्राम
प्रवाल पंचामृत रस-6ग्राम
मुक्ता पिष्टी-6ग्राम
ब्राह्मी वटी- 6ग्राम
बच - 6ग्राम
अकरकरा ईरानी-6ग्राम
स्वर्ण भस्म -500mg

•दवा बनाने का तरीका•
सब दवा वैद्यनाथ,डाबर,या धूतपापेश्वर कंपनी की ही लें ।
सबसे पहले आप वृहत वात चिंतामणि रस,योगेंद्र रस को पीसे , फिर खंजनकारी रस, एकांगवीर रस,प्रवाल पंचामृत रस को पीस लें । फिर ब्राह्मी वटी को पीसकर मिला लें । उसके बाद मुक्ता पिष्टी मिला लें। फिर बच और अकरकरा का महीन पिसा चूर्ण मिला कर ।

90 पुड़िया बराबर मात्रा में मिला लें । बस आपकी लकवा की दवा तैयार है । यह मेरी अनुभूत दवा है ।

असमर्थ लोग स्वर्ण भस्म न डालें, इससे योग बहुत महंगा बनता है, लेकिन रिजल्ट साधारण योग से बहुत ज्यादा आते हैं।

```लेखक```
~सदैव आपका अपना शुभचिन्तक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा
अमन आयुर्वेद,पंजाब
Call & WhatsApp 9915136138~

• विशेष•
यह मेरा अनुभूत नुस्खा है । जो कि किसी भी तरह के लकवा में बहुत ही प्रभावकारी सिद्ध हुई है । महंगी तो जरूर है । रोगी को सारी उम्र के लिए नकारा ,बेसहारा , बोझ जैसी जिंदगी के जीना न पड़े , उस हिसाब से तो बहुत सस्ती है । रिजल्ट देखकर पैसे भूल जाते है । अगर आप इसे बनाने में असमर्थ है तो मेरे से अडवांस बैंक पेमैंट करके भी कोरियर द्वारा मंगवा सकते है ।

•खाने की विधि•
सुबह-दोपहर-शाम एक-एक पुडियाँ
महारास्नादि काढा,बलारिष्ट,अशवगंधारिष्ट 15-15ml लेकर जल में मिलाकर खाने के बाद लें ।

*परहेज*
खट्टी तली चीजें,नमकीन,मेदा,बेसन,केला,अरबी,घी,तैल,मीट,शराब न लें ।
जो मांसाहारी है वह कबूतर सेवन किसी भी रूप में कर सकते है । जो शाकाहारी है वे मूंग की दाल लें । हल्का सुपाचय भोजन ही लें। पेट साफ होना जरूरी है । कब्ज न रहने दें ।

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