Yoga & Spirituality
Yoga is the noble art of living. It is a total package of health , happiness and beauty. It stretches the body as well as mind.
10/09/2025
https://youtu.be/Y_kwlnMjhGU?si=TDDY8-Y8tVdo2rja
परलोक कैसा होता है ?
परलोक कैसा होता है? #shraddh #tarpan #pitripaksh #rebirth #viral #video परलोक कैसा होता है? परलोक के बारे में आम जन में बहुत सारी भ्रांतियां है परलोक कैसा होता है वहां रहने वाले निवासी क्य...
15/08/2025
https://youtu.be/DSZ_0rMB3hc?si=fcujbdjjXsYyr_जहर
पुलिस के डंडे खा खा के बेहोश हो गए लेकिन झंडा नहीं छोड़ा आजादी के मतवाले श्री राम "मत्त"
आजादी के मतवाले श्रीराम "मत्त" #15thaugust #independenceday #gayatripariwar #viral #ptshriramsharma आजादी के मतवाले श्रीराम "मत्त"
22/05/2025
https://youtu.be/J4U9AHQaTuQ?si=0bpmdVidwFfI9oh3
2022 में हीं लिखी जा चुकी है अखंड भारत की पटकथाl क्या है ऑपरेशन सिन्दूर से कनेक्शन #PragyaVani #awgp अखंड भारत की पटकथा 2022 में ही लिखी जा चुकी है l Pragya Vani l ...
Hi everyone
17/07/2023
शबरी की प्रतीक्षा ll Shabri ki Pratiksha ll Pragya Vani ll शबरी की प्रतीक्षा ll Shabri ki Pratiksha ll Pragya Vani ll
👉 *दूसरों के दोष ही गिनने से क्या लाभ (अंतिम भाग)*
*अतएव हमें महात्मा कबीरदास की नम्रतापूर्ण उक्ति को सदा ध्यान में रखना चाहिए।*
*बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न दीखा कोय।*
*जो दिल खोजा आपना, मुझ सा बुरा न होय॥*
*दूसरों के व्यक्तिगत दोषों के प्रति हमारा क्या रुख होना चाहिए इसका विवेचन करते हुए महात्मा तुलसी दास लिखते हैं कि “साधुओं का चरित्र कपास जैसा निर्मल और शुभ्र होता है, उसका फल परम गुणमय होता है और वह स्वयं दुख सहकर दूसरों के पाप रूपी छिद्रों को ढकता है। इसी गुण के कारण वह संसार में वन्दनीय है। अतएव यदि हमें भी इस शुभ्र कपास जैसा वन्दनीय होना है तो हमें दूसरों की व्यक्तिगत भूलों के प्रति बड़ा सहृदय होना चाहिए। सहृदय होने पर ही, हम किसी व्यक्ति के हृदय में स्थान पा सकते हैं। तभी वह हमें अपना हितेच्छु जानकर हम पर अपने हृदय का भेद प्रकट कर सकता है और तभी हम उसके मन की गाँठें खोलने में उसकी सहायता कर उसका सच्चा सुधार कर सकते हैं।*
*हमें किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत दोषों के लिए जितना सहृदय होना है उतना ही हमें सामाजिक अपराध करने वालों के प्रति निर्मम होना पड़ेगा। सामाजिक अपराध करने वालों के उन अपराधों को हजार कान और आँखों से हमें सुनना और देखना पड़ेगा और उन्हें उनका दण्ड दिलवाना होगा।*
*.....समाप्त*
📖 *अखण्ड ज्योति-अप्रैल 1949 पृष्ठ 18*
29/06/2023
कौए (काकभूशुन्डी) की अनोखी अदाकारी ll Ramayan ll Pragya Vani ll कौए की अनोखी अदाकारी ll Ramayana ll Pragya Vani ll Adipurush ...
28/06/2023
रामायण का निर्माण कैसे हुआ? ll Ramayana ll Pragya Vani ll रामायण का निर्माण कैसे हुआ? ll Ramayana ll Pragya Vani ll Adipurush ...
👉 *दूसरों के दोष ही गिनने से क्या लाभ (भाग 1)*
*अगर है मंजूर तुझको बेहतरी, न देख ऐब दूसरों का तु कभी।*
*कि बदबीनी आदत है शैतान की, इसी में बुराई की जड़ है छिपी।*
*महात्मा ईसा ने कहा है कि “दूसरों के दोष मत देखो जिससे कि मरने के उपरान्त तुम्हारे भी दोष न देखे जावें” और तुम्हारा स्वर्गीय पिता तुम्हारे अपराधों को क्षमा कर दें। यदि आप दूसरों के दोषों को क्षमा नहीं करते तो आप अपने दोषों के लिए क्षमा पाने की आशा क्यों करते हैं?*
*मनुष्य का पेट क्यों फूला-फूला सा रहता है और उसकी पीठ क्यों पिचकी रहती है इसका कारण तनिक विनोद पूर्ण ढंग से एक महाशय इस प्रकार बताते हैं कि इन्सान दूसरों के पाप देखा करता है इसलिए दूसरों की पाप रूपी गठरी उसके सामने बंधी रहती है पर उसे अपने ऐब नहीं दिखाई देते, वह उनकी और पीठ किए रहता है इसलिए उसकी पीठ चिपकी रहती है।*
*एक बार भगवान बुद्ध के पास दो व्यक्ति परस्पर लड़ते-झगड़ते हुए हुए आए। एक दूसरे के लिए कहता था कि महाराज इसके आचरण कुत्ते जैसे हैं इसलिए यह अगले जन्म में कुत्ता होगा। दूसरा पहले के लिए कहता है कि महाराज इसके आचरण बिल्ली जैसे हैं और यह अगले जन्म में बिल्ली होगा। भगवान बुद्ध ने बात समझ ली ओर पहले से कहा कि तेरा साथी तो नहीं पर तुझे ही अगले जन्म में कुत्ता होना पड़ेगा क्योंकि तेरे हृदय में कुत्ते के संस्कार जम रहे हैं कि कुत्ता इस प्रकार आचरण करता है। इसी तरह उन्होंने दूसरे से कहा कि वह खुद बिल्ली होगा।*
....*क्रमशः जारी*
📖 *अखण्ड ज्योति-अप्रैल 1949 पृष्ठ 17*
24/06/2023
ब्रह्म पदार्थ ll Brahm Padarth ll Pragya Vani ll ब्रह्म पदार्थ ll Brahm Padarth ll Pragya Vani ll ...
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