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I follow a satvik food plan ( SFP ) -fruits , salads , veggies, millets + fasting

30/08/2025

"अमर गीता" सार -

"अमर गीता" सार पढ़े और
अपनी मनोकामनाएं और मोक्ष पाएं
व स्वस्थ समृद्ध जीवन , 80+ आयु तक पाएं

कृपया "अमर गीता" सार को पढ़े और अपने प्रियजनो और अपने ग्रुप में अवश्य साझा share करें..................................................
"अमर गीता" सार के 8 पाठ हैं-
पाठ 1. समृद्धता
पाठ 2. बाल आयु ( 0-14 वर्ष की आयु )
पाठ 3. 14 - 50 वर्ष की आयु
पाठ 4. ज्ञान
पाठ 5. परम ज्ञान
पाठ 6. 50 वर्ष की आयु - जीवन के आखिर तक
पाठ 7. परमात्मा हो जाना
पाठ 8. मोक्ष प्राप्त करना
..................................................

पाठ 1- समृद्धता

समृद्धता = शरीर , मन , आर्थिक व आध्यात्मिक रूप से संपन्न

भारत का भाव , समृद्धता का भाव है।
हमारे ऋषि-मुनियों ने , हमारे देश भक्तों ने , हमारे संतो ने , महात्माओं ने , गुरुओं ने , भारतीयों ने ,वर्षों तक ध्यान ,तप, बलिदान , शौर्य से , समृद्धता का भाव , हमारे भीतर भरा , ब्रहमांड में भरा है। इसलिए हम भारतीयों के स्वभाव में समृद्धता का भाव है।

हम सब इन के ऋणी है।
इन्हें हमारा सादर नमन प्रणाम 🙏 है।

भारत आध्यात्मिकता , योग और समृद्धता का स्थान है। भारत ने दुनिया को अध्यात्म और योग को प्रस्तुत किया है।
21000 वर्ष पूर्व वेद , रामायण 14000 वर्ष , महाभारत 7000 और कई महान शास्त्रों से , भारत ने दुनिया को अध्यात्म को प्रस्तुत किया है।

विश्व की आध्यात्मिक राजधानी भारत है।
अध्यात्म का केंद्र भारत है।

भारत की सभ्यता सबसे प्राचीन है और भारत की सभ्यता सबसे भव्य दिव्य और विश्व के कल्याण के लिए है और हमेशा रहेगी।

केवल भारत की एकमात्र सभ्यता है जो कि जीवंत है। समृद्धता के भाव ने हमारी सभ्यता को जीवंत बनाए रखा है।

अब हम सब भारतीयों का यह कर्तव्य है कि समृद्धता के भाव को हम अपनी आने वाली पीढ़ियों , भारत और विश्व के लिए दे ।

मैं आप सभी को समृद्धता प्राप्त करने के लिए बहुत ही सरल मार्ग / अभ्यास बता रहा हूं।
आप इसका पालन करें और भारत की भव्य परंपरा को आगे बढ़ाएं।
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पाठ 2-बाल आयु ( 0-14 वर्ष की आयु )

बाल आयु के बारे बस इतना जान ले कि बाल आयु में हम सभी मनोकामनाओं से परे की अवस्था में थे। सभी से मुक्त परम अवस्था ( मोक्ष ) में थे।

14 वर्ष की आयु के आस-पास जैसे ही हम वस्तुओ के संपर्क में आते हैं ,हम , सभी से मुक्त परम अवस्था ( मोक्ष ) को खो देते हैं।क्योंकि
वस्तुओ के संपर्क में आने से हमारे मन के भीतर में मनोकामनाएं पैदा होती है। मनोकामनाएं के कारण , हमारे मन के भीतर विचार thoughts उत्पन्न होते हैं।

विचारों के कारण हम सभी से मुक्त परम अवस्था ( मोक्ष ) को खो देते हैं और हम विचारों (मन) में आ जाते हैं।

अब मनोकामनाएं और फिर से सभी से मुक्त परम अवस्था ( मोक्ष ) को पाने के लिए क्या पालन करना होगा?
आइए इसे जानते है।
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पाठ 3. 14-50 वर्ष की आयु

युवा आयु में , 14 वर्ष की आयु से ,
आपकी क्या मनोकामनाएं हैं, उसे जान ले और उसे लिख ले।
आपको जो 5 अभ्यास दिए गए हैं ,
वह आपकी मनोकामनाओं के लिए काम करेंगे।

आपकी क्या मनोकामनाएं हैं -

-लक्ष्य - आप क्या करना / बनना चाहते हैं
-धन - आपको कितना धन चाहिए?
-उद्देश्य - दूसरों की सेवा करना
( परिवार , समाज , देश और विश्व कल्याण के लिए काम करना )

आपकी मनोकामनाओं के लिए 5 अभ्यास -
a. प्रार्थना
b. ब्रह्मचर्य प्रबंधन
c. कल्पना करना
d. समय प्रबंधन
e. कर्म

a. प्रार्थना

अपनी मनोकामनाएं लिख लें और प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर , आंखें बंद करके , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

"परमात्मा , कृपया मेरी मनोकामनाओं की तैयारी में और मेरे प्रयासों में मेरी मदद करें।
-कृपया 5 अभ्यास के पालन में मेरी मदद करें।
-कृपया मेरी मनोकामनाओं से संबंधित अच्छे विचार दें।
-कृपया मेरी गलतियों को माफ़ करें।

परमात्मा , मैं अपने आपको व अपनी मनोकामनाओं को आपको समर्पण करता हूं "

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़ कर झुककर नमन प्रणाम करना है और अपनी आंखें खोल लेना है

प्रार्थना के पालन से , आपका आपकी मनोकामनाओं में और परमात्मा में विश्वास धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा।

5 अभ्यास के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या मनोकामनाओं के समकक्ष या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा

b. ब्रह्मचर्य प्रबंधन

ब्रह्मचर्य प्रबंधन, विचार thought , शब्द word, क्रिया act और यौन गतिविधियों का अनुशासन है।

पुस्तकें पढ़ें।
पुस्तकें , महान व्यक्तियों के अनुशासित जीवन जीने के तरीके को जानने का सबसे अच्छा तरीका है।
महान व्यक्तियों के व्याख्यान सुने।
अपनी मनोकामनाओं से संबंधित अच्छी पुस्तकें पढ़े और आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़े जैसे भगवत गीता

युवावस्था में शारीरिक व्यायाम करना बहुत महत्वपूर्ण है। खेलों में भाग ले।

ब्रह्मचर्य प्रबंधन में भोजन का बहुत महत्व है। मुख्य रुप से हमारा भोजन होना चाहिए-
फल , सब्जियां , millets + पौष्टिक भोजन खाएं।

अपने यौन गतिविधियों को अनुशासित करें।
अपनी यौन क्रिया को सप्ताह में एक बार से महीने में एक बार के बीच में अनुशासित करें।

प्रार्थना , आप को अनुशासित करने में मदद करेगी ।

c. कल्पना करना visualization

यह मन का एक अभ्यास है जो कल्पना का उपयोग करता है।
सप्ताहांत weekend पर, लेट जाओ और अपनी मनोकामनाओं की कल्पना करो।
visualization के दौरान, हम पहले से ही अपनी मनोकामनाओं पाने की कल्पना करते हैं।
visualization आपको ताजा कर देगा और आपको आपकी मनोकामनाओं के लिए कार्य act करने में प्रेरित करेगा।

d. समय प्रबंधन

समय प्रबंधन , अपनी दिनभर की गतिविधियों की एक टाइम टेबल बनाएं , जागने से लेकर रात में सोने तक और इसे लिख ले।

सुबह 5 बजे के आसपास उठने की कोशिश करें और रात को 09:30 बजे के आसपास सोने की कोशिश करें।

e. कर्म act

प्रार्थना के पालन से आपको पूरा दिन, आपकी मनोकामनाओं के लिए अच्छे विचार मिलेंगे , आपको इन विचारों पर act करना है।

सुबह 1 -2 घंटे का समय और शाम को 1 -2 घंटे का समय , अपनी मनोकामनाओं के लिए दे ।

प्रार्थना , ब्रह्मचर्य प्रबंधन ,कल्पना करना ,समय प्रबंधन = कर्म act

14- 50 वर्ष की आयु तक , 5 अभ्यास के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या मनोकामनाओं के समकक्ष या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा।

( 14 - 50 वर्ष की आयु के बीच में केवल 1 अभ्यास में परिवर्तन है। 30 वर्ष की आयु के आस-पास हम प्रार्थना के स्थान पर आभार व्यक्त करते हैं।
बाकी 4 अभ्यास , ब्रह्मचर्य प्रबंधन ,कल्पना करना ,समय प्रबंधन , कर्म act , वैसे ही रहेंगे।

आभार में , परमात्मा को धन्यवाद देते हैं, नमन प्रणाम करते है।

आभार अभ्यास -
प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर , आंखें बंद करके , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

*"परमात्मा , मैं आपको अपनी पिछली ( 30 वर्ष की आयु तक ) मनोकामनाओं को देने के लिए धन्यवाद देता हूं और अपनी अभी और भविष्य की मनोकामनाओं ,को देने के लिए advance में धन्यवाद देता हूं।
परमात्मा , मैं अपने आपको व अपनी मनोकामनाओं को आपको समर्पण करता हूं"

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़ कर झुककर नमन प्रणाम करना है और अपनी आंखें खोल लेना है

प्रार्थना से हम अपनी मनोकामनाओं में
और परमात्मा में अपने विश्वास को बढ़ाते हैं और
आभार अभ्यास , परमात्मा में और हमारी मनोकामनाओं में हमारे गहरे विश्वास को दर्शाता है।
30 वर्ष की आयु के आस-पास , अपना कुछ कार्य part time करें जिसमें आपकी रुचि हो और अपनी मनोकामनाओं की , 1 वर्ष , 5 वर्ष,10 वर्ष,20 वर्ष और जीवनभर के लिए योजना बनाएं )

इस प्रकार 14 - 50 वर्ष की आयु में ,
आप अपनी मनोकामनाओं के लिए इन 5 अभ्यास का पालन करें।
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पाठ 4. ज्ञान

युवा वायु से ही ज्ञान के इन विषयों को भी जाने -
a. चेतन मन
b. अवचेतन मन
c. आत्मा
d. 8 billions
e. परमात्मा
f. समर्पण अभ्यास

a. चेतन मन
चेतन मन , मन का विचारों वाला भाग है। इस भाग में विचार आते हैं।
युवा आयु में, चेतन मन बहुत सक्रिय होता है। हजारों विचार प्रतिदिन हमारे मन में आते हैं। उनमें से कुछ विचार हमारे लिए ठीक होते हैं और कुछ गैर जरूरी / नकारात्मक विचारों होते हैं।

प्रार्थना के पालन से आपको आपकी मनोकामनाओं से संबंधित और ज्ञान से संबंधित अच्छे विचार / सकारात्मक विचार प्राप्त होते हैं
और अच्छी पुस्तकों को पढ़ने से आपको अच्छे विचार / सकारात्मक विचार प्राप्त होंगे।
यह सभी अच्छे विचार आपको आपकी मनोकामनाओं को पाने के लिए प्रेरित करेंगे।

आप उन विचारों को मन में जप भी सकते हैं ।
उदाहरण के तौर पर भगवत गीता से एक परम विचार है कि कर्म करें , आप इसको जप सकते हैं।

- जप करके आप युवा आयु में, सचेत रूप से अपनी मनोकामनाओं के लिए अपने चेतन मन का पूरा उपयोग करते हैं।
-जप से हम केवल अच्छे विचारों को ही मन में रखते हैं। जप से हम गैर जरूरी / नकारात्मक विचारों को अपने मन में आने से रोकते हैं।
-जप से आप अपनी मनोकामनाओं में विश्वास बढ़ाते हैं। जप से आप अपनी मनोकामनाओं को अपने मन में hold रखते हैं।
-जप से परमात्मा में हमारा विश्वास बढ़ता जाता है।

b. अवचेतन मन-
चेतन मन , मन का विचारों वाला भाग है। इस भाग में विचार आते हैं।
अवचेतन मन , मन का निर्विचार वाला हिस्सा है।
अवचेतन मन, उन विचारों की भावनाओं को संग्रहीत करता है , जिन विचारों को हम follow करते हैं और जिनका हम जप करते हैं।

चेतन मन को साधने के लिए जप है।
अवचेतन मन को सामंजस्यपूर्ण बनाने के लिए प्राणायाम अभ्यास और ध्यान अभ्यास है।

युवा आयु में, चेतन मन बहुत सक्रिय होता है लेकिन 30-50 वर्ष की आयु में ,
अवचेतन मन सक्रिय हो जाता है।

चेतन मन के लिए हम अच्छे विचारों / मंत्रों का जप करते हैं
परंतु अब अवचेतन मन के लिए निर्विचार होना होता है।

हम अपने अवचेतन मन को चेतन मन की तरह उपयोग नहीं कर सकते।
अवचेतन मन को हम सामंजस्यपूर्ण बना सकते हैं। अवचेतन मन को सामंजस्यपूर्ण बनाने के लिए प्राणायाम अभ्यास और ध्यान अभ्यास है।

b. आत्मा

चेतन मन , विचार हैं
और अवचेतन मन , निर्विचार

आत्मा , विचार और निर्विचार से परे है।
अर्थात आत्मा मन नहीं है। आत्मा मन से परे है।

जिस प्रकार चेतन मन (विचार ) है और अवचेतन मन ( निर्विचार ) है उसी प्रकार आत्मा है।
और आत्मा , मुक्त अवस्था है।

चेतन मन - विचार
अवचेतन मन - निर्विचार
आत्मा - मुक्त अवस्था

विचार ( चेतन मन) और निर्विचार (अवचेतन मन) , मन से संबंधित है
लेकिन मुक्त अवस्था , मन से संबंधित नहीं है।
मुक्त अवस्था , आत्मा से , संबंधित है।

महान व्यक्तियों के व्याख्यानों से सुनकर और आध्यात्मिक पुस्तकों से पढ़कर , आत्मा ( मुक्त अवस्था ) को जानना
यह जानना , ज्ञान knowledge हैं।

यह ज्ञान दूसरों का होता है, दूसरों से प्राप्त होता है , दूसरों के द्वारा दिए गए विचारों से होता है।

आत्मा ( मुक्त अवस्था ) को , आप ध्यान अभ्यास से अनुभव करते हैं।
ध्यान अभ्यास से , दोनों आंखों के मध्य में ज्योति का प्रकट होना , आत्मा के दर्शन का प्रतीक होता है।

ध्यान से जो आप आत्मा का अनुभव करते हैं, यह आपका अपना अनुभव होता है।
यह आपका अपना अनुभव ही आत्मज्ञान कहलाता है।

ध्यान अभ्यास के दौरान मेरा अपना अनुभव भी है कि मुझे दोनों आंखों के मध्य में ज्योति के दर्शन हुए।

युवा आयु से लेकर 50 वर्ष की आयु तक जप करें और 50 वर्ष की आयु के आस-पास, ध्यान अभ्यास करें।

प्राणायाम और ध्यान की विधि आगे दी गई है।

c.हम 8 billions-

विश्व की जनसंख्या 8 billions है,
हम 8 billions है।
हम सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

हम सभी 8 billions की मनोकामनाएं हैं।
हम सब जुड़े हुए हैं, यही वजह है कि हम सभी 8 billions के बीच हमारी मनोकामनाएं पूरी हो रही है।
परमात्मा हमारी मनोकामनाएं को हम 8 billions के बीच व्यवस्थित arrange करते हैं।

आत्मा को जानकर , हम सभी 8 billions में , उसी आत्मा को देखते हैं और हम सभी 8 billions से जुड़ जाते हैं और हम आगे परमात्मा की ओर बढ़ते हैं।..................................................

पाठ 5. परम ज्ञान

a. परमात्मा -
परमात्मा , हम सभी 8 billions के भीतर है।

जिस प्रकार मन है , चेतन मन , अवचेतन मन , आत्मा है , उसी प्रकार परमात्मा है।

केवल परमात्मा हमें हमारी मनोकामनाएं देते हैं।
परमात्मा , हम सभी 8 billions लोगों के भीतर सामंजस्यपूर्ण ढंग से काम कर रहे हैं।
परमात्मा हमारी मनोकामनाएं को ,हम 8 billions के बीच व्यवस्थित arrange करते हैं।

परमात्मा सिर्फ हमारा समर्पण चाहते हैं।

अध्यात्म में अब तक हमने जो कुछ पढ़ा, सुना उसके अनुसार -
परमात्मा निर्गुण , निराकार है।
परमात्मा हर जगह है, कण-कण में है, हर चीज में है।

आज मैं आपके साथ परमात्मा के बारे में , नवीनतम व्याख्या साझा कर रहा हूं।

परमात्मा निर्कुछ है।
निर्कुछ = कुछ भी नहीं

विज्ञान में जो कुछ है वह तो पदार्थ है।

परमात्मा , कुछ भी नहीं है
कुछ भी नहीं होकर भी जो सब कुछ हो ,
वह परमात्मा है।

कुछ भी नहीं से ही सब कुछ बनता है।

विज्ञान में जहां तक हम जानते हैं कि सबसे छोटा कण है अणु atom

पहले कहा जाता था कि अणु atom सबसे छोटा है परंतु अब अणु atom को भी वैज्ञानिकों ने और आगे तोड़ / विभाजित कर लिया है और अब string पर पहुंचे हैं जो की अणु से भी बहुत सूक्ष्म है।

और फिर string के बाद , इसी प्रकार आगे विभाजित करते जाए तो बाकी क्या बचेगा - कुछ भी नहीं

अभी साइंस को इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 10 , 20 या 50 साल लग सकते हैं।

अब , कुछ भी नहीं को हम समर्पण के परिपेक्ष context में समझते हैं-

समर्पण अभ्यास -
समर्पण अभ्यास में , हम अपने आपको , अपने ज्ञान को, अपने अहं को , अपने सभी अभ्यास /प्रयासों को ,अपनी मनोकामनाओं को , अपने परिणाम , परमात्मा को समर्पित कर देते हैं ,
तो हम भी ,कुछ भी नहीं हो जाते हैं

परमात्मा हमारे समर्पण का आतुरता से इंतजार कर रहे हैं।
समर्पण अभ्यास के पालन से , परमात्मा हमारे साथ एक हो जाते हैं ,
आप परमात्मा हो जाते हैं।

परमात्मा का मेरा अनुभव , जो मैंने ध्यान के दौरान अनुभव किया -

मैंने ध्यान के दौरान , कुछ भी नहीं को अनुभव किया ।
मेरे ध्यान के दौरान ,चेतना , शीर्ष चक्र से निकलकर , ऊपर की ओर , बहुत दूर , ब्रह्मांड में , कोशिका के समान एक आकार के पास पहुंचती है। उस आकार के अंदर , कुछ भी नहीं है।
यह , कुछ भी नहीं , परमात्मा हैं।

चेतना , उस आकार के अंदर के , कुछ भी नहीं को छूकर फिर से वापस आती है और शीर्ष चक्र से होते हुए , हृदय चक्र में प्रवेश कर जाती है।

यह मेरा अनुभव है , जो मैंने ध्यान के दौरान अनुभव किया।

b. समर्पण अभ्यास -

युवा आयु से लेकर 50 वर्ष की आयु तक , प्रार्थना / आभार + 4 अभ्यास , ब्रह्मचर्य प्रबंधन ,कल्पना करना ,समय प्रबंधन , कर्म act का पालन है।

50 वर्ष की आयु के बाद अब केवल 1 अभ्यास है - समर्पण अभ्यास

50 वर्ष की आयु के बाद आपको केवल समर्पण अभ्यास का पालन करना है।
बाकी के 4 अभ्यास आप स्वयं आपके पास आएंगे।

समर्पण अभ्यास आखिरी है
और समर्पण अभ्यास 50 वर्ष की आयु से लेकर जीवन के आखिर तक है।
समर्पण अभ्यास के बाद और कोई अभ्यास नहीं है।

अध्यात्म में समर्पण अभ्यास , परमात्मा से भी ऊपर है।
क्योंकि समर्पण अभ्यास से परमात्मा आपके लिए सामंजस्यपूर्ण हो जाते हैं
और
फिर परमात्मा आपको समृद्ध बना देते हैं,
साथ ही परमात्मा आप के साथ एक हो जाते हैं और आप परमात्मा हो जाते हैं।

चीजों को छोड़ने और समर्पण करने में अंतर है।
आपको कुछ भी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है । आपको सांसारिक जीवन छोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
समर्पण से आप सांसारिक जीवन में रहते हुए भी मनोकामनाएं भी पाएंगे और मोक्ष भी पाएंगे।

प्रार्थना -विश्वास
आभार - गहरा विश्वास
समर्पण - सबसे गहरा विश्वास

समर्पण , हमारा परमात्मा में और हमारी मनोकामनाओं में , हमारे सबसे गहरा विश्वास को दर्शाता है।

मनोकामनाओं के लिए अनावश्यक चिंता, संदेह, भय, प्रश्न - मन का बंधन है
जिस प्रकार मन का बंधन है ,
उसी तरह मन में , गैर-समर्पण होता है।

समर्पण का मतलब कुछ छोड़ना नहीं है।समर्पण का अर्थ है पदानुक्रम में ऊपर जाना।
हम समर्पण करके ही पदानुक्रम में ऊपर जा सकते हैं।

पदानुक्रम-
-विचार से निर्विचार
अर्थात मन से आत्मा
-आत्मा से परमात्मा

समर्पण , योग की सर्वोच्च अवस्था है।
समर्पण , सबसे गहरा विश्वास है।
समर्पण , प्रेम का सर्वोच्च रूप है।

विश्वास और आभार का जन्म समर्पण से हुआ है।

आत्मा, परमात्मा के साथ एक होना चाहती है। आत्मा , परमात्मा होना चाहती हैं।
प्रेम अपने उच्चतम रूप तक पहुँचना चाहता है
(परमात्मा और समर्पण अभ्यास के लिए प्रेम , प्रेम का उच्चतम रूप है)

समर्पण।

गैर-समर्पण , हमें समृद्ध होने के लिए बाधा है। गैर-समर्पण ,हमें परमात्मा के साथ एक होने के लिए बाधा है।

आपने 50 की उम्र तक ,
अपनी मनोकामना के लिए, सब प्रयास और अभ्यास कर लिया है और बहुत अच्छा किया है।
अब आप का हिस्सा हो गया है अब
परमात्मा आपके लिए काम करना चाहते हैं।
अब समर्पण करो।

रूपांतरण, चमत्कार होने दो।
आत्मज्ञान, मोक्ष में , गैर-समर्पण आखिरी बाधा है।
समर्पण ही एकमात्र शरण है।
समर्पण के बाद किसी और अभ्यास का पालन नहीं है।समर्पण अंतिम अभ्यास है।
अब समर्पण करें।

पुस्तकों से / महान व्यक्तियों के व्याख्यान से हम विचारों से , अपनी मनोकामनाओं के बारे में और अध्यात्म से जुड़े ज्ञान के बारे में जानते है।
यह जानकारी / ज्ञान , दूसरों के विचारों से प्राप्त होती है और बाह्य से from outside प्राप्त होता है ।

ध्यान से , ज्ञान भीतर from inside से होता है । ध्यान से आपको आत्मा , परमात्मा का अनुभव होता है।
यह अनुभव आपका अपना होता है।

परंतु यह केवल अनुभव होता है, परमात्मा से एक होने के लिए , केवल समर्पण अभ्यास ही है।
*समर्पण अभ्यास से आप परमात्मा से एक हो जाएंगे*।
यह ध्यान और समर्पण अभ्यास में अंतर है।

आपके मन की अंतहीन जिज्ञासा ,आपके मन की अंतहीन खोज ,आपकी शाश्वत खोज , आपका अधूरापन , इन सब का 1 समाधान और उत्तर है - समर्पण अभ्यास
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पाठ 6-
50 वर्ष की आयु से लेकर जीवन के आखिर तक

50 वर्ष की आयु के बाद अब केवल 1 अभ्यास है - समर्पण अभ्यास

50 वर्ष की आयु के बाद आपको केवल समर्पण अभ्यास का पालन करना है।

बाकी के 4 अभ्यास - ब्रह्मचर्य प्रबंधन , कल्पना करना ,समय प्रबंधन , कर्म act ,स्वयं आपके पास आएंगे।

समर्पण अभ्यास के 4 चरण है।
समर्पण अभ्यास चरण 1 से शुरू करें और आप धीरे-धीरे , कुछ ही वर्षों में , समर्पण अभ्यास चरण 4 में पहुंच जाएंगे।

*समर्पण अभ्यास चरण 1 की विधि* -

अपनी मनोकामनाएं लिख लें और सुबह जल्दी उठकर , एकांत में और शांत कमरे में ( सर्वोत्तम समय 3:40 सुबह ) ,
आरामदायक सुखासन में बैठ जाना है।
अपनी आंखें बंद कर लेना है। दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" मेरे 8 billions ( विश्व की जनसंख्या 8 billions है ) , परमात्मा , समर्पण अभ्यास , मैं अपने आपको , अपने अहं को , अपने ज्ञान को ,अपने अभ्यासओं को , अपने प्रयासों को , अपनी मनोकामनाओं को , अपने परिणामों को , आपको समर्पण करता हूं "

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़कर झुककर नमन प्रणाम करना है। उसके बाद अपनी आंखों को धीरे-धीरे खोल लेना है

शुरुआत में कुछ महीनो तक , इसी अभ्यास को करना है, परंतु कुछ महीनो के बाद इस में ध्यान अभ्यास को भी जोड़ देना है।

ध्यान अभ्यास -10 - 20 मिनट

सुबह जल्दी उठकर , एकांत में और शांत कमरे में ( सर्वोत्तम समय 3:40 सुबह ) ,
आरामदायक सुखासन में , बैठ जाना है।
अपनी आंखें बंद कर लेना है। दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" मेरे 8 billions ,परमात्मा ,समर्पण अभ्यास , मैं अपने आपको , अपने अहं को ,अपने ज्ञान को ,अपने अभ्यासओं को , अपने प्रयासों को ,अपनी मनोकामनाओं को , अपने परिणामों को , आपको समर्पण करता हूं "

यह कहने के बाद , आंखें बंद रखते हुए , कमर सीधी रखकर , सुखासन में , और दोनों हाथों को घुटनों के ऊपर रखकर , ध्यान को दोनों आंखों के बीच में लगाए

-अब आप को जप करना है
जप में आप मंत्र जप / अपनी इच्छाओं को , धार्मिक ग्रंथों के श्लोक या फिर जिन में आपकी आस्था विश्वास है , उनका नाम जप सकते हैं। 2-4 मिनट

-जपने के बाद , अब आप पूरी तरह गहरी सांस अंदर ले और बाहर छोड़ें। ऐसा 4 -5 बार करें ।
फिर गहरी अंदर लेकर , अपनी सांस को 10 - 18 सेकंड के लिए रोकते हैं।
फिर 10 - 18 सेकंड सांस को रोकने के बाद , अपनी सांसों को बाहर पूरा बाहर छोड़ दें ।
इस 10 - 18 सेकंड में , सांसों को रोकने के दौरान , आप निर्विचार अवस्था को जानते हैं।

-सांसों को बाहर पूरा बाहर छोड़ने के बाद , धीरे-धीरे सांस सामान्य हो जाएगी उसके बाद , मुंह से कुछ नहीं बोलना है , मन में कुछ नहीं बोलना है।
दोनों आंखों के बीच में ध्यान को लगाएं , इस अवस्था में बैठे रहे। लगभग 10 मिनट

लगभग 10 मिनट के बाद ,
दोनों हाथों को जोड़कर नमन प्रणाम करना है। उसके बाद अपनी आंखों को धीरे-धीरे खोल लेना है

ध्यान अपने आप ही सधता है।
कुछ जोर आजमाइश करने की जरूरत नहीं है। धीरे-धीरे , कुछ ही वर्षों में , ध्यान साधना शुरू हो जाएगा तो आपको दोनों आंखों के मध्य में ज्योति के दर्शन होंगे।
दोनों आंखों के मध्य में ज्योति के दर्शन ,
6 चक्र है ,आत्मा का अनुभव है , आत्मा के दर्शन है
और 7 चक्र में , आपको परमात्मा का अनुभव होगा।

समर्पण अभ्यास चरण 1 पालन करने के बाद ,परमात्मा सामंजस्यपूर्ण रूप से आपकी मनोकामनाओं के लिए काम कर रहे हैं। आपको आपकी मनोकामनाएं या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा + स्वास्थ्य , समृद्धता

समर्पण अभ्यास चरण 1 के पालन से ,आपको आत्मा और परमात्मा का अनुभव होगा ।
समर्पण अभ्यास चरण 1 पालन करने के बाद , *परमात्मा आप से एक हो जाते हैं*
और फिर आप समर्पण अभ्यास चरण 2 में प्रवेश कर जाएंगे।

*समर्पण अभ्यास चरण 2*

*समर्पण अभ्यास चरण 2* में , आपको समर्पण अभ्यास से प्यार हो जाता है।

*समर्पण अभ्यास चरण 2 की विधि* -

सुबह जल्दी उठकर सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" *मेरे 8 billions , परमात्मा , समर्पण अभ्यास , मैं आपसे प्यार करता हूं* "

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।

समर्पण अभ्यास चरण 2 के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा + स्वास्थ्य , समृद्धता
+ *आप प्रेम का सर्वोच्च रूप पाते हैं ( समर्पण भाव )*
8 billions , परमात्मा और समर्पण अभ्यास के लिए प्रेम , मुख्यतः समर्पण अभ्यास के लिए प्रेम , समर्पण भाव है।

समर्पण अभ्यास चरण 2 के पालन से आपका हृदय में , 8 billions , परमात्मा और समर्पण अभ्यास के लिए प्यार जागृत होता है और फिर आप समर्पण अभ्यास चरण 3 में प्रवेश कर जाएंगे।

*समर्पण अभ्यास चरण 3*

*समर्पण अभ्यास चरण 3* में ,
केवल नमन प्रणाम 🙏 है

नमन प्रणाम -
-हमारे अवतारो, ऋषि मुनियों, गुरुओं, देशभक्तों, भारतीयों को नमन प्रणाम 🙏
-सभी 8 billions ( विश्व की जनसंख्या ) को नमन प्रणाम 🙏
-परमात्मा को नमन प्रणाम 🙏
-मुख्यत: समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏

समर्पण अभ्यास चरण 3 में ,
प्रार्थना नहीं, आभार नहीं , कुछ मांगना नहीं है, ना ही कुछ बोलना है

*समर्पण अभ्यास चरण 3 की विधि* -

प्रतिदिन सुबह 0340 - 4 बजे के बीच में उठकर , सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है

उसके बाद कमर को थोड़ा सीधा रखते हुए 20 मिनट , आंखें बंद करके , हाथों को जोड़कर🙏 नमन प्रणाम की मुद्रा में बैठे

लगभग 20 मिनट बाद , झुककर नमन प्रणाम करना है और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।

समर्पण अभ्यास चरण 3 में
8 billions , परमात्मा और समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम मुख्यतः समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम 🙏 करने से ,

आप समर्पण अभ्यास को जान जाते हैं
कि समर्पण अभ्यास सबसे ऊपर है
और फिर आप समर्पण अभ्यास चरण 4 में प्रवेश करते हैं।

समर्पण अभ्यास चरण 3 , पालन करने के बाद , *आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आएगी , जीवन के आखिर तक *
+
आप समृद्धता को पाते हैं
*समृद्धता = सब जान लिया ,पा लिया ,कर लिया*
+
आपका कर्म न्यूनतम होगा
+
*समर्पण भाव*

*समर्पण अभ्यास चरण 4*

समर्पण अभ्यास चरण 3 में केवल नमन प्रणाम🙏 है और
*समर्पण अभ्यास चरण 4 में , नमन प्रणाम🙏 को भी समर्पण कर देना है*

इस प्रकार समर्पण अभ्यास चरण 4 में कोई भी अभ्यास नहीं बचता है ,
कुछ भी नहीं बचता है
अर्थात आप कुछ भी नहीं हो जाते हो
अर्थात
*आप परमात्मा हो जाते हो*
+
आप न केवल फल अर्थात परिणाम की आसक्ति से मुक्त हो जाते हैं , साथ ही साथ आप कर्म से भी मुक्त हो जाते हैं।
आप सभी से मुक्त free from all हो जाते हैं
अर्थात आप सभी प्रकार ( अभ्यासओं , प्रयासों ) की आसक्ति से मुक्त हो जाते हैं
और timelessness को भी पाते हैं
+
*सब कुछ स्वयं होगा*
+
*मोक्ष = कुछ जानना ,पाना ,करना बाकी नहीं रह जाता है*
*आप मोक्ष की परम अवस्था में रहते हैं*
+
मोक्ष की परम अवस्था में , आप हर समय परमात्मा के किसी प्रतीक के साथ होंगे
+
*समर्पण भाव*
+
*आप समर्पण अभ्यास के प्रतीक बन जाते हो*

समर्पण अभ्यास चरण 4 में , कोई मनोकामना नहीं है।
मनोकामनाएं केवल समर्पण अभ्यास चरण 3 तक है। आप अपनी इच्छा अनुसार ,
प्रतिदिन सुबह 3:40 पर समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम 🙏 करने , समर्पण अभ्यास चरण 3 में जाते हो

समर्पण अभ्यास चरण 3 में केवल नमन प्रणाम🙏 है
और आपकी मनोकामनाओं को स्पष्ट करके लिख लेना है

समर्पण अभ्यास चरण 3 में मुख्यतः समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏 करने जाना है , सुबह 3:40

समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏 करने से आपकी और सभी की मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आएंगी

मनोकामनाएं तो आपकी समर्पण अभ्यास चरण 3 में समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏 करने से सुबह 3:40 , स्वयं आएगी , समर्पण अभ्यास चरण 4 में आप मोक्ष में , मनोकामनाओं से परे चले जाएंगे।

समर्पण में चरण 4 में ,
आप मोक्ष को प्राप्त करेंगे और समर्पण अभ्यास चरण 3 में आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आती जाएगी।

समर्पण अभ्यास चरण 4 में आप कहते हो -
*मैं परमात्मा हूं*
*मैं समर्पण अभ्यास का प्रतीक हूं*
*मैं समर्पण अभ्यास का संदेश देने आया हूं* समर्पण अभ्यास करें
और समर्पण अभ्यास का संदेश अपने प्रियजनों को दें

समर्पण अभ्यास चरण 4 मोक्ष है।
समर्पण अभ्यास चरण 4 का प्रतीक है -
*आप खाली बैठेंगे* , जीवन के आखिर तक

*मैं समर्पण अभ्यास चरण 4 में रहता हूं* ..................................................

पाठ 7. परमात्मा हो जाना

आप सोचते हैं यदि आप कुछ भी नहीं हो जाओगे तो फिर जीवन कैसे चलेगा / आपका अस्तित्व मिट जाएगा / आप सक्रिय नहीं होंगे , मेरी मनोकामनाओं का क्या होगा?

कुछ भी नहीं हो कर भी सब कुछ हो सकता है। परमात्मा के कार्य करने का तरीका भी यही है।
कुछ नहीं होकर भी , परमात्मा हर समय सक्रिय है / परमात्मा का अस्तित्व है और परमात्मा हर समय काम कर रहा है।

क्योंकि आप मुख्यतः 50 वर्ष की आयु तक विचारों के साथ रहे हैं इसलिए अपने अपने आप को मन ही मान लिया है जबकि आपका असली स्वरूप परमात्मा है।

और परमात्मा होना बहुत सरल है क्योंकि जिस अभ्यास से आप परमात्मा हो जाते हैं, वह अभ्यास बहुत सरल है और वह अभ्यास है समर्पण अभ्यास

50 वर्ष की आयु से पहले आप अपनी मनोकामनाओं के लिए और अध्यात्म के लिए , जितना मन का उपयोग कर सकते हैं, वह कर लिया। आपने अपने स्तर पर जो प्रयास करना तो वह कर लिया।

आज औसत आयु 70-75 वर्ष है।
तो 50 वर्ष की आयु के बाद केवल 20 - 25 वर्ष है।

50 वर्ष की आयु के बाद अब आप कुछ भी नहीं हो जाओ और परमात्मा हो जाओ और देखो परमात्मा किस प्रकार काम करता है।

परमात्मा होने के बाद ,
कुछ जानना , पाना और करना बाकी नहीं रह जाता है।

समर्पण अभ्यास चरण 4 में ,
आप परमात्मा हो जाते हो।
आपको स्पष्ट रूप से पता होता है आप समर्पण अभ्यास से परमात्मा हुए हैं
और आप समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏 करते हैं ।

समर्पण अभ्यास चरण 4 में ,
आप परमात्मा हो जाते हो
आप हर समय परमात्मा के किसी प्रतीक के साथ होते हो
मेरे संदर्भ में , परमात्मा की ध्वनि मेरे भीतर हर समय रहती है।

परमात्मा होना अर्थात कुछ भी नहीं होना
*परमात्मा होना अर्थात स्वस्थ समृद्ध हो जाना अपनी मनोकामनाएं पाना

परमात्मा हो जाने के बाद ही ,
आप मोक्ष प्राप्त करते हैं।..................................................
पाठ 8. मोक्ष प्राप्त करना

समर्पण अभ्यास चरण 4 में ,
आप मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
मोक्ष , जीवन का परम उद्देश्य है।
मोक्ष में आप मनोकामनाओं से परे चले जाते हैं ।
परमात्मा होने के बाद ,
कुछ जानना , पाना और करना बाकी नहीं रह जाता है।

आपको स्पष्ट रूप से पता होता है आप समर्पण अभ्यास से परमात्मा हुए हैं
और आप समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏 करते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।

वही परम अवस्था , जो आप बाल आयु के समय , आप में थी , उस परम अवस्था को आप आप पुनः प्राप्त कर लेते है।

बाल आयु में तो आपको उस परम अवस्था का पता नहीं होता परंतु अब आपको उसका पता भी होता है कि आप परम अवस्था में हैं साथ ही साथ आप मनोकामनाएं भी प्राप्त करते हैं।

समर्पण अभ्यास चरण 4 मोक्ष है।
समर्पण अभ्यास चरण 4 का प्रतीक है -
*आप खाली बैठेंगे* , जीवन के आखिर तक ,
आप हर समय परमात्मा के किसी प्रतीक के साथ
*आप समर्पण अभ्यास के प्रतीक बन जाते हो*

समर्पण अभ्यास चरण 4 में आप कहते हो -
*मैं परमात्मा हूं*
*मैं समर्पण अभ्यास का प्रतीक हूं*
*मैं समर्पण अभ्यास का संदेश देने आया हूं*

कृपया "अमर गीता" सार को पढ़े और अपने प्रियजनो और अपने ग्रुप में अवश्य साझा share करें

अपनी मनोकामनाएं और मोक्ष पाए और स्वस्थ समृद्ध हो जाए , 80+ तक💐
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मेरा परिचय -
श्री अमर , आयु 55 ( 2025 में )
जन्म तिथि - 30 जनवरी 1971
अर्थशास्त्र में परास्नातक 1995
हॉकी का राष्ट्रीय स्तरीय खिलाड़ी

- 1988 - 2018 -
1988 से, 18 साल की उम्र में,
मैंने 30 साल "भगवद गीता" का अध्ययन और शोध किया और ब्रह्मचर्य प्रबंधन का पालन किया।
+ मंत्रों का जप

- 2017 - सन्यास
- 2017 - 2021 - ध्यान
2018 , *ध्यान* में , कुंडलिनी जागरण ( 6 चक्र , दोनों आंखों के मध्य में ज्योति के रूप में आत्मा का दर्शन )
और 2021 - परमात्मा का अनुभव और ज्ञान ( 7 चक्र)

2021 - 6 महीने फलाहार का पालन

- 2021- *समर्पण अभ्यास शुरू किया*

समर्पण अभ्यास से , मैं परमात्मा के साथ एक हो गया
परमात्मा हो गया
और मोक्ष प्राप्त किया ..................................................
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अमर आश्रम
अपनी श्रद्धा अनुसार दान करें

9548382524@ybl
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Amardeep Singh Negi savings a/c no . -
50100451704089
IFSC - HDFC0000808..................................................

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20/04/2025

मेरा परिचय -
अमर, उम्र - 54
जन्म तिथि - 30 जनवरी 1971
अर्थशास्त्र में परास्नातक 1995
हॉकी का राष्ट्रीय स्तरीय खिलाड़ी

- 1988 - 2018 -
1988 से, 18 साल की उम्र में,
मैंने 30 साल "भगवद गीता" का अध्ययन और शोध किया और ब्रह्मचर्य प्रबंधन का पालन किया।
+ मंत्रों का जप

- 2017 - सन्यास
- 2017 - 2021 - ध्यान
2018 , *ध्यान* में , कुंडलिनी जागरण ( 6 चक्र , दोनों आंखों के मध्य में ज्योति के रूप में आत्मा का दर्शन )
और 2021 - परमात्मा का अनुभव और ज्ञान ( 7 चक्र)

- 2021- *समर्पण अभ्यास शुरू किया*

समर्पण अभ्यास से , मैं परमात्मा के साथ एक हो गया
और
2024/2025 से पूर्ण ब्रह्मचर्य
और
अंत में , समर्पण अभ्यास से , मोक्ष प्राप्त किया
( मोक्ष , समर्पण अभ्यास चरण 4 है )

मोक्ष = कुछ नहीं जानना , कुछ नहीं पाना , कुछ नहीं करना

अमर आश्रम , उत्तराखंड
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20/04/2025

💐

*मनोकामनाओं को प्राप्त करने के लिए समर्पण अभ्यास ( सांसारिक ) ही काफी है*

यदि आप चाहते हैं कि आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आए + मोक्ष ,
*तो आपको समर्पण अभ्यास के चरण 4 ( आध्यात्मिक ) तक अवश्य जाना चाहिए

*समर्पण अभ्यास ( आध्यात्मिक ) के चरण 4 चरण है*

समर्पण अभ्यास के चरण 4 में मोक्ष
मोक्ष = कुछ जानना ,कुछ पाना ,कुछ करना बाकी नहीं रह जाता है
..................................................

*समर्पण अभ्यास ( सांसारिक )*

*समर्पण अभ्यास ( सांसारिक ) की विधि*

अपनी मनोकामनाएं लिख लें और प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" परमात्मा , मैं अपने आपको व अपनी मनोकामनाओं को आपको समर्पण करता हूं "

उसके बाद झुककर नमन प्रणाम करना है और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।
..................................................
समर्पण अभ्यास ( सांसारिक ) के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या आपकी मनोकामनाओं के समकक्ष या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा
..................................................

*यदि आप चाहते हैं कि आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आए तो आपको समर्पण अभ्यास ( आध्यात्मिक ) के चरण 4 तक अवश्य जाना चाहिए*

इसके लिए आपको समर्पण अभ्यास ( आध्यात्मिक ) के चरण 1 से शुरू करना है

*समर्पण अभ्यास ( आध्यात्मिक ) के चरण 4 चरण है*..................................................

*समर्पण अभ्यास चरण 1 ( आध्यात्मिक ) की विधि* -

अपनी मनोकामनाएं लिख लें और सुबह जल्दी उठकर सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" मेरे 8 billions ( विश्व की जनसंख्या 8 billions है ) , परमात्मा , समर्पण अभ्यास ,
मैं अपने आपको , अपने अहं को , अपनी आत्मा को , अपने ज्ञान को , अपने अभ्यासओं को , अपने प्रयासों को , अपने परिणामों को व अपनी मनोकामनाओं को , आपको समर्पण करता हूं "

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।

समर्पण अभ्यास चरण 1 ( आध्यात्मिक ) पालन करने के बाद ,परमात्मा आप से एक हो जाते हैं
+
समर्पण अभ्यास चरण 1 के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या आपकी मनोकामनाओं के समकक्ष या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा+ स्वास्थ्य , समृद्धता , समर्पण भाव ..................................................

*समर्पण अभ्यास चरण 2* ( आध्यात्मिक )

*समर्पण अभ्यास चरण 2* में , आपको समर्पण अभ्यास से प्यार हो जाता है।

*समर्पण अभ्यास चरण 2 ( आध्यात्मिक ) की विधि* -

सुबह जल्दी उठकर सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और फिर उसके बाद आपको इस प्रकार कहना है -

" मेरे 8 billions , परमात्मा , समर्पण अभ्यास , मैं आपसे प्यार करता हूं "

यह कहने के बाद , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।

समर्पण अभ्यास चरण 2 ( आध्यात्मिक ) के पालन से , आपको आपकी मनोकामनाएं या आपकी मनोकामनाओं के समकक्ष या आपकी मनोकामनाओं से ज्यादा अवश्य मिलेगा + स्वास्थ्य , समृद्धता , समर्पण भाव
+ आप प्रेम का सर्वोच्च रूप पाते हैं
..................................................

*समर्पण अभ्यास चरण 3* ( आध्यात्मिक )

*समर्पण अभ्यास चरण 3* ( आध्यात्मिक ) में ,
केवल नमन प्रणाम 🙏 है

नमन प्रणाम -
-हमारे अवतारो, ऋषि मुनियों, गुरुओं, देशभक्तों, भारतीयों को नमन प्रणाम 🙏
-सभी 8 billions ( विश्व की जनसंख्या। ) को नमन प्रणाम 🙏
-परमात्मा को नमन प्रणाम 🙏
-मुख्यत: समर्पण अभ्यास को नमन प्रणाम🙏

समर्पण अभ्यास चरण 3 ( आध्यात्मिक ) में ,
प्रार्थना नहीं, आभार नहीं , कुछ मांगना नहीं है, ना ही कुछ बोलना है

*समर्पण अभ्यास चरण 3 ( आध्यात्मिक ) की विधि* -

प्रतिदिन सुबह 0340 - 4 बजे के बीच में उठकर , सुखआसन में बैठ जाना है। अपनी आंखें बंद कर लेना है।
दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है

उसके बाद कमर को थोड़ा सीधा रखते हुए 20 मिनट , आंखें बंद करके , हाथों को जोड़कर🙏 नमन प्रणाम की मुद्रा में बैठे

लगभग 20 मिनट बाद , दोनों हाथों को जोड़कर🙏 , झुककर नमन प्रणाम करना है
और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल लेना है।

समर्पण अभ्यास चरण 3 ( आध्यात्मिक ) , पालन करने के बाद , आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आएगी , जीवन के आखिर तक
+
आप समृद्धता को पाते हैं
समृद्धता = सब जान लिया ,पा लिया ,कर लिया
+
आप न केवल फल अर्थात परिणाम की आसक्ति से मुक्त हो जाते हैं , साथ ही साथ आप कर्म से भी मुक्त हो जाते हैं।
आप सभी से मुक्त free from all हो जाते हैं
अर्थात आप सभी प्रकार ( अभ्यासओं , प्रयासों ) की आसक्ति से मुक्त हो जाते हैं
और timelessness को भी पाते हैं।

आपका कर्म न्यूनतम कर्म होगा
..................................................

*समर्पण अभ्यास चरण 4* ( आध्यात्मिक )

*समर्पण अभ्यास चरण 3* ( आध्यात्मिक ) में , केवल नमन प्रणाम 🙏 है

*समर्पण अभ्यास चरण 4 ( आध्यात्मिक ) में* ,नमन प्रणाम🙏 *को भी समर्पण कर देना है*

इससे आप समर्पण अभ्यास चरण 4 में है और आप समर्पण अभ्यास चरण 3 का पालन भी कर सकते हैं।

*समर्पण अभ्यास चरण 4* ( आध्यात्मिक ) पालन करने के बाद ,
आपकी मनोकामनाएं स्वयं आपके पास आएगी , जीवन के आखिर तक
+
आप मोक्ष की परम अवस्था को प्राप्त करते हैं

मोक्ष = कुछ नहीं जानना , कुछ नहीं पाना , कुछ नहीं करना
..................................................

*समर्पण अभ्यास करें💐*

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