Tantra Sadhna Shivir
teaching ta**ra
22/08/2026
मित्रों ! कामाख्या की कथा से ज्ञात होता है ! यह एक अति पोराणिक कथा है ! मैं कथा पर नहीं जाऊँगा , क्योंकि ऐसा कोनसा साधक है जो इस कथा को और इसके महत्त्व को नहीं जानता ? मेरे ह्रदय में अति उत्साह है कि मैं एक बार फिर माँ कामाख्या के दर्शन , तंत्रोक्त हवन हेतु जा रहा हूँ ! उसपर आपका सहारा है , फिर क्या कमी है ? तंत्रगुरु द्वारा प्रदत्त ज्ञान और आप सबका परिश्रम , विश्वास और निष्ठा अवश्य रंग लाएगी ! माँ कामाख्या के वैदिक , शाबर और प्रादेशिक मन्त्र मिलते हैं ! उल्लेखनीय बात यह है माँ कामाख्या को जिसने भी जिस रूप और कार्य के लिए पुकारा है ! माँ ने उसका वह कार्य निश्चय ही संवारा है ! मेरे एक सखा , मित्र हैं ! सिद्धि के लोभ में वह भी गोहाटी , मायिओंग आदि सब जगह गए ! उनके साथ साधक/शिष्यों की एक लम्बी फ़ौज थी ! क्यों ना हो ? वह केवल तंत्रगुरु , तंत्रमहागुरु और ना जाने क्या क्या थे ! मन्त्रों के नाम पर केवल शाबर मन्त्र में ही सिद्धहस्त थे ! वह और उनके शिष्य/साधक जहाँ भी गए ? उनका साक्षात्कार अनेक सिद्धि और चमत्कारों से हुआ ! मुझे तो वास्तव में ऐसा अनुभव हुआ जैसे सिद्धि उनकी चेरी और चमत्कार उनके घर में पानी भरते हैं ! उनकी प्रशंसा और ख्याति सुनकर हम भी मायिओंग गए , हम उत्साह से गए और मुंह लटका कर वापिस आये ! हमें वहां कुछ नहीं मिला मुंह लटकाकर वापिस आ गए , संभव है किसी समय में वहां कुछ हो लेकिन अब तो वहां ठेंगा है ! जैसाकि मैंने पहले भी लिखा था – मन्त्र में कम और भाव में शक्ति अधिक होती है ! शाबर मन्त्र साधना अन्य मन्त्र साधना की तुलना में सरल होती है किन्तु इसका अभिप्राय यह बिलकुल नहीं कि शाबर मन्त्रों से जुड़े नियमो को ध्यान में ना रखते हुए साधना में सफल होने के प्रयास किये जाएँ ! किसी भी साधना में सफलता साधक के हाथ में होती है ! अगर साधक शाबर मन्त्र साधना से सम्बंधित नियमो का पालन करते हुए साधना करता है तो निश्चय ही सफलता प्राप्त होती है ! अगर आपने भी शाबर मन्त्र साधना में सफलता प्राप्त करने का मन बना लिया है तो साधना शुरू करने से पहले कम से कम एक बार मन्त्र साधना से जुड़े नियमो को अच्छी प्रकार से समझ लें ! इसके बाद साधना आरम्भ करें ! हालांकि परिधान और साधना का कोई विशेष मतलब नहीं है , लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि आप कमीज , पेंट और बेल्ट लगाकर साधना करें ? स्कूल में बच्चों की , पुलिस में उनके कर्मचारियों की , फ़ौज में एक फौजी की ड्रेस होती है उसी प्रकार साधक की भी ड्रेस होती है ! कामाख्या मंदिर के प्रांगण में भाई कमल नारायण शर्मा को लुंगी बांधे , बनियान पहिने , कंधे पर तोलिया डाले घूमते देखा जा सकता है ! डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक को ढीला ढाला पायजामा , सिर पर गमछा , कंधे पर तोलिया डाले आप देख सकते हैं ! मेरा क्या ? मैं तो बीता समय हूँ , जो किसी भी मूल्य पर वापिस नहीं आ सकता है ! किसी भी साधना को शुरू करने से पहले अपने मन में यह निश्चय किया जाना चाहिए कि मेरे द्वारा की गयी साधना में मुझे सफलता अवश्य प्राप्त होगी ! यहाँ मुझे एक बात याद आ रही है ! एक बार हम सब कामाख्या गोहाटी में साधना हेतु गए ! भीषण गर्मी का मोसम था ! मैंने साधकों को समझाया आप सब छत पर चले जाएँ और मंदिर की ओर मुख करके जप करें ! अखिल कुमार तेवतिया , पं. राम प्रकाश शर्मा , तांत्रिक सूरज , डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक को मैंने साधना करते देखा , अब परिणाम वह स्वयं बतलायेंगे ! खेर , इस प्रकार का निश्चय और अपने ईष्ट देव जिस भी देव की साधना आप कर रहे हैं , पर पूर्ण विश्वास व श्रद्धा भाव बनाए रखें ! साधना के समय अपनी नाभि स्थान पर ध्यान लगाए रखें ! मन में आने वाले निरर्थक विचारों या बाहरी कोलाहल पर बिलकुल ध्यान ना दें ! शाबर मन्त्र की विशेषता है साधना के प्रारम्भ के 3 या 5 दिन में ही आपको अनुभूति होने लगेगी हाँ अगर शाबर मन्त्र तंत्र महागुरु का स्वयं निर्मित है तो फिर इल्ले ! साधना के समय मिलने वाले अनुभवों को गुप्त रखें ! शाबर मन्त्र साधना में ग्रहण का सर्वाधिक महत्त्व है ! ग्रहण काल में सर्वाधिक महत्त्व अधिक से अधिक जप का है ! साधना के मध्य कहा गया है शाकाहारी भोजन ही करें ! साधक अपने उदर का आधा भाग भोजन से , एक चोथाई हिस्सा जल से भरे तथा शेष चोथाई भाग को खाली रखे ताकि वायु संचरण को स्थान मिल सके ! गोहाटी स्थित कामाख्या में साधना तंत्रोक्त हवन कोई सफलता की गारंटी नहीं है ! गुरुजन कहते हैं – तंत्र साधना अगम है , चलना तलवार की धार ! गुरु कृपा से सफलता , वरना टुकड़े होयें हज़ार !! साधकों ! इस बार गोहाटी स्थित कामाख्या के लिए कोई बहाना नहीं , कोई बाधा नहीं , कोई रुकावट नहीं , केवल जैसे तेसे पंहुचना है ! साधकों ! बाद मुद्दत के यह घडी आई , जब कामाख्या की कृपा से सफलता पाई ! सुख दुःख तो आते जाते रहते हैं ! दुर्भाग्य का रोना मत रोते रहो कि मैं क्या कर सकता हूँ ? मेरा तो भाग्य ही खराब है , मेरे तो परिवार वाले मेरे अनुकूल नहीं हैं , मेरे तो मित्र भी सहयोगी नहीं हैं , मेरे पास धन की कमी है , मेरा तो जन्म ही ऐसे स्थान पर हुआ है जो बहुत दूर है इस प्रकार रोते रहोगे तो जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते ! इस बार गोहाटी स्थित तांत्रिकों की ईष्ट कामाख्या के सहयोग से अपनी साधना पूरी करने का प्रयत्न करेंगे ! आशा है आप सभी पंहुचेंगे , मुझे प्रतीक्षा रहेगी ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
20/08/2026
मित्रों ! साधना उपासना का ही एक नाम है और साधना की कोई सीमा ही नहीं है और ना कोई बंधे बंधाये सूत्र या सिद्धांत ! इसलिए हम स्वयं को किसी विधि या सूत्र में नहीं बाँध सकते ! सिद्धि प्राप्त करने के लिए श्रद्धा , विश्वास और निष्ठा अनिवार्य है ! यूँ तो उस (सिद्धि) तक पंहुचने के लिए कोई बने बनाए मार्ग भी नहीं हैं , परन्तु हमारे वेद शास्त्रों ने साधना को अनेक भागों में विभाजित किया है ! इन भागों से परिचय ‘तंत्रगुरु’ कराते हैं ! तंत्रगुरु ज्ञान देदे , मन्त्र देदे , माला देदे , शुभ मुहूर्त भी बतला दे , पर जब तक विश्वास , लगन और निष्ठा नहीं होगी तब तक यह सब वस्तुएं बेकार हैं ! मन्त्र के शब्दों में नहीं भाव में शक्ति छिपी होती है ! जब आप तंत्र मार्ग में प्रवेश करते हैं तब ऐसा अनुभव होता है कि आप भविष्य के गर्भ में छिपी मृत्यु से समझोता कर रहे हैं ! तनिक साधना के स्थल को देखिये धधकता , सुलगता शमशान , दूर बीहड़ में कोई भग्न मंदिर , पहाड़ पर ऊंची कोई अँधेरी गुफा , तब आपको क्या ऐसा अनुभव नहीं होता जैसे किसी भी पल हम मर सकते हैं ? तंत्र मार्ग कठिन है ! जोखिम से भरा है ! तंत्र के मार्ग में कंटक के सिवा और कुछ भी नहीं है ! तंत्र में ऐसा अनुभव होता है जैसे आप हर पल मर रहे हों ! तांत्रिक बनना अर्थात स्वयं को मार देना ! एक ऐसी आत्महत्या जहाँ और कुछ रह ही नहीं जाता ! तंत्र साधना स्वयं को मारना ही तो है ! साधक तो उस नदी के समान होता है जो सागर में उतरने को जाती है ! या उस पतंगे की तरह जो बिना परिणाम जाने आग से लिपट जाता है ! तांत्रिक भी केवल सिद्धि पाने की आशा में साधना के कठिन मार्ग में उतर जाता है ! वह यह नहीं सोचता उसे सफलता मिलेगी या विक्षिप्तता अथवा मृत्यु ? तांत्रिक बहल ने इस बात को समझ लिया था मौत कभी भी , कहीं भी उसपर झपट सकती है , लेकिन मान्त्रिक शक्ति और तंत्रगुरु उसका सहारा बने ! कल का शशि मोहन बहल आज तंत्रगुरु की कृपा से तांत्रिक बहल बना ! मृत्यु उसे छूकर निकल गयी ! मृत्यु के बाद सभी प्राणियों को शमशान जाना होता है ! आखिर क्यों ? क्योंकि शमशान जाने से उसकी मुक्ति हो जाती है ! शमशान बैराग है , क्योंकि वहां जाकर उसकी आसक्ति छूट जाती है ! वह किसी का नहीं रहता , कोई उसका नहीं रहता ! क्या आप विश्वास करेंगे ? शरीर चार कन्धों पर जाएगा , तब जाएगा , मैंने और दिनेश ने हर शनिवार काल भैरव और श्री महाकाली के दर्शनों को शमशान में जाना भी शुरू कर दिया है ! यह भी अतिरिक्त शक्ति और सुरक्षा पाने का एक प्रयत्न है ! एक सेठ था ! एक दिन वह भ्रमण कर रहा था , तो उसके मन में एक कल्पना जागी कि उसके पास एक सुन्दर सी छड़ी होनी चाहिए ! उसने कुशल कारीगरों को बुलाकर कहा कि मेरे लिए एक अति सुन्दर , मज़बूत छड़ी बनाओ ! लागत की कोई चिंता नहीं है ! कारीगरों ने एक मज़बूत , सुन्दर , मूल्यवान छड़ी बनायी और शुभ दिन देखकर सेठजी को भेंट करदी ! एक दिन वह छड़ी को लेकर पर्वत पर पंहुच गया ! शाम को जब वह वापिस आ रहा था तो उसने शमशान भूमि में एक नंग धढंग तांत्रिक को देखा ! वह उसके समीप पंहुचा और कहने लगा – तुम यहाँ क्यों पड़े हो ? क्या कर रहे हो ? मेरे साथ चलो ! तांत्रिक ने हँसते हुए उत्तर दिया कि जो भी आपके साथ हैं , वह भी एक दिन यहीं आ जायेंगे ! मैं वहां जाकर भला क्या करूँगा ? दोस्तों ! तांत्रिक इस सत्य को ना केवल जानता है वरन मानता भी है ! मैंने एक बार जब मैं तंत्रगुरु के सानिध्य में धधकते , सुलगते शमशान में साधना रत था , तब मैंने तंत्रगुरु को यह दो पंक्तियाँ सुनाई थीं , जो मैंने उसी समय लिखी थीं – जिंदगी कितनी खूबसूरत है ? लेकिन मौत की अहं ज़रुरत है !! इस पर मेरे तंत्रगुरु ने मेरी पीठ थपथपाते हुए कहा था – अब तू तंत्र को पहचान गया है ! अंत में केवल इतना ही कहूँगा , कि हम में से प्रत्येक साधक को अद्वितीय बनने की ओर अग्रसर होना ही चाहिए और उस क्षण को गंवाना नहीं चाहिए जो क्षण बहुत कुछ देने वाला है......अब वह क्षण पुन: आ गया है , जब यह दिखला देना चाहिए , कि हम केवल अस्थि चर्म युक्त नहीं बने रहना चाहते , अब हम कामाख्या में वशिष्ठ आश्रम के शमशान में मौत से आँख से आँख मिलाना चाहते हैं ! तंत्र मन्त्र साधना और सर्वकार्य सिद्धि तंत्रोक्त हवन की इच्छा करने वाले मेरे साथ कामाख्या चलें , और हाँ ले जाना या ना ले जाना मेरे अधिकार क्षेत्र में होगा ! स्वार्थी और अपना हित चिन्तक इस कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखें ! जिंदगी भर आभारी रहूँगा ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
19/08/2026
सह्रदय मित्रों ! मेरा उद्देश्य है हर वो काम करूँ जिससे आपको लाभ हो और समस्याओं के जंजाल से मुक्त हों , पाप ताप , श्राप आपको स्पर्श तक ना कर पायें , लेकिन यह होगा कैसे ? जब आप स्वयं नहीं चाहेंगे ! मैं जानता हूँ आजकल आप मुक्त हैं , लेकीन जैसे ही दशहरा , नवरात्र , श्राद्ध , दीपावली आयेंगे आप सब व्यस्त हो जायेंगे ! अब अगर आप कष्टों में घिरते हैं और परेशान होते हैं तो इसमें मेरा क्या दोष ? परेशानी भी आपकी , भोगने वाले भी आप और मुक्त होने वाले भी आप , मैं तो केवल माध्यम हूँ ! मैंने माँ कामख्या की यात्रा का कार्यक्रम बनाया , क्यों ? क्योंकि मुझे अन्तस से प्रेरणा हुई ! रोगी , अशक्त और बड़ी आयु होने के बाद भी मैंने साहस जुटाया ! क्यों ? क्योंकि मैं आपका हितचिंतक हूँ ! कहा गया है मनुष्य योनिरूपा , अतिगोपनीय माँ कामाख्या का दर्शन , स्पर्श और साधना करके जीव मुक्त हो जाता है और दूसरे पर शंकर की तरह पृथ्वीतल विचरण करता है ! इन्द्र आदि सभी देवगण उसकी आज्ञा के अधीन हो जाते है ! उसके लिए तीनो लोकों में कुछ भी असाध्य नहीं है ! जो साधक योनि मण्डल में जाकर माँ त्रिपुर भैरवी अर्थात कामाख्या को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करता है , उसका ही जीवन सब प्रकार सफल होता है ! जयेश भाई गायवाला , डॉ. आर.एस.प्रसाद तांत्रिक , मनारंजन मोहोंतो , भाई कमल नारायण शर्मा , स्वामीजी मनोज ही त्रिपुर भैरवी का हवन कर और करा सकते है , क्योंकि उनकी इच्छा भी है और साधन भी हैं ! कहते हैं ब्रह्म हत्या करने वाला मनुष्य भी कामाख्या के पुण्य क्षेत्र के स्पर्श करने मात्र से क्षणभर में पाप शाप से मुक्त हो जाता है ! भगवती कामाख्या का दर्शन , पूजन देवताओं को भी दुर्लभ है ! जो उपासक उनका दर्शन करता है वह देवताओं के द्वारा पूजित होता है ! हज़ारों जन्म जन्मान्तर में किये हुए पाप शाप कामाख्या के दर्शन मात्र से भस्मीभूत हो जाते हैं ! पृथ्वीतल पर कामाख्या के शक्तिपीठ के समान अन्य कोई तीर्थ नहीं है ! विश्वास किया जाता है बिना माँ कामाख्या के दर्शन , स्पर्श , साधना , उपासना के कोई भी साधक तांत्रिक नहीं कहलाता है ! मैं तांत्रिक के नाम से प्रसिद्ध अवश्य हुआ लेकिन कभी गोहाटी गया नहीं ! डॉ. आर. एस. प्रसाद तांत्रिक और उनके साथियों के सहयोग से माँ कामाख्या के दर्शन भी किये , साधना भी की और शमशान में यज्ञ भी किया एक बार नहीं कई बार किया ! इस भारतवर्ष में भगवती सती के अंग प्रत्यंग के गिरने से यह देश मनुष्यों के पापों तापों का नाश करने वाला है ! कामाख्या के सभी अंगों में ‘योनि’ सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि व देवी योनिरूप में आज भी सभी महिलाओं में विद्यमान है ! आप स्वयं अनुभव करें जीव योनि से आता है और किसी दूसरी योनि में चला जाता है ! यही योनि जिस स्थान पर गिरी वहां साक्षात स्वयं भगवती सती प्रतिष्ठित हैं ! अपने पितरों की तृप्ति की इच्छा से जिसने भी श्राद्ध किया , मानो उसने हज़ार वर्षों तक गया श्राद्ध कर लिया ! अगले माह श्राद्ध है , बोलो क्या कहते हो ? धन चाहिए या पितरों की संतुष्टि और आपको पापों तापों से मुक्ति ! तांत्रिकों के लिए तो यह स्थल स्वर्ग के समान है ! तांत्रिक यहाँ आकर वह तंत्र मन्त्र की कठिन , दुर्गम साधना भी सरलता से पूर्ण कर लेते हैं ! कोई भी साधारण व्यक्ति किसीको डॉक्टर या वकील का सार्टीफिकट दे तो वह अमान्य होता है जबतक कोई डॉक्टर या वकील ना दे ! इसी प्रकार जब तक कोई स्थापित तांत्रिक ना कहे – अमुक तांत्रिक है ! वह तांत्रिक नहीं होता ! कामाख्या के शक्तिपीठ में अमावस्या , चतुर्दशी , अष्टमी तथा तिथि क्षय होने पर या नवमी तिथि में भैरवी का साहसपूर्ण जो जितेन्द्रिय साधक किसी तांत्रिक के सानिध्य में निर्भय होकर मन्त्र जपता है ! उसे माँ कामाख्या का अनुभव होता है ! अपनी हर पोस्ट में माँ कामाख्या से सम्बंधित गोपनीय ज्ञान को प्रकट कर रहा हूँ , जो समझ सकेगा , समझ लेगा , जो साथ कामाख्या चलेगा वह कहीं ना कहीं पंहुच जाएगा और जो बहाने करेगा वह अनाड़ी है ! माँ कामाख्या प्रत्येक साधना को पूर्ण कराती है ! एक कवि दीवाना थे , उन्होंने लिखा था = गुरु बहल स्वीकारता , उर में बहुत उमंग ! पद पद साथ निभायियों छोडू कभी ना संग !! छोडू कबहु न संग , यही अंतर में धारूँ ! सफल होय सब काज , सभी तन मन को वारु !! कहे दीवाना करजोरी गुरु चरण हैं गंग ! गुरु बहल स्वीकारता उर में बहुत उमंग !! अंत में केवल इतना – सत्य तो यह है कि सिद्धि को पाने के लिए साधक सदैव प्रयत्नशील रहता है , पर हर साधना साधना में सफलता का वायदा नहीं करती ! इसका मूल्यांकन तो स्वयं कीजिये ! अंत में केवल इतना निवेदन है की ‘’तंत्र सबके लिए मिशन’’ (निजी) के वाटस एप्प ग्रुप से जुड़ें और मेरी आने वाली पोस्टों को नियमित पढ़ें ! जुड़ने के लिए अपना वाटस एप्प नंबर शीघ्र भेजिए ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! 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17/08/2026
मित्रों ! रिमझिम करती बरसात का मोसम चल रहा है ! जहाँ जाओ हरियाली देखने को मिलती है ! मन एक अजीब से उत्साह और जोश से भर जाता है ! बरसात के आते ही मन करता है गरमा गरम बेसन के पकोड़े खाएं ! क्या कभी यह विचार भी आता है ? बाहर रिमझिम करती बरसात का मोसम है चलो थोड़ी साधना करलें ? बूंदों की धुन पर कोई मन्त्र गूंजा लें ! कुछ तंत्र का अच्छा साहित्य पढ़ लें ? कोई भी चीज़ सदैव स्थायी नहीं रहती है ! आज बरसात है कल हाड कांपती सर्दी होगी ? अब प्रश्न उठता है , तब क्या करोगे ? शरद ऋतु दिन छोटे रात लम्बी होती हैं ! तंत्र मार्ग में जब रात लम्बी होती है , साधना के लिए , चिंतन के लिए , पठन के लिए अधिक समय मिलता है ! तब ही तो मैंने प्रश्न किया है , अब क्या करोगे ? विदुर निति कहती है – धन की आय , नित्य निरोग रहना , पत्नी का अनुकूल तथा प्रियवादिनी होना , संतान का आज्ञा में रहना तथा धन पैदा करने वाली विद्या का ज्ञान – यह छ: बातें इस मनुष्य लोक में सुख देने वाली होती हैं ! इन सबकी प्राप्ति का माध्यम तंत्र मन्त्र साधना के अतिरिक्त भला और क्या हो सकता है ? संसार में जिसके पास धन है उसी के सभी मित्र , सखा होते हैं ! उसी के सब भाई बन्धु और पारिवारिक जन होते हैं ! धनवान व्यक्ति को श्रेष्ठ माना जाता है ! जिसके पास धन हो , वह सुख पूर्वक जीवन बिताता है ! जब तंत्र मन्त्र साधना का सहारा हो तो यह सब शीघ्र सुलभ हो जाता है ! यह भी सत्य है केवल परिश्रम करने से ही लक्ष्मी नहीं आती है और न ही स्थिर रह सकती है ! वशिष्ठ , विश्वामित्र , गुरु गोरखनाथ , तिब्बत के लामा आदि अपने आप में संपन्न व्यक्ति थे ! इनका कोई लम्बा चौड़ा व्यापार भी नहीं था , फिर भी अपने समय के सर्वाधिक संपन्न व्यक्ति थे ! वह संपन्न इसलिए थे कि उनके पास ऐसी तंत्र मन्त्र विद्या थी जिसके माध्यम से वह लक्ष्मी को स्थापित कर सके ! मुझसे साधना शिविर में प्राय: लोग कहते हैं – गुरूजी धन की बड़ी तंगी चल रही है ! क्या करूँ ? क्या लक्ष्मी कोई चिड़िया का बच्चा है जिसे पकड़ कर मैं आपको देदूं ? साधना करो , प्रार्थना करो , उपाय करो , लक्ष्मी को विवश करो कि वह आपके द्वार पर आये ! तंत्र कोरा पुस्तकीय ज्ञान नहीं है ! वह तो कठोर साधना का मार्ग है ! शास्त्रों की जानकारी तो पढ़कर , गुरुमुख से सुनकर मिल सकती है लेकिन सिद्धि के लिए , लक्ष्मी के लिए साधना करनी पड़ेगी ! तंत्र साधना बड़ी दुष्कर है ! यह कोई हलवा नहीं कि मुख खोला और गप से खा लिया ! लक्ष्मी की कृपा चाहिए तो कठोर साधना करो , साहित्य पढो , लक्ष्मी स्थिर करनी है तो निर्धन को , रोगी को , अशक्त को दान दो ! आज के साधक अंगुली कटाकर शहीद कहलाना चाहते हैं ! किसी से एक रोटी मांगकर किसी भूखे को खिला दी बन बेठे दानवीर ! प्राचीन काल में और आज भी तंत्र के नाम पर अज्ञानी समाज में अनेक प्रकार के अंधविश्वासों का जन्म हुआ ! आज भी अनेक बेहरुपिये , छदम तांत्रिक तंत्र मन्त्र के नाम पर भोले भाले विश्वासी लोगों को गुमराह करने से नहीं चूकते ! स्वछन्द काम (S*X) के नाम पर कामुक तांत्रिकों को स्त्रियों का योनशोषण करते आम देखा जा सकता है ! मैं वो नहीं कि दस पंक्तियों की पोस्ट लिखी और एक साधना ठोक दी ! यह सिलसिला उनका निरंतर चलता रहता है ! ज़रा आप ही बताईये एक उपासक जिसे जीवन में अनेक कार्य करने हैं , वह कितनी साधनाएं करेगा ? उसपर तुर्रा यह हैं कि एक दिन , चार दिन में चार पांच साधना सिद्ध करलो , शुल्क मात्र दस हज़ार रूपये ! कमाल है एक तो पैसे की तंगी इतनी बड़ी धनराशी लाएगा कहाँ से ? जब एक साधक को एक दिन में चार पांच साधनाएं सिद्ध करा सकते हैं ? तो उन्होंने तो हजारों साधनाएं सिद्ध कर रखी होंगी ? वह साधना के नाम पर शुल्क क्यों लेते हैं ? मैं साधनाएं , उपाय कभी नहीं देता ! कभी कभी समय अनुकूल देखकर एक आध साधना और उपाय दे देता हूँ ! सबसे बड़ा तंत्र तो हमारा शरीर है ! पूरे जीवन में कितनी क्रियाएं करता है ! किसी गृहणी से कभी पूछना – आपको भोजन तैयार करने में , बर्तन साफ़ करने में कितना समय लग जाता है ? तो वह मस्तक से पसीना पोंछते हुए कहेगी – भाई पूरा दिन लग जाता है ! एक यह हैं जो एक दिन में तीन चार साधनाएं सिद्ध करा देते हैं ! भाई कमाल है ! त्योहारों का मोसम आ रहा है ! नवरात्र , दशहरा , दीपावली यह सब साधना के पर्व हैं ! बिछायिये आसन , पकडिये माला और लग जाईये साधना में ! मेरा परामर्श है – कभी कभी ऐसा भी होता है प्रकाश तो होता है फिर भी कुछ नज़र नहीं आता , जैसे फूल तो हैं पर सुगंध नहीं दिखती , भवन तो है पर नींव दिखाई नहीं देती , अग्नि तो है पर गर्मी दिखाई नहीं देती , केवल अनुभव होता है , शरीर तो है , लेकिन उसमे आत्मा कहाँ है ? मानव जीवन दुर्लभ है – मिलता ना बार बार ! तंत्र समाज के हित और कल्याण के लिए है , बना लिया आय का साधन , धन के लिए तांत्रिक वस्तुओं का व्यापार करने लगे ! जो तांत्रिक वस्तु दूसरे का भाग्य उदय कर सकती है तो बेचने वाले , रखने वाले का भाग्य उदय क्यों नहीं करती ? वह इन अमूल्य चीज़ों को क्यों बेचता है ? मुझ मूर्ख को एक बात बतलाईये – श्री यंत्र लक्ष्मी का घर है अगर आप किसी का घर बेचेंगे तो क्या वह कृपा करेगा ? या क्रोध करेगा ? मूर्ख हूँ प्रश्न भी मूर्खों वाला है ! माँ कामाख्या की यात्रा के लिए अपनी तैयारी रखें ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
14/08/2026
मित्रों ! आज मुझे पोस्ट लिखते हुए और ‘तंत्र सबके लिए मिशन’ चलाते हुए एक युग बीत गया है ! एक बात जो मैंने बड़ी ही बारीकी से अनुभव की है , आज के सदस्य/साधक पोस्ट नहीं पड़ते वरन अक्षरों को पढ़ते हैं ! पोस्ट में कौनसी बात अर्थपूर्ण है ? किस बात में क्या सन्देश है ? कौनसी बात उनको क्या सिखलाती है ? उन्हें क्या करना चाहिए ? क्या नहीं करना चाहिए ? वह यह बिलकुल जानना , समझना नहीं चाहते हैं ! उन्हें वह पोस्ट अधिक पसंद आती है जिसमे कोई टोना टोटका , साधना दी होती है ! उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं कि उस टोने टोटके , साधना का कोई मूल्य नहीं है ! वह पोस्ट टोना टोटका तो केवल इधर से उधर गया होता है ! उसमें लेखक का कोई अनुभव नहीं होता है ! मैं साधना शिविर में कोई बहुत ही गोपनीय , महत्त्वपूर्ण बात बतला रहा होता हूँ और ‘’शिकारी’’ महोदय इधर उधर कोई जेब से भारी शिकार खोज रहे होते हैं अथवा मोबाइल पर प्रेम प्रसंगों या शिकार को शीशे में उतारने में व्यस्त होते हैं ! क्या तो यह स्वयं का कल्याण करेंगे ? क्या यह तंत्र का भला करेंगे और क्या यह ‘शिकार’ का हित करेंगे ? उनके पूर्वज तो कष्ट में होंगे ही ? रोचक बात यह है कि परेशान लोग इनकी बातों से ही संतुष्ट होते हैं ! जब समय के साथ धन भी चला जाता है तो अपशब्द तंत्र को कहेंगे ! वह शिकारी महोदय आगे फिर किसी नए शिकार की खोज में चल पड़ेंगे ! एक कहावत है ‘करे काहू का , भरे ताऊ का’ अर्थात धन कमाने के लिए जाल यह फेंके , फंसे आप और बुराई करें तंत्र की ! आप तनिक मेरी बात आजमा कर देखें ! इनसे दो चार प्रश्न तंत्र ज्ञान के विषय में करके देखें , इनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जायेगी , सारा तंत्र ज्ञान हवा में उड़ जाएगा ! इन्हें एकबार पैसे मिल जाएँ और कार्य ना हो तो फिर इनके बहाने भी बड़े रोचक होते हैं ! मेरे एक प्रिय साथी हैं ! मैंने उनसे पूछा यार पोस्ट पढ़ी ? हाँ हाँ क्यों नहीं , सबसे पहले पढ़ी और लाईक भी करदी !मेरे यह पूछने पर पोस्ट में क्या पढ़ा ? तो बगलें झाँकने लगे ! मेरे एक और मित्र हैं ! एक दिन मुझे मिले तो मिलते ही बोले – भाई आजकल धंधा कुछ हल्का चल रहा है ! उनके लिए तंत्र ज्ञान भी एक धंधा है , व्यापार है ! हमें ऐसे छदम विद्वानों पर और ऐसे यजमानो पर वारी जाना चाहिए ! खेर , यह तो कुछ चुम्बन और चांटे थे ! 27 सितम्बर 2026 रविवार को श्राद्ध और पिण्डदान पर गुरुधाम में आयोजन होगा ! आपको गुरुधाम की स्थिति तो पता ही है ! कृपया अपने रुकने का कार्यक्रम यथासंभव कम बनाएं ! वैसे भी नियम के अनुसार मृत कर्म में रुका नहीं जाता है ! श्राद्ध कर्म के पश्चात भोजन की व्यवस्था गुरुधाम में ही होगी ! यह कार्यक्रम भी सदा की भांति नि:शुल्क होगा ! ह्रदय से तो मैं बिल्कुल नहीं चाहता कि आप तुरंत वापिस जाएँ , पर क्या करूँ परिस्थित अनुकूल नहीं हैं ! अस्तु क्षमा ! परलोक , कर्म के अनुसार स्वर्ग या घोर नर्क और पुनर्जन्म का सिद्धांत भारतीय धर्म शास्त्रों का एक महत्त्वपूर्ण विषय है ! नचिकेता ने भी आत्मा का रहस्य जानना चाहा था ! मृत्यु अटल है ! कर्मो के अनुसार फल मिलना भी अटल है ! इसके बाद भी जीव सोचता है मेरे सिवा सब मरेंगे ! भगवान श्री कृष्ण कहते हैं – हे अर्जुन ! मेरा हरेक बार अवतार हुआ है ! तेरे भी कई बार जन्म हो चुके हैं किन्तु तुझे उनका स्मरण नहीं है ! यह जानते हुए भी कि मृत्यु अटल है , फिर भी मनुष्य उस ओर से आँखें बंद रखता है ! कर्म के अनुसार स्वर्ग या नर्क (अर्थात सज़ा) मिलेगा फिर भी मनुष्य नहीं मानता ! शास्त्रों के अनुसार ‘मोक्ष’ प्राप्ति के लिए सतकर्म करते रहने को कहा गया है , लेकिन धन कमाने को जीव मूल आवश्यकता समझता है ! क्षमा करें बात सत्य है पर है ज़रा कडवी ! बुड़ापे के अलावा जीवन की अन्य अवस्थाएं बल , बुद्धि और पौरुष का समय होता है ! मन स्वपनों के आकाश में विचर रहा होता है ! युवावस्था जहाँ उत्थान व बुडापा समाप्ति का समय है ! यौवन का भविष्य है बुडापे का कोई भविष्य नहीं है ! बुडापा बोझ होता है ! बुडापा मृत्यु के भय से त्रस्त होता है ! वह भूल जाता है कि उसे अपने पूर्वजों के लिए भी कुछ करना चाहिए , तभी हमारी संतति हमारे लिए कुछ करेगी ! कबीर जी समझाते हुए कहते हैं = पत्ता झरता यों कहे सुनु तख्वर बनराय ! अब के बिछड़े ना मिले दूर पड़ेंगे जाए !! इसका केवल एक उपाय है श्राद्ध और पिण्डदान ! कम से कम श्राद्ध पक्ष में तो वह अपने परिजनों के द्वार पर आयेंगे ? तर्पण करके हम अपने पूर्वजों को संतुष्ट कर सकेंगे और बदले में पायेंगे खुशहाल जीवन ! और भी बहुत कुछ बतलाऊंगा ज़रा 10 सितम्बर तो आने दो ! अखिल कुमार तेवतिया की जिम्मेदारी है कि वह जौ का आटा और हवन के लिए लकड़ियों का प्रबंध करके गुरुधाम यथा समय पंहुचे ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
13/08/2026
मित्रों ! मैं सदैव सिद्धि , साधना में सफलता की बात करता हूँ ! सिद्धि भोग (सेक्स (S*X) काम ) से अथवा फिर जोग (उदासीनता) से मिलती है ! इस वास्ते हमें दोनों को संतुलित रूप से चुनना हैं ! माँ कामाख्या के द्वार पर भोग भी है और जोग भी है ! अब यह मर्जी आपकी है जो चाहो चुनलो ! देवी पुराण में स्पष्ट कहा गया है – कामाख्या सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है ! कामाख्या सर्वश्रेष्ठ धन है ! कामाख्या सर्वश्रेष्ठ परमपद है ! इस प्रकार की भावना करने वाले साधक का कभी पुनर्जन्म नहीं होता ! सभी सिद्ध पीठों में कामगिरी कामाख्या पीठ सर्वोत्तम है ! कामाख्या तीर्थ का महात्म्य बताते हुए श्री महादेव जी बोले – मुनिश्रेष्ठ आप सावधान होकर सुनिए ! मैं कामरूप तीर्थ का महात्म्य बतलाता हूँ ! वहां अति शीघ्र सिद्धि देने वाली ‘’शिव’’ भगवती विराजमान हैं ! मृत्युलोक में इससे उत्तम कोई तीर्थ नहीं है ! जहाँ गन्धर्वों सहित देवगण तथा ब्रह्मादि श्रेष्ठ देवता भी प्रतिदिन आकर भक्तिपूर्वक पूजा यज्ञ करते हैं ! पृथ्वी पर लोगो का कल्याण करने के लिए जहाँ योनि रूप में स्वयं महामाया शक्ति परमेश्वरी विराजती हैं ! प्राचीन काल में भगवती के प्रत्यक्ष दर्शन की इच्छा रखने वाले पितामह ब्रह्मा , विष्णु तथा भगवान शंकर ने ‘’कमाक्ष्या क्षेत्र’’ में घोर तप किया था ! अपनी बात को आगे बढाने से पहले एक महत्वपूर्ण बात आपको बतलाना चाहता हूँ , शर्त केवल इतनी है आप पढ़कर हंसेगे नहीं ! मेरे एक परम मित्र स्नेही साधक कुछ पाने की खोज में दलबल सहित गोहाटी आसाम गए ! बड़े भाग्यवान थे वहां उन्हें पंहुचते ही सिद्धि मिल गयी ! इसके बाद वह अतिरिक्त शक्ति प्राप्त करने के लिए माईऑंग गए ! बड़े भाग्य वाले थे वहां भी उन्हें विचरती हुई सिद्धि मिल गयी ! केवल सिद्धि ही नहीं सिद्द्धगुरु भी मिल गये ! अब वह साधक से तांत्रिक और तांत्रिक से तंत्रगुरु हो गए ! अब वह शिव के अनन्य भक्त भस्मासुर हो गए ! जिसने जो कहा कर दिया ! उन्होंने जो कह दिया हो गया ! कमाल हो गया वस्त्र तो उनके पहले से ही रंगबिरंगे विचित्र थे ! तंत्रगुरु तो वह पहले से ही स्वयं को कहते थे ! अब वह सर्वशक्तिमान की श्रेणी में आ गए ! वह जिसे कामाख्या , माईऑंग से प्राप्त भूल से शक्ति समझ बेठे थे वह तो उनका कोरा वहम था ! रेत से निर्मित इमारत थी ! वह विचित्र बाना भी कब तक उनके आडम्बर को ढकता ? रेत तो फिर रेत होता है ! इमारत भरभराकर ढह गयी और वह – कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे ! दलबल के साथ हम भी कामाख्या , माईऑंग गए लेकिन खाली हाथ आये ! जब वहां कुछ था ही नहीं तो भला मिलता क्या ? हमारे साथ तो कुछ दिव्य मन्त्र थे , तंत्रगुरु द्वारा प्रदत्त कुछ सावधानियां और कुछ एक आसन पर बेठने का अभ्यास , यज्ञ के कुछ गूढ़ रहस्य हमारे पास 60 वर्षों में कमाई यही कुल जमा पूँजी थी ! यह थोडा था पर हमारे संतोष के कारण बहुत कुछ था ! वशिष्ठ ने पुरुश्चरण करके मन्त्र सिद्धि प्राप्त करली और वह दूसरे स्रष्टिकर्ता के समान हुए ! जो अन्य देवतागण , ऋषिगण तथा सिद्धगण अव्याहत आज्ञा वाले हुए है , वह सभी माँ कामख्या की महती कृपा से ही हुए ! वह माँ कामाख्या के महामंत्र का जप करके सिद्ध हुए हैं , उन्होंने आकाश में विचरण करने की दिव्य शक्ति प्राप्त करी तथा देवताओं के द्वारा पूज्य हो गए ! साधक योनिरूपा , अतिगोपनीय माँ कामाख्या का दर्शन , स्पर्श और पूजन करके जीवमुक्त हो जाता है और दूसरे शंकर की तरह पृथ्वीतल पर विचरण करने लगता है ! इन्द्र आदि सभी देवगण उसकी आज्ञा के आधीन हो जाते हैं ! उसके लिए तीनो लोकों में कुछ भी असाध्य नहीं है ! जो साधक योनि मण्डल में जाकर त्रिपुर भैरवी (कामाख्या) को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करता है और उन्हें शिव स्वरुप ‘लिंग मुद्रा’ दिखाता है उसका ही जीवन सफल होता है ! ब्रह्म हत्या करने वाला साधक भी कामाख्या का दर्शन देवताओं को भी दुर्लभ है ! जो साधक उनका दर्शन करता है वह देवताओं द्वारा पूजित होता है ! हज़ारों जन्मो के पाप कामाख्या के दर्शन मात्र से भस्मीभूत हो जाते हैं ! मेरा विश्वास है पृथ्वीतल पर कामाख्या के शक्तिपीठ के समान अन्य कोई तीर्थ या सिद्धपीठ नहीं है ! स्मरण रखें वहां कोई सिद्धि या दिव्य शक्ति विचरती नहीं है ! इसे तो दिव्य मन्त्रों , तंत्रोक्त हवन से अर्जित किया जाता है ! यह कथन कि कामाख्या में सारे कार्य पूरा होते हैं , सफ़ेद झूठ है , बकवास है , गप है ! कठोर साधना , तंत्रोक्त यज्ञ और तंत्रगुरु की कृपा और आशीर्वाद से सारे कार्य पूरे होते हैं ! कामना पूर्ती के लिए कठोर साधना , तंत्रोक्त हवन और रगों में बहते खून को पानी करना पड़ता है ! कार्य कोई चिड़िया नहीं है जिसे कामाख्या सिद्ध पीठ में पकड़ कर किसी को भी देदो ! साधकों ! तांत्रिकों , साधकों के लिए तो यह स्वर्ग के समान है ! यह नीलांचल के जंगलों में , माईऑंग में भटकने से नहीं मिलती ! इसके लिए तो किसी छत पर कामाख्या मंदिर की तरफ मुख करके घंटों बेठना होता है , पसीना सिर से एड़ी तक आ जाता है तब कहीं जाकर सिरा मिलता है ! यह जो बड़े कटोरे में अग्नि जलाकर यज्ञ करने का झूठा दावा करते हैं और एक घंटे , एक दिन , एक माह में कार्य होने का दावा करते हैं , सब झूठ है , गप है , बकवास है ! जब मैंने अपने तंत्रगुरु से कहा – इतनी कठोर साधना भला कौन करेगा ? तो तंत्रगुरु आँखें तरेड़ कर बोले – तो फिर मर जा ! मैंने आत्महत्या तो नहीं की लेकिन दुगनी गति से साधना में लग गया ! परिणाम आपके सामने है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ और मेरा बिल्कुल नया नावेल ‘’बिन फेरे हम तेरे’’ और ‘’क्या यही प्यार है ?’’ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
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