Tantra Sadhna Shivir
teaching ta**ra
24/01/2026
साथियों ! हमें जन्म ओर पुनर्जन्म के रहस्य को समझने के लिए पहले ‘मृत्यु’ को समझना होगा ! मृत्यु की गाँठ खोले बिना हम जन्म , पुनर्जन्म के रहस्य को समझ ही नहीं सकते ! वृक्ष पर नयी कोंपले , पत्ते आयें इसके लिए वृक्ष को पतझड की प्रक्रिया से गुजरना ही होगा ! मानलो , अगर पतझड तो आता है , पत्ते भी झडते हैं , लेकिन पुन: फूल पत्ते नहीं आते तो इसका अर्थ है वृक्ष अपनी आयु जी चुका ! अब कोई पतझड़ नहीं आएगा , कोई नए फूल पत्ते नहीं आयेंगे ! इसी प्रकार मनुष्य जन्म तो लेता और जन्म और मृत्यु के नियमानुसार मृत्यु भी पाता है , लेकिन विधि की इच्छानुसार पुनर्जन्म नहीं होता है तो समझलो उसका ‘मोक्ष’ हो गया ! अब वह जन्म , मृत्यु , पुनर्जन्म के क्रम से छूट गया ! अगर आपको मैं यह कटु सत्य नहीं समझा पाता हूँ , और आप भी इस क्रम को नहीं समझ पाते हैं तो फ़िर इसके अलावा और क्या कहूँ ? मेरे ऊपर आक़ – थू !
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‘शुक्र’ बिंदु जो सूक्ष्म अंश है , वह मनुष्यत्व का आधार है ! वह मौलिक अंश है ! इसमें मनुष्य के मौलिक संस्कार , कर्मफल , विवेक , बुद्धि , अहंकार आदि सूक्ष्म बीज रूप में विद्यमान रहते हैं ! मृत्यपरान्त इसी अंश के अनुसार एवं आधार पर प्राणमय सूक्ष्म शरीर का तदानन्तर मनोमय शरीर और वासनामय शरीर का जन्म होता है ! कालान्तर में स्थूल शरीर की भी प्राप्ति होती है ! इसी मुख्य शुक्रांश का नाम = परा कला है ! वैदिक भाषा में इसी को शुक्र धरा भी कहते हैं ! इसी अंश को ‘शुक्र’ ब्रह्म सतीतवन कहा गया है ! वह शुक्र बिंदु सनातन ब्रह्म रूप है ! ब्रह्म स्वरुप यही शुक्रांश बिंदु साधना का आधार है ! मानव में एक और वस्तु होती है ‘रज’ ! रज के 16 अंश होते हैं ! जिस प्रकोप पुरुष में शुक्र के 84 अंश होते हैं उसी प्रकार स्त्री के रजो बिंदु के 16 अंश होते हैं , जिन्हें षोडश कला की संज्ञा दी गयी है ! संभवत: इन्ही के आधार पर 84 योनियां , 16 श्रंगार , 16 कला , षोडश वर्षीय की कल्पना की गयी होगी ? इन 16 अंशों में 4 अंश पड़दादी के , 8 अंश दादी के और 3 अंश माता के और केवल एक अंश स्वयं के अपने होते हैं ! 4+8+3= 15 इस प्रकार जोड़ने पर कुल 15 अंश होते हैं ! यह अंश अथवा 15 कला , चन्द्रमा की 15 कलाओं से सम्बंधित हैं ! अंतिम 16वीं कला को ‘परमा कला’ कहते हैं ! इसी कला को ‘श्रमा’ अथवा ‘अमावस्या’ भी कहते हैं ! चौथी कला का सम्बन्ध चतुर्थ तिथि से और आठवीं कला का मध्यस्थ अष्टम से समझना चाहिए ! तांत्रिक उपासना/साधना आदि में 4 और 8 तिथि का भावी महत्त्व इसलिए है ! अमावस्या पूर्ण कला है अर्थात षोडशी कला है , क्षमा है ! यही परमाकला या परम शक्ति महामाया है ! इसी में नारी का नारीत्व अथवा स्त्री का स्त्रीत्व विद्यमान है ! दूसरे शब्दों में इसी को ‘मूल शक्ति तत्व’ भी कहते हैं ! इसी प्रकार पुरुष का जो पर कला अथवा कला अथवा ‘शुक्र धरा कला’ है ! वह पुरुष तत्व है ! जिसे शिवत्व या शिव तत्व की संज्ञा दी गयी है ! पुरुष या पौरुष इसी में निहित है ! इसी को ‘सिद्धि’ पुरुषार्थ है जो धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष में पर्यवसित होता है !
अपनों से अपनी बात के अंतर्गत में कहना चाहूँगा जीवन में असफलता का मूल कारण ‘संदेह’ है ! जैसे = होगा या नहीं , करूँ या नहीं , यह मेरे अनुकूल रहेगा या नहीं ? यह वह बीज हैं जो हम अनजाने में अपने जीवन में बो लेते हैं , परिणाम = असफलता , अशांति , वियोग होता है ! गुरुजन कहते हैं = निश्चय कर अपनी जीत लड़ो ! मैं इस बात को उदाहरण देकर समझाता हूँ ! एक कन्या है ! वह किसी पुरुष को देखती है ! मन कहता है यह व्यक्ति उसके लिए वर के रूप में श्रेष्ठ है , तो निश्चय ही होगा ! एक कन्या है उसके लिए एक युवक विवाह के लिए उसके समक्ष लाया जाता है ! उसका मन कहता है यह युवक उसके अनुकूल नहीं है तो अनुकूल नहीं होगा ! यह बात युवक युवती दोनों पर समान रूप से लागू होती है ! स्मरण रखें दिमाग़ भटकाता है , दिल सही राह दिखलाता है ! मेरी अगर इस बात को आप समझते हैं तो ठीक नहीं तो ? = आक़ थू !
अब मैं ‘गर्भ धारण’ के आधार पर चर्चा करूँगा ! आपने देखा होगा कई लोग सब कुछ फिजिकली स्वस्थ होने पर भी नि:संतान रहते हैं और कई पति पत्नी अधिक संतान नहीं चाहते और 5-5 बच्चे हो जाते हैं ! इस संवेदनशील विषय पर विस्तृत चर्चा अपनी अगली पोस्ट में करूँगा ! ‘तंत्र सबके लिए मिशन’ एक संस्था है जो तंत्र के प्रचार प्रसार के क्षेत्र में कार्यरत है ! इसमें कुछ साधक तंत्र सीखने और साधना करने की इच्छा से जुड़ते हैं ! कुछ समय बाद जब उनसे चन्द्रमा दिखाकर पूछा जाता है = वो क्या है ? तो एक साधक कहता है – रोटी , दूसरा साधक कहता है – एक रूपये का सिक्का , तीसरा कहता है – मेरी प्रेयसी का चेहरा , चौथा कहता है – लेम्प ! जिसकी जैसी भावना थी उसने वैसा ही देखा और समझा ! मेरी यह पोस्ट आप समझते हैं तो – शाबाश नहीं तो आक़ थू ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
24/01/2026
मित्रों ! आलोचना करना एक अच्छी बात हो सकती है , करनी भी चाहिए , लेकिन आलोचना अनुभवजन्य और सटीक होनी चाहिए ! ऐसा कुछ नहीं कि मैंने लोगों का समस्या/समाधान नहीं किया 12 वर्ष समस्या समाधान ही किया है ! इसके बाद साधना शिविरों का आयोजन किया ! ना लाभ , ना हानि के सिद्धांत पर , 55 वर्ष पुस्तको का लेखन किया , पत्र , पत्रिकाओ में छपा , कई पत्र पत्रिकाओं का संपादक रहा , कई अवार्ड मिले , लेकिन दीक्षा कभी नहीं दी , पैसा कभी नहीं लिया , कभी किसी से मिलता नहीं , जो भी वार्तालाप होता , वह ‘तंत्र सबके लिए मिशन’ के वरिष्ठ साधकों के माध्यम से होता ! आज स्थिति यह है = धन मेरे पास नहीं , कई बार ओषधियों के लिए भी लोगों का मुंह देखना पड़ता है , तन अशक्त , शरीर वृद्ध और निर्बल चाहकर भी मैं कुछ करने में असमर्थ हूँ , मन , हाँ मन अवश्य करता है आपकी सेवा करूँ लेकिन आयु से अधिक रोग हैं , रोगों के राजा शुगर , रक्तचाप और किडनी के रोग से ग्रस्त हूँ , फ़िर भी वो जिद्द पर हैं कि ‘तांत्रिक बहल’ से मिलेंगे ! कृपया मुझे उस समय तक विश्राम करने दें जब तक चिरविश्राम ना मिल जाए ! आप मुझसे दूरी बनाकर रखें ! साधना शिविर में कम से कम , अति कम साधक आयें , संभव हो तो ना आयें ! अनेक तथाकथित तंत्रगुरु साधना शिविर लगाते हैं ! उनमे जाएँ ! हाँ थोडा गणित अवश्य करलें ! मानलें उन तथाकथित गुरु की आयु 45 वर्ष है ! अब देखिये कितनी शीघ्र उन्होंने तंत्र मार्ग में सफ़लता की सीढियाँ चढ़ी हैं ! इतनी आयु में उन्होंने तंत्र सीख भी लिया , साधना कर सिद्धि भी प्राप्त करली , दीक्षा भी देदी , पुस्तकें भी लिखलीं , साधना शिविर के द्वारा लोगों को सिद्धि भी दिलादी मानो सिद्धि ना हो कोई फल या सब्जी हो बाज़ार में गए और खरीदवा दी ! वास्तव में वह चमत्कारी गुरु हैं ! केवल गुरु ही नहीं गुरु श्रेष्ठ हैं ! आप उनके सानिध्य में साधना करें और 4 – 5 दिनों की साधना के बाद सिद्धि या शक्ति को घर बाँध कर ले आयें ! मेरे पास तो मेरी पोस्टें है जो तंत्रज्ञान का सागर हैं ! जिनमे मेरा अनुभव बोलता है ! कृपया मेरे को आज़ाद छोड़कर सहयोग करें ! इसके बाद भी उत्कृष्ट सहयोग के लिए आपका – तांत्रिक बहल. ! 17 फ़रवरी 2026 मंगलवार को अमावस्या है और है देवपितृकार्य अमावस्या , शिव खप्पर पूजन आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है आप ना आकर मेरे ऊपर एहसान और सहयोग करेंगे ! यह मेरी सूचना मात्र है ! 01 फ़रवरी 2026 रविवार पूर्णिमा जिस दिन सत्यव्रत पूर्णिमा और माघ स्नान का अंतिम दिवस होगा उस दिन से पितरों पर मेरी पोस्टें आरम्भ हो जायेंगीं ! पढना ना भूलें ! वर्तमान में मेरी अति उपयोगी पोस्ट ‘तांत्रिक बिंदु साधना’ चल रही है ! आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि आप पढ़कर पूरा लाभ उठा रहे होंगे ! मुझे पूरा विश्वास है आप समझ नहीं रहे होंगे , हाँ, समझने का नाटक अवश्य कर रहे होंगे , अगर आप पढने का और समझने का धोखा दे रहे हैं तो आक़ – थू ! आज की पोस्ट गर्भ धारण का आधार पर है ! मुल्यांकन करें ! **** स्त्री तत्वमय ‘परमा कला’ और पुरुष तत्वमय ‘परा कला ‘ , शक्ति तत्व का सम्बन्ध मन की अत्यंत सूक्ष्म अवस्थ जिसे अचेतन कहते हैं , से है ! इसी प्रकार ‘प्राण’ की सुक्ष्मावस्था धनंजय से है ! सम्भोग काल में जिस क्षण स्त्री पुरुष के अचेतन मन और धनंजय प्राण का संयोग होता है उसी अवस्था में ‘परा कला’ और ‘परमा कला’ एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं ! यही आदि आकर्षण है जो आदि काम के रूप में शिव शक्ति युक्त होने पर पर्यवसित होता है और इसी स्थिति में गर्भ धारण करती है ! अगर ‘परमा कला’ में आकर्षण अधिक होता है तो कन्या और अगर ‘परा कला’ में अधिक होता है तो पुत्र रत्न की उत्पत्ति होती है ! यही गर्भ का मूल रहस्य है ! ज्योतिष तंत्र के अनुसार स्त्री पुरुष की परा और परमा कला के आकर्षण का सम्बन्ध ग्रह उर्जा से है ! गर्भ धारण के क्षण अगर स्त्री के गोचर में कोई उच्च ग्रह है तो उसकी उर्जा परमा कला में पुरुष की परा कला से अधिक आकर्षण उत्पन्न करेगी ! इसी प्रकार अगरगर्भ धारण के निमित्त पुरुष गोचर में कोई उच्च ग्रह है तो उसकी उर्जा परा कला में परमा कला से अधिक आकर्षण उत्पन्न करेगी ! इसके विपरीत अगर दोनों के ग्रह समान रूप से उच्च हैं दोनों का आकर्षण भी समान होगा ! ऐसी स्थिति में जो गर्भधारण होगा वह या तो पतित (गर्भपात) हो जाएगा या फ़िर जो भी संतान होगी वह किन्नर (नपुंसक) होगी , इसलिए ज्योतिष शास्त्र में गर्भ धारण के निमित्त अनुकूल ग्रह नक्षत्र आदि के अनुसार मुहूर्त व्यवस्था है ! कुछ समझे ? या फ़िर बस गर्दन हिलादी ! मैं निजरूप में श्री श्याम बिहारी मौर्य जी जो सुप्रसिद्ध वैद्य हैं और डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक जो जड़ी बूटी विशेषज्ञ हैं , जयेश भाई गायवाला से निवेदन करूँगा अगर वह समझ गए हैं तो ज़रा ओरों को भी समझाना ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत ,सम्पूर्ण ज्योतिष विद्या एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त एवं गोपनीय तांत्रिक मुद्राएँ प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर , फ़ॉलो और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.
16/02/2023
मित्रों ! आज मैं एक प्रश्न का उत्तर आप लोगों से चाहता हूँ ! मुझे तनिक यह बतलाएं अगर हम एक साधना शिविर में एक साधना के विषय में ज्ञान प्राप्त करें ? और शिविर भी वर्ष में 02 या 03 हों तो कितने वर्ष में हम तंत्र को जानेंगे और कितने वर्ष और लगेंगे तंत्र को साधना करके समझने में ? संभवत: एक जीवन भी कम पड़ जाए ! इसके बाद तंत्रोक्त हवन और व्यवहारिक साधना करने की बात आती है तो समय में और भी वृद्धि हो जायेगी ! अभी इसमें डाउजर , हाजरात , सम्मोहन , हिप्नाटिज्म , मेस्मरेजम और जादूई छड़ी शेष रह जायेगी ! इसका सीधा अर्थ यह हो गया जीवन भर सीखते रहो और धन व्यय करते रहो ! अभी मैं समय , श्रम की बात नहीं कर रहा हूँ ! तो क्यों ना एक साधना शिविर में अनेक विद्याओं की जानकारी दी जाए ? कम व्यय हो और अधिक से अधिक जानकारी मिले ! हमारा ऐसा प्रयत्न होना चाहिए ! भगवान करे आपके पास समय ही समय हो ! आपका जीवन दीर्घ से दीर्घतर हो ! आप अधिक से अधिक सीखें और अधिक से अधिक लोगों की सेवा करें ! अपना मुझे पता है मेरे पास समय और शक्ति दोनों कम हैं ! मैं कम से कम समय में अधिक से अधिक सिखाना चाहता हूँ ! किसी ने क्या खूब कहा है ? अच्छी सूरत भी क्या बुरी शय है , जिसने डाली बुरी नज़र डाली ! मेरी आयु आवश्यकता से अधिक हो गयी है ! रोगों की कोई गिनती नहीं है ! शरीर निरन्तर अपनी शक्ति खोता जा रहा है ! मैं अकेला रहना चाहता हूँ ! कुछ नया सोचना चाहता हूँ ! कुछ नया करना चाहता हूँ ! कुछ नया बताना चाहता हूँ ! लेकिन कुछ स्वार्थ में आकंठ डूबे लोग अपना बिगड़ा , उलझा कार्य सुलझवाने के चक्कर में मुझे इधर से उधर घसीटते रहते हैं तो कुछ गुरूजी निकलें तो हम गुरुधाम में प्रवेश करें ! मेरे ना चाहने पर भी किसी न किसी बहाने से मेरा समय नष्ट करने चले आते हैं ! किसीको अपने कार्य का लालच है तो किसीको गुरुधाम में प्रवेश का ऊपर से मिशन के कुछ शातिर साधक उनसे सहयोग करने को तत्पर रहते हैं ! वह दीखते तो मेरे साथ हैं लेकिन सहयोग उनके साथ करते हैं ! कहा है ‘कर्तम सो भोक्तम’ जो जैसा करेगा वैसा ही फल भोगेगा , यह है गीता का ज्ञान ! आभारी हूँ जयेश भाई गायवाला , डॉ.आर.एस.प्रसाद तांत्रिक , तांत्रिक सूरज , प्रतीक कुमार जायसवाल , स्वामी जी मनोज , बाबा सत्यानन्द दास एवं कुछ अन्यों का जो मेरे साथ यथाशक्ति सहयोग कर रहे हैं ! आप स्वयं निर्णय करलें आप मेरे साथ हैं या अन्य स्वार्थी लोगों के साथ ? यह तंत्र है जो हर पल , हर घडी , हर परिस्थिति में आपके साथ होता है ! जीवन की ऐसी अनेक स्थितियाँ होती हैं जहाँ धन अथवा चतुरायी एक और धरी रह जाती हैं ! यह सत्य है आज के समय में परिश्रम करने से सब कुछ प्राप्त हो सकता है ,लेकिन तंत्र ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता .... सिद्ध , निर्लोभी साधक प्राप्त नहीं हो सकते हैं .......लेकिन जिसे तंत्र ज्ञान मिल जाए , वह दहाड़ता गरजता हुआ शेर बन जाता है , जिसकी एक हुंकार से शत्रु वर्ग थरथरा जाता है ! भय क्या होता है ? चिंता और तनाव क्या होता है ? घबराहट क्या होती है और तुम्हारे जीवन में विषम परिस्थिति कैसे हो सकती हैं ? सम्भव नहीं है , क्योंकि तुम्हारे पास तंत्र ज्ञान का भण्डार है जो यमराज का दण्ड है , इन्द्र का वज्र है , विष्णु का सुदर्शन चक्र है और यम का मृत्युपाश है , जो प्रबल से प्रबल शत्रु को मिटा सकता है और अपना नाम पूरे विश्व में सोने की लेखनी से लिखकर टांग सकता है ! हमें ऐसा तंत्र ज्ञान प्राप्त करना है ! यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं कि वह तांत्रिक बहल ही दे , वह आप प्राप्त करें भले ही विद्वान् कोई भी हो ? मेरी यह बात सदैव ध्यान रखें गीदढ़ों के झुण्ड होते हैं , शेरों के झुण्ड नहीं होते ! चापलूस पैर पकड़ते हैं सच्चा , अच्छा इन्सान सदैव सबसे अलग तनकर खड़ा होता है ! अपनी और साधना शिविर की बात करने से पहले एक ‘अघोरी खप्पर’ साधना बतलाना चाहता हूँ ! यह साधना किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार से प्रारम्भ की जा सकती है ! वस्त्र व आसन श्वेत ही होने चाहिए ! पूर्व की ओर मुख रखें ! सफ़ेद हक़ीक़ की प्राण प्रतिष्ठित माला हो या सतरंगी उर्जित माला होनी चाहिए ! गुलाब की अभिमंत्रित अगरबत्ती जलालें ! गूगल की धूप भी जलालें ! मन्त्र इस प्रकार है – ‘’उत्तरकाल, काल सुन ! सुन जोगी के बापा ! अघोरी की दो बेटी , एक माथे चूहा , एक काते फूला ! दुहाई सच्चे मशानिक अघोरी की ! शब्द सांचा , पिण्ड काचा फुरो मन्त्र , ईश्वरी वाचा’’ ! साधना शिविर में बस अब कुछ ही समय शेष है जोश में उठो और समय से होली साधना शिविर में पंहुचो ! साधकों ! अनेक अनदेखी ,बाधाओं एवं अड़चनो के बाद भी रंग , रस और तांत्रिकों के पर्व होली पर लगाया जाने वाला साधना शिविर कुछ स्वाभाविक नियमो के बाद निश्चित हो गया है ! होली के अवसर पर लगाए जाने वाले साधना शिविर में व्यवस्थित रूप से भोजन और शयन की व्यवस्था शायद इस बार मैं नहीं कर पाउंगा ! मैं चाहता तो हूँ बहुत कुछ करूँ , लेकिन मेरी अपनी भी कुछ सीमाएं हैं ! आपको उस सीमा के भीतर रहकर साधना शिविर में भाग लेना होगा ! तांत्रिकों , साधकों का पर्व होली है ! होली से कुछ समय पूर्व अर्थात 27 फ़रवरी 2023 अष्टमी सोमवार उस दिन दुर्गाष्टमी भी है और होलाष्टक का भी आरम्भ है ! 28 फ़रवरी 2023 मंगलवार तक साधना शिविर चलेगा ! आपने 26 फ़रवरी 2023 रविवार की सांय तक गुरुधाम पंहुच जाना है ! सम्भव हो तो 28 फ़रवरी रविवार तक प्रस्थान कर जाएँ , अन्यथा 01 मार्च बुद्धवार तक निश्चित ही प्रस्थान कर जाएँ ! आप सभी साधक मेरी विवशता अर्थात अस्वस्थता और सीमा को समझते हैं ! जिन सदस्य/साधकों को आये अभी 03 वर्ष हुए हैं , वह सदस्य/साधक साधना शिविर से दूरी बनाकर रखें ! कृपया नियम को मानकर सहयोग करें ! मैं शने: शने: गुरुधाम का रूप बदलने में लगा हूँ ! शीघ्र ही एक नयी उर्जा से भरी टीम आपके सामने होगी ! गुरुधाम में रहने और शयन की सुन्दर व्यवस्था हो इसके लिए समुचित स्थान आवश्यक है ! इसलिए गुरुधाम से अनावश्यक समान हटा रहा हूँ या बेच रहा हूँ ! मेरा सपना है आप जब गुरुधाम में आये तो आपको पूर्ण विश्राम के साथ शुद्ध भोजन भी उपलब्ध कराया जाए ! आपकी समस्याओं के लिए हवन , उपाय कम से कम व्यय में करवा सकूँ ! मैं ऐसी व्यवस्था कर रहा हूँ ! मेरी पुस्तकें और अन्य प्राचीन तंत्र साहित्य आपको पढने के लिए मिल सके इसके लिए एक पुस्तकालय की भी व्यवस्था कर रहा हूँ ! मेरे जो सदस्य/साधक दिल्ली या दिल्ली के आस पास रहते हैं , निश्चय ही मेरे साथ सहयोग करेंगे ! आपका स्नेह , सहयोग और सहायता ही तांत्रिक बहल की वास्तविक शक्ति हैं ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!. अंत में ज्योतिष के कुछ उपयोगी सूत्र प्रस्तुत हैं ! यह न केवल ऋण की दलदल से बचायेंगे साथ ही आपका जीवन भी सुखमय रखेंगे ! मंगलवार को लिया गया ऋण स्थायी हो जाता है , इसलिए न तो इस दिन ऋण लें और ना ही ऋण के लिए आवेदन करें ! मंगलवार को ज़मीन ना तो क्रय करें और ना ही बेचें ! यह सोदा बरबादी का कारण बनता है ! बुद्धवार के दिन भी ना ऋण लें और ना ऋण दें ! मंगल की दशा अन्तर्दशा , प्रत्यंतर में भी ऋण ना लें ! रविवार को हस्त नक्षत्र या अमृतसिद्धि योग घटित होने पर भी ऋण चुकाना शुभ होता है ! ऋण लेने के बाद आप एक बार अपने पीछे थूक दें ! ऋण शीघ्र चुकने की सम्भावना प्रबल होती है ! होली साधना शिविर में निश्चित रूप से पंहुचने के लिए अपनी सीटें आज ही आरक्षित करालें ! मुझे आपकी आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी ! अंत में तुम्हारा अपना ‘तांत्रिक बहल’ सदैव !
14/02/2023
11/02/2023
मित्रों ! बात जब साधना की , तंत्र ज्ञान की आती है तो वह बातें तो साधना शिविर में भी हो जाती हैं ! वही बात जब व्यवहारिक और अनुभव की आती है तो वह तो हमें सिद्ध पीठों पर जाकर भी वह ज्ञान मिल जाता है , लेकिन संसार के व्यवहार का ज्ञान मैं अपनी पोस्टों के साथ तंत्र ज्ञान भी दे देता हूँ ! अब समझने वाले समझ जाते हैं जो नहीं समझते वह झूठे गर्व और स्वार्थ में आकंठ डूबे लोग होते हैं ! मैंने तो जैसे तैसे अपना पूरा जीवन गुज़ार दिया , लेकिन तुम लोग ? किसी सुप्रसिद्ध शायर ने कहा है – ‘’ऐसा लगता है अब तुमको नज़र लग गयी ! तुम ऐसे तो ना थे , तुमको क्या हो गया ? इस कदर ना सता लौट आ लौट आ , फिर ना कहना कोई बेवफा हो गया !’’ मिशन के प्रिय समर्पित साधकों ! तंत्र सीखो , साधना शिविर में भी आओ लेकिन – कभी किसी की ओर अंगुली ना उठाना , पहले कमाना फिर व्यय करना ! यह व्यय और आय का मूल सिद्धांत है ! जहाँ तक बात तंत्र की है , प्रत्यक्ष फलदायक होने से तंत्र वैज्ञानिक युग के लिए अत्यंत उपयोगी शास्त्र है क्योंकि वैज्ञानिक विचारधारा वाले व्यक्ति जिस भी विषय में प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं पाते , उसमे विश्वास नहीं करते हैं ! जिस प्रकार आज के लोग पदार्थ विज्ञान , मनोविज्ञान आदि विषयों में अध्ययन कर सकते हैं , उसी प्रकार संस्कार युक्त मन , दृढ संकल्प और मार्गदर्शक का सहारा लेकर वह स्वयं सत्य को प्रत्यक्ष करने के लिए परीक्षा कर तंत्र के विषय का भी निरिक्षण कर सकते हैं ! तंत्र शास्त्र मन्त्र शक्ति का प्राय: प्रत्यक्ष प्रमाण देता है ! जिस जिस परिमाण में जो सिद्धि चाहिए , वह प्रयत्न करके प्राप्त की जा सकती है और साधक ‘’साधना’ , तंत्र ज्ञान द्वारा क्रमश: उच्च से उच्च तर स्थान को पंहुचता हुआ अंत में परमानन्द को प्राप्त करता है ! कोई भी अधिकारी साधक तंत्र शास्त्र का अनुसरण कर इन सबका प्रत्यक्ष प्रमाण स्वयं प्राप्त कर सकता है ! जिस प्रकार अन्य विद्याओं के द्वार सभी के लिए खुले हैं , ठीक उसी प्रकार तंत्र के द्वार भी सबके लिए खुले हैं ! जिसका जैसा ‘’अधिकार’’ है वह उसी के अनुसार ‘तंत्र’ निर्दिष्ट पद्द्वती से साधना कर वैसी ही सिद्धि पा सकता है ! रोग प्रशमनम , शत्रुता दमन तक सब प्रकार की सिद्धियों की व्यवस्था ‘तंत्र शास्त्र’ में है ! नि:संदेह ‘तंत्र’ इस संसार के लिए ‘कल्पवृक्ष’ के समान है ! लेकिन तंत्र विद्या किसको देनी है ? कब देनी है ? कैसे देनी है ? कहाँ देनी है ? इसका पूरा अधिकार मार्गदर्शक के पास सुरक्षित होता है ! कोई भी साधक मार्गदर्शक से बलपूर्वक , आग्रहपूर्वक , चतुराई से तंत्र विद्या प्राप्त नहीं कर सकता है ! ‘तंत्र शास्त्र’ पारमार्थिक शास्त्र है ! खेद है कुछ स्वार्थी , धन के लोभी , और झूठी गारन्टी देने वालों ने , और बातों के धनी लोगों ने इस विद्या को अपने कुकृत्यों से बदनाम करके रख दिया है ! साधक के लिए प्रकृति से उत्तम गुरु कोई नहीं है ! आज तक साधकों ने जो कुछ भी प्राप्त किया है वह सब प्राकृतिक वातावरण में जाकर ही प्राप्त किया है ! तनिक सोचिये , कुछ मूर्ख लोग पतझड का अर्थ मृत्यु से लगाते हैं ! वह समझते हैं वृक्ष का अंत हो गया , नहीं यह तो नयी फ़सल के आगमन की पूर्व सूचना है ! शुभ सन्देश है ! फ़लों से लदे , झुके हुए वृक्ष हमें सफ़लता और प्रसिद्धि मिलने के बाद भी विनम्र और शालीन बने रहना सिखाते हैं ! बाबा आमटे ज़रा ज़रा सी बात पर रूठ जाते थे ! एक दिन उनकी माँ उन्हें बगीचे में ले गयी ! उन दिनों पतझड का मोसम चल रहा था और पेड़ के सड़े गले पत्ते पीले होकर झड रहे थे ! माँ ने उन पत्तों को दिखाते हुए बाबा आमटे से कहा , पुत्र, देखो ये पुराने पत्ते किस प्रकार अनायास झड रहे हैं ! हमारे ह्रदय के पुराने मनमुटाव , मतभेद को इसी प्रकार झड जाना चाहिए ! उन्हें भी वृक्ष के सड़े गले पत्तों की तरह झटक कर फेंक देना चाहिए ! माँ की इस बात का बाबा आमटे पर गहरा प्रभाव पड़ा ! प्रकृति परमार्थ और परोपकार की प्रतिमूर्ती है ! अपने लिए कुछ ना रख , सब कुछ जीवमात्र को अर्पित कर देती है ! नदी सबकी प्यास बुझाती है , वृक्ष अपने फल स्वयं कभी नहीं खाते है , पुष्प पूरे वातावरण में मधुर सुगंध फैला देते हैं ! प्रकृति किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करती है ! जल , जंगल और ज़मीन जीवन में होने वाले विकास के पर्याय हैं ! हम मनुष्य हैं हमें एक दूसरे पर निर्भर होना चाहिए ! मनुष्य जो वायु छोड़ते हैं उसको पेड़ पोधे सोख लेते हैं और बदले में प्राणवायु , शीतलता मानव समाज को भेंट करते हैं ! साधक भी कठोर साधना करता है ! उसे जब कोई शक्ति प्राप्त होती है तो वह उसे जनकल्याण में लगा देता है ! आप तंत्र को उसके द्वारा होने वाले चमत्कारों को तर्क बुद्धि से नहीं समझ सकते हैं ! इसीलिए बार बार कहा गया है ‘तंत्र ज्ञान’ गुरु गम्य है ! इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर मैं साधना शिविर का आयोजन अपने सीमित साधनों से करता हूँ ! कुछ लोग मेरा विरोध करते हैं ! सोचता हूँ ऐसे लोग कब तक छिपेंगे ? कहा है ना कब तक छुपेगी केरी पत्तों की आड़ में ? सह्रदय मित्रों एवं साधकों ! अनेक अनदेखी ,बाधाओं एवं अड़चनो के बाद भी रंग , रस और तांत्रिकों के पर्व होली पर लगाया जाने वाला साधना शिविर कुछ स्वाभाविक नियमो के बाद निश्चित हो गया है ! होली के अवसर पर लगाए जाने वाले साधना शिविर में व्यवस्थित रूप से भोजन और शयन की व्यवस्था इस बार मैं नहीं कर पाउंगा ! मैं चाहता तो हूँ बहुत कुछ करूँ , लेकिन मेरी अपनी भी कुछ सीमाएं हैं ! आपको उस सीमा के भीतर रहकर साधना शिविर में भाग लेना होगा ! तांत्रिकों , साधकों का पर्व होली है ! होली से कुछ समय पूर्व अर्थात 27 फ़रवरी 2023 अष्टमी सोमवार उस दिन दुर्गाष्टमी भी है और होलाष्टक का भी आरम्भ है ! 28 फ़रवरी 2023 मंगलवार तक साधना शिविर चलेगा ! आपने 26 फ़रवरी 2023 रविवार की सांय तक गुरुधाम पंहुच जाना है ! सम्भव हो तो 28 फ़रवरी रविवार तक प्रस्थान कर जाएँ , अन्यथा 01 मार्च बुद्धवार तक निश्चित ही प्रस्थान कर जाएँ ! आप सभी साधक मेरी विवशता अर्थात अस्वस्थता और आयु की सीमा को समझते हैं ! जिन सदस्य/साधकों को आये अभी 03 वर्ष ही हुए हैं , वह सदस्य/साधक साधना शिविर से दूरी बनाकर रखें ! कृपया नियम को मानकर सहयोग करें ! मैं शने: शने: गुरुधाम का रूप बदलने में लगा हूँ ! शीघ्र ही एक नयी टीम आपके सामने होगी ! गुरुधाम में रहने और शयन की सुन्दर व्यवस्था हो इसके लिए समुचित खुला स्थान आवश्यक है ! इसलिए गुरुधाम से अनावश्यक समान हटा रहा हूँ या बेच रहा हूँ ! मेरा सपना है आप जब गुरुधाम में आये तो आपको पूर्ण विश्राम के साथ शुद्ध भोजन भी उपलब्ध कराया जाए ! आपकी समस्याओं के लिए हवन , उपाय कम से कम व्यय में करवा सकूँ ! मैं ऐसी व्यवस्था कर रहा हूँ ! मेरी पुस्तकें और अन्य प्राचीन तंत्र साहित्य आपको पढने के लिए मिल सके इसके लिए एक पुस्तकालय की भी व्यवस्था कर रहा हूँ ! मेरे जो सदस्य/साधक दिल्ली या दिल्ली के आस पास रहते हैं , निश्चय ही मेरे साथ सहयोग करेंगे ! आपका स्नेह , सहयोग और सहायता ही तांत्रिक बहल का सम्बल है ! अधिक जानने के लिए और मेरी पुस्तक “तंत्र भैरवी मिन्ही” ( उपन्यास रूप ) , टोना टोटका गंडे , तावीज़ , नज़र , डोरा , भभूत एवं अप्सरा साधना रहस्य प्राप्त करने अथवा वास्तु विजिट के लिए जयेश भाई गायवाला से आज ही सूरत ( गुजरात ) मोबाइल मोबाइल न. 09825574899 पर सम्पर्क करें कृपया वाटस एप्प ( WHATTS APP . ) नहीं करें ! WHATT’S APP करने पर आपके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ! सनसनीखेज़ – रोचक – रोमांचक – रहस्यमय – होरर तंत्र और ज्ञानवर्धक काल्पनिक कथा / लेख के लिए मेरे पेज “तांत्रिक बहल की तंत्र यात्रायें” में मेरी सर्वथा नयी तंत्र मन्त्र कथा “तांत्रिक पण्डित” पढ़ें अर्थात लोमहर्षक घटनाओं की दास्तान या जिसने खोजा है उसने ही इस रहस्य को पाया है ! ज्ञान प्राप्ति के लिए यह उक्ति एकदम सही चरितार्थ होती है , स्वयं पढ़ें और अन्य तंत्र प्रेमियों को भी पढने के लिए प्रेरित करें ! U . TUBE पर मेरे चैनल TA**RA SABKE LIYE MISSION ( tm ) में मुझे लाइव देखें और लाइक , शेयर और सब्सक्रायिब भी करें ! ! शेष फिर ! गुरु स्मरण !! हरी ॐ प्रभु !!!.अंत में अपनी बात को पुन: दोहराता हूँ – एक बार जब आप तंत्र के पावन क्षेत्र में आ गए हो तो लहराकर उठो , जागो सब कुछ पीछे छोड़कर आगे निकल जाओ ! जीवन के अद्रश्य बंधन कभी भी गति नहीं देंगे वह तो मैं , मेरा , तू तेरा के बंधन में बांधेंगे ! तंत्र में तेरा मेरा नहीं है ! सब सबका है ऐसे विचार होते हैं सच्चे साधको के ! साधना शिविर एक होने का , नेक होने का सन्देश देता है !
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