Riya Pandit
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14/02/2026
बचपन में मेरे घर में बजाज का चेतक स्कूटर हुआ करता था...!
उस समय कहा जाता था कि बजाज का चेतक स्कूटर बहुत अच्छा होता है.
अब वो अपने समय के हिसाब से बहुत अच्छा होता था या नहीं ये तो मुझे नहीं मालूम है लेकिन 175 cc का इंजन होने के कारण उसमें पिकअप बहुत होता था.
खैर, हाई स्कूल तक तो मैं साइकिल से ही स्कूल जाया करता था..
लेकिन, इंटर (+2) में मैं कभी कभी पापा का स्कूटर ले कर कॉलेज चला जाता था.
तो, मैं एक बार यूँ ही स्कूटर लेकर कॉलेज चला गया था.
वहाँ कॉलेज में मेरे एक घनिष्ठ मित्र को पता नहीं क्या जरूरी काम आ गया कि उसने मुझसे स्कूटर माँगा कि चाभी दो...
हम 10-15 मिनट में घर से आते हैं.
शायद उसे घर से कोई किताब लाने थे.
चूँकि, वो काफी घनिष्ठ मित्र था..
इसीलिए... स्कूटर, उसे "ठीक से चलाने" का नसीहत देकर चाभी उसे सौंप दी....
जो कि स्कूटर निकालते समय हमेशा मुझे भी सुनना पड़ता था कि...
"ठीक से चलाना".
खैर, स्कूटर ले जाने के महज 5-7 मिनट बाद ही वो वापस लौट आया और मुझे गरियाते हुए बोला कि....
भाऊ श्री के..
तुम्हारा ये गाड़ी है कि घोड़ा है रे ?
साला ब्रेक मारो तो गाड़ी और तेज चलने लगती है.
पकड़ अपनी गाड़ी...!
इस पर मैंने उसे समझाया कि...
अबे, पगलाओ मत ज्यादा...
गाड़ी ब्रेक से चलती है कि एक्सीलेटर से ??
जरूर तुमने गलती से एक्सीलेटर घुमा दिया होगा.
इस पर मित्र ने झिड़कते हुए कहा कि...
ज्यादा फालतू बात मत करो.
खुद ही चला कर देखो तो समझ आएगा.
उसकी ऐसी कॉन्फिडेंस भरी बात सुनकर टेस्ट के लिए मैंने खुद स्कूटर स्टार्ट किया और जोश में भगा दिया...!
लेकिन, जब ब्रेक लगाया तो मेरे भी होश उड़ गए...
क्योंकि, वास्तव में ब्रेक लगाने पर गाड़ी और तेज हो जा रही थी...!
जैसे तैसे... राम-राम करते हुए मैंने स्कूटर रोका..
और, उसे लुढ़काते हुए ले जाकर पहले ब्रेक बनवाया..!
जहाँ मिस्त्री ने बताया कि.... ब्रेक खराब नहीं है बल्कि किसी कारण से ब्रेक वायर ढीला हो गया था इसीलिए ब्रेक बहुत ही हल्का लग रहा था.
इस पर मैंने मिस्त्री को बोला कि...
अरे, हल्का लगे या न लगे... वो अलग बात है.
लेकिन, साला ब्रेक लगाने पर गाड़ी और तेज भाग काहे रही थी ?
इस पर मिस्त्री ने हँसते हुए कहा कि...
अरे, गाड़ी भाग नहीं रही थी बल्कि तुमको ऐसा लग रहा था.
फिर, स्कूटर ठीक हो गई और मैं वापस आ गया.
लेकिन, वापस आने के बाद भी मन में यही चलता रहा कि ... साला, गाड़ी तो एक्सीलेटर से ही चलता है.
फिर, ब्रेक दबाने पर गाड़ी तेज कैसे हो जा रही थी ???
काफी सोचने के बाद .. अंततः मुझे ये समझ आ गया कि...
अरे यार,
वो मिस्त्री सही ही कह रहा था कि... गाड़ी तेज भाग नहीं रही थी (बल्कि, हल्का-हल्का ब्रेक ही लग रहा था).. बल्कि, मुझे ऐसा महसूस हो रहा था.
असल में होता है ये कि... हमारा दिमाग इस बात के लिए सेट है कि अगर हमने ब्रेक दबाया तो गाड़ी रुकनी चाहिए.
और, अगर ब्रेक पर खड़े हो गए तो गाड़ी को भी वहीं पर खड़ी हो जानी है.
लेकिन, जब हमारे ब्रेक दबाने पर भी हमारी अपेक्षा के अनुरूप गाड़ी नहीं रुकती है तो हमें ऐसा लगता है कि...
ब्रेक दबाने पर गाड़ी और तेज हो गई है.
जबकि, गाड़ी तेज नहीं होती है...
बल्कि, उसमें ब्रेक काफी हल्का लगता है.
अब ब्रेक हल्का लगने के भी बहुत से कारण होते हैं कि...
शायद, ब्रेक शू घिस गया हो , ब्रेक ऑयल कम हो गया हो या फिर उसका वायर ढीला हो.
कहने के मतलब है कि....
ये सब दिमाग का खेल है.
क्योंकि, हमारा दिमाग हर चीज के लिए सेट है कि अगर हम ऐसा करेंगे तो परिणाम ऐसा होना चाहिए..!
और, जब हमें वैसा होते नजर नहीं आता है तो हमें लगता है कि ब्रेक दबाने पर हमारी स्कूटर और तेज हो गई.
अब ये ब्रेक और स्पीड वाली बात जितना हमारे स्कूटर, मोटरसाइकिल और कार आदि पर लागू है...
उतना ही हमारे समाज, धर्म और राजनीति पर भी लागू है.
उदाहरण के लिए... आज बहुत से लोगों को लगता है कि.... केंद्र में भाजपा का शासन आ जाने के बाद तुष्टिकरण और तृप्तिकरण की गाड़ी काफी तेज हो गई है...!
तो, उसका कारण भी वही "माइंड सेटअप" है.
असल में... राजनीति और सिस्टम के काम करने के तरीके से अनजान लोगों को ऐसा लगता था कि.... भाजपा / मोई का शासन आने के बाद....
मोई जी, लालकिले से प्राचीर पर चढ़ कर गरज कर पूछेंगे कि...
"कौन है रे मा.चो. ?
साले, अगर आज के बाद नमाझ पढ़ा या ईद-फीद मनाया तो में डंडा करके उलट देंगे.
काहे कि... आज से भारत एक हिनू राष्ट्र है...
समझ गए ???"
लेकिन, ऐसा हो सकना न तो संभव था और ही हुआ.
बल्कि, शासन पूर्ववत ही सुचारू रूप से चलता रहा.
परिणामतः... ऐसे लोगों को "लगने लगा" कि... मोई रूपी ब्रेक लगाने के बाद गाड़ी और तेज भागने लगी है.
जबकि ऐसा है नहीं...
क्योंकि, अगर ऐसे लोग हड़बड़ाने की जगह गाड़ी की स्पीडोमीटर पर नजर दौड़ाते तो उन्हें समझ आ जाता कि...
जहाँ कश्मीर समेत पूरे भारत में आतं कवाद अपने चरम पर था और आये दिन किसी न किसी शहर में बम फूटा करते थे...
धर्मांतरण अपने चरम पर था...
हज सब्सिडी में हजारों करोड़ फूंके जा रहे थे..
राजभवन एवं प्रधानमंत्री आवास को इफ्तारी का अड्डा बना दिया था...
भगवान राम को काल्पनिक एवं रामसेतु को फालतू बताया जा रहा था....
देश में राम का नाम लेना तक साम्प्रदायिक माना जाने लगा था...
कुछेक मजहब के लोग खुद को कानून व्यवस्था से ऊपर मानने लगे थे...
यहाँ तक कि पिगिस्तान जैसा चिन्दी चोर भी हमारी छाती पर चढ़कर तांडव करने को उतारू था...
और, सबसे बड़ी बात कि... भारत की सनातनी पहचान को ही बदल कर इसे ताजमहल और कुतुबमीनार से जोड़ा जाने लगा था.
सब बंद हो चुका है.
और, अब... सबका रिवर्स हो रहा है.
देश में आतं कवाद अब बीते दिनों की बात हो चुकी है तथा हज सब्सिडी का कहीं नामोनिशान नहीं है.
हमारे राजभवन एवं सरकारी आवासों में धूमधाम से कन्यापूजन आयोजित किया जा रहा है..
तथा, दीपावली एवं रामनवमी आदि में लाखों दीप जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में रिकॉर्ड दर्ज करवाया जा रहा है.
और सबसे महत्वपूर्ण कि... अब उस ताजमहल और कुतुबमीनार को साइड लाइन करके.... सनातनी भारत के पहचान तौर पर भव्य काशी कॉरिडोर, महाकाल कॉरिडोर, अयोध्या के राममंदिर, वृंदावन में विश्व के सबसे बड़े कृष्ण मंदिर आदि को उभारा जा रहा है.
कुल मिलाकर.... गाड़ी में ब्रेक लगाई जा रही है जो सफलता पूर्वक लग भी रही है.
लेकिन, सबसे मुख्य सवाल कि... ये सब ठीक है.
लेकिन, इस हाइटेक जमाने में इतना हल्का ड्रम ब्रेक क्यों लगाया जा रहा है ?
डिस्क या पावर ब्रेक लगाकर झटके से गाड़ी को क्यों नहीं रोका जा रहा है ???
तो, इसका बहुत ही आसान सा जबाब है कि... गाड़ी में बहुत पैसेंजर हैं..
जो बिना किसी सीटबेल्ट के गाड़ी में बहुत लापरवाही से बैठे हुए हैं.
इसीलिए, अगर गाड़ी के डिस्क ब्रेक या हैंड ब्रेक का इस्तेमाल करके झटके से गाड़ी को रोका गया तो पैसेंजर्स को बहुत ज्यादा कैजुअल्टी हो सकती है और गाड़ी की जो एक्सीडेंट होगी सो अलग.
क्योंकि, सड़क की हालत अच्छी नहीं है और बरसात (हिनूओं की उदासीनता) होने की वजह से सड़क पर काफी फिसलन है एवं बड़े बड़े रोड ब्रेकर (बड़का कोठा, मानवाधिकार आदि) हैं.
इसीलिए, कोई कुछ भी कहे...
लेकिन, मेरी नजर में सबसे कुशल ड्राइवर वही है जो न सिर्फ गाड़ी को डेस्टिनेशन पर पहुँचा दे...
बल्कि, उससे भी ज्यादा जरूरी है कि सारे पैसेंजर को सुरक्षित रखते हुए गाड़ी को डेस्टिनेशन तक पहुंचा दे.
और, मोई जी वही कर रहे हैं...!
जय महाकाल...!!!
Kumar Satish
12/02/2026
कभी इस बात पर गहराई से सोचा है कि जब एक स्त्री किसी पुरुष के सामने खुद को पूरी तरह खोलती है..????
तो वह सिर्फ अपना शरीर नहीं,अपना भरोसा, अपना डर,अपनी इज़्ज़त और अपना दिल भी सौंपती है..???
यह कोई आम बात नहीं होती।यह हर किसी के साथ नहीं होता।
यह सिर्फ उसी के साथ होता है जिसे वह अपना मान चुकी होती है..???
इसलिए अगर किसी स्त्री ने तुम्हें अपने अस्तित्व का हर सच दिखाया है,
तो याद रखना...
अब तुम्हारी ज़िम्मेदारी सिर्फ उसे चाहने की नहीं,उसका सम्मान निभाने की भी है।
एक औरत मर्द के सामने इसलिए नहीं खुलती कि वह उसे हल्के में ले,बल्कि इसलिए खुलती है कि उसका दिल कहीं और न भटके..???
कि उसकी निगाहें सिर्फ उसी पर ठहर जाएँ।
वह चाहती है कि मर्द उसे दुनिया से छुपाए नहीं,लेकिन दिल में सबसे ऊपर रखे।
क्योंकि जिस रिश्ते में भरोसा होता है,वहाँ जिस्म से पहले आत्मा जुड़ती है।
और जो मर्द उस भरोसे की कद्र करना सीख जाता है,वही सच में मर्द कहलाने के काबिल होता है।
याद रखना...
प्यार जिस्म से शुरू हो सकता है,लेकिन चलता है
सम्मान से....
12/02/2026
सस्ती दारु, पोर्न फ़िल्में, मोबाइल फोन में आती अनचाही अर्धनग्न तसवीरें , सस्ता नशा, देश में फैले हुए ड्रग माफिया हर वस्तु में हो रही मिलावट, नकली घी, तेल, दाल, चावल, आटा, सब्जियां, लगातार प्राकृतिक संसाधनों का निजीकरण पर्वत पहाड़ जल, वन, पशुओं की हत्या, बेरोजगारी, भूख और नर्क किसे कहते हैं!! यही तो नर्क होता है!! बस नेट सस्ता है जिससे जनता सवाल ना पूछे और यदि कोई बुद्धिजीवी कोशिश भी करता है बोलने की तो उसके पीछे सोशल मीडिया के भाड़े के टट्टू लगाकर उपहास उड़ाया जाता है रिपोर्ट मरवाई जाती है! नेता चाहते हैं कोई मुद्दे की बात पर चर्चा नहीं हो.. देश सिर्फ सुरा सुन्दरी में डूबा हो!! तभी live in relationships आया है!! लोगों के 25- 25 वर्ष के रिश्ते टूट गए!! कोई सुनवाई नहीं कोई कानून का भय नहीं. कोई शर्म लिहाज नहीं... रोटी मिले ना मिले सुरा सुन्दरी मिल जाए बस यही ख्वाहिश होती है!! अश्लीलता रोकने के बजाय इतनी फैला दी गई है कि अब वैश्यालयों की आवश्यकता नहीं होती!! किसी देश का बेड़ा गर्क करना है तो वहाँ की परम्पराओं को तोड़ दीजिए..और यही किया जा रहा है फिल्मी हीरोइन हीरो यही कर रहे हैं!! अब तो स्त्रियों ने चड्डी पहनना भी बंद कर दिया है!! नग्नता सीधे घरों में आ रही है!! पहले फ़िल्में साफ सुथरी होती थी रेडियो पर लता आशा किशोर मुकेश के कर्णप्रिय गीत होते थे जो आत्मा को प्रेम की पवित्रता से भर देते थे!! आजकल संगीत ही फूहड़ है चोली के पीछे क्या है? चने के खेत में, तनै छोड़ूंगी भरतार जैसे गीतों ने लोगों के मस्तिष्क में गन्दगी भर दी है!! जब विचार गंदे होते हैं तभी कामुकता जन्म लेती है!! विचारों को गीतों द्वारा नग्न स्त्रियों द्वारा जानबूझकर भड़काया जाता है!! और फिर अपराध बलात्कार होने पर कड़े कानून का ना होना अपराधी का छूट जाना उसके हौसले बुलंद करता है!! .. कितना हास्यास्पद है कि जमीन के नीचे पानी का दोहन टनों में किया जाता है और लोगों को टूथपेस्ट करते वक्त पानी बचाने की सलाह दी जाती है!! उसी प्रकार लोगों की सेक्स भावनाओं को जानबूझकर उत्तेजित किया जा रहा है और फिर बलात्कार के लिए निर्दोष स्त्रियों को दोषी ठहराया जाता है!! जातिवाद समाप्त नहीं किया जाता है सरकारी रिकार्ड में सबसे पहले जन्म लेते ही फार्म भरवा लिया जाता है और फिर असमानता कि बात कही जाती है!!कैसे आएगी समानता कौन लाएगा? सदियाँ बीत गई लेकिन हम लोग भारतीय नहीं बन सके.. लोग हिन्दू मुस्लिम ईसाई है लेकिन अफसोस भारतीय कोई नहीं है... और जाते जाते कड़वा सच. ये सभी नेता विदेशों में भाग जायेगे इनके बच्चे वहीं पढ़ते हैं और बर्बाद होगे आप और हम...और हमारी आने वाली पीढ़ी..✍️😢
12/02/2026
अगर कोई आपको बिना वजह बहुत ज़्यादा प्यार दे रहा है, अगर कोई अनजान इंसान अचानक आपकी ज़िंदगी का सबसे खास बन गया है, अगर कोई रोज़ कहे कि “तुम ही मेरी दुनिया हो”, तो ज़रा रुकिए… क्योंकि हो सकता है आप हनी ट्रैप की तरफ बढ़ रहे हों। ये वीडियो सिर्फ लड़कों के लिए नहीं है, सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं है, ये वीडियो हर उस इंसान के लिए है जो मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया इस्तेमाल करता है। बहुत से लोग आज जेल में हैं, बहुत से लोग कर्ज़ में डूबे हैं, बहुत से लोगों की शादी, नौकरी, इज्जत सब खत्म हो चुकी है — और शुरुआत बस एक मैसेज से हुई थी।
हनी ट्रैप का मतलब सिर्फ अश्लीलता या गलत रिश्ता नहीं होता। हनी ट्रैप का असली मतलब है किसी इंसान की भावना, अकेलेपन, भरोसे और कमजोरी का फायदा उठाकर उससे पैसा, इज्जत या जरूरी जानकारी छीन लेना। इसमें सामने वाला पहले आपको अपना बनाता है, आपका भरोसा जीतता है, आपको खास महसूस कराता है और जब आप पूरी तरह से जुड़ जाते हैं, तब असली खेल शुरू होता है। सबसे खतरनाक बात ये है कि जब तक इंसान को समझ आता है कि वो फँस चुका है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
सबसे पहले बात होती है सोशल मीडिया से। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, डेटिंग ऐप या शादी के ऐप पर एक खूबसूरत प्रोफाइल आती है। फोटो अच्छी होती है, बातें शालीन होती हैं, कोई जल्दी नहीं करता। रोज़ हालचाल पूछता है, आपकी बात सुनता है, आपकी परेशानी समझता है। धीरे-धीरे आप खुद इंतज़ार करने लगते हैं उसके मैसेज का। यहीं से दिमाग नहीं, दिल काम करने लगता है।
इसके बाद वीडियो कॉल आता है। अक्सर रात के समय, हल्की रोशनी में, बेड या सोफे पर बैठकर। सामने वाला बहुत नॉर्मल दिखता है, रोमांटिक बातें करता है। कई बार रिकॉर्डिंग चुपचाप हो रही होती है और सामने वाले को पता भी नहीं चलता। यही वो मोड़ होता है जहाँ से ब्लैकमेल का रास्ता खुलता है।
फिर किसी न किसी बहाने से पैसों की बात आती है। कभी बीमारी, कभी बिज़नेस में नुकसान, कभी निवेश का मौका, कभी विदेश जाने की तैयारी, कभी शादी से पहले की मजबूरी। पहली बार इंसान सोचता है, “कोई बात नहीं, अपना ही तो है।” लेकिन जैसे ही एक बार पैसा चला गया, समझ लीजिए अब आप टारगेट बन चुके हैं। माँग रुकती नहीं, बढ़ती जाती है।
कई लोग शादी के नाम पर फँसाए जाते हैं। मैट्रिमोनियल ऐप पर रिश्ता, परिवार की बातें, सगाई की तारीख, फिर अचानक कोई इमरजेंसी। शादी से कुछ दिन पहले फोन बंद। बाद में पता चलता है कि सामने वाला पहले से शादीशुदा है या पूरे गैंग का हिस्सा है।
नौकरी, मॉडलिंग, कास्टिंग और वेब सीरीज़ के नाम पर भी बहुत से लोग फँसते हैं। ऑडिशन के बहाने मिलने बुलाया जाता है, फिर वीडियो या फोटो के ज़रिए दबाव बनाया जाता है। बहुत से लोग बदनामी के डर से चुप रह जाते हैं।
अब सच्ची घटनाओं की बात करते हैं। एक लड़का, प्राइवेट नौकरी करता था, इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई, तीन महीने में रिश्ता गहरा हो गया। एक रात वीडियो कॉल हुआ। कुछ दिन बाद मैसेज आया कि अगर पैसे नहीं दिए तो वीडियो परिवार और ऑफिस में भेज दिया जाएगा। पहले उसने पैसे दिए, फिर माँग बढ़ी, और जब पैसे खत्म हुए तो वीडियो भेज दिया गया। नौकरी गई, समाज में बदनामी हुई, आदमी अंदर से टूट गया।
एक और मामला विदेश का है। डेटिंग ऐप पर प्यार हुआ। सामने वाला खुद को बड़ा अफसर बताता था। रोता था, भावुक बातें करता था। महिला ने लोन लेकर पैसे भेजे। बाद में पता चला कि वही आदमी दर्जनों लोगों को एक जैसी कहानी सुना रहा था। महिला पर लाखों का कर्ज़ चढ़ गया।
एक लड़की की शादी तय हो चुकी थी। लड़के ने कहा बस शादी से पहले एक छोटा सा लोन है। लड़की ने गहने गिरवी रखे। शादी से दस दिन पहले लड़का गायब। बाद में पता चला कि वो कई जगह यही कर चुका है।
सबसे खतरनाक केस तब होते हैं जब सेना, पुलिस या सरकारी कर्मचारी फँसते हैं। पहले प्यार, फिर सवाल — ड्यूटी कहाँ है, लोकेशन क्या है, फोन बंद क्यों रहता है। ये जानकारी धीरे-धीरे बाहर जाती है और मामला सिर्फ व्यक्ति का नहीं, देश की सुरक्षा का बन जाता है।
अब सबसे ज़रूरी बात — अगर कोई फँस जाए तो क्या करे। सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं वो है डर जाना। डर के कारण पैसे भेजते रहते हैं, चुप रहते हैं और सोचते हैं कि मामला खुद ही खत्म हो जाएगा। ऐसा कभी नहीं होता। पैसा देने से मामला रुकता नहीं, और बिगड़ता है।
अगर आप या आपका कोई जानने वाला फँस गया है तो सबसे पहले सारे सबूत सुरक्षित रखें — चैट, कॉल डिटेल, पैसे के ट्रांजैक्शन। एक रुपया भी और मत भेजिए। तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। परिवार या किसी भरोसेमंद इंसान को ज़रूर बताइए। बदनामी का डर सबसे बड़ा हथियार होता है अपराधियों का, और वही डर उन्हें ताकत देता है। जैसे ही आप सच सामने लाते हैं, उनका कंट्रोल टूटने लगता है।
हर प्लेटफॉर्म से उस व्यक्ति को ब्लॉक और रिपोर्ट करें। अकेले मत लड़िए। कानून आपके साथ है, लेकिन आपको पहला कदम उठाना होगा।
आख़िर में एक बात हमेशा याद रखिए — जो सच में आपसे प्यार करेगा, वो आपसे पैसे नहीं माँगेगा, आपको डराएगा नहीं, आपको ब्लैकमेल नहीं करेगा। ऑनलाइन दुनिया में धीरे चलना ही समझदारी है। वीडियो कॉल पर निजी होना, अनजान व्यक्ति को पैसे भेजना, ये सब सबसे बड़े खतरे हैं।
इस फोटो को शेयर कीजिए। हो सकता है आपकी एक शेयर से किसी की ज़िंदगी बच जाए। हनी ट्रैप में सबसे पहले शरीर नहीं, दिल और दिमाग फँसता है। सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए।
12/02/2026
कामुकता लड़का हो या लड़की सभी के अन्दर आज कूट कूट के भरी है, आज के समय 15 वर्ष की लड़किया प्रेग्नेंट हो रही हैं पर उन्हें ये नहीं पता होता है कि वो किससे प्रेग्नेंट होती है
पेशे से मै भारत के एक बड़े शहर में सीनियर गायनकोलॉजिस्ट हूं,
एक बार मेरे पास एक लड़की आती है जिसे पेट में हल्के दर्द की समय था वो अभी क्लास 11 में पढ़ती थी, और और महज 15 16 साल की थी,
मैने शुरुवाती जांच की तो मुझे शक हुआ कि हो सकता है ये प्रेग्नेंट है, लेकिन जब रिपोर्ट आई तो वो सच में।प्रेग्नेंट थी,
मुझे लगा कि उसके साथ किसी ने कुछ गलत तो नहीं किया इस लिए मैने कम से कम 1 से 2 घंटा उसका समय लिया और काउंसलिंग की जिसमें इस बात की पुष्टि हुई कि किसी ने गलत नहीं किया है
मैने कुछ दावा देके उसका भरोसा जीता और बोला 2 दिन बाद फिर आओ
आज दूसरा दिन था
वो आई
मैने बोला और कैसी हो दर्द कैसा है
उसने बोला मम दर्द ठीक है लेकिन पेट में भारी पान लगता है
मैने बोला " बेटा किसी के साथ कोई रिलेशनशिप में हो ? "
उसने बोला नहीं मम मै तो बस स्कूल जाती हूं
फिर मैने बिना समय गवाए बोला
" देखो तुम 2 3 वीक की प्रेग्नेंट हो तुम्हारा बच्चा स्वास्थ्य लेकिन डरने की बात नहीं ये बात पूरी तरह से गोपनीय है
अब तुम बताओ इस बच्चे को जन्म देना चाहती हो या दवा देके इसे साफ करना चाहती हो"
उसने बिना कुछ सोचे बोला डॉक्टर मेरी उम्र नहीं की मै बच्चे को पैदा करु इस लिए आप इसे साफ कर दीजिए
मैने बोला कि अच्छा ठीक है तो जरा उसे बुलाओ जिसका ये बच्चा है, क्यों की मुझे जरूरी काम है बिना ये जाने मै आगे नहीं बढ़ सकती
उसने बोला मुझे नहीं पता कि किसका बच्चा है ये
मैने बोला क्यों ऐसा कैसे हो सकता है,
इसे उसने बोला उसके 7 से ज्यादा लड़कों के साथ संबंध है
जिसे सुनकर मैं हैरान थी मैने उससे पूछा उसने ऐसा क्यों किया
उसने जवाब दिया पहली बार तो बस ये जानने के लिए किया था कि कैसा लगता है धीरे धीरे आदत बन गई
उसके बाद अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अलग लग लड़के कुछ भी करने को तैयार रहते थे अगर मैं अपना शरीर उन्हें सौंप दूं तो
मैने पूछा तुम्हारी ऐसी कौनसी जरूरत है जिसे पूरा करने की जरूरत है
जवाब था
I phone लेना उसका रिचार्ज महंगे रेस्टुरेंट में जाना पार्टी करना ट्रिप पर जाना ये सब कैसे होगा
मैने उसे समझाया बेटा जिंदगी में मित्र रखो लेकिन जिसके साथ सहवास करना है वो एक इंसान रहे उसपे उसका जवाब अजीब था
मैम आज फ्रेंड विद बेनिफिट का जमाना है मतलब ऐसे दोस्त जिनके साथ हम सब कुछ कर सकते हैं
यानी शारीरिक जरूरत भी पूरी कर सकते हैं
किसी से कोई कमिटमेंट नहीं और एंजॉय पूरा
खैर मेरे पास जवाब में कुछ नहीं था मैने उसे सलाह दी कि ये सब मत करो और बार बार नाचे साफ करना जानलेवा है
वो वहां से गई लेकिन साल भर में ना जाने कितनी ऐसी लड़कियों आगई जो सिर्फ ये चाहती थी कि उनके बारे में किसी को पता ना चले और ये उनकी प्रेग्नेंसी भी खत्म हो जाए
मेरा सवाल बच्चों से नहीं उनके मां बाप से क्या आप पैसे कमाने में इतना बिजी है कि बच्चे क्या कर रहे कहां जा रहे आप को नहीं पता ??
और मा से भी आजकल की मां मोबाइल में इतना बिजी है कि। उन्हें होश नहीं की उनकी बेटियां और बेटे कहां जा रहे हैं क्या कर रहे हैं
क्या कभी अपने जानने की कोशिश की आप की बेटी जो मोबाइल इस्तेमाल कर रही है उसकी कीमत क्या है
??
अब मैं इसे पढ़ने वालो से पूछती हूं समाज में फैल रहे इस नासूर का जिम्मेदार कौन है ??
आज कल की फिल्म या सोशल मीडिया पे फैली गंदगी ?? अपना जवाब दीजिए
12/02/2026
🌹कामवासना दिवस🌹 (Vellentine day)
बाप ने कतरा कतरा जमा करके कमाई थी इज़्ज़त
बेटी "वेलेंटाइन डे" पर एक चॉकलेट पे बेच आयी अपनी इज़्ज़त।
14 फरवरी हवस दिवस ।।
तीन चीजे... ध्यान देने की है......
वैलेंटाइन को सपोर्ट/प्रोमोट कौन करता है...
बॉलीवुड , टीवी सीरियल, प्राइवेट न्यूज चैनल/ FM रेडियो , वामपंथी , महिलावादी बुद्धिजीवी
# कमाई किसकी होती है...
शुरू में...
विदेशी गिफ्ट कम्पनियों की, विदेशी चाकलेट, बेकरी कम्पनियों की, विदेशी precaution ( कॉन्डोम / गर्भनिरोधक गोलियों ) की , पोर्न इंडस्ट्रीज की, बॉलीवुड/फिल्मो की...
बाद में...
गर्भपात करने वाले डॉक्टर्स की, अजन्मे बच्चो को बेचकर, बाझपन/कैंसर/गुप्त रोग के डॉक्टर्स और स्त्री रोग विशेषज्ञों की, सोशल नेट्वर्किंग एप्प और पोर्न साईट की, सच्ची घटनाओ पर आधारित टीवी सीरियल/शोर्ट मूवी की, ट्रैफिकिंग के बाद अंग व्यापार और जू प्रोडक्ट इंडस्ट्रीज की, महिला सुरक्षा के खोखले वादों पर वोट बनाने वाले और फर्जी योजनाए चलाने वाले नेताओ...और भी कई हैं...बड़े छोटे...
इसमें फंसती/मरती कौन हैं...
छोटे शहरों के मध्यमवर्गीय और निचले तबके की ज्यादातर पढ़ी लिखी लड़किया,,,जिनके परिवार का कोई राजनैतिक और क़ानूनी पकड़ नही होता...सीधे साधे और दुनियादारी से अनजान भोले और मूर्ख टाइप के लोग...
जैसे की आप...और आपकी बेटी...
इसमें ऐसा कुछ भी नही जो आप नही जानते...आप सबकुछ जानते हो...
दिसम्बर से फरवरी तक...एक मास्टर लेवल की स्क्रिप्ट रची जाती है...फिर बड़ी सफाई से प्यार / मोहब्बत / आशिकी के नाम पर बड़े स्तर पर लड़कियों को फसाकर / मारकर अरबो रूपये का देशी विदेशी व्यापार होता है...
वैलेंटाइन कोई त्यौहार नही है...यह बड़े लेवल का बिजनेस इवेंट है...
फरवरी लडकियों के लिए सबसे खतरनाक महिना होता है...अपनी बच्ची का विशेष ध्यान रखे...क्योंकि जो दूसरी लडकियों के साथ हो रहा है....वो आपकी बेटी के साथ नही होगा...उसकी कोई गारंटी नही...
कुछ भी अचानक से नही होता,,,उसके पीछे कारण होता है...वो कारण है... 👉🏻 पैसा
👉🏻 विचार किजिए
अब वैलेंटाइन वाले सारे पोस्ट अपने सभी चाहने वालो तक ज्यादा से ज्यादा कॉपी पेस्ट या शेयर करे...
इस पर चर्चा करे,,,और उपाय निकाले...
अपनों को सचेत करें व्यर्थ प्रलाप न करें।।
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゚viralfollowersシ゚
11/02/2026
मैं अंतिम संस्कार से घर लौटी। मेरे पति ने कहा, “माँ ने सब कुछ मेरे नाम कर दिया है। तुम्हारे पास अपना सामान समेटने के लिए 48 घंटे हैं...!!
मेरे पति, मेरा बेटा, मेरी ननद और एक वकील—जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था। जब मैं श्मशान से लौटकर आई, वे सब मेरे ड्राइंग रूम में बैठे थे।कानूनी सलाह...!!
फरवरी की बारिश ने मेरी काली साड़ी और शॉल को पूरी तरह भिगो दिया था। मेरी सास। वह औरत जिसकी मैंने दस साल तक देखभाल की—पहले स्ट्रोक से लेकर आख़िरी साँस तक...!!
मैं दरवाज़े पर रुक गई। अंतिम संस्कार के जूतों से लकड़ी के फर्श पर गीले निशान पड़ रहे थे।
रोहित, मेरे पति, सास की पसंदीदा कुर्सी पर बैठे थे। वह कभी उस कुर्सी पर नहीं बैठे थे—यहाँ तक कि जब वह ज़िंदा थीं।
“कविता” उसने बिना उठे कहा, “हमें बात करनी है...!!
मेरा बेटा रौनक, 24 साल का, सोफे पर बैठा था और मेरी ओर देखने से बच रहा था। रोहित की छोटी बहन सोनम उसके बगल में फ़ाइल गोद में रखे बैठी थी। वह अनजान वकील खिड़की के पास कुर्सी पर था...!!
“क्या मैं कम से कम अपना शॉल उतार सकती हूँ?” मैंने पूछा।
“इसमें ज़्यादा समय नहीं लगेगा,” नठंडे स्वर में कहा। वह घर के अंदर भी धूप का चश्मा लगाए हुए थी।
मैंने शॉल टाँग दी...!!
कविता रोहित ने आदेश दिया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेरुख़ी थी जिसे मैं पहचान नहीं पा रही थी।
मैं कुर्सी पर बैठ गई—अपने ही घर में बची इकलौती खाली जगह पर...!!
रोहित ने फ़ाइल खोली।
“मुझे माँ की वसीयत मिल गई। यह उनके कमरे में थी, दवाइयों के साथ...!!
मेरा सीना भारी हो गया। मेरी सास और मैं कई बार उसकी वसीयत के बारे में बात कर चुकी थीं...!!
"माँ ने घर रोहित के नाम छोड़ा है," वकील नने कहा।
"और तुम्हारे लिए, कविता रोहित ने चश्मे के ऊपर से मुझे देखा।
"माँ ने तुम्हारी सेवाओं के बदले पाँच १० लाख छोड़े हैं।"
मेरी सेवाओं के बदले।
दस साल...!!
दस साल कपड़े बदलना, खाना खिलाना, नहलाना, दर्द में थामे रखना। दस साल जब मैंने अपना करियर, अपनी पहचान छोड़ दी-जबकि रोहित और कविता शायद ही कभी मिलने आते थे...!!
"यह मुमकिन नहीं है," मैंने फुसफुसाकर कहा।
"सास ने मुझसे कहा था कि घर मेरा होगा।
"माँ भारी दवाइयाँ ले रही थीं," रोहित ने कहा।
"उनका दिमाग़ साफ़ नहीं था।"
"वह पूरी तरह होश में थीं," मैंने कहा।
"सब कुछ काग़ज़ों में है," कबीता ने फ़ाइल पर थपकी दी।
वकील ने गला साफ़ किया...!!
"श्रीमती मैं वकील हूँ। मुझे आपको सूचित करना है कि आपके पास यह घर खाली करने के लिए 48 घंटे हैं।"
"48 घंटे?" मैंने अपने बेटे की ओर देखा।
वो अपने हाथों को देखता रहा।
"पापा कहते हैं... यही दादी चाहती थीं...!!
"तुम्हारे पापा ने उन्हें छह महीने तक नहीं देखा," मेरी आवाज़ काँप रही थी...!!
"जब वह दर्द से चिल्लाती थीं, तब तुम लोग कहाँ थे? जब वह मेरा हाथ पकड़कर रोती थीं?"
"रोहित कविता खड़ा हो गया...!!
"यही मेरी माँ की इच्छा थी। तुम्हें इतना ही मिलेंगे। रौनक हमारे साथ रहेगा। अपना सामान बाँधो और चली जाओ।
हमारे साथ
जैसे वे एक नया परिवार हों-और मैं एक बाहरी...!!
"आपके पास 48 घंटे हैं," वकील ने दोहराया।
"नहीं तो हम बेदखली की कार्रवाई करेंगे।"
मैं धीरे से खड़ी हुई।
मैं उनके सामने टूटने वाली नहीं थी...!!
दस साल की देखभाल ने मुझे एक बात सिखाई थी-हर लड़ाई तुरंत नहीं जीती जाती।
कभी-कभी इंतज़ार करना पड़ता है।
"मैं समझ गई," मैंने शांत स्वर में कहा।
वे हैरान थे। शायद उन्हें एक तमाशे की उम्मीद थी।
मैं ऊपर गई, ज़रूरी सामान बैग में रखा और लिफ़ाफ़ा संभाल लिया...!!
वही लिफ़ाफ़ा जो मेरी सास ने अपनी मौत से तीन दिन पहले मुझे दिया था - पूरी होशियारी में...!!
उसने मेरी कलाई पकड़कर फुसफुसाया थाः मेरे बच्चे अच्छे इंसान नहीं हैं। अब मैं जानती हूँ। उन्हें मत बचाओ। अब किसी को तुम्हारी रक्षा करनी चाहिए।"
उसने मुझसे कसम ली थीः
"मेरे जाने से पहले इसे मत खोलना।"
अगले 48 घंटे मैंने एक सस्ते होटल में बिताए...!!
तीसरे दिन, मैंने लिफ़ाफ़ा खोला।
अंदर एक बैंक लॉकर की चाबी थी और सास की काँपती लिखावट में एक नोटः....!!
बहू मैं अपने बच्चों को जानती हूँ। मैंने तैयारी कर रखी है। मुझ पर रोसा करो। असली वसीयत लॉकर में है। वकील को फोन करो...!!
मैंने वकील को फोन किया। उनका दफ़्तर शहर के बीचों-बीच था। वह एक बुजुर्ग व्यक्ति थे, दयालु आँखों वाले...!!
"श्रीमती उन्होंने कहा, "मैं आपका इंतज़ार कर रहा था...!!
हमने साथ मिलकर लॉकर खोला। अंदर एक सीलबंद लिफ़ाफ़ा, एक पेन ड्राइव और मोटी फ़ाइल थी...!!
"यह सास की आधिकारिक वसीयत है," बाक़ील ने कहा। "पिछले साल 15 जून को रजिस्टर की गई थी...!!
उन्होंने पढ़कर सुनाया।
घर मेरा था।
रोहित का नहीं।
मेराचार सारे पैसे भी मेरे थे...!!
रोहितऔर कविता को ५ -५ लाख -एक शर्त परः अगर उन्होंने वसीयत को चुनौती दी, तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।
"लेकिन उनके पास भी एक वसीयत है," मैंने कहा...!!
"वकीलने मुझे दिखाई थी।"
"वह नकली है," वकीलने शांत स्वर में कहा।
"और यह एक गंभीर अपराध है। मेरे सास को पता था कि वे ऐसा करेंगे...!!
उन्होंने पेन ड्राइव चलाया। स्क्रीन पर सास का चेहरा उभरा-वह उसी दफ़्तर में बैठी थी, अपनी पसंदीदा स्वेटर में...!!
"मेरा बेटा और बेटी " उसने कैमरे से कहा, "सालों से मेरी ज़िंदगी में नहीं रहे। उन्हें मेरी देखभाल बोझ लगती है...!!
उसकी आवाज़ भर्रा गई...!!
"मेरी बहू, , दस साल तक मेरा एकमात्र सहारा रही। उसने मेरी गरिमा बचाने के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान की...!!
उसने सीधे कैमरे में देखा...!!
"मेरी bhuu सब कुछ पाने की हक़दार है। घर उसका है। अगर मेरे बच्चे उससे यह छीनने की कोशिश करें-तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।"
मैं चुपचाप रो पड़ी। बकील ने मुझे रूमाल दिया।
"और भी है," उन्होंने कहा...!!
"मेरी सास ने सब दर्ज किया था-हर बार जब वे नहीं आए, हर झूठ। नर्सों की गवाही भी है।"
उन्होंने मुझे गंभीरता से देखा।
"अगर वे उस नकली वसीयत का इस्तेमाल करते हैं, तो यह धोखाधड़ी होगी...!!
"मुझे क्या करना चाहिए?"
"घर जाइए,” उन्होंने कहा।
"वह आपका घर है। और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराइए।"
मैंने अगले दिन शिकायत दर्ज कराई...!!
तीन दिन बाद, मैं अपने घर पहुँची।
दो पुलिस गाड़ियाँ पहले से वहाँ थीं।
मै कार की खिड़की से देखती रही- पुलिस ने दरवाज़ा खटखटाया।
रोहित ने खोला...!!
हथकड़ियाँ लगते ही उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
रोहित और कविता -दोनों को ले जाया गया।
वे मेरी सास की चीजें बेचने की तैयारी कर रहे थे।
उस रात मेरे बेटे ने मुझे फोन किया।
"माँ..." उसकी आवाज़ काँप रही थी...!!
"मुझे माफ़ कर दो। मुझे नहीं पता था। पापा ने वसीयत दिखाई थी-मुझे लगा असली है।"
"क्या तुमने जालसाज़ी में मदद की?"
"नहीं! कसम से नहीं!"
वह रोने लगा।
"मुझे तुमसे पूछना चाहिए था...!!
"तुम्हें अपनी दादी से मिलने जाना चाहिए था," मैंने धीरे से कहा। "लेकिन तुम जवान थे। अपने पिता पर भरोसा कर बैठे।"
"माँ, आप कहाँ हैं?"
"घर पर...!!
मुक़दमा था। रोहित और कविता ने अपराध स्वीकार कर लिया। रोहित को 18 महीने, कबीता को एक साल की सज़ा हुई...!!
उसके बाद मेरा बेटा हर हफ्ते मिलने आने लगा। हम ड्राइंग रूम में बैठते, चाय पीते-और एक-दूसरे को फिर से जानने लगे।
"उसने मुझे क्यों नहीं बताया?" उसने एक दिन पूछा...!!
"क्योंकि वह जानती थी कि तुम तैयार नहीं थे," मैंने कहा। "तुम्हें उसके और अपने पिता के बीच चुनना पड़ता...!!
मैंने घर नहीं बेचा...!!
उस पैसे से मैंने "मागरट हाउस" की स्थापना की-देखभाल करने वाले परिवारों के लिए एक सहायता केंद्र।
मैं सब कुछ अपने ड्राइंग रूम से ही चलाती थी...!!
मेरा बेटा में मेरी मदद करता।
मैंने उसे सीखते देखा कि देखभाल बोझ नहीं, बल्कि प्रेम का सौभाग्य...!!
मेरी सास की मृत्यु के एक साल बाद, हमने बगीचे में गुलाब लगाए।
"उसे पता था, है ना?" मेरे बेटे ने मिट्टी में हाथ डालते हुए पूछा।
"पापा और बुआ क्या करने वाले थे
"उसे शक था," मैंने कहा।
"और उसने मेरी रक्षा की।"
"क्या आप कभी पापा को माफ़ करेंगी?"
मैंने उन वर्षों के बारे में सोचा-जब मैंने खुद को छोटा किया, ताकि रोहित बड़ा महसूस कर सके...!!
"शायद एक दिन," मैंने ईमानदारी से कहा।
"लेकिन सिर्फ़ अगर मैं चाहूँ...!!
उस रात, मुझे फोटो ऐल्बम में मेरी सास का एक और नोट मिला।
प्रिय अगर तुम यह पढ़ रही हो, तो मेरा प्लान कामयाब रहा। तुम सुरक्षित हो।
मुझे अफ़सोस है कि मैं तुम्हें ज़िंदा रहते ज़्यादा नहीं दे सकी...!!
लेकिन अब यह देती हूँ- इजाज़त । खुद को कुर्बान करना बंद करने की इजाज़त।
जगह लेने की इजाज़त...!!
तुमने बहुत समय दूसरों के आराम की वास्तुकार बनकर बिताया।
अब अपने लिए कुछ बनाओ...!!
मैं पहली बार अंतिम संस्कार के बाद राहत के आँसू रोई।
मैं अब बलि का बकरा नहीं थी...!!
मैं -62 साल की, एक घर की मालिक, एक संस्था की संस्थापक, और एक ऐसी औरत जिसे इतना प्यार मिला कि किसी ने मरने के बाद भी उसके लिए लड़ाई लड़ी...!!
रोहित ने ने मुझे 48 घंटे दिए थे ज़िंदगी समेटने के लिए। मेरी सास ने मुझे मेरी पूरी बची हुई ज़िंदगी दे दी-उसे जीने के लिए...!!!!!
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पूजा मिश्रा ❤️
#पूजामिश्रा #पूजा
11/02/2026
हरड़े भरड़े आँवले, लो तीनो सम तोल।
कूट पीस कर छानिए,त्रिफला है अनमोल।।
पाँच भाँति के नमक से,करो चूर्ण तैयार।
दस्तावर है औषधि, कहते पंचसकार।।
ताजे माखन में सखी, केसर लेओ घोल।
मुख व होठों पर लगा,रंग गुलाब अमोल।।
सूखी मेंथी लीजिए, खाएँ मन अनुसार।
किसी तरह पहुँचे उदर,मेटे बहुत विकार।।
ठंड जुकाम भारी लगे, नाक बंद हो जाय।
अजवायन को सेंक कर, सूंघे तो खुल जाय।।
चर्म रोग में पीसिए, अजवायन को खूब।
लेप लगाओ साथिया,मिलता लाभ बखूब।।
फोड़े फुंसी होय तो, अजवायन ले आय।
नींबू रस में पीस कर,औषध मान लगाय।।
अजवाइन गुड़ घी मिला,हल्का गर्म कराय।
वात पित्त कफ संतुलन, सर्दी में हो जाय।।
भारी सर्दी पोष की, करती बेदम हाल।
अदरक नींबू शहद को,पीना संग उबाल।।
मेंथी अजवायन उभय,हरती उदर विकार।
पाचन होता संतुलित, खाएँ किसी प्रकार।।
अदरक के रस में शहद, लेना सखे मिलाय।
पखवाड़े नियमित रखो,श्वाँस कास मिटजाय।
मक्का की रोटी भली,खूब लगाओ भोग।
पाचन के संग लाभ दे,क्षय में रखे निरोग।।
छाछ दही घी दूध ये, शुद्ध हमारा भोज।
गाय पाल सेवा करो ,मेवा पाओ रोज।।
गाजर रस मय आँवला,पीना पूरे मास।
रक्त बने भरपूर तो,नयनन भरे उजास।।
बथुआ केंहि विधि खाइए,मिले लाभ भरपूर।
पाचन भी अच्छा करे, रहे बुढ़ापा दूर।।
चौंलाई में गुण बहुत, रक्त बढ़े भरपूर।
हरी सब्जियों से रहे,मानुष तन मन नूर।।
पालक मेथी मूलियाँ,स्वास्थ्य रक्त दातार।
हरी सब्जियां नित्य लो,रहलो सदाबहार।।
जूस करेला पीजिए, प्रतिदिन बारहो मास।
मधुहारे तुमसे सदा, हो सुखिया आभास।।
दातुन करिए नीम की,होय न दंत विकार।
नीम स्वयं ही वैद्य है, समझो सही प्रकार।।
जामुन की दातुन करो, गुठली लेय चबाय।
मधुमेही को लाभ हो ,प्रदर प्रमेह नशाय।।
दातुन करो बबूल की,हिलते कभी न दंत।
तन मन शीतलता रहे, शूल बचाओ पंत।।
कच्ची पत्ती नीम की ,प्रातः नित्य चबाय।
रक्त साफ करके सखे,यह मधुमेह मिटाय।।
सदाबहारी फूल जो, प्रात चबालो आप।
दूर करे मधुमेह को, खाओ मधु को माप।।
तुलसी पत्ते औषधी, पीना सदा उबाल।
कितनी भी सर्दी पड़े,होय न बाँका बाल।।
चूर्ण बना कर आँवले, खाओ बारह मास।
नहीं जरूरत वैद्य की,जब तक तन में श्वाँस।
संध्या भोजन बाद में, थोड़ा सा गुड़ खाय।
पाचन भी अच्छा रहे, बुरी डकार न आय।।
लहसुन डालो तेल में,अजवायन अरु हींग।
जोड़ो में मलते रहो , नहीं चुभेंगे सींग।।
सब्जी में खाओ लहसुन, हरता कई विकार।
नेमी धर्मी डर रहे, खाएँ खूब विचार।।
कैसे भी खा लीजीए ,करे सदा ही लाभ।
ग्वार पाठा बल खूब दे,आए तन में आभ।।
दाल चीनि जल घोल कर,पीजिए दोनो वक्त।
पेचिस में आराम हो, मल हो जाए सख्त।।
दालचीनि मुख राखिए, जैसे पान सुबास।
मुख कभी न आएगी, गन्दी श्वाँस कुबास।।
दूध पियो नित ही भला,हल्का मीठा डाल।
ग्रीष्म ऋतु में पीजिए,संगत मिला रसाल।।
ग्वारपाठ रस आँवला ,करे पित्त को नष्ट।
नित्य निहारा पीजीए,स्वास्थ्य रहेगा पुष्ट।।
तीन भाग रस आँवला,एक भाग मधु साथ।
प्रातः सायं पीजिए, नेत्र नए हो जात।।
हल्दी डालें दूध में, छोटी चम्मच एक।
कफ खाँसी के शूल मिट,स्वस्थ रहोगे नेक।।
हल्दी चम्मच एक भर, पीवे छाछ मिलाय।
खुजली फुन्शी दाद भी,जल्दी से मिटजाय।।
बेसन नींबू नीर मधु, सबको लेय मिलाय।
चेहरे पर लेपन करो,सुन्दरता बढ़ि जाय।।
शहद मिला कर दूध पी,जीवन रहे निरोग।
दीर्घायु होकर करो, जीवन के सुखभोग।।
भोजन के संग छाछ तो,होती अमरित मान।
स्वस्थ पुष्ट तन मन रहे, बनी रहेगी शान।।
सौ रोगों की औषधी, देखी परखी मान।
पिए गुनगुना नीर तो,बनी रहे तन जान।।
दिन के भोजन में रखो, दही कटोरी एक।
पाचक रस निर्माण कर,मेटे व्याधि अनेक।।
अजवायन की भाप से,मिटे शीत के रोग।
गर्म भाप को सूँघिए ,रहना शीत निरोग।।
लो अजवायन छाछ से,पेट रहे तन्दरुस्त।
कीड़े मरते पेट के, भोजन करना मस्त।।
सौंफ हींग सेंधा नमक, पीपल उसमे डाल।
जीरा छाछ मिला य पी, रहे न उदर मलाल।।
भूतों को सावन पिला, कार्तिक पिला सपूत।
ग्रीष्मकाल में सब पियो,उत्तम छाछ अकूत।।
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