Work from home only female
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30/03/2026
तारा और अनिकेत दो वर्ष से एक दूसरे से प्यार करते थे पर घर में किसी को कोई खबर ना थी क्यूकी अनिकेत डरता था कहीं अगर मेरे माता-पिता को हमारे प्यार के बारे में पता चला तो क्या सोचेंगेl सही समय आने पर मैं खुद अपने माता-पिता से बात करूंगाl जब अनिकेत तारा से मिलता यहीं कहती तारा -कब बात करोगे अपने घर वालों से अनिकेत हमारी शादी की .......l अनिकेत यहीं कर कर टाल देता है कि कुछ दिन और रुक जाओ l एक दिन दोनों पार्क में बातें करते देख तारा की मां गुस्से से आग बबूला हो गईl वह घर आकर सारी बात बताई अपने पति को ...पति ने कुछ सोचा ना समझा चला गया अपने दोस्त रवि के पास और कहां रवि अब पानी सर से ऊपर चला गया है.....l तुम्हारा बेटा और मेरी बेटी एक साथ दिखती है जो मुझे बिल्कुल नही पसंद हैl ईससे पहले कि तुम्हारी और मेरी बदनामी हो उन की शादी करा देते हैं..... रवि ने कहा कर दीl क्योंकि बचपन से जानते थे अपने दोस्त और उनके परिवार वालों को..l कुछ महींने बाद दोनो की शादी हो गईl सब ठीक चल रहा था अनिकेत और तारा खुश थे अपनी शादी से...3 साल बीत जाने के बाद तारा और अनिकेत हर समय चिंता करते रहते थे घर में सारी खुशियां होने के बावजूद भी एक बच्चे का इंतजार हो रहा थाl कई साल बीत गए पर घर के आंगन में कीलकारी गुंजी नहीं रही थी... तब दोनो ने डॉक्टर से मिला डॉक्टर ने अनिकेत में कमी बता दियाl अनिकेत अब हर समय सोचता रहता है.. मेरी वजह से तारा मां नहीं बन सकती,हम दोनों औलाद का सुख नहीं भोग पाएंगेl पर एक दिन तारा ने अपने पति अनिकेत को बड़े प्यार से समझा चिंता मत करो बहुत सारी सुविधाएं हैं मां बनने के... दोनो मिलकर एक बच्ची को गोद ले लियाl बच्चे का नाम रखा "काव्या"l तारा और अनिकेत काव्या को पाकर बहुत खुश रहते थेl अच्छे परवरिश के साथ अच्छे संस्कार दे रखे थे अपनी बच्ची काव्या कोl काव्य बचपन से ही बहुत सुंदर और होशियार थीl वह अपने मां बाप की इकलौती संतान होने के करण घर में उसे बहुत प्यार दुलार मिलता थाl उसके माता-पिता काव्या की हर छोटी बड़ी जरूरतों को ध्यान रखते थेl काव्या भी अपने माता-पिता की बहुत इज्जत करती थीl और पढाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करती थीl धीरे-धीरे समय बिता गया.... समय के साथ काव्या बड़ी होने लगी l वह स्कूल में बहुत अच्छी छात्रा थी उसके शिक्षक काव्या की तारीफ करते हैं नहीं थकते थे और दोस्त भी उससे बहुत प्यार करते थे काव्या का सपना था कि वह बडी होकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करे लेकिन एक दिन उसकी जिन्दगी मे एक ऐसा मोड आया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया काव्या की मुलकत एक ऐसी व्यक्ति से हुई जिसने मीठी-मीठी बाते करके उसका विश्वास जीत लिया उसे लगने लगा की वही उसका सच्चा दोस्त है शुरुआत में सब कुछ अच्छा लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे काव्या को अहसास हुआ की हर व्यक्ति वैसा नहीं होता जैसा वह दिखता है उस दिन से वह थोड़ा टुट गई लेकिन खुद को सम्भलते हुए अपनी पढाई पुरी करी तारा ने अनिकेत से कहा काव्या बडी हो रही है कोई अच्छा सा लडका खोजो उसके लिए.... २५ साल साल की हो चुकी है काव्या कुछ ही महिनो बाद उसकी शादी करा दी गई जब काव्या की शादी हुई तो उसके रिश्तेदार और समाज के लोग कहने लगे लड़की भाग्यशाली है ससुराल अच्छा मिला है घर बड़ा, पढ़ा लिखा पति, संस्कारी परिवार, लेकिन किसी ने काव्य से नहीं पूछा कि वह क्या चाहती है और उसके मन में क्या चल रहा है ससुराल में कदम रखते ही काव्या ने अपने सपने मायके में ही छोर दि थी वह अब बेटी नहीं बहु थी किसी घर की .... सुबह उठते ही नई आवाज उसके कानों में सुनाई देती है बहू चाय अभी तक नहीं बनी क्या..... यह तुम्हारा ससुराल है मायका नहीं है हमारे यहां ऐसा नहीं होता काव्या कान खोल कर सुन लो आज ही काव्या मुस्कुराइ उसे उसकी मां ने सिखायी थी कि बहू मुस्कुराती है जवाब नहीं देती कुणाल जो काव्या का पति था वह अच्छा इंसान था जो .....आगे की कहानी के लिए मुझे comments करें 🙏
15/03/2026
ससुराल वालो दिया जाने वाला नया रूप बहू की😂
14/03/2026
धनौली गांव का रहने वाला परिवार पति राजकुमार और पत्नी दुर्गेश्वरी देवी के साथ उनकी पांच बेटियां और साथ में एक प्यारी सी दादी रहती थी अपनी बेटियों का नाम प्यार से लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, जानकी, और सबसे छोटी बेटी का नाम गौरी रखा थाl परिवार बड़ा था पर घर छोटा था और आमदनी भी सिमित थीl बेटियों के सपने भी बड़े बड़े थेl इसलिए पिता राजकुमार खूब मेहनत करते थेl पिता अपनी बेटियों को बहादुर और निडर बनाने की कोशिश करतेl माँ दुर्गेश्वरी भी कम ना थी घर संभालते हुए अपने पांचों बेटियों को अच्छे संस्कार के साथ अच्छी परवरिश दे रही थीl कुछ पडोसी ताने देते, इतना बड़ा परिवार और बेटियां 5 कैसे पालेगीl शादी ब्याह में खर्च कैसे करेगीl आमदानी तो इस परिवार की सुमित है और जमाना भी खराब है किसी के साथ इनकी बेटी भाग गई तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगीl यह सब सुन दुर्गेश्वरी घर के अंदर चली जाती है पर किसी को कुछ ना कहतीl समय बीतता गया बिटिया बड़ी हो गईl पिता को लगता बिटिया मेरी ताकत है पापा की ऐसी शब्द सुनकर बेटीयो को अपने पापा पर बड़ा ही प्यारा थाl उनकी मेहनत देख सभी बेटियां छुप कर रो रोती थी और साथ रहने की कसमें खातीl बड़ी बेटी लक्ष्मी शांत सुंदर और व्यवहारिक थीl सबसे बड़ी होने के कारण सबसे पहले उसी पे ज़िम्मेदारी आई थीl मां की कामों में हाथ बटाती, साथ ही बच्चों को पढाती, खुद भी पढाई करती और फॉर्म भरती जॉब के लिएl खर्चे ज्यादा होने के करण फॉर्म भरने तक के पैसे नहीं होते लक्ष्मी के पासl कॉलेज भी बहुत दूर होने के कारण साइकिल से ही जाती आतीl खुद की पढ़ाई, बच्चों को ट्यूशन और मां के साथ घर का काम, ऐ सब कर वह थक जातीl जब रात को सोती, उसके दिमाग में उसके पापा का प्यार दिखता और वह किताब खोल पढ़ने बैठ जाती ताकि कोई अच्छा सा काम मिल जाए तो आर्थिक मदद कर सके अपने पापा की दूसरी बेटी सरस्वती जो हार ना मानने वाली लड़की थीl कभी सरस्वती सपने देखने वाली.. साथ डरी हुई लड़की थीl लेकिन अब मजबूत और बहादुर सी लड़की थीl सरस्वती का कॉलेज दूर था बस का किराया तक नहीं था देने को l बड़ी बहन की किताब लेकर पढ़ाई की थी जब पूरी तरह थक कर घर आती तो उसकी माँ उसकी माथा चुमकर कहती एक कदम और चल ले बेटीl ऐसी बात सुन उसे ताकत सी आ जातीl तीसरी बेटी पार्वती शांत, काम बोलने वाली, जिसका सपना था डॉक्टर बनने काl पार्वती का बचपन से ही मेडिकल लाइन में जाने की इच्छा थीl एक बार एड्रेस में फेल भी हो गई थी उस दिन बहुत रोई थीl मां और दादी समझती बेटा हौसला रख एक इम्तिहान में फेल हो गई तो क्या हुआ.. अगली बार पास जरूर हो जाओगेl पार्वती मेहनत जरी रखा l पुरानी किताबें, नोटस उधर लिया और कई रातों तक नहीं सो पाई... घंटो घंटो पढाई करतीl चौथी बेटी थी जानकी जिसके सबसे ज्यादा सपने थेl अंग्रेजी के साथ-साथ आत्मविश्वास भी कम थी उसके....लोग मजाक उड़ाते थे जानकी की l इसलिए वह रोज आईने के सामने खडी होकर बोलने की कोशिश करती,यूट्यूब से सीखती बहुत गलतियाँ भी करती फिर भी कोशिश करती रहती थी माँ-पापा का संघर्ष देख वह रो पडतीl पापा को रात-रात भर जगते देख भगवान से कहती हे भगवान मेरे माता-पिता का दुख कब दुर करोगेl फीस, फॉर्म, कोचिंग काम.. यह सब एक साथ कैसे होगा सोचती रहती l मां मुस्कुराती और कहती तुम सब क्यों चिंता करती हो हमसे जितना हो पायेगा उससे ज्यादा करेंगे सबके लिये ......आगे की कहानी के लिए मुझे कमेंट करें
13/03/2026
सुकोली गांव की रहने वाली मैं शर्मिला गुप्ता हूं मैं बहुत सीधी हूं जो जैसा कहता वैसा करने वाली , अपना दिमाग कम इस्तेमाल करने वाली हूं मेरे साथ दो भाई एवम दो बहने भी रहती थी मैं अपने माता-पिता की नजरों में सबसे ज्ञानी, समझदार बेटी थी l क्योंकि मैं पढ़ने लिखने में काफी अच्छी होने के कारण मेरे आस-पास की कुछ औरतें काना फूसी करती कि काश ऐसी लड़की मेरे बेटे के लिए मिल जाए तो अच्छा होता l मेरे माता-पिता ने हम पांचों भाई बहनों को जितना हो सका पढ़ाया लिखायाl कुछ वर्षों बाद मेरी दोनों बहनों की शादी हो गई l भाई दोनों अपना-अपना बिजनेस शुरू कर लिया सब ठीक चल रहा था l पर एक दिन अचानक पिता जी की मृत्यु हो गई मेरी मां अकेली पड़ गई, हर समय मेरे बारे में सोचती रहती कि इसका विवाह कैसे होगा यह ससुराल में कैसे रह पायेगी l मां को मैं बहुत समझती पर वह मेरे बारे में ही हर समय सोचती रहती थीl पिता जी के गुजरे कुछ ही महीने हुआ थे की दोनों भाई अलग हो गएl घर का बंटवारा हो गया l माँ पे मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ीl मेरी शादी की चिंता कम थी कि अब घर की चिंता बढ़ गई थी उनको l सुकोली गांव के पास ही एक गांव कटवानी का रहनेवाला एक लड़के से मुझे प्यार हो गया l कुछ ही महीने बीते थे कि हम दोनों को समझे l अचानक एक दिन विजय (जिसे मैं प्यार करती थी) की मां मेरे घर आए अपने बेटों के साथ मेरा हाथ मांगने के लिए l अच्छा घर परिवार देख मेरी शादी के लिए हाँ कर दी मेरी मां ने l कुछ महीनों बाद मेरी शादी विजय से हो गई और मैं कटवानी गांव में अपने ससुराल वालों के साथ रहने लगीl कुछ ही समय बीते होंगे की मेरी स सासु मां का व्यवहार हमारे प्रति बदलने लगा l मेरी जेठानी मुझे बहुत प्यार करती, मैं भी उनका आदर सम्मान करती, हर बातें हम सब एक दूसरे से शेयर करते l ये सब देख मेरी सास को जलन होती l उनको लगता है कि अगर मेरी बहू साथ रहेगी तो मेरा प्यार, मान-सम्मान और महत्व काम हो जाएगा l बस यहीं से उनके अंदर जहर घुलने लगा घर तो ज्यादा बड़ा नहीं था पर मेरे सासु माँ का अहंकार बहुत बड़ा था l उन्हें लगता है घर में जो भी हो वह सही है बहुओं को हर समय टोकाती रहती कि यह गलत है यह सही है l हम बहुये सुबह से रात तक घर के सारे काम करती फिर भी सासू माँ को संतोष ना होता l मेरे जमाने में हम ऐसा करते थे, तुम्हें कुछ नहीं आता,मेरे बारे में कोई नहीं सोचता l हर बात में खुद को सही मानती l सच कहूं तो मेरी सासुमा को हमारे प्यार नहीं दिखता l हम लोगों की मेहनत, मन की हालत और हमारी तक़लीफ़ कुछ भी नहीं दिखाती उनको l मैं चुप- चाप सब सहती रही l पति भी माँ के डर से ज्यादा कुछ बोल नहीं पाता l घर में हर दिन नोकझोंक,ताने और कडवे शब्दों का माहौल बना रहता l धीरे-धीरे मैं बीमार होने लगी मेरी समझदारी यहां काम नहीं कर रही थी l एक दिन मुझे चक्कर आया और मैं बेहोश हो गई l डॉक्टर ने साफ़ कहा "बहू का मानसिक तनाव बहुत ज़्यादा है अगर महौल नहीं बदला तो हालात और बिगड़ सकते हैं"l उस दिन मेरी सास माँ चुप रही l रात में उन्हें नींद नहीं आई और उन्हें याद आया कि वह भी कभी बहु हुआ करता थी कैसे उनहोने भी सब सहा था l फिर इन्हो ने सोचा अगर मेरी वजह से घर टूट जाए तो ये अच्छी बात ना होगी गांव समाज क्या कहेगा मुझे l अगले दिन मेरी सास सभी बहुओं को अपने पास बैठाया और भारी मन से कहा-बेटी मुझसे गलती हो गई तुम सब मुझे माफ कर देना मैं सिर्फ अपने बारे में ही सोचती रहती l तुम लोगों का दर्द नहीं समझ पाई l उनकी बातें सुन हम बहुओं की आंखों से आंसू बह निकले, दुख के नहीं सुकुन के l उस दिन के बाद मेरी सास बदल गई l अब वह हमे अपनी बेटी जैसी प्यार करती और समझने लगी l पहले जैसा घर में फिर से हंसी लौट आई सब खुशी-खुशी रहने लगे
28/02/2026
एक सफल बिजनेसमैन अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका सामान समेट रहा था। अलमारी के एक कोने में उसे पिता की एक पुरानी डायरी मिली। उसे याद आया कि बचपन में जब भी वह कुछ गलती करता, पिता उसे डांटते थे और फिर अकेले में इस डायरी में कुछ लिखते थे। बेटे को हमेशा लगता था कि पिता उसकी कमियाँ लिख रहे हैं।
उसने डरते हुए डायरी खोली। पन्ने पलटे तो उसकी आँखें भर आईं।
डायरी के एक पन्ने पर लिखा था: "आज मेरे बेटे ने अपनी टूटी हुई साइकिल खुद ठीक करने की कोशिश की। वह थक गया था, पर उसकी आँखों में जो चमक थी, वह मैंने पहले कभी नहीं देखी। मुझे गर्व है कि वह आत्मनिर्भर बन रहा है।"
एक और पन्ने पर लिखा था: "आज बेटे का रिजल्ट आया। नंबर कम थे, वह दुखी था। मैंने उसे बहुत डांटा क्योंकि मैं चाहता था कि वह और मेहनत करे, पर बाद में मेरा दिल बहुत रोया। काश मैं उसे गले लगाकर कह पाता कि नंबरों से ज्यादा वह मेरे लिए कीमती है।"
डायरी के आखिरी पन्ने पर, जो पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले लिखा था, लिखा था: "आज मेरा बेटा मुझसे मिलने आया। वह बहुत बड़ा आदमी बन गया है। उसने मुझे एक महंगा फोन दिया, पर मेरा मन बस यह सुनने को तरस रहा था कि 'पापा, क्या आपको याद है हम बचपन में बारिश में कैसे भीगते थे?' वह व्यस्त था, और मैं उसे परेशान नहीं करना चाहता था। बस उसे खुश देखकर ही मेरा दिल भर आता है।"
बेटा फूट-फूटकर रोने लगा। उसे अहसास हुआ कि जिसे वह 'सख्त पिता' समझता था, उनके सीने में उसके लिए कितना अथाह प्रेम और गर्व छुपा था।
सीख आपके लिए--: हमारे माता-पिता की खामोशी और डांट के पीछे हमेशा सुरक्षा और प्रेम छिपा होता है। समय रहते उनके उस अनकहे प्यार को पहचानें, क्योंकि समय निकल जाने के बाद केवल यादें और पछतावा रह जाता है।
भावुक कर देने वाली ये कहानी आपको पसंद आई हो तो एक लाइक प्लीज 🙏
बहू की दुनिया🤣
प्यारे पापा❤️
पापा❤️
हीरा और इंसान की चमक
Sach👇
ये बात याद रखना तुम्हारे लिए ही है
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