Dr.Rinku Sharma
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#कीड़ाजड़ी #घोड़े के समान #स्टैमिना पावर ताकत #यौनशक्ति ( #हिमालयन वियाग्रा) #बाझपन और इसे अक्सर अश्वगंधा और वाजीकरण औषधि के साथ पाउडर के रूप में या गर्म दूध/पानी में 250 मिलीग्राम (दिन में एक बार) लिया जाता है। 1. यौन स्वास्थ्य और स्टेमिना:इसे पारंपरिक रूप से पुरुषों और महिलाओं दोनों में कामेच्छा (sexual desire) बढ़ाने और बांझपन या नपुंसकता (impotence) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है。 यह नसों में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और शारीरिक ऊर्जा प्रदान करता है。 2. रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ावा:इसमें मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स (जैसे कॉर्डिसेपिन) सेलुलर मेटाबॉलिज्म को सुधारते हैं 3. किडनी और लिवर की सुरक्षा:यह गुर्दे (किडनी) और यकृत (लिवर) के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है 5. एंटी-एजिंग (बुढ़ापा रोकने में मददगार):इसमें मौजूद अमीनो एसिड्स और एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर के ऊतकों (tissues) की मरम्मत करते हैं, जिससे त्वचा में कसाव रहता है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीमे होते हैं。 कैसे करें सेवन: प्रमाणित कीड़ा जड़ी एक्सट्रेक्ट या पाउडर का इस्तेमाल ही सुरक्षित रहता है。आमतौर पर इसे पानी या दूध के साथ 250 मिलीग्राम की मात्रा में विशेष जानकारी के लिए लिंक फॉलो करें Rinku Sharma
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12/07/2026
#निर्गुंडी: आयुर्वेद की बहुउपयोगी औषधि
#निर्गुंडी (Vitex negundo) #आयुर्वेद में एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। इसे "सिंहपर्णी" और "पंचपत्री" जैसे नामों से भी जाना जाता है। इसके पत्ते, जड़, छाल, बीज और फूल विभिन्न रोगों में उपयोग किए जाते हैं।
निर्गुंडी के प्रमुख गुण
- वात और कफ दोष को संतुलित करने में सहायक।
- सूजन और दर्द कम करने में उपयोगी।
- जीवाणुरोधी एवं सूजनरोधी गुणों से युक्त।
- घाव भरने में सहायक।
किन रोगों में लाभकारी?
- जोड़ों का दर्द एवं गठिया
- कमर दर्द, गर्दन दर्द और सायटिका
- मांसपेशियों की सूजन
- मोच एवं चोट
- सर्दी, खांसी और नाक बंद होना
- त्वचा के कुछ संक्रमणों में सहायक
उपयोग की विधि
- निर्गुंडी के पत्तों का लेप: दर्द और सूजन वाले स्थान पर लगाया जा सकता है।
- निर्गुंडी का तेल: जोड़ों और मांसपेशियों की मालिश के लिए उपयोगी माना जाता है।
- काढ़ा: चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सेवन किया जा सकता है।
- भाप: पत्तों की भाप लेने से नाक बंद होने में राहत मिल सकती है।
सावधानियां
#- गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
- किसी भी औषधि का लंबे समय तक उपयोग योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से ही करें।
- यदि किसी प्रकार की एलर्जी या असुविधा हो तो उपयोग बंद कर चिकित्सक से संपर्क करें।
निष्कर्ष
निर्गुंडी एक बहुउपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है, जो विशेष रूप से दर्द, सूजन और वातजन्य रोगों में सहायक मानी जाती है। हालांकि, इसका उपयोग उचित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
#स्वस्थ रहें, आयुर्वेद अपनाएं।
Dr.Rinku Sharma
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manegement
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नई दिल्ली (Engineer to Doctor Motivational Story). सफल करियर बनाने में सालों की मेहनत और पसीना लगता है. जब इंसान उस मुकाम पर पहुंच जाए, जहां सब कुछ सेटल हो तो उसे छोड़ने की कल्पना भी कोई नहीं करता. लेकिन कभी-कभी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है, जो पूरे जीवन की दिशा बदल देता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जान्हवी अजीत राव ने. टेक इंडस्ट्री में पूरे 18 साल बिताने के बाद जान्हवी ने जो फैसला लिया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया.
28/06/2026
❤️ Historical Myth??
The image illustrates the traditional belief that wedding rings are worn on the fourth finger (ring finger) because of the "Vena Amoris" or "vein of love," which was once thought to connect directly to the heart.
Since the heart symbolizes love and emotion, this belief made the ring finger a romantic choice for wedding bands.
However, modern anatomy has shown that no unique vein runs directly from the ring finger to the heart. Instead, all fingers have similar blood vessels that eventually return blood to the heart through the same venous system.
Today, wearing a ring on the fourth finger remains a meaningful cultural and symbolic tradition rather than an anatomical fact.
23/06/2026
This medical infographic illustrates L5 nerve compression, commonly known as sciatica. The central diagram shows the lumbar spine, highlighting a herniated disc compressing the L5 nerve root between the L4 and L5 vertebrae.
The image maps out the resulting symptoms down the leg and foot:
Back Pain: Originating at the lower spine.
Sciatica: Radiating pain traveling down the back and side of the leg.
Paresthesia: Numbness and tingling specifically localized in the big toe.
Foot Drop: Muscle weakness during dorsiflexion, making it difficult to lift the front part of the foot.
Dr.Rinku Sharma
Dr.Rinku Sharma
21/06/2026
19/06/2026
मानव अग्न्याशय (Human Pancreas) की संरचना एवं पाचन तंत्र से संबंध
यह शैक्षणिक चित्र मानव अग्न्याशय (Pancreas) और उसके आसपास स्थित पाचन अंगों के बीच के संबंध को दर्शाता है। अग्न्याशय पाचन तंत्र और अंतःस्रावी (Endocrine) तंत्र दोनों का महत्वपूर्ण अंग है। यह भोजन के पाचन के लिए एंजाइम बनाता है तथा रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी उत्पन्न करता है।
🔹 यकृत (Liver)
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त (Bile) का निर्माण करता है, जो वसा के पाचन में सहायता करता है।
🔹 पित्ताशय (Gallbladder)
यह यकृत द्वारा निर्मित पित्त को संग्रहित करता है और आवश्यकता पड़ने पर छोटी आंत में छोड़ता है।
🔹 सिस्टिक डक्ट (Cystic Duct)
यह पित्ताशय को सामान्य पित्त नली (Common Bile Duct) से जोड़ती है।
🔹 कॉमन बाइल डक्ट (Common Bile Duct)
यह नली पित्त को यकृत और पित्ताशय से ग्रहणी (Duodenum) तक पहुंचाती है।
🔹 आमाशय (Stomach)
यह भोजन को संग्रहित करता है और अम्ल तथा एंजाइम की सहायता से उसका प्रारंभिक पाचन करता है।
🔹 पाइलोरस (Pylorus)
आमाशय का निचला भाग, जो भोजन को नियंत्रित मात्रा में ग्रहणी की ओर भेजता है।
🔹 अग्न्याशय (Pancreas)
यह दो प्रमुख कार्य करता है:
पाचन एंजाइम बनाकर भोजन के पाचन में सहायता करना।
इंसुलिन और ग्लूकागॉन हार्मोन का निर्माण करके रक्त शर्करा को नियंत्रित करना।
अग्न्याशय के भाग
🔸 अग्न्याशय का सिर (Head of Pancreas)
यह ग्रहणी (Duodenum) के पास स्थित होता है और अग्न्याशय का सबसे चौड़ा भाग होता है।
🔸 अग्न्याशय का शरीर (Body of Pancreas)
यह मध्य भाग होता है, जो उदर गुहा के भीतर क्षैतिज रूप से फैला रहता है।
🔸 अग्न्याशय की पूंछ (Tail of Pancreas)
यह प्लीहा (Spleen) की ओर बढ़ती है और अग्न्याशय का सबसे संकरा भाग होता है।
🔹 अग्न्याशयी नलिका (Pancreatic Duct)
यह अग्न्याशय से पाचन एंजाइमों को ग्रहणी तक पहुंचाती है।
🔹 हेपाटोपैंक्रियाटिक एम्पुला (Hepatopancreatic Ampulla)
यह वह स्थान है जहां पित्त नली और अग्न्याशयी नलिका मिलकर ग्रहणी में खुलती हैं।
🔹 ग्रहणी (Duodenum)
छोटी आंत का पहला भाग, जहां पित्त और अग्न्याशयी एंजाइम मिलकर भोजन का रासायनिक पाचन करते हैं।
🔹 प्लीहा (Spleen)
यह प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण अंग है और पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को हटाने में सहायता करता है।
संबंधित रक्त वाहिकाएं
🔸 स्प्लेनिक धमनी (Splenic Artery)
यह प्लीहा और अग्न्याशय को रक्त की आपूर्ति करती है।
🔸 स्प्लेनिक शिरा (Splenic Vein)
यह प्लीहा और अग्न्याशय से रक्त को वापस ले जाती है।
🔸 सुपीरियर मेसेन्ट्रिक शिरा (Superior Mesenteric Vein)
यह आंतों से पोषक तत्वों से युक्त रक्त को यकृत तक पहुंचाने में सहायता करती है।
🔸 पैंक्रियाटोडुओडेनल धमनियां (Pancreaticoduodenal Arteries)
ये अग्न्याशय और ग्रहणी को रक्त की आपूर्ति करती हैं।
अग्न्याशय का महत्व
अग्न्याशय शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है क्योंकि यह:
भोजन के पाचन में सहायता करता है।
रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।
वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम उत्पन्न करता है।
⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह चित्र केवल शैक्षणिक और जागरूकता उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसमें दी गई जानकारी मानव अग्न्याशय और पाचन तंत्र की सामान्य संरचना को समझाने हेतु है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको पेट दर्द, पाचन संबंधी समस्या, अग्न्याशय की बीमारी या मधुमेह से संबंधित कोई समस्या हो, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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