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10/07/2024

ज़िन्दगी में कुछ अनजान लोग मिलते हैं, जान -पहचान होती है बात होती है फिर कुछ-कुछ अपनापन सा लगने लगता है, हो सकता है कि सामने वाले लिए ऐसी कोई बात ना हो, लेकिन आप इस बात से अनभिज्ञ पूरी कोशिश करते हैं, खैर नियति है कभी यह भी सुनने को मिलता है कि 'नही बात करनी, तुम हो कौन' इत्यादि। आप अभी उसी इंतजार में बैठे रहते हैं कि नियति कब करवट लेगी, जल्दी नही लेती है, कभी-कभी तो लेती ही नहीं है, किसी इंसान के लिए कोई इंसान इतना महत्वपूर्ण क्यों हो जाता है, कोई रिश्ता भी नहीं है, सोचनीय बात है। सोचनीय बात यह भी है कि आपको अभी भी क्यों लगता है कि थोड़ी देर की आंधी है फिर गायब हो जाएगी। पता नहीं इन बातों का क्या जवाब है, शायद कभी पता भी ना चलें, क्योंकि इंसान की फितरत है कि हम बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं, खैर कभी समय मिले तो अपने बारे में सोचिएगा हो सके तो उसके बारे में भी, क्या रहस्य है। मेरी सबसे बड़ी बीमारी क्या है कि जिंदगी में जब गंभीर होता हूँ तो लिखता हूँ, बीमारी इसलिए कहा कि वैसे कुछ नहीं लिखता हूँ, लिखना चाहिए खुद से बात करनी चाहिये, कभी-कभी मेरी लिखी हुई बातें लोगों को दुख पहुंचा देती है, अपनी बातों को दबाने का मुख्य कारण यही है, दुःख पहुंचाने का मकसद नहीं होता है. खैर आप पढ़कर निकल जाएंगे और मैं लिखता रहूंगा।
प्रणाम

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