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05/01/2025
29/08/2024
संगीता ने एक दिन अपने पति, अजय से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए, जिन्हें सुधारने से वह एक बेहतर पत्नी बन सके।
अजय यह सुनकर हैरान रह गया और असमंजस की स्थिति में पड़ गया। उसने सोचा कि वह बड़ी आसानी से संगीता को छह ऐसी बातों की सूची दे सकता है, जिनमें सुधार की जरूरत थी, और ईश्वर जानता है कि संगीता ऐसी ६० बातों की सूची थमा सकती थी, जिसमें उसे सुधार की जरूरत थी।
परंतु अजय ने ऐसा नहीं किया और कहा, "मुझे इस बारे में सोचने का समय दो, मैं तुम्हें सुबह इसका जवाब दूँगा।"
अगली सुबह अजय जल्दी ऑफिस गया और फूल वाले को फोन करके उसने संगीता के लिए छह गुलाबों का तोहफा भिजवाने के लिए कहा, जिसके साथ यह चिट्ठी लगी हो:
"मुझे तुम्हारी छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत है। तुम जैसी भी हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो।"
उस शाम जब अजय ऑफिस से लौटा तो देखा कि संगीता दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी। उसकी आंखों में आँसू भरे हुए थे। यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गई थी।
अजय इस बात पर बहुत खुश था कि संगीता के आग्रह के बावजूद उसने उसकी छह कमियों की सूची नहीं दी थी।
इसलिए यथासंभव जीवन में सराहना करने में कंजूसी न करें और आलोचना से बचकर रहने में ही समझदारी है।
सारांश:
ज़िन्दगी का ये हुनर भी आज़माना चाहिए,
जंग अगर अपनों से हो तो हार जाना चाहिए।
पसीना उम्र भर का उसकी गोद में सूख जाएगा...
हमसफ़र क्या चीज है ये बुढ़ापे में समझ आएगा।
एक शादीशुदा जोड़ा अपनी शाम की चाय के साथ टीवी पर आईपीएल का मैच देख रहा था। यह वो समय था जब दोनों पति-पत्नी एक साथ बैठकर कुछ वक्त बिताने की कोशिश करते थे। लेकिन जैसे ही मैच शुरू हुआ, घर में एक अलग ही किस्म का ड्रामा शुरू हो गया।
मैच के पहले पाँच मिनट के बाद...
पत्नी ने उत्सुकता से पूछा, "ये ब्रेट ली है क्या?"
पति ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "नहीं, ये क्रिस गेल है। ब्रेट ली तो तेज गेंदबाज है।"
पत्नी ने थोड़ी सी अनजानियत दिखाते हुए कहा, "ओह, लेकिन ब्रेट ली तो बहुत स्मार्ट है... उसे तो अपने भाई की तरह फिल्मों में हीरो बन जाना चाहिए।"
पति ने थोड़े हैरान होकर कहा, "उसका कोई भाई फिल्म अभिनेता नहीं है।"
पत्नी ने बेफिक्री से पूछा, "तो फिर ये ब्रूस ली कौन है?"
पति ने अपनी हंसी को दबाते हुए कहा, "अरे नहीं, ब्रेट ली ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेटर है, और ब्रूस ली फिल्मों में एक्शन हीरो था। दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है।"
पत्नी ने अचानक टीवी पर नजर डालते हुए कहा, "अरे वाह, देखो, दो मिनट में एक और विकेट गिर गया।"
पति ने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा, "नहीं, ये एक्शन रिप्ले है, असली विकेट नहीं गिरा है।"
पत्नी ने उत्साह से कहा, "ऐसा लग रहा है कि मैच भारत जीत जाएगा, क्यों जी, ठीक कहा न?"
पति ने निराश होकर जवाब दिया, "इसमें भारत नहीं खेल रहा है... ये चेन्नई और जयपुर के बीच का मैच है, आईपीएल का।"
पत्नी ने कुछ अजीब सा महसूस करते हुए पूछा, "ये अंपायर हाथ हिलाकर हेलीकॉप्टर क्यों बुला रहा है? पगला गया है क्या?"
पति ने हंसते हुए कहा, "वो हेलीकॉप्टर नहीं बुला रहा है... ये फ्री हिट का इशारा कर रहा है।"
पत्नी ने फिर से हैरानी जताते हुए कहा, "दर्शकों ने क्या पैसे नहीं दिए जो ये फ्री हिट दे रहा है? अब ये किसे हाय कह रहा है?"
पति ने हंसते हुए समझाया, "ये 'बाय' का इशारा है।"
पत्नी ने भोलेपन से पूछा, "ये बाय क्यों कह रहा है? क्या मैच खत्म हो गया है? अब कितने रन और चाहिए जीतने के लिए?"
पति ने जवाब दिया, "36 गेंदों में 72 रन चाहिए।"
पत्नी ने बेफिक्री से कहा, "ओह बस! ये तो कितना आसान है....केवल 1 गेंद पर 2 रन ही बनाना है।"
यह सुनकर पति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने झल्लाकर गुस्से में टीवी बंद कर दिया। उसकी चेहरे पर नाराजगी की लकीरें साफ दिख रही थीं।
लेकिन पत्नी ने बिना किसी झिझक के टीवी को फिर से चालू कर दिया और चैनल बदलकर 'बालिका वधू' देखने लगी। अब बारी थी पति की, जो पत्नी के टीवी शो को समझने की कोशिश कर रहा था।
पति ने कुछ जानने की कोशिश करते हुए पूछा, "ये आनंदी कौन है?"
पत्नी ने उसकी ओर घूरते हुए जवाब दिया, "तुम्हारी माँ..."
अब तक पति की हालत पतली हो चुकी थी। पत्नी ने गंभीर आवाज में कहा, "अगर तुमने मुझसे एक और सवाल पूछ कर मुझे परेशान किया, तो देख लेना... टीवी फोड़ दूंगी। और अगर फिर भी तुम्हारा बक-बक बंद नहीं हुआ, तो पूरे घर में आग लगा दूंगी... पक्का समझ लो, एक बार में... जब देखो तब खाली बक-बक करते रहते हो।"
पति चुप हो गया, लेकिन उसके मन में एक बात गूंजती रही—शादी के बाद का जीवन वाकई एक बड़े आईपीएल मैच से कम नहीं है, जहां हर दिन एक नई चुनौती होती है और हर सवाल का जवाब एक नई दिक्कत को जन्म देता है।
यह कहानी उन सभी शादीशुदा मर्दों को समर्पित है, जिन्होंने कभी न कभी ऐसी स्थिति का सामना किया हो।
🥰🥰🥰
पत्नी के शरीर पर पति का हक है, और पति के शरीर पर पत्नी का
दीपक जी से ऑनलाइन मुलाकात होने के बाद हम दोनों ने अपनी प्रोफाइल घर पर दिखा दी, सबको सब कुछ अच्छा लगा दीपक जी ने मेरा नंबर लिया, और हमारी बात शुरू हुई पहले तो लगा ये शर्मीले हैं, लेकिन समय के साथ साथ इनकी बातें ऐसी होने लगी कि मुझे शर्म आने लगती थी,
इन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारे पति से तुम्हारी क्या उम्मीदें हैं तो मैंने लंबी चौड़ी लिस्ट गिना दी, अच्छा दिखने वाला होना चाहिए, पैसे वाला होना चाहिए, कमाई अच्छी हो की किसी चीज के लिए सोचना ना पड़े , मेरा ख्याल रखे,
स्टेबिलिटी हो, मुझे प्यार करे
बदले में मैने पूछा आप को आप की पत्नी से क्या उम्मीदें हैं
जवाब आया, बस हर परिस्थित में मेरा साथ दे, और परिवार की इज्जत करे
जिसे सुन कर थोड़ी देर के लिए मैं शर्मिंदा हो गई, की कहां मैने क्या क्या गिना दिया और ये बस 2 बातें बोला
मैने बोला क्यों आप की पत्नी अच्छी दिखे ये नहीं चाहते आप,
उन्होंने बोला, अच्छी दिखने वाले पत्नी पाकर क्या करूंगा अगर विपरीत परिस्थि में वो मेरा साथ ना दें
ऐसे ही उनकी बातों ने मेरा दिल जीत लिया और अरेंज मैरेज धीरे धीरे लव मैरिज में कन्वर्ट हो गई
हमारी शादी होती है, सब अच्छे से होता है,
और जैसा घर में दोस्तों से सुना था शादी फ्री अनलिमिटेड सेक्स का लाइसेंस है, उसी आधार पर जिंदगी जीना शुरू किया
किसी भी पुरुष को यदि कोई स्त्री भरपूर सेक्स का आनंद दे तो वो पूरी तरह से मुरीद हो जाता है और मैंने भी ऐसा अनुभव किया
लेकिन एक पुरुष हमेशा ऐसा नहीं होता
मेरे पति होटल इंडस्ट्री में नौकरी करते थे,
और 2021 में बहायानक महामारी में मेरे पति की नौकरी चली गई,
घर का माहौल काफी नीरस था, घर खर्च करने के लिए भी किसी चीज पर 10 बार सोचना पड़ता था,
हमारी सेविंग्स के पैसे से घर चल रहा था,
इस वक्त मुझे ये याद आया कि मेरे पति से जो उम्मीदें मेरी थी वो तो समय के साथ पूरी हुई हैं लेकिन क्या मैं उनकी उम्मीद पर कायम हूं?
अंदर से जवाब आया नही, क्यों की पैसे की तंगी होने की वजह से मुझे कुछ समझ नहीं आता कि कैसे क्या खर्च करना है और मैं उन्हें बात बात पर कोसती
जब मैने इस बारे में सोचा तो मुझे और ज्यादा आत्म ग्लानि हुई ,
और रात में पति के पास जाकर बैठी, और उन्हें बताया, कि आप परेशान मत होइए , हम दोनो मिलकर कुछ ना कुछ करेंगे,
मेरा ये रूप देख कर उन्हें काफी अच्छा लगा और अंदर से ऊर्जा मिली
मैने बोला घर में जितने भी पैसे हैं मैं सब कुछ मैनेज कर लूंगी बस आप मेरे ऊपर भरोसा रखिए,
मैने बहुत सारे फिजूल के खर्च खत्म किए, खाने में हरि सब्जी की जगह राजमा चना चावल अनाज इनका उपयोग बढ़ाया, जहां से संभव कटौती हो सकती की
और सबसे जरूरी चीज इन्हें जो चाहिए था, की परिस्थित जैसी भी हो मेरी पत्नी मेरा साथ दे, उस बात का भरोसा कराया
हमारी सेक्स लाइफ वैसे भी पहले जैसी नहीं थी कुछ दिनों से
पर जब उन्हें ये भरोसा हुआ कि दुनिया चाहे जैसी हो उनकी पत्नी उनके साथ हमेशा खड़ी है
तो उस खराब स्थिति में भी हमारी हमारा जीवन आनंद पूर्वक बीत था
महामारी खत्म होने के 2 साल बाद उन्हें फिर से नौकरी मिली, लेकिन अब हमने अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना सीख लिया है, हम पहले पति पत्नी थे, लेकिन अब हम हमसफर हैं एक अच्छे दोस्त हैं जिन्हें एक दूसरे पर ये भरोसा हैं कि दुनिया इधर उधर हो जाए लेकिन ये शक्श सिर्फ मेरा है और साथ रहेगा
आज कल की लड़किया शादी करने जाती हैं तो वो और उनके घर वाले यही देखते हैं कि लड़का कितना कमाता है उनकी बेटियां अच्छी लाइफ जीने और लड़के की मोटी कमाई की खपत करने को तैयार हैं
लेकिन वो विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं है,
एक पुरुष जितना संवेदनशील है आज की लड़किया नहीं है
पर आपको ये याद रखना चाहिए कि जीवन में परिस्थिया एक जैसी नहीं होती, अच्छी बुरी दोनों परिस्थी के लिए तैयार रहिए
और अपने पति के लिए एक स्तंभ का काम कीजिए
फिर जीती भी बुरी परिस्थिति हो जिंदगी आनंदमई हो जाती है
ये सब क्या है मम्मी ..... आँफिस से आए बेटे ने अपनी टाई खोलते हुए गुस्से से कहा.....?
अरे संजू.....आज इतना जल्दी आ गया .....वैसे क्या हुआ क्या पूछना चाहते हो साफ साफ कहो बेटा....?
हूह.... जैसे आपको कुछ पता ही ना हो ....आपको कुछ थोड़ा सा भी शर्म लिहाज नहीं है ना.....?
संजू.....ये कैसी बातें बोल रहा है .....जानता भी तू किससे बात कर रहा है मां हूं तेरी .....और ऐसा कया गुनाह कर दिया मैने....?
मुझे भी तो पता चले जो तू मां को शर्म लिहाज बताने चला आया....?
रहने दो मेरा मुंह मत खुलवाओ.....मे पूछता हूं आखिर आप ज्योति को क्यो नीचा दिखाती रहती हो....उसकी बात क्यों नहीं समझती आप....?
अरे पर मुझे पता भी तो चले मुझे समझना क्या है....और ज्योति को मे नीचा अपनी बहु को .... भला मे ऐसा कयुं करुंगी ....?
तो फिर इतनी पढी -लिखी एजुकेटेड जवान लडकियो के सामने... उनकी किटी पार्टी में क्यो बाहर आ जाती है आप और उसपर भी वो भी सीधे पल्ले की साड़ी पहनकर अपनी घिसी पिटी हिन्दी लेकर....नमस्ते बेटा ....जुग जुग जियो .....अरे जरुरत ही कया है और इतना ही शौक है सबसे मिलने का तो अपना पहनावा क्यो नहीं बदल लेती हो आप.... कितनी बार कहा थोड़े ही सही अपने पोते से कुछ अंग्रेजी के शब्द हाय... हलो ....करना ही सीख लो..!!
लेकिन आपको तो हमारी इज्ज़त का का कोई ख्याल ही नही....बस मुंह उठाकर बाहर चली आती है
शर्म नहीं आती आपको ....कोई लिहाज नहीं है किसी की इज्ज़त का ..है ना....संजू ने आँखों की त्यौरियां चढाते हुए कहा
शर्म लिहाज...... वाह बेटा वाह.....उस वक्त कहा था तेरा ये शर्म ये लिहाज जब तेरे पापा की आकस्मिक मृत्यु के बाद तुझे एक अच्छी परवरिश देने की खातिर आई मैंने स्कूल में झाडू लगाने की नौकरी की थी ....उस वक्त तुम्हें शर्म नहीं आती थी जब मेने अपने फटे हुए कपडो को दूसरी कतरों के सहारे अपने बदन को ढका था ताकि तुम्हारे बदन पर हमेशा अच्छे कपडे बने रहे .... जब उसवक्त मैंने कोई काम करने में शर्म महसूस नहीं की नहीं की तो आज अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता के अनुरूप कपड़े पहनने और राष्ट्रीय भाषा हिन्दी बोलने में कैसी शर्म......
और सच कहूं..... शर्म बहु और उसकी सहेलियों को आनी चाहिए जो हमारे घरों में किटी पार्टी के नाम पर अर्धनग्न कपडों मे चली आती है जिन्हें ये तक ज्ञात नहीं की अपने बुजुर्गों के सामने कैसे कपड़े मे जाना चाहिए कैसे आदर सत्कार करना चाहिए ....और हां बेटे ....यदि इतनी शर्म लिहाज की बातें समझ मे आती है तो बता भी देना और समझा भी देना अपनी पत्नी को जिसके कहने पर तनतानते हुए आए हो ये घर मेरी मेहनत की कमाई से बना हुआ है मेरे नाम पर ...और यदि मेरे रहने से इतनी ही शर्म महसूस होती है तो अपना बोरियां बिस्तर बांधकर जा सकती हो जहां रहने खाने मे शर्म लिहाज का मतलब समझ मे आता हो...कहकर मां अंदर चली गई
वहीं बेटा वहां तो पर्दे के पीछे खडी बहु को सही मायनों में समझ आ चुका था शर्म लिहाज का सटीक अर्थ....!!
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एक सुंदर और प्ररेणादायक रचना
एक दिन मैं दुकान से जल्दी घर चला आया। आम तौर पर रात में 7 बजे के बाद आता हूं,उस दिन 6 बजे ही चला आया
सोचा था घर जाकर थोड़ी देर पत्नी से बातें करूंगा, फिर कहूंगा कि कहीं बाहर खाना खाने चलते हैं। बहुत साल पहले, हम ऐसा करते थे।
घर आया तो पत्नी टीवी देख रही थी। मुझे लगा कि जब तक वो ये वाला सीरियल देख रही है, मैं कम्यूटर पर कुछ मेल चेक कर लूं। मैं मेल चेक करने लगा, कुछ देर बाद पत्नी चाय लेकर आई, तो मैं चाय पीता हुआ दुकान के काम करने लगा।
अब मन में था कि पत्नी के साथ बैठ कर बातें करूंगा, फिर खाना खाने बाहर जाऊंगा, पर कब 7 से 9 बज गए, पता ही नहीं चला।
पत्नी ने वहीं टेबल पर खाना लगा दिया,मैं चुपचाप खाना खाने लगा। खाना खाते हुए मैंने कहा कि खा कर हम लोग नीचे टहलने चलेंगे, गप करेंगे। पत्नी खुश हो गई।
हम खाना खाते रहे, इस बीच मेरी पसंद का सीरियल आने लगा और मैं खाते-खाते सीरियल में डूब गया। सीरियल देखते हुए सोफा पर ही मैं सो गया था।
जब नींद खुली तब आधी रात हो चुकी थी।
बहुत अफसोस हुआ।मन में सोच कर घर आया था कि जल्दी आने का फायदा उठाते हुए आज कुछ समय पत्नी के साथ बिताऊंगा।पर यहां तो शाम क्या आधी रात भी निकल गई।
ऐसा ही होता है, ज़िंदगी में। हम सोचते कुछ हैं, होता कुछ है। हम सोचते हैं कि एक दिन हम जी लेंगे, पर हम कभी नहीं जीते। हम सोचते हैं कि एक दिन ये कर लेंगे, पर नहीं कर पाते।
आधी रात को सोफे से उठा, हाथ मुंह धो कर बिस्तर पर आया तो पत्नी सारा दिन के काम से थकी हुई सो गई थी।मैं चुपचाप बेडरूम में कुर्सी पर बैठ कर कुछ सोच रहा था।
पच्चीस साल पहले इस लड़की से मैं पहली बार मिला था। जामुनी रंग के शूट में मुझे मिली थी। फिर मैने इससे शादी की थी।मैंने वादा किया था कि सुख में, दुख में ज़िंदगी के हर मोड़ पर मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।
पर ये कैसा साथ? मैं सुबह जागता हूं अपने काम में व्यस्त हो जाता हूं। वो सुबह जागती है मेरे लिए चाय बनाती है।चाय पीकर मैं कम्यूटर पर संसार से जुड़ जाता हूं, वो नाश्ते की तैयारी करती है। फिर हम दोनों दुकान के काम में लग जाते हैं, मैं दुकान के लिए तैयार होता हूं, वो साथ में मेरे लंच का इंतज़ाम करती है। फिर हम दोनों भविष्य के काम में लग जाते हैं।
मैं एकबार दुकान चला गया, तो इसी बात में अपनी शान समझता हूं कि मेरे बिना मेरा दुकान का काम नहीं चलता, वो अपना काम करके डिनर की तैयारी करती है।
देर रात मैं घर आता हूं और खाना खाते हुए ही निढाल हो जाता हूं। एक पूरा दिन खर्च हो जाता है, जीने की तैयारी में।
वो पंजाबी सूट वाली लड़की मुझ से कभी शिकायत नहीं करती। क्यों नहीं करती मैं नहीं जानता। पर मुझे खुद से शिकायत है।आदमी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करता है, सबसे कम उसी की परवाह करता है क्यों?
कई दफा लगता है कि हम खुद के लिए अब काम नहीं करते।हम किसी अज्ञात भय से लड़ने के लिए काम करते हैं।हम जीने के पीछे ज़िंदगी बर्बाद करते हैं
कल से मैं सोच रहा हूं, वो कौन सा दिन होगा जब हम जीना शुरू करेंगे। क्या हम गाड़ी, टीवी, फोन, कम्यूटर, कपड़े खरीदने के लिए जी रहे हैं?
मैं तो सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिए कि ज़िंदगी बहुत छोटी होती है। उसे यूं जाया मत कीजिए। अपने प्यार को पहचानिए। उसके साथ समय बिताइए। जो अपने माँ बाप भाई बहन सागे संबंधी सब को छोड़ आप से रिश्ता जोड़ आपके सुख-दुख में शामिल होने का वादा किया उसके सुख-दुख को पूछिए तो सही।
एक दिन अफसोस करने से बेहतर है, सच को आज ही समझ लेना कि ज़िंदगी मुट्ठी में रेत की तरह होती है। कब मुट्ठी से वो निकल जाएगी, पता भी नहीं चलेगा।
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