Ransisar charna
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16/11/2019
23/08/2019
Ransisar to Salasar darbar
02/02/2019
Good morning
#खिंयाला_____इतिहास
जायल (नागौर) पंचायत मुख्यालय से 15 कि मी दूर खिंयाला गाँव जो पूर्व मे धसून्डा हुआ करता था ।
14 वीं सदी मे दो #जाट_समुदाय के बीच हुये भीषण युद्ध के बाद से यह गाँव खिंयाला हो गया ।
बात उस समय की है जब दिल्ली सल्तनत पर अकबर का शासन था । खिंयाला सहित 27 गाँव खालसा घोषित थे ओर यहाँ की लगान को दिल्ली तक पहूचाने की जिम्मेदारी यहाँ के #जाटों की थी ।
बात 1556 ई स्वी की है जब खिंयाला के #धरमसिंहbidiyasarव जायल के #गोपाल_जी_basat समस्त लगान लेकर दिल्ली जा रहे थे । रात्रि विश्राम हेतु वह #हरमाङा (जयपुर) मे गाँव के बाहर कुएं पर रूके । वहां पर एक #अबला_स्त्री लिछमा गुजरी जिसके घर लडकियों की शादी होती है परन्तु उसके भात (मायरा ) भरने वाला कोई नहीं होता है , वह अपना यह दुखः छिपा नहीं पाती है और जब कुएं पर विलाप करती है तो धरमसिंह जी उसे अपनी धर्म की बहिन बना लेते है और भात भरने का आश्वासन देकर घर भेज देते है ।
हरमाङा मे मां दधिमति (बिडियासरों की कुल देवी ) की ऐसी कृपा होती शादी के दिन दोनों चौधरी ऐसा भात (मायरा) भरते है कि आज लगभग 500 वर्षों बाद भी जब भी कोई मायरा भरा जाता है तो उन्हें याद किया जाता है ।
#बीरा तु बणजे जायलङी रो जाट घङी दोय बणजे खिंयाला रो चौधरी ।
एक ऐसी ही दुसरी घटना से आपको रूबरू करवा देता हूँ-------
#धरमसिंह जी bidiyasarके छः पुत्र थे सबसे छोटे पुत्र का नाम #नृसिंह_जी (नरसी जी ) था ।कुशाग्र बुद्धि युद्ध कोशल मे प्रवीण सच्चे धर्म रक्षक युवा एक बार तोषिणा गाँव से गुजरते हैं। उनका सामना एक अबला स्त्री से होता है वह स्त्री तोषिणा ठाकुर के घर बंधक बनाई हुई होती है । उसकी पीङा सुनकर #नृसिंह_जी उसे अपने साथ अपने घर अपने गाँव ले आते है । यह बात जब तोषिणा ठाकुर को पता चलती है कि दासी को तो #नृसिंह_चौधरी अपने साथ ले गया तो वह अपने आदमियों से कहलवाता है कि जाट को बोल दो या तो दासी को वापिस पहुँचा दे अन्यथा युद्ध के लिये तैयार रहें। #नृसिंह_जी ने सन्तोषजनक जवाब देते हुये कहा कि #बेटी बनाके लाया हूँ #जवांई बनके ले जा सकते हो ।
तोषिणा ठाकुर युद्ध की तैयारी कर रवाना हो जाते है अङसिंगा व खिंयाला मार्ग पर अपनी फौज तैनात कर देते है । इनकी फौज मे 150 घुङसवारों सहित सैकङो बन्दुकधारी सैनिक होते है । उनके सामने एक अकेला वीर योद्धा खङा होता है इनकी फौज मे तो एक #सांड होता है जो युद्ध के दौरान #नृसिंह_जी का साथ निभाता है उसे ही एक खान बहादुर नामक सैनिक द्वारा गोली मार दी जाती है और #सांड #देवलोक हो जाता है ।
यह #दृश्य देखकर #नृसिंह_जी_चौधरी अपना #शीश अपने ही हाथों से उस #सांड को #अर्पित कर देते है और बीना शीश के पुरी फौज को खत्म कर देते हैं। यह वृतांत आज भी यहां के स्थानीय गीतों मे गाया जाता है ।
भोमिया शीश पङयो धङ झुंझियो भोमियो बीना माथे भाही तलवार भोमियाजी झगङे झुंझिया ।
जब भी यह वृतांत याद करता हूँ तो रोंगटे खङे हो जाते है और सिर फक्र से ऊन्चा हो जाता है ।
यह दोनों ही घटनाएँ प्रमाणित है आज दिन तक इनके परचे कायम हैं ।
दोनों ही घटनाओं से स्पष्ट होता है कि यह वीर भूमि उन वीर योद्धा व सूरमाओं की है जिन्होंने अबला स्त्री के सम्मान व रक्षार्थ अपना सम्पूर्ण जीवन न्योछावर कर दिया ।
परन्तु जो घटना पीछले पांच दिनों से देखी है आत्मा को झकझोर के रखती है इस वीर भूमि पर ऐसे क्रत्य ।
कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे जाट समाज की माओं ने नृसिंह सुरजमल व भगतसिंह पैदा करने ही भूल गई हो ।
हे मेरे ईष्ट देव सबको सद्ध बुद्धि देना ।
22/01/2017
Happy new year mere pyare ghav walo
rewelcome to dear all members
05/05/2015
तांबे के बर्तन से पानी पीने के 9 स्वास्थ्य लाभ
हम में से ज्यादातर लोगों ने अपने दादा-दादी से तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी पीने के स्वास्थ्य लाभों के बारे में सुना होगा। कुछ लोग तो पानी पीने के लिए विशेष रूप से तांबे से बने गिलास और जग का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या इस धारणा के पीछे वास्तव में कोई वैज्ञानिक समर्थन है? या यह एक मिथक है बस? तो आइए तांबे के बर्तन में पानी पीने के बेहतरीन कारणों को जाने
1 . तांबे के बर्तन में पानी पीना अच्छा क्यों है?
आयुर्वेद के अनुसार, तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी में आपके शरीर में तीन दोषों (वात, कफ और पित्त) को संतुलित करने की क्षमता होती है और यह ऐसा सकारात्मक पानी चार्ज करके करता है। तांबे के बर्तन में जमा पानी 'तमारा जल' के रूप में भी जाना जाता है और तांबे के बर्तन में कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है।
2. तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे
जब पानी तांबे के बर्तन में संग्रहित किया जाता है तब तांबा धीरे से पानी में मिलकर उसे सकारात्मक गुण प्रदान करता है। इस पानी के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह कभी भी बासी (बेस्वाद) नहीं होता और इसे लंबी अवधि तक संग्रहित किया जा सकता है।
3. बैक्टीरिया समाप्त करने में मददगार
तांबे को प्रकृति में ओलीगोडिनेमिक के रूप में (बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव) जाना जाता है और इसमें रखे पानी के सेवन से बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है। तांबा आम जल जनित रोग जैसे डायरिया, दस्त और पीलिया को रोकने में मददगार माना जाता है। जिन देशों में अच्छी स्वच्छता प्रणाली नहीं है उन देशों में तांबा पानी की सफाई के लिए सबसे सस्ते समाधान के रूप में पेश आता है।
4. थायरॉयड ग्रंथि की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण
थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में तेजी से वजन घटना या बढ़ना, अधिक थकान महसूस होना आदि हैं। कॉपर थायरॉयड ग्रंथि के बेहतर कार्य करने की जरूरत का पता लगाने वाले सबसे महत्वपूर्ण मिनरलों में से एक है। थायराइड विशेषज्ञों के अनुसार, कि तांबे के बर्तन में रखें पानी को पीने से शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन नियंत्रित होकर इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है।
5. मस्तिष्क को उत्तेजित करता है
तांबे में मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाले और विरोधी ऐंठन गुण होते हैं। इन गुणों की मौजूदगी मस्तिष्क के काम को तेजी और अधिक कुशलता के साथ करने में मदद करते है।
6. गठिया में फायदेमंद
गठिया या जोड़ों में दर्द की समस्या आजकल कम उम्र के लोगों में भी होने लगी है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो रोज तांबे के पात्र का पानी पीये। तांबे में एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह गुण दर्द से राहत और दर्द की वजह से जोड़ों में सूजन का कारण बने - गठिया और रुमेटी गठिया के मामले विशेष रूप से फायदेमंद होते है।
7. त्वचा को बनाये स्वस्थ
त्वचा पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसीलिए अगर आप अपनी त्वचा को सुंदर बनाना चाहते हैं तो रातभर तांबे के बर्तन में रखें पानी को सुबह पी लें। ऐसा इसलिए क्योंकि तांबा हमारे शरीर के मेलेनिन के उत्पादन का मुख्य घटक है। इसके अलावा तांबा नई कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है जो त्वचा की सबसे ऊपरी परतों की भरपाई करने में मदद करती है। नियमित रूप से इस नुस्खे को अपनाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार लगने लगेगी।
8. पाचन क्रिया को दुरुस्त रखें
पेट जैसी समस्याएं जैसे एसिडिटी, कब्ज, गैस आदि के लिए तांबे के बर्तन का पानी अमृत के सामान होता है। आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप अपने शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे रखा हुआ पानी पिएं। इससे पेट की सूजन में राहत मिलेगी और पाचन की समस्याएं भी दूर होंगी।
9. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करें
अगर आप त्वचा पर फाइन लाइन को लेकर चिंतित हैं तो तांबा आपके लिए प्राकृतिक उपाय है। मजबूत एंटी-ऑक्सीडेंट और सेल गठन के गुणों से समृद्ध होने के कारण कॉपर मुक्त कणों से लड़ता है---जो झुर्रियों आने के मुख्य कारणों में से एक है---और नए और स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है।
जानिये भारत भूमि के बारे मे विदेशियों की राय
अवश्य पढ़े
1. अलबर्ट आइन्स्टीन - हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती।
2. रोमां रोलां (फ्रांस) - मानव ने आदिकाल से जो सपने देखने शुरू किये, उनके साकार होने का इस धरती पर कोई स्थान है, तो वो है भारत।
3. हू शिह (अमेरिका में चीन राजदूत)- सीमा पर एक भी सैनिक न भेजते हुए भारत ने बीस सदियों तक सांस्कृतिक धरातल पर चीन को जीता और उसे प्रभावित भी किया।..
4. मैक्स मुलर- यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया, तो मैं भारत का नाम लूँगा।
5. मार्क ट्वेन- मनुष्य के इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है।
6. आर्थर शोपेन्हावर - विश्व भर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो उपनिषदों जितना उपकारी और उद्दत हो। यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है, और वही मृत्यु में भी शांति देगा।
7. हेनरी डेविड थोरो - प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को अपूर्व और ब्रह्माण्डव्यापी #गीता के तत्वज्ञान से स्नान करता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र और तुच्छ जान पड़ता है।
8. राल्फ वाल्डो इमर्सन - मैं भगवत #गीता का अत्यंत ऋणी हूँ। यह पहला ग्रन्थ है जिसे पढ़कर मुझे लगा की किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है।
9. विल्हन वोन हम्बोल्ट- #गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक ग्रन्थ है जो किसी अन्य भाषा में नहीं। वह एक ऐसी गहन और उन्नत वस्तु है जिस पर सारी दुनिया गर्व कर सकती है।
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