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"Hello friends, I am Dr Sonu malik, our channel provides remedies for various diseases.If you enjoy.
नमस्कार दोस्तों,
इस वीडियो में हम बात करने वाले हैं एक ऐसी कैप्सूल के बारे में जो आपके शरीर की थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी को जड़ से खत्म करने में मदद करता है — Be One Capsule।
यह एक Multivitamin, Multimineral & Antioxidant Capsule है, जो शरीर की Nutritional Deficiency को दूर करके Energy, Strength और Immunity बढ़ाता है।
अगर आप हमेशा थके रहते हैं, जल्दी कमजोरी महसूस होती है या काम करने में मन नहीं लगता, तो यह वीडियो आपके लिए है।
इस वीडियो में आप जानेंगे👇
🔹 Be One Capsule क्या है?
🔹 Be One Capsule के फायदे (Uses & Benefits)
🔹 इसके अंदर कौन-कौन से Vitamins और Minerals हैं
🔹 Be One Capsule के Side Effects
🔹 कैसे और कब लें (Dosage & Timing)
🔹 किस कंपनी की दवा है और इसकी कीमत क्या है
⚠️ Disclaimer: यह वीडियो केवल एजुकेशन और जानकारी के उद्देश्य से बनाया गया है। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह जरूर लें।
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18/04/2025
एक जादुई पौधा जो शराब क्या हर नशा छुड़ा देगा
पातालगरुड़ी नाम सुनकर अजीब लग रहा होगा न! हिन्दी में यह जलजमनी, छिरहटा ऐसे अनेक नामों से जाना जाता है। असल में घरों के आस-पास, नम छायादार जगहों में इस तरह के बेल नजर में आते हैं। इन बेलों के कारण जल जम जाते हैं वहां इसलिए इन्हें जलजमनी भी कहा जाता है। आयुर्वेद में लेकिन इस बेल के अनेक औषधीय गुण का परिचय भी मिलता है। चलिये इसके बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
पातालगरुड़ी क्या है? (What is Patalgarudi in Hindi?)
पातालगरुड़ी बेल बरसात के दिनों में सब जगह उत्पन्न होती है, इसके पत्तों को पीसकर पानी में डालने से पानी जम जाता है, इसलिए इसको जलजमनी कहते हैं। इसकी जड़ के अन्त में जो कन्द या बल्ब होता है, उसे जल में घिसकर पिलाने से उल्टी करवाकर सांप का विष निकालने में मदद मिलती है, अत: इसे पातालगरूड़ी कहते हैं। पाठा मूल के स्थान पर इसकी जड़ों को बेचा जाता है या पाठा मूल के साथ इसकी जड़ों की मिलावट की जाती है।
पाठा के जैसी किन्तु अधिक मोटी तथा दृढ़ लता होती है। नई बेल धागा जैसी पतली तथा पुरानी बेल अधिक मोटी होती है। इसके फल छोटे, गोल, चने के बराबर, चिकने, झुर्रीदार, बैंगनी काले रंग के, मटर आकार के, कच्ची अवस्था में हरे तथा पकने पर काले या बैंगनी रंग के होते हैं। इसकी जड़ टेढ़ी, स्निग्ध, हलकी भूरी अथवा पीले रंग की, जमीन में गहराई तक गई हुई, सख्त तथा अन्त में कन्द से युक्त व स्वाद में कड़वी होती है।
अन्य भाषाओं में पातालगरुड़ी के नाम (Names of Patalgarudi in Different Languages)
पातालगरुड़ी का वानास्पतिक नाम Cocculus hirsutus (Linn.) W.Theob.(कोकुलस हिर्सुटस) Syn-Cocculus villosus DC. Menispermum hirsutum Linn. होता है। इसका कुल Menispermaceae(मेनिस्पर्मेसी) होता है और इसको अंग्रेजी में Broom creeper (ब्रूम क्रीपर) कहते हैं। चलिये अब जानते हैं कि पातालगरुड़ी और किन-किन नामों से जाना जाता है।
Sanskrit-छिलिहिण्ट, महामूल, पातालगरुड़, वत्सादनी, दीर्घवल्ली;
Hindi-पातालगरुड़ी, छिरेटा, फरीदबूटी, चिरिहिंटा, छिरहटा, जलजमनी;
Urdu-फरीदबूट्टी (Faridbutti);
Odia-मूसाकानी (Musakani);
Konkani–वानाटिक्टीका (Vanatiktika);
Kannada–दागड़ी (Dagadi), दागाड़ीवल्ली (Dagadiballi);
Gujrati-पातालग्लोरी (Patalglori), वेवड़ी (Vevadi);
Telugu-दूसरतिगे (Dusartige), चीप्रुतिगे (Chieeprutige);
Tamil-कातुककोदी (Kattukkodi);
Bengali-हुएर (Huyer);
Nepali–कासे लहरो (Kaselahro);
Punjabi-फरीद बूटी (Farid buti);
Marathi-वासनवेल (Vasanvela), भूर्यपाडल (Bhuryapadal);
Malayalam-पाथाअलमूली (Paathaalamuuli)।
English-इन्क बेरी (Ink berry);
Persian-फरीद बूटी (Farid Butti)।
पातालगरुड़ी का औषधीय गुण (Medicinal Properties of Patalgarudi in Hindi)
पातालगरुड़ी के फायदों के बारे में जानने के पहले औषधीय गुणों के बारे में जानना जरूरी होता है। चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं-
सिरदर्द से दिलाये आराम पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial to Treat Headache in Hindi)
हर दिन तनाव से सर फटने लगता है तो पातालगरुड़ी का इस्तेमाल इस तरह से करने पर जल्दी आराम मिल सकता है। इसके लिए पातालगरुड़ी जड़ तथा पत्ते को पीसकर सिर पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलने में मदद मिलती है।
रतौंधी के इलाज में लाभकारी पातालगरुड़ी (Benefit of Patalgarudi in Nightblindness in Hindi)
पातालगरुड़ी का औषधीय गुण पातालगरुड़ी के पत्तों को पकाकर सेवन करने से रात्र्यान्धता (रतौंधी) में लाभ होता है।
आँखों के रोगों से दिलाये राहत पातालगरुड़ी (Uses of Patalgarudi to Treat Eye Diseases in Hindi)
पातालगरुड़ी पत्ते के रस का अंजन करने से अभिष्यंद (आँखों का आना) तथा आँखों में दर्द में लाभ होता है।
दांतों के दर्द को कम करने में फायदेमंद पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial to Get Relief from Toothache in Hindi)
दांत दर्द से परेशान रहते हैं तो पातालगरुड़ी के औषधीय गुणों का इस्तेमाल इस तरह से करने से जल्दी आराम मिलता है। पातालगरुड़ी पत्ते के पेस्ट को दाँतों पर मलने से दांत दर्द से आराम मिलता है।
अजीर्ण या बदहजमी के इलाज में लाभकारी पातालगरुड़ी (Benefits of Patalgarudi in Indigestion in Hindi)
खाने-पीने में गड़बड़ी होने के वजह से बदहजमी की समस्या से परेशान रहते हैं तो 1-2 ग्राम पातालगरुड़ी जड़ चूर्ण में समान भाग में अदरक तथा शर्करा मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण से आराम मिलता है।
अतिसार या दस्त को रोकने में फायदेमंद पातालगरुड़ी (Uses of Patalgarudi to Get Relief from Diarrhoea in Hindi)
खान-पान में असंतुलन होने से अक्सर दस्त जैसी समस्या होती है। 5 मिली पातालगरुड़ी जड़ के रस का सेवन करने से अतिसार में लाभ होता है।
श्वेतप्रदर या ल्यूकोरिया के इलाज में लाभकारी पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial in Leucorrhoea in Hindi)
पातालगरुड़ी के नये पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-20 मिली काढ़े में शर्करा मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ होता है।
पूयमेह या गोनोरिया से राहत दिलाने में फायदेमंद पातालगरुड़ी (Benefits of Patalgarudi to Get Relief from Gonorrhoea in Hindi)
5 मिली पातालगरुड़ी पत्ते के रस को जल में जैली की तरह जमाकर और दही के साथ सेवन करने से पूयमेह या शुक्रमेह (गोनोरिया) में लाभ होता है। इसके अलावा 5 मिली पातालगरुड़ी पत्ते के रस को पिलाने से सूजाक में लाभ होता है।
स्वप्नदोष के इलाज में लाभकारी पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial to Treat Nightfall in Hindi)
10 ग्राम छाया में सुखाया हुआ जलजमनी पत्ते के चूर्ण में घी में भुनी हुई हरड़ का चूर्ण मिलाकर, इसके समान मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह शाम 2 ग्राम की मात्रा में गाय दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। औषध सेवन काल में पथ्य पालन आवश्यक है।
आमवात या गठिया के दर्द से दिलाये राहत पातालगरुड़ी (Benefits of Patalgarudi to Get Relief from Gout in Hindi)
गठिया के दर्द से परेशान रहते हैं तो पिप्पली तथा बकरी के दूध से सिद्ध जलजमनी के 10-20 मिली काढ़े का सेवन करने से जीर्ण आमवात (गठिया) अथवा रतिज रोगों के कारण उत्पन्न दर्द में लाभ होता है। इसके अलावा 5 ग्राम जलजमनी की जड़ को 50 मिली बकरी के दूध में उबालकर छानकर, उसमें 500 मिग्रा पिप्पली, 500 मिग्रा सोंठ तथा 500 मिग्रा मरिच डालकर पिलाने से आमवात, त्वचा संबंधी बीमारियों तथा उपदंश (Syphilis) की वजह से होने वाले संधिवात में लाभ होता है। जलजमनी पत्ते को पीसकर लगाने से संधिवात या अर्थराइटिस में लाभ होता है।
त्वचा संबंधी समस्याओं में फायदेमंद पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial in Skin Diseases in Hindi)
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जलजमनी पत्ते के रस का लेप करने से छाजन, खुजली, घाव तथा जलन से राहत मिलने में आसानी होती है।
राजयक्ष्मा या तपेदिक के इलाज में लाभकारी पातालगरुड़ी (Benefit of Patalgarudi to Treat Tuberculosis in Hindi)
5 मिली जलजमनी पत्ते के रस को 50 मिली तिल तेल में मिलाकर, पकाकर, छानकर तेल प्रयोग करने से क्षय रोग में लाभ होता है।
शराब व भांग की लत छुड़ाने में लाभकारी पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial in De-addiction from Alcoholism in Hindi)
जलजमनी के 2-4 ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन 1 माह तक सेवन करने से शराब तथा भांग की आदत छूट जाती है। इसका प्रयोग करते समय यदि उल्टी हो तो इसकी मात्रा कम कर देनी चाहिए।
पेटदर्द से दिलाये आराम पातालगरुड़ी (Benefit of Patalgarudi to Treat Stomach Ache in Hindi)
लता करंज के बीजचूर्ण तथा जलजमनी जड़ के चूर्ण को मिलाकर 1-2 ग्राम मात्रा में सेवन कराने से बच्चों के पेट के दर्द से आराम मिलता है।
सांप के विष के असर को कम करने में फायदेमंद पातालगरुड़ी (Patalgarudi Beneficial to Treat Snake Poison in Hindi)
Ayurvedic Medicine Indian birthwort is Beneficial in Snake Bite
पातालगरुड़ी जड़ को पीसकर पानी में घिसकर 1-2 बूँद नाक लेने से तथा इसके 5 मिली पत्ते के रस में 5 मिली नीम पत्ते के रस में मिलाकर पीने से सांप के काटने से जो विष का असर होता है उसको कम करने में मदद मिलता है।
पातालगरुड़ी का उपयोगी भाग (Useful Parts of Patalgarudi)
आयुर्वेद के अनुसार पातालगरुड़ी का औषधीय गुण इसके इन भागों को प्रयोग करने पर सबसे ज्यादा मिलता है-
-पत्ता और
-जड़
पातालगरुड़ी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए (How to Use Patalgarudi in Hindi)
यदि आप किसी ख़ास बीमारी के घरेलू इलाज के लिए पातालगरुड़ी का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही इसका उपयोग करें। चिकित्सक के सलाह के अनुसार 2-4 ग्राम चूर्ण ले सकते हैं।
पातालगरुड़ी कहां पाया या उगाया जाता है (Where is Patalgarudi Found or Grown in Hindi)
भारत में यह उष्णकटिबंधीय एवं उप-उष्णकटिबंधीय साधारण प्रान्तों में मुख्यत: हिमालय के निचले क्षेत्रों, पश्चिम बंगाल, बिहार एवं पंजाब में पाया जाता है।
18/04/2025
तुम्बा औषधीय गुण
तुम्बा को इंद्रायण के नाम से भी जाना जाता है।यह स्वाद में कड़वा होता है।तुम्बा कम पानी वाले स्थानों पर आसानी से मिल जाता है।इसे आचार और औषधि के रूप में काम में लिया जाता है।
1-तुम्बे की जड़ की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं तथा दांतों से खुन निकलना बंद हो जाता है। अगर दांतों में दरद महसूस हो रहा है या किड़ा लग रहा है तो तुम्बे की गिरी का रस एक गिलास पानी में मिलाकर कुल्ला करें ध्यान रहे इस पानी को पेट में ना जाने दें। वरना पेचिश हो सकते है।इसके सुखे फल की ध्वनी को मुंह में ले और मुंह नीचे कर के लार टपकाने से दांत के किड़े बहार आ जाते हैं।
2- जिन लोगों को शुगर है उनके लिए यह रामबाण औषधि है। तुम्बे में छेद करके गिरी निकालकर अन्दर से खोखला करलो। और इसमें मैथी दाना भरकर छेद को बन्द कर तीन दिन छाया में रख दें। तीन दिन बाद मैथी को निकाल कर छाया में सुखा लें,और सुखने के बाद पाउडर तैयार करें। एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट सेवन करने से शुगर जड़ से खत्म हो जाता है।15-20 तुम्बों को पैरों से तब तक कुचले जब तक मुंह कड़वा ना हो जाए यह उपाय शुगर, जोड़ दर्द, कमर दर्द, पेट दर्द, मांसपेशियों की ऐंठन, गैस, आदि में फायदा करता है।
3-तुम्बे को गरम करके पेट पर रखने से पेट के कीड़े मर जाते हैं और अपच की समस्या ठीक हो जाती है। तुम्बे को तिल के तेल में डालकर गरम करें और इस तेल की मालिश करने से दरद ,मौच ठीक हो जाता है। माइग्रेन में भी इसका माथे पर मालिश करने से फायदा होता है।तथा नाक में दो बूंद डालने से मिर्गी रोग से मुक्ति मिलती है। तुम्बे को नारियल तेल में डालकर गरम करें और इस तेल को बालों में लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं और बालों का झड़ना व डेंड्रफ खत्म हो जाता है।और कान में डालने से कान दर्द ठीक हो जाता है।
4- सुखे तुम्बे को चिल्म की तरह पीने से दमा रोग में लाभ होता है।कब्ज होने पर तुम्बे को सुखाकर उसमें हिंग, अजवाइन, नमक, इलायची बराबर मात्रा में मिलाकर एक चौथाई चम्मच पानी के साथ खाने से पहले लें। बवासीर होने पर इसकी जड़ को धुप में सुखाकर चूर्ण बनाकर एक चौथाई चम्मच रोज सुबह शाम सेवन करने से फायदा होता है। तथा इसकी जड़ का रस त्वचा पर लगाने से मच्छर नहीं काटते हैं। और तमाम त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।
5-आतं के किड़ो से राहत पाने के लिए इसकी जड़ को धोकर साफ करें और चूर्ण तैयार कर लें। इसे रोज गुनगुना पानी के साथ लें इससे आंत के कैंसर व किड़े, पेट की गैस दुर हो जाती है।तथा हर प्रकार की सुजन दुर करता है। तुम्बे की गिरी को रात में सोते समय तलवों पर बांधने से गठीया रोग व तलवों की जलन दुर हो जाती है।
6- इसका अचार भी बहुत ही लाभकारी है।तुम्बे का अचार डालने के लिए तुम्बे के चार टुकड़े करें। और चुने के पानी में सात से आठ दिन डालकर छोड़ दे। आठ दिन बाद में निकाल कर साफ पानी से साफ कर धुप में सुखा लें और आचार डालें यह बहुत ही लाभदायक होता है।
6. यह कब्ज की रामबाण दवा है करीब 2 किलो तूंबे को अच्छी तरह से छीलकर काट कर गिरी को सुखा ले सूखने के बाद इसमें अजवाइन काला जीरी सौंफ काला नमक इत्यादि मिलाकर इसको एक अच्छी तरह से पीसकर कांच के बर्तन में भर लेवे और आधा चम्मच आप ट्राई करके देखें
कृपया इस उपयोग ज्यादा मात्रा में ना करें।
तथा चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
18/04/2025
जानिए इस दाल की उत्पत्ति कैसे हुयी
मूंग दाल की खोज का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता है। माना जाता है कि यह भारतीय उपमहाद्वीप में उत्पन्न हुई थी, और इसकी खेती का इतिहास बहुत पुराना है, लगभग 4,000 साल पहले. इसे हड़प्पा सभ्यता के पूर्वी क्षेत्र में खोजा गया था, जो अब पंजाब और हरियाणा में है.
विस्तार:
मूंग दाल की उत्पत्ति को भारतीय उपमहाद्वीप से जोड़ा गया है.
यह माना जाता है कि इसकी खेती लगभग 4,000 साल पहले शुरू हुई थी, और यह एशिया में फैल गई.
कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, मूंग दाल की खेती लगभग 2200 ईसा पूर्व से शुरू हुई थी.
यह प्राचीन काल से ही भारतीय भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, और आयुर्वेद और बौद्ध साहित्य में इसका उल्लेख मिलता है.
आजकल मूंग दाल भारत के कई हिस्सों में उगाई जाती है और इसे ठंडे मौसम में उगाया जाता है.
18/04/2025
फालसा🍒
फालसा गहरे बैंगनी रंग का फल है जो गर्मियों में मिलता है, ये फल दिखने में भले ही छोटा है लेकिन इसके फायदे बड़े-बड़े है,
यह छोटा, मुलायम और पीले रंग का झाड़ी अथवा पेड़ होता है। इसके तने की त्वचा-खुरदरी, हल्का भूरा और सफेद रंग की होती है। इसके फल गोल, बड़े मटर या जंगली झरबेरी जैसे धूसर रंग के होते हैं। जब फल कच्ची अवस्था में रहते हैं तब वह हरे रंग के तथा पके अवस्था में बैंगनी रंग के अथवा लाल रंग के, खट्टे व मीठे होते हैं। इसकी खेती मुख्य रूप से पंजाब और मुंबई के आसपास की जाती है, इसका स्वाद काफी हद तक अंगूर के जैसा खट्टा मिठा होता है,फालसा फल का वैज्ञानिक नाम ग्रेविआ एशियाटिक है। इसमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इस फल में मैग्नीशियम, पोटैशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन भी पाया जाता है, गर्मियों मे इस फल का सेवन करने से शरीर को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है।
1. शरीर को ठंडा रखने-
गर्मी के मौसम में फालसा का सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाता है, इस चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए आप इस फल का सेवन कर सकते हैं।
2.इम्यूनिटी-
फालसा में विटामिन सी और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मददगार हैं,मजबूत इम्यूनिटी शरीर को संक्रमण से बचाने में मददगार है।
3.मोटापा-
अगर आप वजन को कम करना चाहते हैं तो फालसा फल आपकी मदद कर सकता है, फालसा का सेवन करने से वजन को कम किया जा सकता है।
4.स्किन-
गर्मियों के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं काफी देखी जाती है, फालसा में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो त्वचा को हेल्दी रखने में मददगार है।
5.हार्ट-
फालसा में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो हार्ट हेल्थ को हेल्दी रखने में मदद करते हैं, हार्ट के मरीजों के लिए फायदेमंद है इस फल का सेवन।
6.पाचन-
फालसा में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मददगार है, गर्मियों के मौसम में पाचन को बेहतर रखने के लिए आप इस फल का सेवन कर सकते हैं।
7.पेट दर्द -
असंतुलित खानपान हुआ कि नहीं पेट दर्द की परेशानी होनी शुरु हो जाती है, पेट दर्द की परेशानी में फालसे के रस का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है।
8.डिप्थीरिया-
द्राक्षा (एक तरह का अंगूर) तथा फालसा का काढ़ा बनाकर उससे गरारा करने पर रोहिणी या डिप्थीरिया में लाभ होता है।
13/04/2025
मुंह में अगर छाले हो जाएं तो जीना मुहाल हो जाता है। खाना तो दूर पानी पीना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इसका इलाज आपके आसपास ही मौजूद है। मुंह के छाले गालों के अंदर और जीभ पर होते हैं। संतुलित आहार, पेट में दिक्कत, पान-मसालों का सेवन छाले का प्रमुख कारण है। छाले होने पर बहुत तेज दर्द होता है। आइए हम आपको मुंह के छालों से बचने के लिए घरेलू उपचार बताते हैं।
मुंह के छालों से बचने के घरेलू उपचार–
शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुंह के छालों पर करें और लार को मुंह से बाहर टपकने दें।
मुंह में छाले होने पर अडूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उनका रस चूसना चाहिए।
छाले होने पर कत्था और मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुंह के छालों परलगाने चाहिए।
अमलतास की फली मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुंह में रखिए। या केवल अमलतास के गूदे को मुंहमें रखने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
अमरूद के मुलायम पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले से राहत मिलती है और छाले ठीक हो जाते हैं
07/04/2025
कोई चूर्ण जिससे ज्यादा भूख लगे ? कोई हमको राय दे सकता है ?
कौनसा लेना चाहिए?
अगर आपको भूख बढ़ाने के लिए किसी चूर्ण की तलाश है, तो आयुर्वेदिक और हर्बल उपाय अच्छे विकल्प हो सकते हैं। यहाँ कुछ असरदार चूर्ण बताए जा रहे हैं:
Dadima ke Gharelu Nuskhe - घरेलू नुस्खे
1. अविपत्तिकर चूर्ण
पेट की समस्याओं को दूर करता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है।
गैस, एसिडिटी और अपच को कम करता है।
कैसे लें? भोजन से पहले या बाद में 1-2 ग्राम गुनगुने पानी या शहद के साथ लें।
2. हिंग्वाष्टक चूर्ण
पाचन शक्ति को बढ़ाता है और मेटाबोलिज्म सुधारता है।
पेट फूलना और गैस की समस्या को कम करता है।
कैसे लें? 1-2 ग्राम गुनगुने पानी या घी के साथ भोजन से पहले लें।
3. चव्य चूर्ण (
Chavya Churna)
यह आयुर्वेदिक चूर्ण भूख को बढ़ाने में मदद करता है।
पाचन क्रिया को तेज करता है और भोजन को सही से अवशोषित करने में मदद करता है।
कैसे लें? 1-2 ग्राम गुनगुने पानी के साथ दिन में एक बार लें।
4. त्रिकटु चूर्ण
इसमें अदरक, काली मिर्च और पिपली होती है, जो पाचन शक्ति को बढ़ाकर भूख में सुधार करती है।
कैसे लें? आधा चम्मच शहद या गुनगुने पानी के साथ लें।
5. विदारीकंद चूर्ण
यह शरीर को ताकत देने और भूख बढ़ाने में मदद करता है।
कमजोर शरीर वालों के लिए फायदेमंद होता है।
कैसे लें? दूध के साथ 1-2 ग्राम रोज़ लें।
👉 सुझाव: अगर आपकी भूख बहुत कम है और लंबे समय से ऐसी समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा। साथ ही, अश्वगंधा और सतावरी चूर्ण भी भूख को सुधारने में मदद कर सकते हैं।
क्या आपको भूख न लगने की समस्या लंबे समय से है, या यह हाल ही में हुआ है?
😊🙏🏻
Sonu Malik
07/04/2025
बेलपत्र की तासीर ठंडी होती है. बेलपत्र के कई फ़ायदे हैं, जैसे कि:
पेट की गर्मी से होने वाले मुंह के छालों में राहत मिलती है.
गर्मियों में लू से बचाव होता है.
पेट ठंडा रहता है.
गैस, एसिडिटी, और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
बवासीर की समस्या में फ़ायदेमंद होता है.
इम्यूनिटी मज़बूत होती है.
दिल की सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है.
ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
बेल फल के फायदे और उपयोग:
वैसे तो इस पत्ते का सेवन दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन एक्सपर्ट का सुझाव है कि जब आप इसे खाली पेट खाते हैं यानि सुबह तो अनगिनत फायदे पहुंचाता है. क्योंकि बासी मुंह शरीर पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित कर लेता है.
बेलपत्र खाने के फायदे
- बेल पत्र पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या है तो रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं
- रोजाना सुबह बेल पत्र का सेवन करने से गैस, एसिडिटी और अपच से छुटकारा मिल सकता है.
- वहीं, जिन लोगों को बवासीर की समस्या है उनके लिए खाली पेट बेल पत्र खाना फायदेमंद हो सकता है.
दिल के लिए हेल्दी
- अगर आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो दिल को बीमारियों से बचाते हैं.
- साथ ही हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी कम हो जाता है.
शरीर रखे ठंडा
- दरअसल, बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में अगर आप बेल पत्र का सेवन करते हैं तो आपका शरीर पूरे दिन ठंडा रहेगा.
- खासतौर पर गर्मियों में बेल पत्र का सेवन अधिक फायदेमंद होता है. इससे आपको ठंडक मिलेगी.
छाले करे ठीक
- मुंह में छाले होने पर भी रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन फायदेमंद होता है. इसके लिए आप बेल पत्र को चबाकर खा सकते हैं.
डायबिटीज में मिले राहत
- अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्र का सेवन कर सकते हैं.
- बेल पत्र में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक हैं.
- खाली पेट बेल पत्र खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
बेल फल एक प्राकृतिक और पौष्टिक फल है जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यहाँ कुछ प्रमुख फायदे और उपयोग हैं:
फायदे:
1. *पाचन में सुधार*: बेल फल में फाइबर और टैनिन होते हैं जो पाचन में सुधार करते हैं।
2. *कब्ज से राहत*: बेल फल का शरबत कब्ज से राहत दिलाता है।
3. *वजन कम करने में मदद*: बेल फल के जूस में हेल्दी कैलोरी होती है जो वजन कम करने में मदद करती है।
4. *मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद*: बेल फल का शरबत मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद करता है।
5. *हृदय स्वास्थ्य में सुधार*: बेल फल में पोटैशियम होता है जो हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है।
उपयोग:
1. *बेल का शरबत*: बेल का शरबत शरीर को ठंडक देता है और लू से बचाता है।
2. *बेल का मुरब्बा*: बेल का मुरब्बा सीमित मात्रा में खाना चाहिए। दिनभर में 10 ग्राम से अधिक नहीं खाएं।
नोट: बेल फल का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना उचित होगा।
Sonu Malik
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