Dr.Abhishek's wellness centre,GONDA
ब्लड प्रेशर,डाइबीटीज,वजन घटाना,वजन बढ़ाना,त्वचा व सौंदर्य की सुरक्षा हेतु आयुर्वेद की विशेषज्ञ टीम।
22/10/2025
--
🌕 प्राकृतिक घटनाएँ और हृदय रोग का सम्बन्ध
✍️ डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र
एडवांस आयुर्वेद एंड पाइल्स क्लिनिक
महादेवा कला, जय प्रभा ग्राम, गोण्डा – 271209
---
🔶 पूर्णिमा (Full Moon) के समय हृदय पर प्रभाव
पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ जाता है। जैसे समुद्र की लहरें ऊँची हो जाती हैं, वैसे ही हमारे शरीर के द्रवों (रक्त, लसीका, मस्तिष्क द्रव) पर भी सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है।
इससे कुछ लोगों में रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ जाता है, नींद कम आती है, और चिंता भी बढ़ सकती है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से:
पूर्णिमा पर कफ और जल तत्व की वृद्धि होती है। जिन व्यक्तियों में पहले से कफ प्रधान प्रकृति या हृदय की कमजोरी हो, उनमें इस दिन हृदयविकार, घबराहट या छाती में भारीपन बढ़ सकता है।
---
☀️ मकर संक्रान्ति एवं अन्य संक्रान्तियों के समय
मकर संक्रान्ति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। यह ऋतु परिवर्तन का समय होता है — जिसे ऋतु सन्धि कहा गया है।
इस काल में वात और पित्त दोनों असंतुलित हो जाते हैं। ठंड से गर्मी की ओर संक्रमण के कारण शरीर की नसें (धमनियाँ) कभी सिकुड़ती, कभी फैलती हैं — जिससे हृदय पर अतिरिक्त भार पड़ता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से:
जनवरी के महीनों में भारत सहित अनेक देशों में हृदयाघात (Heart Attack) की घटनाएँ सर्वाधिक पाई जाती हैं।
ठंडा मौसम, सुबह का अधिक परिश्रम, तथा मानसिक तनाव प्रमुख कारण बनते हैं।
---
🌑 अमावस्या एवं ग्रहण का प्रभाव
अमावस्या को मन और शरीर दोनों पर तमसिक प्रभाव अधिक होता है।
इस दिन मानसिक उदासी, बेचैनी, या रक्तचाप में गिरावट देखी जा सकती है।
ग्रहण (सूर्य या चन्द्र) के समय मेलाटोनिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन अस्थिर हो जाते हैं — जिससे अनिद्रा, सिरदर्द और दिल की धड़कनें तेज होना जैसी स्थितियाँ संभव हैं।
---
⚡ अन्य प्राकृतिक या ब्रह्माण्डीय प्रभाव
घटना संभावित प्रभाव स्पष्टीकरण
अत्यधिक ठंड हृदयाघात का जोखिम बढ़ना रक्तवाहिनियों का संकुचन
अत्यधिक गर्मी निर्जलीकरण, हृदय पर दबाव शरीर में जल-लवण असंतुलन
सौर तूफ़ान या चुम्बकीय गतिविधि हृदय गति अस्थिर तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव
---
🕉️ आयुर्वेदिक सावधानियाँ एवं उपाय
1. पूर्णिमा पर:
हल्का, मधुर एवं शीतल भोजन लें — लौकी, जौ, या दूध लाभकारी हैं।
2. अमावस्या पर:
तुलसी, अर्जुन छाल एवं गुलकंद का सेवन हृदय के लिए हितकर है।
3. ऋतु सन्धि (जैसे मकर संक्रान्ति):
तिल तेल से अभ्यंग (मालिश) करें।
गुनगुना पानी पिएँ।
प्रातःकाल तीव्र व्यायाम न करें, केवल हल्की सैर पर्याप्त है।
4. मानसिक संतुलन हेतु:
ध्यान, प्रार्थना और जप इन दिनों में विशेष लाभदायक रहते हैं।
---
💬 सारांश
चन्द्रमा, सूर्य, ऋतु परिवर्तन और प्राकृतिक घटनाओं का हमारे शरीर व मन पर सूक्ष्म प्रभाव होता है।
आयुर्वेद ने इन प्रभावों को बहुत पहले ही पहचान लिया था। उचित आहार-विहार और दिनचर्या से हम इन कालों में भी हृदय को स्वस्थ रख सकते हैं।
---
🪷
डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र
एडवांस आयुर्वेद एंड पाइल्स क्लिनिक
महादेवा कला, जय प्रभा ग्राम, गोण्डा – 271209
📞 मोबाइल: 9919941200
---
11/10/2025
🌿 भूम्यामलकी (Bhumi Amla)
जिसे संस्कृत में भूम्यावला, तामालकी या भूद्राक्षा भी कहा जाता है — यह आयुर्वेद की अत्यंत प्रसिद्ध औषधि है।
इसका वैज्ञानिक नाम 👉 Phyllanthus niruri Linn.
यह पौधा भूमि पर फैलने वाला छोटा सा शाक होता है, इसलिए इसे "भूम्यामलकी" (भूमि पर उगने वाली आंवला) कहा गया है।
---
🌿 परिचय
कुल (Family): Euphorbiaceae
रूप: छोटा, कोमल, शाखाओं वाला पौधा — आंवले जैसा फल पत्तियों के नीचे उलटे लटकते हैं।
स्वाद (Rasa): तिक्त, कषाय
गुण (Guna): लघु, रुक्ष
वीर्य (Virya): शीत
विपाक (Vipaka): कटु
---
⚕️ मुख्य उपयोग (Medicinal Uses)
रोग / समस्या उपयोगिता
यकृत विकार (Liver diseases) अत्यंत प्रभावी – विशेषकर हेपेटाइटिस-B, पीलिया, लिवर की सूजन में।
मूत्र रोग (Urinary disorders) मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन), मूत्राश्मरी (किडनी स्टोन) में उपयोगी।
कफ-पित्त विकार पित्तज ज्वर, कफ-पित्तज विकार में शमन करती है।
त्वचा रोग रक्तशोधक होने से त्वचा के दाग, फोड़े, खुजली में लाभकारी।
मधुमेह (Diabetes) रक्तशर्करा को संतुलित करती है।
अग्निमांद्य / अपच यकृत को सक्रिय करके पाचन सुधारे।
---
🧪 प्रयुक्त भाग (Part Used):
पूरा पौधा (Whole plant)
---
💊 मात्रा एवं उपयोग विधि
रूप मात्रा सेवन विधि
चूर्ण 3–5 ग्राम दिन में 2 बार, गुनगुने पानी से
स्वरस 10–20 मि.ली. दिन में 2 बार, भोजन से पहले
काढ़ा 30–50 मि.ली. दिन में 2 बार
घनसार / टैबलेट चिकित्सक की सलाह अनुसार —
---
⚠️ सावधानी
अत्यधिक मात्रा में सेवन करने पर शरीर में ठंडक बढ़ा सकता है।
गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक।
---
📜 आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लेख
> "भूम्यामलकी तिक्तका लघुशीता पित्तकफजित्।
रक्तपित्तकृमिज्वरघ्नी यकृत्प्लीहविनाशिनी॥"
(भावप्रकाश निघण्टु)
---
🏥 उपलब्ध स्थान
Advance Ayurveda and Piles Clinic
📍 महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
🕑 समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
📞 मोबाइल: 9919941200
Dr. Abhishek's Wellness Centre
📍 रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
🕗 समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
📞 मोबाइल: 9919941200
10/10/2025
🌕 करवा चौथ का आयुर्वेदिक महत्त्व — जब स्त्री का संयम बनता है परिवार की सुरक्षा
(लेखक – वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र, Advance Ayurveda & Piles Clinic / Dr. Abhishek’s Wellness Centre)
हज़ारों वर्षों से भारतीय स्त्रियाँ करवा चौथ का व्रत रखती आई हैं —
सिर्फ़ पति की लंबी आयु के लिए नहीं, बल्कि उसके अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की पवित्रता की रक्षा के लिए भी।
आयुर्वेद की दृष्टि से यह व्रत एक शारीरिक, मानसिक और यौनिक (sexual) शुद्धि साधना है।
---
🌿 १. उपवास – शरीर की गहराई तक शुद्धि
आयुर्वेद कहता है —
> “लघ्वन्नं बलवर्धनम्” — चरक संहिता
दिनभर का उपवास आमशय को विश्राम देता है, जिससे रक्त, रस और शुक्र धातु की गुणवत्ता सुधरती है।
यह टॉक्सिन्स (विष) को हटाकर रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है, जिससे संक्रमणों से बचाव होता है।
---
🌸 २. हार्मोनल संतुलन — यौन स्वास्थ्य की जड़
करवा चौथ जैसे उपवास, ध्यान और संयम से एंडोक्राइन सिस्टम (हार्मोनल तंत्र) संतुलित होता है।
यह सीधे तौर पर प्रजनन स्वास्थ्य को सुधारता है।
जब महिला का हार्मोन संतुलन सही रहता है, तो गर्भाशय, योनि और मूत्रमार्ग की रोगप्रतिरोधक क्षमता (local immunity) बढ़ती है।
इससे बैक्टीरियल, फंगल या वायरल संक्रमण (जैसे Trichomoniasis, HPV, Herpes, Candida infection) की संभावना घटती है।
यह STDs/STIs (Sexually Transmitted Diseases/Infections) जैसे रोगों के प्रति प्राकृतिक प्रतिरक्षा बनाता है।
👉 इस तरह, स्त्री का हॉर्मोनल और मानसिक संतुलन पति के यौन स्वास्थ्य और जीवनकाल दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
यही कारण है कि करवा चौथ को पति-पत्नी दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा करने वाला पर्व माना गया है।
---
🌼 ३. चन्द्रमा का मानसिक व शारीरिक प्रभाव
> “चन्द्रमाः मनसो जातः” — उपनिषद्
चन्द्रमा “मन” का अधिपति है।
रात्रि में चन्द्रमा का दर्शन पित्त दोष को शांत करता है और Serotonin-Melatonin जैसे हार्मोन के स्तर को संतुलित रखता है।
यह तनावजनित यौन रोगों (psychosexual disorders) जैसे low libido, premature issues, irritability आदि में लाभकारी होता है।
---
🌺 ४. सोमजल सेवन — शीतलता और शुद्धि का प्रतीक
चन्द्रकिरणों में रखा हुआ जल (सोमजल) पित्त और रक्त दोषों को शांत करता है, जिससे त्वचा, गर्भाशय और शुक्र धातु शुद्ध रहते हैं।
आयुर्वेद कहता है कि शुद्ध शुक्र और शुद्ध रज ही स्वस्थ संतान और दीर्घायु दांपत्य जीवन की नींव हैं।
---
🌹 ५. मानसिक प्रसन्नता – सर्वश्रेष्ठ औषधि
> “मनः प्रसादः सर्वारोगपरिहारकः”
जब मन संयमित और प्रसन्न होता है, तब शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति चरम पर होती है।
करवा चौथ का व्रत प्रेम, संयम और आत्मसंयोजन की साधना है — यही कारण है कि यह शारीरिक और यौन दोनों प्रकार के रोगों से सुरक्षा का एक सांस्कृतिक कवच भी बन गया है।
---
🔔 निष्कर्ष
करवा चौथ केवल धार्मिक कर्म नहीं,
बल्कि एक गहन आयुर्वेदिक और जैविक साधना है —
जो स्त्री के शरीर, मन और रज-शुक्र धातु को शुद्ध करती है।
इससे न केवल हार्मोनल असंतुलन और संक्रमणजन्य रोगों का जोखिम घटता है,
बल्कि पति की दीर्घायु और यौन स्वास्थ्य की रक्षा भी होती है।
---
📍लेखक:
वैद्य अभिषेक कुमार मिश्र
Advance Ayurveda and Piles Clinic – महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
🕑 समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
Dr. Abhishek’s Wellness Centre – रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
🕗 समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
📞 9919941200
---
07/10/2025
भारत में आयुर्वेद चिकित्सक का दर्द
(एक वैद्य की आत्मा की पुकार — Dr. Abhishek Kumar Mishra के शब्दों से जुड़ा हुआ)
जब अंग्रेज़ों ने भारत छोड़ा, तो उन्होंने केवल सीमाएँ नहीं खींचीं — उन्होंने हमारे जीवन-चयन के मानचित्र पर भी ऐसा घाव किया जिसका असर आज तक चलता है।
वो संस्कृति जहाँ औषधि को देवता की तरह पूजा जाता था, जहाँ हर जड़ी-बूटी का नाम शास्त्रों में गूंजता था — आज उसी भूमि पर दवाइयों के बड़े बक्सों और मशीनों की छाया छा गई है।
सरकारों ने जिस दिशा में स्वास्थ्य व्यवस्था को उँगली से धकेला — मुफ्त दवाओं, बड़े सरकारी अस्पतालों और कॉर्पोरेट मेडिकल नेटवर्क के पक्ष में — वहाँ आयुर्वेद को केवल शाब्दिक सम्मान मिला। जमीन पर संसाधन, क्लीनिक-लेवल सपोर्ट और व्यापक उपलब्धता नहीं मिली। दवाओं का पर्चा लिख दो — पर मरीजों को एक ही जगह पर दवा नहीं मिलती; उसे कई-बहुत सी दुकानों का चक्कर काटना पड़ता है। थक कर वह आयुर्वेद छोड़ देता है — और साथ में हमारी परंपरा की एक उम्मीद भी ठंडी पड़ जाती है।
और क्या है — कुछ मिशनरी अस्पतालों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुभवों का जिक्र करते हुए, यह भी कहा जाता है कि विदेशों के परीक्षणों ने हमारे समाज पर असर डाला — ऐसे अनुभव और आरोप भी रहे हैं कि हमारी दवाओं और पद्धतियों का इस्तेमाल परीक्षणों के लिए किया गया। यह बात एक संवेदनशील प्रश्न है और इसे नजरअन्दाज करना आसान नहीं। जब हमारी ही धरती पर आयुर्वेदिक संसाधनों और क्लिनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं हुआ, तब बाहरी एजेंडों और प्रयोगों के डर के साथ सामाजिक विश्वास और भी कमजोर हो जाता है।
हमारे इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं से एक विनती है — क्या उन महान मस्तिष्कों का उपयोग आयुर्वेद को आधुनिक उपकरण दे कर नहीं किया जा सकता? सेंसर-आधारित डायग्नॉस्टिक यंत्र, पौधा-आधारित रसों के माप के लिए मानकीकृत मशीनें, और क्लिनिक-फ्रेंडली हर्बल सप्लाई चेन — ये सब बनते तो वैद्य को विज्ञान के साथ खड़ा होने का मौका मिलता। पर आज तक यह अनदेखा बना रहा — और वैद्य के हाथ खाली, उम्मीदें थकी हुई।
एक वैद्य जब क्लिनिक खोलता है, वह केवल व्यवसाय नहीं खोलता — वह अपने ज्ञान, अपनी पंरपरा, और अपनी सेवा को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास करता है। लेकिन बिना संसाधन के, बिना सप्लाय चैन के, बिना तकनीकी और प्रशासनिक समर्थन के यह यात्रा बहुत कठिन हो जाती है। नतीजा — गाँवों में पहुँचने वाली आयुर्वेदिक सेवाएँ घटती चली गईं, और जनता के सामने विकल्प सिकुड़ गए।
यदि सरकार सच में चाहे और एक दशक तक मुफ्त आयुर्वेदिक कैंप और स्थायी आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित करे — तो केवल इलाज नहीं होगा, एक जन-आंदोलन खड़ा होगा। तब लोग समझेंगे कि स्वास्थ्य केवल दवाइयों का कारोबार नहीं — यह जीवन, संस्कार और वैज्ञानिक दृष्टि का समन्वय है। और हाँ — अगर इंजीनियर और उद्यमी साथ दें, तो हम आयुर्वेद को नई तकनीक और मानक के साथ देश-विदेश में दोबारा स्थापित कर सकते हैं।
आयुर्वेद की रक्षा केवल वैद्यों की ज़िम्मेदारी नहीं — यह समाज, नीति, विज्ञान और उद्योग सबकी साझी ज़िम्मेदारी है। जब तक हम यह समझकर कदम नहीं उठाएंगे, तब तक वैद्य का दर्द बना रहेगा — और भारत की असली चिकित्सा विरासत कँपकँपाती रहेगी।
❖ व्यवस्था का दूसरा पक्ष
हमारे यहाँ सरकारों द्वारा जो आयुर्वेदिक काउंसिल्स और असोसिएशन बनाई गईं — उनमें बैठे अधिकारी अक्सर 2-4 लाख महीने की तनख्वाह पाकर स्वयं को धन्य मान लेते हैं।
पर वही अधिकारी भूल जाते हैं कि आयुर्वेद का स्तर कहाँ जा रहा है।
नीतियों के नाम पर केवल फाइलें बनती हैं, धरातल पर न जड़ी-बूटियों की खेती को बल मिलता है, न क्लिनिक-स्तर की सुविधा को।
हमारे PG स्कॉलर्स इस दौड़ में हैं कि कब वे प्रोफेसर बनें और बिना मरीज देखे संस्थान से 1 लाख की तनख्वाह पाएँ — क्योंकि सरकार ने योग्यता को कागज़ की डिग्री से जोड़ दिया है,
जबकि असली योग्यता अनुभव, प्रयोग और उपचार की समझ में होती है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा व्यंग्य यही है —
> “जिसके पास कागज़ का परचा है, वह प्रोफेसर बनता है;
और जिसे आयुर्वेद का व्यावहारिक ज्ञान है, उसे झोलाछाप कहा जाता है।”
कभी-कभी लगता है — आखिर झोले में बुराई क्या थी?
पर हमारी हर व्यवस्था ने “झोला” शब्द को भी नीचा दिखाने के लिए लिफाफे और पॉलीथिन में बदल दिया।
वह “झोला” जिसमें कभी औषधि, ज्ञान और सेवा की परंपरा चलती थी — आज उपहास का प्रतीक बना दिया गया है।
अक्सर देखा जा सकता है — एक आयुर्वेद कॉलेज में 20-20 प्रोफेसर होते हैं, लेकिन अस्पताल में 20 मरीज भी नहीं।
जाँच के समय फर्जी मरीजों और कागज़ी दस्तावेज़ों के सहारे बड़ी-बड़ी संस्थाओं की मान्यता चल रही है।
यह खेल रुकना चाहिए — वरना आयुर्वेद एक प्राचीन ग्रंथ तक सीमित होकर रह जाएगा, जीवन का विज्ञान नहीं रहेगा।
---
❖ समाधान की दिशा
अगर हमारे इंजीनियर, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता चाहें — तो वही प्रतिभा, जो अंतरिक्ष और तकनीक में भारत को ऊँचाई दे रही है, आयुर्वेद को भी नई उड़ान दे सकती है।
सेंसर-आधारित डायग्नॉस्टिक उपकरण, पौधा-आधारित रसों की मानकीकरण मशीनें, और क्लिनिक-फ्रेंडली हर्बल सप्लाई चेन — ये सब मिलकर वैद्य को विज्ञान के साथ बराबरी का दर्जा दे सकते हैं।
पर आज तक यह अनदेखा बना रहा — और वैद्य के हाथ खाली, उम्मीदें थकी हुई।
एक वैद्य जब क्लिनिक खोलता है, वह केवल व्यवसाय नहीं खोलता — वह अपने ज्ञान, अपनी परंपरा और अपनी सेवा को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास करता है।
लेकिन बिना संसाधन, बिना सप्लाय चैन, और बिना तकनीकी-सहयोग के यह यात्रा बहुत कठिन हो जाती है।
नतीजा — गाँवों में पहुँचने वाली आयुर्वेदिक सेवाएँ घटती चली गईं, और जनता के सामने विकल्प सिकुड़ गए।
यदि सरकार सच में चाहे और एक दशक तक मुफ्त आयुर्वेदिक कैंप और स्थायी अस्पताल शुरू करे —
तो केवल इलाज नहीं होगा, एक जन-आंदोलन खड़ा होगा।
तब लोग समझेंगे कि स्वास्थ्य केवल दवाइयों का कारोबार नहीं — यह जीवन, संस्कार और वैज्ञानिक दृष्टि का समन्वय है।
---
---
संदेश — एक वैद्य की आवाज़:
> जब तक भारत का वैद्य सम्मानित नहीं होगा, तब तक भारत का स्वास्थ्य स्वतंत्र नहीं होगा।
वैद्य को संसाधन दो, विज्ञान का साथ दो, और उसकी सेवा को वह गरिमा दो जो वह वर्षों से निभा रहा है।
---
लेखक / हस्ताक्षर:
डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा
Advance Ayurveda and Piles Clinic — महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209 (दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे)
Dr. Abhishek's Wellness Centre — रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002 (सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे)
मोबाइल: 9919941200
06/10/2025
🍅 टमाटर फ्लू (Tomato Flu) से सावधान रहें
मौसम बदलते ही छोटे बच्चों में टमाटर फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। यह एक वायरल संक्रमण है, जिसमें शरीर पर लाल फफोले (टमाटर जैसे) निकल आते हैं, साथ में बुखार, थकान, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
---
⚠️ मुख्य लक्षण:
तेज बुखार
लाल दाने या फफोले (हाथ, पैर और मुँह पर)
उल्टी या दस्त
भूख कम लगना
त्वचा में खुजली या जलन
---
🩺 उपचार व सावधानी:
बच्चे को आराम दें और भीड़ से दूर रखें
फफोले न फोड़ें
उबला पानी पिलाएँ, हल्का भोजन दें
हाथ-पैर की सफाई रखें
बुखार बढ़े या फफोले पस वाले हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें
---
🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:
आयुर्वेद में इसे पित्तज वातार्तिक ज्वर जैसा रोग माना जाता है।
नीम, तुलसी, गिलोय, हरिद्रा और त्रिफला जैसे औषधीय तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी हैं।
गिलोय-सत्व या गिलोय-काढ़ा दिन में 2 बार लेना लाभकारी होता है।
---
🏥 परामर्श हेतु संपर्क करें:
🩹 Advance Ayurveda and Piles Clinic
📍 महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
⏰ समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
📞 9919941200
🌿 Dr. Abhishek’s Wellness Centre
📍 रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
⏰ समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
📞 9919941200
---
04/10/2025
🌿 भारत भूमि और सनातन धर्म का आयुर्वेद विज्ञान 🌿
भारत केवल एक भूखंड नहीं है, यह एक सभ्यता है – एक ऐसी परंपरा, जहाँ हर उत्सव, हर त्यौहार और हर संस्कार के पीछे वैज्ञानिक आधार छिपा हुआ है। यही कारण है कि हमारे ऋषियों ने अपने अनुभवों को वेद, पुराण, गीता, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, शारंगधर संहिता और अनेकों ग्रंथों में अंकित किया।
👉 आयुर्वेद केवल चिकित्सा शास्त्र नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला है। इसे यदि धर्म मानकर जिया जाए तो शरीर, मन और आत्मा – तीनों की रक्षा होती है।
🔥 त्यौहार और उनके वैज्ञानिक रहस्य:
दीपावली – वर्षा ऋतु के बाद वातावरण में फैले जीवाणु, विषाणु और कीट-परजीवी दीपों की गर्मी व धुएँ से नष्ट हो जाते हैं। घर-परिवार और समाज स्वस्थ रहता है।
होली – यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि रंग-चिकित्सा (Colour Therapy) है। यह त्वचा के कैंसर से रक्षा करता है और शरीर को ऊर्जा देता है।
सगोत्र विवाह निषेध – आनुवंशिक रोग और जन्मजात विकारों से परिवार को सुरक्षित रखने की महान परंपरा।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी – तिल-चावल और दाल का यह योग liver को सुरक्षा प्रदान करता है और पाचन को दुरुस्त रखता है।
सत्तू पर्व – इसके बाद से सत्तू का सेवन शुरू करना शरीर को ठंडक, पाचन-शक्ति और अमृत तुल्य लाभ देता है।
रक्षाबंधन – परिवार में कन्याओं और बहनों के महत्व को स्मरण कराता है, जिससे सामाजिक ताना-बाना सुदृढ़ होता है।
नवरात्रि व्रत – पाचन तंत्र को विश्राम, मस्तिष्क को शांति और त्वचा रोगों से सुरक्षा।
नवअन्न संस्कार – नए अनाज के धीरे-धीरे सेवन से पाचन तंत्र उसे स्वीकार करता है और शरीर को रोगमुक्त रखता है।
🌍 भारत की अनोखी पहचान
भारत में धर्म केवल आस्था नहीं है, यह प्राकृतिक नियम है जिसे यहाँ आम जनमानस त्योहारों की तरह जीता है। यही भारत की विज्ञाननिष्ठ संस्कृति है। और इस भूमि की सबसे बड़ी सुंदरता यही है कि यहाँ हर धर्म, हर संस्कृति और हर जाति भाईचारे से साथ रहती है।
“सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा…”
---
🏥 आपके स्वास्थ्य की सेवा में:
Advance Ayurveda and Piles Clinic
📍 महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
⏰ समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
📞 9919941200
Dr. Abhishek's Wellness Centre
📍 रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
⏰ समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
📞 9919941200
03/10/2025
🌸 नवरात्रि समापन एवं ऋतु-संधि काल का विशेष संदेश 🌸
🙏 डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा द्वारा
इस समय ऋतु-संधि काल (एक ऋतु से दूसरी ऋतु का परिवर्तन) चल रहा है। आयुर्वेद कहता है कि इस समय शरीर में दोषों का भी परिवर्तन होता है।
👉 वर्षा ऋतु में कफ शांत होकर पित्त का संचय होता है।
👉 शरद ऋतु के प्रारम्भ में यही पित्त प्रकोप में बदल जाता है।
यही कारण है कि इस समय त्वचा पर छोटे दाने, फफोले, अम्लपित्त, दाह, क्रोध और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं।
🍽 आहार-संयम
मसालेदार भोजन, बर्गर, मोमोज़, पिज़्ज़ा जैसी वस्तुओं से बचें।
यदि त्वचा पर दाने या फफोले हों तो घृत (लगभग 10 ग्राम, सुबह-शाम भोजन में मिलाकर) लें।
परंतु यदि किसी को फैटी लिवर या हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो घी का सेवन न करें और इसके स्थान पर खीरा/ककड़ी का अधिक सेवन प्रारम्भ करें।
🌿 आयुर्वेद एवं अध्यात्म का संगम
वेदों में घृत को अमृत और अग्नि का प्रिय अर्पण कहा गया है। यह जठराग्नि और ज्ञानाग्नि दोनों को संतुलित करता है।
खीरा चंद्र तत्व का आहार है, जो अग्नि को शीतल कर संतुलन देता है।
नवरात्रि का उपवास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पित्त शमन की वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है।
शक्ति की साधना का गूढ़ संदेश यही है कि जैसे माँ दुर्गा ने असुरों का विनाश किया, वैसे ही संतुलित आहार-विहार पित्त के असंतुलन रूपी रोगों का नाश करता है।
✨ नवरात्रि के इस अंतिम दिवस पर प्रार्थना है कि माँ दुर्गा सबको उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।
---
🏥 हमारे केंद्र
Advance Ayurveda and Piles Clinic
📍 महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
🕑 समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
Dr. Abhishek's Wellness Centre
📍 रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
🕑 समय: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
📞 मोबाइल: 9919941200
02/10/2025
"इतना महान होने के बाद भी रावण का वध क्यों हुआ?"
🔥 रावण की महानता:
भगवान शिव का परम भक्त 🕉️
शिव तांडव स्तोत्र का रचयिता 🎶
वेदों का महान विद्वान 📚
रावण वीणा का आविष्कारक 🎵
स्वर्ण लंका का समृद्ध राजा 👑
शूरवीर योद्धा ⚔️
प्रजा का रक्षक 👥
⚡ फिर भी उसका अंत क्यों हुआ?
अहंकार: ज्ञान और शक्ति से उत्पन्न घमंड
अधर्म: माता सीता का हरण कर धर्म की मर्यादा भंग करना
काम: अपनी वासना पर नियंत्रण न रख पाना
अन्याय: स्त्रियों का अपमान और शक्ति का दुरुपयोग
🚩 दशहरा का संदेश:
“चाहे कितना भी ज्ञान, शक्ति या भक्ति क्यों न हो —
यदि अहंकार और अधर्म बढ़े, तो विनाश निश्चित है।”
---
🩺 Dr. Abhishek’s Wellness Centre
रानीजोत, बड़गांव, गोंडा – 271002
⏰ सुबह 8 बजे – दोपहर 2 बजे | 📞 9919941200
🌿 Advance Ayurveda & Piles Clinic
महादेवा कलां, जय प्रभा ग्राम, गोंडा – 271209
⏰ दोपहर 2 बजे – रात 8 बजे | 📞 9919941200
--
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Kanti Villa, Opposite Chintu Baba Mandir, Madhvpuram Bargaon
Gonda
271002
Opening Hours
| Monday | 6:30am - 9:30am |
| Tuesday | 6:30am - 9:30am |
| Wednesday | 6:30am - 9:30am |
| Thursday | 6:30am - 9:30am |
| Friday | 9am - 9:30am |
| Sunday | 6:30am - 9:30am |