Hafiz Muhammad aalam

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26/04/2026

सलीम वास्तिक की वास्तविकता तो चौंकाने वाली है, इस्लामोफोबिया से ग्रसित समाज के लिये सलीम वास्तिक इन दिनों नया मसीहा था, अब जब इसकी असलियत सामने आई तो हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं, दिल्ली के कारोबारी के बेटे संदीप बंसल के अपहरण और हत्या का दोषी ये व्यक्ति अपनी पहचान छुपाकर ग़ाज़ियाबाद में रह रहा था और कुछ अतिवादी संगठनों का चहेता बना बैठा था, आज जब दिल्ली पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया तब इसकी असलियत देश के सामने आई।

एैसे ना जाने कितने बहुरूपिये इस्लाम और मुसलमान को भला बुरा कह कर समाज में पूज्यनीय बने हुए हैं, एक दिन वो सब क़ानून के शिकंजे में आयेगे और देश उनकी असलियत पहचानेगा।

11/04/2026

मेरे शागिर्द देने माशाल्लाह क्या नात पढ़ी है दिल खुश हो क्या आप लोग वीडियो को जरुर शेयर करें

07/04/2026

वैभव सूर्यवंशी क्या खिलाड़ी है भाई सुपर से भी ऊपर है

07/04/2026

कुर्दोगलो…
काई कबीले का वो शख्स,
जिसका नाम आज भी
गद्दारी का पर्याय बन चुका है…
सुलैमान शाह का भाई होने के बावजूद
उसकी नजर हमेशा कबीले की सत्ता पर टिकी रही
वह मुस्लिम कयादत का सबसे बड़ा आंतरिक दुश्मन था…
वह हाजेश राग अलापता:
“हमारी तादाद कम है… ह
म गरीब हैं…
हम लाचार हैं…
सलीबियों से दुश्मनी हमारी बर्बादी है”
कुर्दोगलो कहता था
“सलीबियों की मातहत में रहो,
तो शांति रहेगी
वह हमारी रक्षा करेंगे”
लेकिन असलियत कुछ और थी
कुर्दोगलो चुपके से सलीबियों के साथ गठजोड़ कर चुका था
वह मुखबिरी कर
मुस्लिम नौजवानों को सलीबियों के हवाले कर देता,
फिर नाटक करके उन्हें छुड़वाता
और खुद को “मसीहा” बताता…
कुर्दोगलो मुसलमानों को खंजर भोंकने की साजिश रचता
वह कबीले को बांटता,
भय फैलाता
और खुद को मुसलमानों का सच्चा नुमाइंदा बताता…
कुर्दोगलो आज भी प्रतीक है…
उस हर “घर के भेदी” का,
जो गरीबी,
लाचारी
और तादाद का रोना रोकर अपनी कौम को बेचता है…

03/04/2026

माशा अल्लाह

02/04/2026

Assalam alaikum

02/04/2026

"सभी भाइयों और बहनों को सलाम। नमाज़ हमारे ईमान का एक मजबूत हिस्सा है, जो हमें एकता, शांति और अल्लाह के करीब लाती है। आइए, हम सब मिलकर इस ज़रूरी फर्ज़ को अदा करें और अपने समाज को मजबूत बनाएं। हम आपका दिल से स्वागत करते हैं हर रोज़ की नमाज़ में, साथ मिलकर अल्लाह से दुआ करने के लिए।"

16/08/2025
03/12/2024

Nasir Mazahiri
از : حضرت مولانا ناصرالدين صاحب مظاہری حفظہ اللہ ۔

مجھ سے لوگ پوچھتے ہیں کہ حالیہ تنازعہ پر کچھ بولئے میرا کہنا ہے کہ اب تک ہم نے بندے کو بھاجبائی کہا اس نے برداشت کیا ، حیدرآباد سے باہر نہیں نکلنے دوں گا اس نے برداشت کیا ،ہم نے اس کی زمینی سطح پر مخالفت کی اس نے برداشت کیا ، اس نے ہر موقع پر اکیلے پارلیمنٹ میں ہماری وکالت کی ، ہر قدم پر اس نے اکرام اور احترام کا معاملہ کیا ۔

جب وہ دنیا دار ہوکر اتنے گھاؤ جھیل گیا تو اب اس کی ایک بات ہمیں برداشت کرلینی چاہیے اور یہ سوچنا چاہیے کہ اس کو یہ بولنے کا حق اور اختیار خود ہم نے دیا ہے خوب یاد رکھیں وہ ایک لیڈر ہے کسی خانقاہ کا مسند نشین ، یا کسی تنظیم کا صدر نشین یا کسی ادارہ کا دینی تعلیم یافتہ عالم دین نہیں ہے۔ آپ کیوں سوچتے ہیں کہ وہ جو بھی بولے گا جب بھی بولے گا تو اس کی زبان سے سلوک واحسان کے آبشار اور حدیث وقرآن کی تعلیمات کی پھوار نکلے گی۔

اگر حالات کو نارمل کرنے کی کوشش نہیں کی گئی تو آپ ایک لیڈر کھو دیں گے اور وہ اور اس کے لاکھوں حواری ہزاروں علماء سے بدظن ہوکر دور ہو جائیں گے۔ عوام کی علماء سے دوری نہ عوام کے حق میں بہترہے نہ خود کو خواص سمجھنے والوں کے حق میں بہترہے، لگے گی آگ تو گھر دونوں کے جلیں گے اور ہاتھ تیسری طاقت سینکے گی ۔

میں حضرت مولانا سجاد نعمانی مدظلہ کی بڑی عزت کرتاہوں بلکہ سبھی علماء کی بدل وجان قدر کرتاہوں اور درخواست کرتاہوں کہ جیسے بھی ہو، گالیاں کھاکر بھی آپ اپنے فرض کو مت بھولئے ، اس آگ کو بجھانے کی کوشش کیجیے ، آپ بڑے ہیں ، بڑے پن کا مظاہرہ کیجیے ، آپ ہی کرسکتے ہیں۔

17/10/2024

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08/08/2024

महिलाओं को छोटे कपड़े में देखकर कौन मजे लेता है,??....

एक दिन किसी ख़ास अवसर पर महिला सभा का आयोजन किया गया, सभा स्थल पर महिलाओं की संख्या अधिक और पुरुषों की कम थी..!!
मंच पर तकरीबन 27 वर्षीय खुबसूरत युवती, जीन्स, टीशर्ट पहनकर हाथ में माइक पकड़कर पूरे पुरुष समाज को कोष रही थी।

वही पुरानी घिसी-पिटी बाते.... कम और छोटे कपड़ों को सही ठहराना, और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता का पक्ष रखते हुए पुरुषों की गन्दी सोच और गन्दी नीयत का दोष दे रही थी।

तभी बीच में अचानक सभा स्थल से...तकरीबन बत्तीय वर्षीय सभ्य, शालीन और आकर्षक से दिखते युवक ने खड़े होकर अपने भी विचार प्रकट करने की अनुमति मांगी..!!

उसकी अनुमति स्वीकार कर माइक को उसके हाथों मे सौप दिया गया .... हाथ में माइक आते ही उसने बोलना शुरु किया..!!

माताओं, बहनों और भाइयों, मैं आप सबको नही जानता और न ही आप जानते हैं कि आखिर मैं कैसा इंसान हूं..??

लेकिन कपड़े पहनने के ढंग और शक्ल सूरत से मैं आप सबको कैसा लग रहा हूँ सभ्य या असभ्य..??

सभास्थल से बहुत सारे लोग एक साथ बोले... कपड़े पहनने और बातचीत के ढंग से तो आप सभ्य दिखाई दे रहे हो...

बस अपने आपको सभ्य सुनकर ही अचानक उसने अजीबोगरीब हरकत कर डाली... सिर्फ हाफ चण्डा छोड़कर बाकी कपड़े उतारकर फेंकर दिए।

उसको ऐसा देख कर .... पूरा सभास्थल चिल्लाने लगा मारो साले को, कितना बत्तमीज आदमी है, बेशर्म है, इसको पुलिस के हवाले कर दो, औरतों के सामने कैसे रहा जाता है इसको ये तक नहीं पता।
अपने विषय में ऐसे शब्द सुनकर ... अचानक वो माइक पर चिल्लाने लगा.

रुको... कुछ भी करने से पहले मेरी बात सुन लो, फिर जो चाहे कर लेना मैं मना नहीं करूंगा, चाहे तो मुझे जिंदा जला भी देना..!!

अभी थोड़ी देर पहले तो....ये बहन जी कम, छोटे-छोटे कपड़ों की वकालत कर रही थी स्वतंत्रता की दुहाई देकर लोगो की नीयत और छोटी सोंच को जिम्मेदार बता रही थी। अब अचानक क्या हुआ अब आपकी सोंच छोटी हो गयी क्या?

तब तो आप सभी तालियां बजा-बजाकर अपनी सहमति जता रहे थे..फिर मैंने ऐसा क्या कर दिया हैै..??

सिर्फ अपनी भी कपड़ों की स्वतंत्रता ही तो दिखलायी है..!!

नीयत और सोच की खोट तो नहीं ना और फिर मैने तो, आप लोगों को... मां बहन और भाई भी कहकर ही संबोधित किया था..फिर मेरे अर्द्ध नग्न होते ही.... आप में से किसी को भी मुझमें भाई और बेटा क्यों नहीं नजर आया..??

मेरी नीयत में आप लोगों को खोट कैसे नजर आ गया..??

मुझमें आपको सिर्फ मर्द ही क्यों नजर आया? भाई, बेटा, दोस्त क्यों नहीं नजर आया? आप में से तो किसी की सोच और नीयत भी खोटी नहीं थी... फिर ऐसा क्यों??

सच तो यही है कि..... झूठ बोलते हैं लोग कि...
वेशभूषा और पहनावे से कोई फर्क नहीं पड़ता

हकीकत तो यही है कि मानवीय स्वभाव है कि किसी को सरेआम बिना कपड़े के देख लें तो कामुकता जागती है मन में...

रूप, रस, शब्द, गन्ध, स्पर्श ये बहुत प्रभावशाली कारक हैं इनके प्रभाव से “विश्वामित्र” जैसे मुनि के मस्तिष्क में विकार पैदा हो गया था..जबकि उन्होंने सिर्फ रूप कारक के दर्शन किये..आम मनुष्यों की विसात कहाँ..??

दुर्गा शप्तशती के देव्या कवच में श्लोक 38 में भगवती से इन्हीं कारकों से रक्षा करने की प्रार्थना की गई है..
“रुरसे-रुपे-च-गन्धे-च-शब्दे-स्पर्शे-च-योगिनी।
रुसत्त्वं-रजस्तमश्चौव-रक्षेन्नारायणी-सदा।।”
रस रूप गंध शब्द स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करें तथा सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण की रक्षा नारायणी देवी करें.!!

बहुत से घरों में बेटियों को छोटे कपड़ो में देख कर मां बाप अपनी शान समझते हैं कि कितनी मार्डन है हमारी लाडली

आज के समाज की सोच ये है कि अपने घर की बेटियां अपने बदन को ढके या ना ढके लेकिन बहु मुंह छिपाकर घुंघट में रहनी चाहिए आज के समाज में बदन ढकना जरूरी नहीं पर मुंह ढकना जरूरी है।
आज के समाज में घूंघट के लिए कोई जगह नहीं है वैसे ही इन अर्ध नग्न वस्त्रों के लिए भी कोई जगह नहीं है।
🙏आप सभी हमारी पोस्ट से कितना संतुष्ट है अवलोकन जरूर करें

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