Gayatri Yog
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31/10/2024
सभी को दीपावाली की शुभकामनाएं
07/05/2024
22/01/2024
🙏🙏🙏 जय श्रीराम
08/07/2023
गोरखपुर( तुर्कमानपुर) में आज से बालसंस्कार शाला का शुभारंभ
22/01/2023
दही के फायदे
हम ऐसे समाज का भाग हैं, जहाँ सुंदरता का पैमाना "गोरा रंग" और वुद्धिमानी का पैमाना "अंग्रेज़ी भाषा" है।
जिसके पास पैसा है उसे ही सम्मान मिलता है। चाहे उसने घुस देके नौकरी पायी हो ,चाहे वो शराबी, शबाबी, कबाबी हो।उसकी सारी कमियां उसके पैसे के सामने टिकती नही। सारे रिस्तेदार उसकी तारीफ करते हैं। वो गलत भी कहता हैं तो रिस्तेदार कहते हैं कि वो इतना कमा रहे है वो सही हैं तुम्हारी कोई औकात नही उसपर उंगली उठा सको।
जिसके पास पैसा नही है वो चाहे कितना अच्छा क्यो न हो उसे कोई नही पूछता , उसकी सारी पढ़ाई सब बेकार हो जाती हैं। जो ग़लती वो नही करता उसका भी उसपे इल्ज़ाम लगा दिया जाता हैं।
"सुप तो सूप चलनी भी उसे बोलने लगती हैं।"
नैतिकता की बात अब सिर्फ मंच पे, भीड़ के सामने होती हैं।
धन्य हैं ऐसी मानसिकता के लोग और धन्य हैं उनकी सोच ।
धर्म, नैतिकता का भी अपना एक बाज़ार है। यहाँ भी पैसा बोलता हैं उन्हें जल्दी दर्शन ,जल्दी प्रसाद मिल जाता हैं।
अंजुम रहबर - जिनके आँगन में अमीरी का सजर लगता हैं,
उसका हर ऐब ज़माने को हूनर लगता हैं।
-विन्ध्यवासिनी
जिन्होंने आजादी दिलाई वो आज गुमनाम हैं, चाहे उधम सिंह, सावरकर, नेता जी । पर जिन्होंने आजादी दिलवाने का दिखावा किया वो सत्ता के हस्तांतरण के बाद गद्दी पर बैठे।
जिन रजवाड़ों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की वो मिट गए चाहे वो झांसी, अवध, पेशवा हो। पर इस बगावत को कुचलने में जिन रजवाड़ों ने उन कमीने अंग्रेजों का साथ दिया वो आज भी सत्ता का लाभ ले रहे है।
भारत माँ देख रही हैं उनका दंड विधान सब पर लागू होगा, क्लाइव को आत्महत्या करनी पड़ी, डायर आग में जल भून कर मरा। सारे अपराधी ऐसे ही मरे है। आज गांधी के कई स्त्रियों के साथ ब्रह्मचर्य के प्रयोग के बारे में लोग पढ़ रहे हैं।
नेहरू की एडविना के साथ प्रयोग लोग जानते है। पटेल की नेता जी के प्रकरण में विरोध न करना लोग समझते हैं।
भला कौन सी सत्ता अपना विरोध करने वाले को खाना खाने के लिए बावर्ची देती हैं, पूछती है कि आप कौन से पेपर पढ़ेंगे डायरी लिखने के लिए डायरी पेन देगी, पसंद की किताब पढ़ने के लिए देगी। जिन्हें शक है वो मौलाना आजाद की किताब इंडिया विंस फ्रीडम पढ़े।
पर जिन्होंने सच में विरोध किया वो आग में जला दिए गए, 1857 की क्रांति में मेरठ, अवध के बड़े पेड़ो पर उन्हें लटका कर नीचे आग लगा दिया गया। भगत सिंह, उधम सिंह, खुदीराम बोस आदि ने भारत माँ के चरणों में अपनी आहुति दी। चरखे से कपड़ा बनता है आजादी नही मिलती, उसकी लिए खून की होली खेलनी पड़ती हैं। आज तक किसी मुल्क को चरखे से आजादी नही मिली।
आज भी कुछ लोग सत्ता की गलतियों को चुनौती दे रहे हैं, उन्हें उसकी हैसियत दिख रहे हैं। आप किसके साथ है ये आपको सोचना है
आजादी का रंग लाल है....... और भारत माँ के आँचल का भी।
05/02/2021
श्रीराम मंदिर सिर्फ हमारी आस्था ही नहीं हमारे आत्मसम्मान आत्मगौरव का प्रतीक है,सिर्फ इसीलिए इस पर प्रहार कर हमे नीचा दिखाने का प्रयास किया गया था। आइए इसके निर्माण में अपनी गिलहरी भूमिका का निर्वहन कर अपनी मनुष्यता एवं हिंदुत्व पर अपनी आस्था का परिचय दे। याद रखिए श्रीराम है तो हम सब है। अन्यथा अपनी अंतरात्मा के सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा।
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