Atul Mishra
7017006728
04/07/2024
जी हाँ मैं बात करता हूँ। Nitricare Bio Science( P )Ltd के आर्गेनिक प्रोडक्ट #साडावीर #और #साडावीर4जी #
साडावीर में
Bio fulvic acid--30%
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Other micro nutrients--10%
Amino Acids--- 05%
That's composition of sadaveer fertilizer.
Sadaveer 4G---.
See w**d extract-- 50% #साडावीर क्या काम करता है, और इसमें कौन से तत्व पाए जाते हैं?
#साडावीर जड़ों ब कल्लो की संख्या में वृद्धि ब समुचित विकास करता है।
#फूल ब फलों की संख्या में वृद्धि होती हैं तथा समय पूर्व गिरते नहीं।
#पौधो की रोग प्रतिरोधक छमता बड़ जाती हैं।अत: बीमारियां कम लगती हैं।
#यह भूमि में नमी को बनाएं रखता हैं।
#बहुत सारी रसायनिक व पेस्टीसाइड खाद के कारण होने वाले नुकसान से भी बचाओ करता है|
#मिट्टी को उपजाऊ और भुरभुरी बनाता है!
#पानी कम लगता है,और फसल हरी भरी रहती है!
साडावीर किसान भाइयों का सच्चा साथी है,
🌾🌱साडा वीर का है यह वादा,
लागत कम मुनाफा ज्यादा,, 🌾🌾🌱🌱
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Fulvic acid -- 15%
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जो हमारी जमीन में बहुत अच्छी तरह काम करते है जिससे हमारी फसलों में लागत काफी कम आती है और फसल उत्पादन बढ़ जाता है।
किसान भाइयो साडावीर को धान, गेहूँ, गन्ना,कपास,दलहन,तिलहन,व सभी प्रकार की सब्जी में समान रूप से लगा सकते है..
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29/06/2024
प्रिय किसान भाईयो साडावीर को लगाओ और अपनी पैदावार ज्यादा बढ़ाओ
साडा वीर का कमाल
*◆धान की पैदावार बढ़ाने के मूल मंत्र◆*
*●धान की पैदावार कम क्यों●*
1• अधिक उपज देने वाली प्रजाति का चुनाव न करना ।
2• उच्च गुणवत्ता युक्त बीज का चुनाव न करना।
3• बीज का जमाव एवं कल्लों की संख्या कम होने के कारण उपज की संख्या का कम होना
4• फसल का गिर जाना ।
5• फसल में खरपतवार का प्रकोप होना ।
6•फसल में कीड़े एवं बीमारियों का प्रकोप होना ।
7• जरुरत के अनुसार समय से खाद, उर्वरक एवं सिंचाई का प्रयोग न करना
8• मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की गहरी जुताई करे तथा खेत समतल करके अन्तिम जुताई से पहले प्रति एकड़ 2 लीटर ट्राइकोडर्मा को 3-4 कु० सड़ी गोबर की खाद मे गिलाकर 3-4 दिन छाया में रखकर खेत मे बिखेर
9• *200 ग्रा. #साडावीर_5G, 200ग्रा. #साडावीर_फंगस_फाईटर व 250मिली. #फर्राटा* पानी में घोलकर खेत में नमी होने पर पर्णीय छिड़काव करे
#साडावीर क्या काम करता है, और इसमें कौन से तत्व पाए जाते हैं?
#साडावीर जड़ों ब कल्लो की संख्या में वृद्धि ब समुचित विकास करता है।
#फूल ब फलों की संख्या में वृद्धि होती हैं तथा समय पूर्व गिरते नहीं।
#पौधो की रोग प्रतिरोधक छमता बड़ जाती हैं।अत: बीमारियां कम लगती हैं।
#यह भूमि में नमी को बनाएं रखता हैं।
#बहुत सारी रसायनिक व पेस्टीसाइड खाद के कारण होने वाले नुकसान से भी बचाओ करता है|
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🇮🇳🇮🇳 SADAVEER 🇮🇳🇮🇳
साडा वीर 500g के मुख्य तत्व👇👇👇👇👇
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साडावीर किसान भाइयों का सच्चा साथी है,
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आपका किसान मित्र
अतुल मिश्रा
☎️ अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें 07017006728
15/04/2024
*◆गन्ने की पैदावार बढ़ाने के मूल मंत्र◆*
*●गन्ने की पैदावार कम क्यों●*
1• अधिक उपज देने वाली प्रजाति का चुनाव न करना ।
2• उच्च गुणवत्ता युक्त बीज का चुनाव न करना।
3• बीज का जमाव एवं कल्लों की संख्या कम होने के कारण मिल योग्य गन्ने की संख्या का कम होना ।
4• पौधो की बढ़वार एवं प्रति गन्ना वजन कम होना ।
5• फसल का गिर जाना ।
6• फसल में खरपतवार का प्रकोप होना ।
7•फसल में कीड़े एवं बीमारियों का प्रकोप होना ।
8• जरुरत के अनुसार समय से खाद, उर्वरक एवं सिंचाई का प्रयोग न करना।
*◆◆गन्ने की पैदावार कैसे बढ़ायें ?*
1• मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की गहरी जुताई करे तथा खेत समतल करके अन्तिम जुताई से पहले प्रति एकड़ 2 लीटर ट्राइकोडर्मा को 3-4 कु० सड़ी गोबर की खाद मे गिलाकर 3-4 दिन छाया में रखकर खेत मे बिखेर दें।
2• 50-75 कु० सड़ी गोबर की खाद या 50 कुं० सड़ी हुई प्रेसमड की खाद प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
3• अच्छे जमाव के लिए शरदकाल में सितम्बर-अक्टूबर और बरांतकाल में फरवरी-मार्च के महीने में बुवाई करें।
4• 3 फिट की दूरी पर ट्रेन्च विधि व सिंगल लाइन रेजर से बनाई गई नालियों में व रिंगपिट विधि से गन्ने की बुवाई करें।
5• खेत के एक हिस्से में बीज गन्ने की नर्सरी लगायें तथा अगले वर्ष उसी नर्सरी खेत से ही बीज का प्रयोग करें।
6• अधिक पैदावार देने हाली प्रजातियों जैसे को०लख•14201 को० 0118, तथा को० 15023 की अधिक से अधिक क्षेत्र में बुवाई करे।
7• 2 आँख के स्वस्थ टुकड़ो को प्रति एकड़ 200 ग्राम बावस्टीन और 100 गिली० इमिडाक्लोप्रिड के घोल में रातभर भिगोकर रखें, फिर बुवाई करें।
9• बुवाई के समय प्रति एकड़ 50 किग्रा० डी०ए०पी०, 25 किग्रा० यूरिया, 50 किग्रा० एम० ओ०पी०, 02 किग्रा #साडावीर व 250मिली #फर्राटा* का मिश्रण नालियों में पहले डालें और इसके बाद गन्ना बीज की बुवाई करे।
10• बुवाई के 60 दिन बाद 50 किग्रा0 यूरिया व *02 किग्रा #साडावीर व 250मिली #फर्राटा* जड़ो के पास सिंचाई के बाद डालकर गुड़ाई करें और 90-110 दिन के बाद *200 ग्रा. #साडावीर_5G, 200ग्रा. #साडावीर_फंगस_फाईटर व 150मिली. #फर्राटा* की पानी में घोलकर खेत में नमी होने पर पर्णीय छिड़काव करें।
11• जुलाई के प्रथम सप्ताह में *200ग्रा. #साडावीर_लठ्ठ 25 किग्रा0 व 150मिली. #फर्राटा* की पानी में घोलकर खेत में नमी होने पर पर्णीय छिड़काव करें।
12• बुवाई के समय 1-1 आँख के टुकड़ों की पौध तैयार कर लें तथा खेत में जमाव होने के बाद जहां रिक्त स्थान दिखें वहां उस पौध को लगाकर पानी दे दें।
13• सिंचाई हमेशा नालियों में करें, कभी भी खेत को पूरा न भरें तथा यूरिया हमेशा सिचाई के बाद लाइनों में पौधे के जड़ो के पास ही डालें।
14• खरपतवार नियत्रंण एवं जड़ों के विकास के लिए बैल / ट्रैक्टर चालित यंत्र या मठई से निराई-गुड़ाई करें।
15• खरपतवारों की सघनता अधिक होने पर किसी खरपतवारनाशी रसायन का प्रयोग करें।
16• गन्ने की सूखी पत्तियों से जुलाई में पहली बंधाई 150 सेगी0 ऊपर, अगस्त में दूसरी पहली बंधाई से 50 सेमी ऊपर तथा तीसरी बंधाई दो लाइनों के तीन थानों की एक साथ कैचीनुमा करें।
17• अतिरिक्त आय प्राप्त करने के लिए शरदकाल में गन्ने की दो लाइनों के बीच आलू, सरसों, मसूर, सब्जी तथा बसंतकाल में उर्द या मूंग की सहफसली खेती करें।
18• चोटी बेधक से बचाव हेतु यांत्रिक नियंत्रण के साथ-साथ कोराजन क प्रयोग मई के अंतिम सप्ताह करें।
*®पेड़ी प्रबन्धन®*
1• गन्ने की कटाई तेज धार वाले हथियार से भूमि की सतह से करें।
2• पूराने मेड़ो, ढूँठ के साइड की जड़ो को तोड़ने के लिए देशी हल या कुदाल से गुड़ाई कर सूखी पत्ती को गन्ने की लाईनों के बीच समतल रुप से बिछायें।
3• 25 किग्रा० डी०ए०पी०, 70 किग्रा० यूरिया, 25 किग्रा० एम०ओ०पी० तथा *2 किग्रा० #साडावीर व 250मिली #फर्राटा* प्रति एकड़ की दर से गन्ने की लाईनों में डालकर मिट्टी में मिलाकर सिंचाई करें।
4• 8-10 कल्ले वाले झुण्ड का आधा भाग जड़ सहित तेज धार वाले हथियार से खोदकर एक-एक पौधे को जड़ सहित अलग करके रिक्त स्थानों पर लगा दें और सिचाई करे।
6• कटाई के 60 तथा 90 दिन बाद सिंचाई करके 70 किग्रा0 यूरिया व *2 किग्रा० #साडावीर व 250मिली #फर्राटा* प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें।
7• *200 ग्रा. #साडावीर_5G, 200ग्रा. #साडावीर_फंगस_फाईटर व 150मिली. #फर्राटा* पानी में घोलकर खेत में नमी होने पर पर्णीय छिड़काव करें।
8• जुलाई के प्रथम सप्ताह में *200ग्रा. #साडावीर_लठ्ठ 25 किग्रा0 व 150मिली. #फर्राटा* की पानी में घोलकर खेत में नमी होने पर पर्णीय छिड़काव करें।
9• यदि रेड राट की सम्भावना हो तो 300-400 ग्राम हेक्जास्टाप प्रति एकड़ की दर से 15 दिन के अंतराल पर 2 बार छिड़काव करें।
10• गन्ने में मिट्टी चढ़ाये एवं 2-3 बंधाई करें।।
*नोट:- रेड राट, टॉप बोरर व पोक्का वोइंग के लिए समय-समय पर कीटनाशक व फंगीसाइड का पर्णीय छिड़काव किसान भाई करते रहें।*
धन्यवाद🙏
आपका किसान मित्र
Atul Mishra
मो.07017006728
14/04/2024
Nothing is impossible
जब वह पैदा हुआ तो उसके माँ- बाप को छोड़कर दुनिया ने मुंह फेर लिया क्योंकि ना सिर्फ वह दोनों हाथों, पांव से अपंग था बल्कि सिरे से उसकी टांगे और बाजू मौजूद ही नहीं थी
इस समय इनकी उम्र 41 साल है सोचिए उसने पिछले 41 बरस बगैर टांगों, बाजुओं और हाथों पांव के कैसे गुजारे होंगे... ? और वह आज किस हालत में होगा ??
अगर आप ऑस्ट्रेलिया में पैदा होने वाले इस शख्स की जिंदगी को पढ़ें तो आपके सारे गिले-शिकवे तमाम बहाने सब शिकायतें हवा में गायब हो जायेंगी।
क्योंकि वह अपने आधे अधूरे शरीर के बावजूद एक खुशहाल और भरपूर जिंदगी जी रहा बल्कि करोड़ों बुझी आंखों में उम्मीद की रोशनी और मायूस दिलों में जोश की आग भड़का रहा है
यह सात किताबों का राइटर है और इसकी अक्सर किताबें न्यून्यूयॉर्क बेस्ट सेलर की लिस्ट का हिस्सा बनी है
इसकी किताबों की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाइए कि यह किताबें दुनिया की 40 से ज्यादा भासाओ में लिखी जा चुकी हैं
वह एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है और TED समेत हर फोरम पर अपनी बातो के जरिए लाखों लोगों की जिंदगियां बदल चुका है
उसके मुंह से निकलने वाली हर बात उम्मीद और जिंदगी से भरपूर होती है
18/03/2024
करके विधि वाद न खेद करो
निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो
बनता बस उद्यम ही विधि है
मिलती जिससे सुख की निधि है
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
~मैथिलीशरण गुप्त
08/03/2024
Shubhkamnaye
फीकी पड़ जाती है पूरी दुनिया की खुशियाँ सारी,
छोटे बच्चे की किलकारियाँ होती है इतनी प्यारी !
नन्ही बच्ची के जन्म की ढेरों बधाई।
My dear sir ji 🙏🙏🙏
22/02/2024
उलझनों से निकल कर बाहर आना पड़ेगा,
खुद का जीवन बदलने का वीणा खुद ही उठाना पड़ेगा।
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हम ग्रामीण किसानों और युवाओं को उनकी जीवन शैली, स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से ऊपर उठाने के मिशन पर हैं।
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18/02/2024
यदि आपको या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज है तो यह लेख अवश्य पढ़ें।
डाइबिटीज़ एक ऐसी शारीरिक अवस्था है जिसमें रक्त(खून) में लंबे समय तक शर्करा(शुगर) की उच्च मात्रा बनी रहती है। यह शर्करा रक्त में ग्लूकोज के रूप में होती है। आदर्श स्थति में यह सुबह खाली 100 mg/dl से कम होनी चाहिए। व भोजन के 2 घंटे उपरांत यह 150 mg/dl तक जा सकती है। अब आप सोच रहे होंगे कि रक्त में शर्करा का काम क्या है यह शर्करा हमारे शरीर को ऊर्जा देती है यह हमारे शरीर का यह ईधन है जब यह शर्करा कोशिका के अंदर जाती है तब कोशिका उर्जा में बदल देती है। रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिये इंसुलिन नामक हॉर्मोन बनता है। यह हार्मोन अग्नाशय(पैंक्रियाज) नामक अंग में बीटा कोशिकाओं में बनता है। यदि किसी कारण यह कोशिकाएं यह हार्मोन बनाना कम कर देती हैं तब रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। इंसुलिन हार्मोन एक प्रकार की चाबी है जो कोशकाओं को शर्करा को अंदर लेने के लिए खोलती है। जब इंसुलिन कम होगा तो शर्करा कोशिकाओं के अंदर नही जा पाएगी जससे शर्करा ऊर्जा में भी नही बदल पाएगी और उसकी मात्रा रक्त में भी बढ़ जाएगी। अब आप सोच रहे होंगे कि अगर खून में यह शुगर बढ़ गई तो क्या समस्या है बढ़ जाने दो । किन्तु यह रक्त में बढी हुई शुगर हमारे शरीर के लिये समस्या बन जाती है। यह अगर अधिक दिनों तक बढ़ी रहे तो यह सबसे पहले गुर्दो को खराब कर देती है। आंखों में रेटिना को खराब कर देती है। यह सभी रक्त वाहिकाओं (नसों) को खराब करने लगती है जिससे हर्दय व नसों के रोग, स्ट्रोक, पैरालिसिस आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। अधिक शर्करा के स्तर के कारण यौन समस्याएं, पैरों में खून का दौड़ान कम हो जाना, घावों का जल्दी न भरना, रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाना जैसी समस्याऐं हो जाती हैं।
डाइबिटीज़ दो प्रकार की होती है टाइप 1 और टाइप टू। टाइप 1 अधिकतर किशोरावस्था में हो जाती है इसमें अग्नाशय कार्य करना विल्कुल ही छोड़ देता है जिससे रोगी इंसुलिन पर ही निर्भर हो जाता है। इसके होने के कारणों को पूरी तरह पता नही लगाया जा सका है। किन्तु ऑटो इम्युन बीमारी या फिर किन्ही इंफेक्शन की वजह को भी इसका कारण माना जाता है।
टाइप 2 डियाबिटीज़ हमारी खान पान व दिनचर्या की गलत आदतों के कारण होती है।
इसको नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण अपनी खान पान की आदतों में सुधार करना होता है। हालांकि कई प्रकार की एलोपैथी ड्रग इसके उपचार के लिए उपलब्ध हैं। सबसे अधिक मेटफॉर्मिन ग्लिमप्राइड नामक ड्रग का प्रयोग होता है। यह लिवर में ग्लूकोज का उत्पादन कम कर देती है। ग्लिमप्राइड पैंक्रियाज को स्टिम्युलेट कर इंसुलिन का उत्पादन बढ़ा देती है। किन्तु इनके अनेकों साइड इफ़ेक्ट हैं। ज्यादा दिनों तक पैंक्रियाज को स्टिमुलेट करने वाली एलोपथिक ड्रग्स खाएंगे तब एक समय ऐसा आता है की पैंक्रियाज काम करना विल्कुल छोड़ देता है। इसलिये केवल इन दवाओं पर ही निर्भरता ठीक नही है। यदि खान पान व दिनचर्या में सुधार नही किया तो कुछ समय पश्चात जब पैंक्रियाज काम करना बिल्कुल बन्द कर देता है उस समय इनका कोई उपयोग नही रह जाता है, औऱ फिर केवल इन्सुलिन के इंजेक्शन लेना ही विकल्प रह जाता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम कर देना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट भी जटिल वाले लेना चाहिए जिनका देर से पाचन हो और वो रक्त में धीरे धीरे पहुंचे। गेंहू चावल के स्थान पर जौं, रागी, मडुआ बाजरा जैसे परंपरागत मोटे अनाजों का प्रयोग करना चाहिए। इनमें जटिल प्रकार के कार्बोहाइड्रेट होते हैं। सभी प्रकार के फल व शब्जियाँ लिये जा सकते हैं। प्रारंभ में ज्यादा मीठे फल जैसे केला आम इत्यादि न ले किन्तु मधुमेह नियंत्रित होने के पश्चात उन्हें लेना भी शुरू कर सकते हैं। ऐसे ही सब्जियों में भी आलू, घुइयां, याम आदि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों से बचना चाहिए।
मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूँ जिन्होंने खान पान और दिनचर्या में परिवर्तन कर ब्लड सुगर को नियंत्रित कर लिया। लेकिन मेरा मानना है की प्रारम्भ में जब मधुमेह का पता चले और यह अधिक मात्रा में बढ़ी हुई हो तब एलोपथिक दवाओं का सहारा लिया जा सकता ह। फिर धीरे धीरे दिनचर्या व भोजन में परिवर्तन कर उन्हें छोड़ देना चाहिए।
करेला, जामुन, नीम, गुड़मार, मेथी जैसी अनेकों जड़ी बूटियों का उपयोग हज़ारों वर्षो से मधुमेह को नियंत्रित करने में प्रयोग किया जा रहा है। आप इनका उपयोग कर भी लाभ ले सकते हैं। न्यूट्रिवर्ल्ड आपकी सेवा में *डाइबो रस* लेकर आये हैं जो उपरोक्त जैसी अनेको जड़ी बूटियों से तैयार किया गया है। जिसका अब तक हज़ारों लोग प्रयोग कर चुके हैं। सभी को इससे सकारात्मक परिणाम ही मिले हैं। *आजकल लोग अनेकों कंपनियों की आयूर्वेदिक गोलियां प्रयोग कर रहें हैं परन्तु उन गोलियों की तुलना में इसका प्रभाव अत्यधिक है क्योंकि यह कोलाइडल अवस्था में है शरीर के सम्पूर्ण द्रव कोलाइडल अवस्था में ही होते हैं अतः यह शरीर में जाकर तुरन्त ही घुल मिल जाता है। इसलिए यह ज्यादा असरकारी सिद्ध हुआ है।*
इसको 15 ml सुबह शाम लिया जा सकता है। अनेकों लोग जिनकी ब्लड सुगर एलोपैथी ड्रग लेने के बाद भी कम नही हो रही थीं। इसको लेने से सामान्य हो गई। इसको आप अपनी एलोपथिक दवा के साथ भी ले सकते हैं। जिससे उस दवा की कम मात्रा ही पर्याप्त होगी इसके प्रयोग से उसकी मात्रा नहीं बढ़ेगी। यदि साथ मेंआप उचित दिनचर्या व भोजन का भी पालन करेंगे तो एक दिन आपकी एलोपैथिक दवा भी छूट जाएगी। ऐसा अनेको लोगो के साथ हो रहा है। लोगों ने अपने अनुभवों में पाया है की न यह केवल ब्लड सुगर नियंत्रित करता है वल्कि पाचन को ठीक करता और मेटाबोलिस्म को भी सुधरता है। इसके उपयोग से सारे दिन ऊर्जा बनी रहती है।अतः न्यूट्रिवर्ल्ड का डाइबो रस लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है।
संपर्क करे-7017006728
हम सभी कहीं न कहीं negative लोग और positive लोग दोनों की संगति में रहते है ।उन दोनों का ही हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है ।और उस प्रभाव में कुछ लोग positive लोगों की बातों को अमल में लाते है और आगे बढ़ जाते है ,वहीं जो लोग negetive लोगों की बातों को अमल में लाते है अक्सर वो लोग अपने जीवन में बहुत पीछे रह जाते है ।
मेरे कहने का मतलब बिलकुल सीधा सा है ,हमारे जीवन में दोनों तरह के व्यक्ति आयेंगे हमें दोनों की बातें सुननी पड़ेगी ।बस हमें ध्यान यह रखना है कि हम किस व्यक्ति की बातों को अमल में लाये ।
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#राष्ट्रीयवृक्षारोपणअभियान
16/02/2024
जब भी आपको लगे कि दुनिया आपके बारे में क्या सोचती है बस आप घबराना नहीं अब आप भी दुनिया की उसी भीड़ में शामिल हो चुके हैं जो यह सोचती है,अब आप अलग नहीं रह गए हैं।
यदि आपको भी यही सोचना पड़ जाए तो समझ लो आप भीड़ का ही हिस्सा हो सच में आप अलग तब होंगे जब आप अलग सोचना शुरू करेंगे।
बहुत कुछ है सीखने को आप भीड़ का हिस्सा बनकर सीख रहे हैं या भीड़ से अलग होकर तय आपको करना है।
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05/03/2024