Peepal Tree

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17/11/2025

114 साल की पर्यावरणविद् थिमक्का, यानी हम सबकी प्यारी ‘वृक्षमाता’, हमें हमेशा के लिए छोड़कर चली गईं।
अपने पीछे वो अपने लगाए हुए हज़ारों वृक्षों की विरासत छोड़ गई हैं—जो आने वाले कई दशकों तक उन्हें याद दिलाते रहेंगे और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। कर्नाटक के तुमकुरु ज़िले में जन्मी थिमक्का की शादी केवल 12 साल की उम्र में हो गई थी। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने शुरुआती दौर में खदान में मज़दूर के रूप में काम किया और शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाया।

उनके कोई बच्चे नहीं थे, लेकिन पौधों से गहरा लगाव था।
पेड़ लगाना ही उन्हें सुकून देता था। इसी प्यार की वजह से उन्होंने 80 वर्षों में 8,000 से ज़्यादा पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की। उन्होंने अपने पति चिक्कैया के साथ मिलकर बरगद के पेड़ लगाने की शुरुआत की—पहले 10 पौधे, फिर हर साल यह संख्या बढ़ती गई। धीरे-धीरे उनका पौधारोपण अभियान अन्य गाँवों तक फैल गया।

सूखे क्षेत्र में रहने के बावजूद यह दंपती दिन-रात मेहनत करते रहे—चिक्कैया गड्ढे खोदते और थिमक्का पौधों को पानी देतीं। इसी समर्पण के कारण उन्हें ‘वृक्षमाता’ यानी Mother of Trees कहा जाने लगा। दोनों ने मिलकर करीब 400 पेड़ों को बच्चों की तरह पाला।

1991 में पति के निधन के बाद भी थिमक्का का पर्यावरण संरक्षण का सफर नहीं रुका। उनके काम को पहली बार 1995 में राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार के साथ सम्मान मिला।
2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया और 2020 में केंद्रीय विश्वविद्यालय कर्नाटक ने उन्हें मानद डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की।

थिमक्का की उपलब्धियाँ अनगिनत हैं, लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने पूरे देश—खासतौर पर युवाओं—को सिखाया कि हमारा भविष्य, हमारे पर्यावरण की रक्षा में छिपा है।
आज भले ही थिमक्का हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका लगाया हर पौधा, उनकी विरासत, उनका प्रेम और धरती के प्रति उनका कर्तव्य हमेशा हरियाली की तरह फलता-फूलता रहेगा।



[RIPSaalumarada Thimmakka, Forest conservation, Karnataka, Tree Plantation, Padma Shri, Inspiration]

11/10/2025

#पंच_परिवर्तन से #राष्ट्रीय_पुनर्निर्माण


#नागरिक_कर्तव्य : प्रत्येक नागरिक का धर्म है कि सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन करे और राष्ट्रहित में योगदान दें। नागरिक कर्तव्य, एक समृद्ध और लोकतांत्रिक समाज में रहने के लिए आवश्यक तत्त्व होते हैं. ये कर्तव्य, नागरिकों की ज़िम्मेदारियां और अधिकार होते हैं. नागरिक कर्तव्यों को पूरा करना एक प्रकार से सरकार और जनमानस के बीच होने वाले अनुबंध का सम्मान होता है. आज के संदर्भ में संवैधानिक कर्तव्यों को निम्न बिंदुओं के रूप में देखा जाता है, जिसके अनुपालन हेतु ही संघ का ऐसा आग्रह है। इनमें निम्न का ध्यान रखना चाहिए जो संविधान में वर्णित हैं:

i. संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों का सम्मान करना

ii. राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान करना

iii. देश की रक्षा करना और राष्ट्रीय सेवा देना

iv. देश की एकता, अखंडता, और संप्रभुता को बनाए रखना

v. धर्म, भाषा, और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव को खत्म करना

vi. पर्यावरण की रक्षा करना और प्राणियों के प्रति दया रखना

vii. वैज्ञानिक सोच का विकास करना

viii. सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना

ix. हिंसा से दूर रहना

x. 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा देना

11/10/2025

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Photos from Peepal Tree's post 11/10/2025

Panch Parivartan – Five Steps Towards Positive Transformation

Panch Parivartan represents five key areas of change that guide us toward a responsible, value-based, and sustainable society.
It inspires individuals to reflect, act, and contribute to building a better Bharat through:

1. Kutumb Parivartan – Strengthening family relationships and nurturing values at home.

2. Samajik Samasata – Promoting equality, harmony, and inclusiveness in society.

3. Paryavaran Parivartan – Protecting nature and adopting eco-friendly practices.

4. Nagrik Anusasan – Encouraging discipline, responsibility, and respect for civic duties.

5. Swadeshi Jeevan Shailee – Living a self-reliant and sustainable Indian lifestyle.

Each transformation begins with awareness and action.
Visit Ecomitram today and participate in the Panch Parivartan Quiz to learn more and become a part of this journey toward change.

🔗 https://ecomitram.app/panch-parivartan

01/09/2025

गमले में पौधे लगाने के बाद अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि मिट्टी भी समय-समय पर थक जाती है और उसकी उर्वरता कम हो जाती है। ऐसी मिट्टी में पौधे सही से बढ़ते नहीं, पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और फूल-फल भी कम लगते हैं। यदि मिट्टी को सही तरीके से समृद्ध किया जाए तो पौधे लंबे समय तक हरे-भरे और स्वस्थ रहेंगे। आइए जानते हैं गमले की मिट्टी को सुधारने और उपजाऊ बनाए रखने के सिद्ध और व्यवहारिक उपाय।

🔹 गमले की मिट्टी क्यों खराब होती है?
• लगातार पानी देने से मिट्टी सख्त (Hard) हो जाती है।
• पौधे सारे पोषक तत्व खींच लेते हैं जिससे मिट्टी कमजोर हो जाती है।
• समय-समय पर खाद न डालने से मिट्टी की जीवन्तता खत्म हो जाती है।
• कीड़े, फफूँद या नमक जमने से भी मिट्टी की संरचना बिगड़ती है।

🔹 गमले की मिट्टी समृद्ध करने के उपाय

1) पुरानी मिट्टी को ढीला करना

• गमले की ऊपरी 2–3 इंच मिट्टी को हाथ या खुरपी से हल्का-हल्का ढीला करें।
• इससे जड़ों को हवा मिलेगी और पानी व पोषण आसानी से अंदर जाएगा।
• यदि मिट्टी बहुत कड़ी हो गई है तो उसमें रेत या परलाइट मिलाएँ।

2) जैविक खाद मिलाना

• वर्मी कम्पोस्ट – पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व देता है।
• नीम खली – मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ कीड़ों से भी बचाती है।
• सरसों खली – फूल व फलदार पौधों के लिए बहुत लाभकारी।
• सड़ी हुई गोबर की खाद – मिट्टी की संरचना सुधारती है।

👉 हर 30–40 दिन में ऊपर की मिट्टी हटाकर ताज़ी खाद डालें।

3) सूक्ष्म पोषक तत्व

कई बार मिट्टी में कैल्शियम, आयरन, जिंक या मैग्नीशियम की कमी हो जाती है। इसके लिए:
• बोन मील – फॉस्फोरस और कैल्शियम का अच्छा स्रोत।
• लकड़ी की राख – पोटाश और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देती है।
• जिप्सम पाउडर – मिट्टी की कठोरता और क्षारीयता कम करता है।

4) मिट्टी को हल्का और सांस लेने योग्य बनाना

• गमले की मिट्टी में 30% रेत, 30% खाद और 40% बगीचे की मिट्टी मिलाएँ।
• यदि मिट्टी बहुत भारी है तो उसमें कोकोपीट या लीफ कम्पोस्ट डालें।

👉 इससे पानी जमता नहीं और जड़ों को हवा मिलती रहती है।

5) तरल खाद देना

• जैविक बायो-एंजाइम – मिट्टी की उर्वरता और माइक्रोब्स बढ़ाते हैं।
• गुड़ का घोल – मिट्टी में अच्छे जीवाणुओं को सक्रिय करता है।
• केले का छिलका घोल – पोटाश की पूर्ति करता है।

👉 हर 15 दिन में एक बार तरल खाद देना सबसे अच्छा माना जाता है।

6) मिट्टी कीटाणुरहित करना

यदि मिट्टी में चींटियाँ, सफेद कीड़े या फंगस लग गए हों तो

• नीम की खली या नीम का पानी डालें।
• सूरज की रोशनी में पुरानी मिट्टी 4–5 दिन सुखाएँ।
• चाहें तो 2–3 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर प्रति किलो मिट्टी मिलाएँ।

7) री-पॉटिंग करना

• हर 1–2 साल में पौधे को नई मिट्टी में रिपॉट करें।
• पुरानी मिट्टी को छानकर उसमें आधा हिस्सा नई मिट्टी और खाद मिलाकर फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं।

🔹 आदर्श मिट्टी का मिश्रण

• 40% बगीचे की मिट्टी
• 30% गोबर की खाद / वर्मी कम्पोस्ट
• 20% रेत या परलाइट
• 10% कोकोपीट या सूखे पत्तों की खाद

👉 इसमें मुट्ठीभर नीम खली और थोड़ी राख मिला दें तो मिट्टी समृद्ध और पौधों के लिए परफेक्ट हो जाएगी।

🔹 विशेष ध्यान देने योग्य बातें
• मिट्टी में अत्यधिक खाद न डालें, वरना पौधा जल सकता है।
• हर बार पानी देने के बाद गमले की मिट्टी ढीली जरूर करें।
• समय-2 पर तरल खाद और सूक्ष्म पोषक तत्व देते रहें।
• कीड़े लगने पर रासायनिक दवाइयों की बजाय जैविक उपाय अपनाएँ।

👉 क्या आप चाहेंगे कि मैं इस पर एक वार्षिक देखभाल कैलेंडर भी बनाऊँ जिसमे कब कौन-सी खाद, कब तरल पोषण, कब रिपॉटिंग करनी है, ताकि आपको महीने-दर-महीने गाइड मिल सके?

अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ साझा करें। अपने अनुभव, सुझाव या प्रश्न नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें। हम हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

28/07/2025

#विश्व_प्रकृति_सरंक्षण_दिवस
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 2017, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 28 जुलाई को दुनिया भर में मनाया जाता है। प्रकृति वनों की कटाई और अवैध वन्यजीव व्यापार जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। हर किसी को हरित जीवनशैली अपनाने के लिए अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए। स्वच्छ भारत अभियान, प्रोजेक्ट टाइगर, भविष्य के लिए मैंग्रोव कुछ ऐसी पहल हैं जो भारत ने प्रकृति संरक्षण के लिए शुरू की हैं।
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हमारे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा के महत्व की याद दिलाता है।

Photos from RAHUL DWIVEDI's post 28/07/2025
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