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#बंद_करो_अटलजी_के_नाम_पर_मजाक
जिन्हें ग्वालियर की आन, बान और शान से खिलवाड़ करना है वो करेंगे ही। #वामपंथी_विचारधारा #राष्ट्रवादी_विचारधारा पर इस क़दर हावी है कि निगम के द्वारा आशकरण अटल को अटल सम्मान देने एवं उक्त कार्यक्रम में #हिंदी_कवियों के स्थान पर #उर्दू_शायरों को शामिल करने का विरोध शहर भर के साहित्य एवम् हिंदी सेवियों ने किया था लेकिन निगम में पाँव फैलाये बैठे वामपंथी शकुनि ने फिर से एक चाल चल दी है।
26 दिसंबर को आनन-फानन में आयोजित हो रहे कवि सम्मेलन में एक बार फिर कोई राष्ट्रवादी धारा का कवि नहीं है। #मंचीय_विदूषकों और #अर्बन_नक्सल_कवियों से सजी टीम आखिर किसकी साजिश पर नाम प्रस्तावित करने पर उतार दी गई है?
शासन और प्रशासन की आंखों पर धृतराष्ट्री पट्टी बँधी हुई है और एक वामपंथी पुनः शकुनि वाला खेल खेल चुका है और शहर के सभी साहित्यकार देख रहे हैं कि फिर कैसे ये अन्याय किया जा रहा है?
#धिक्कार है निर्णयकर्ताओं पर
#हिंदी और अटल जी का सम्मान फिर दांव पर है
तय कार्यक्रम अनुसार एक #जिहादी और #शहरी_नक्सल_अज़हर_इक़बाल हजारों लोगों से सम्वाद करेगा वह भी हिंदुत्व के महान प्रतीक #अटलजी_की_जन्मजयंती पर। भाजपा और मोदी जी अर्बन नक्सल/शहरी नक्सल बाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और यहां नेता इक़बाल अज़हर ज्ञान दीक्षा देंगे?
गुरु पुत्रों के शहीदी दिवस और अटल जयंती पर #जिहादी_शायर #इस्लामिक_क्रूरता पर पर्दा डालते हुए गंगा जमुनी तहज़ीब, भाईचारे पर सम्बोधित करेंगे।
संयोजन, संचालन, सम्वाद तीनों वामपंथियों और अर्बन नक्सलों के और पैसा, भीड़, आयोजन राष्ट्रवादियों का।
राष्ट्रवादी कवि एक भी नहीं।।
यह समाचार न केवल विचलित करने वाला है अपितु अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण भी है।
स्मरण रहे अज़हर इक़बाल जो कि रवीश कुमार का चेला है, भेष बदल कर राष्ट्रवादियों के मंचों का यूज कर रहा है... यही है अर्बन नक्सलवाद।
#कृपया_कापी_कर_पेस्ट_करें
23/03/2023
"देश के वास्ते जो जिये मर गये
वो शहीदे वतन याद आते रहे"
-प्रदीप पुष्पेन्द्र
महान क्रान्तिकारी "शहीद भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु" को आज "शहीददिवस" पर कोटि कोटि नमन
10/11/2022
कर सौलह श्रंगार जो, खूब निखारे वेश•
फूलों वाली सेज पर, बिखर गये जो केश•
-प्रदीप पुष्पेन्द्र
हम परवाने दीप पर, जीवन देते वार•
खुशबू पर आसक्त जो, वो क्या जाने प्यार•
-प्रदीप पुष्पेन्द्र
24/10/2022
गीत
-प्रदीप पुष्पेन्द्र
(आप सभी को को दीपावली की शुभकामनायें)
अँधियारे को दूर भगाओ•
दीप जलाओ दीप जलाओ•
*
जब भी संकट. घिरकर आये•
भय का तक्षक फन फैलाये•
फूट पड़े संशय का अंकुर
बल अंतर का डिग डिग जाये•
थोड़ा धैर्य बाँधकर तब तुम
मन में संयम बाँध बँधाओ•
*
जब भी दुश्मन आ धमकाये•
बारूदी एटम से आये•
नाखूनो के खतरों से जब
शांति राग खण्डित हो जाये•
सत्य अहिंसा के परचम को
आसमान में जा लहराओ•
*
जब जब घोर निराशा छाये•
टूट टूट मन आशा जाये•
दग्ध हृदय में कम्पन जन्मे
अभिलाषा सूखे मुरझाये•
तब तुम छोड़ निराशा गहरी
विश्वासों को गले लगाओ•
*
सत्य तो यह है कि हम छंद की दुहाई देनेवाले भी कम दोषी नहीं हैं। छंद गीत ग़ज़ल के नाम पर मृत देह की उपासना करते रहे। उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर ही न सके।
केवल काया ही सुन्दर होना ही जरूरी नहीं, उसमें प्राण फूँकने का काम भी जरूरी है। छंदमुक्त कविता में तो आजकल प्राण पूर्णतः गायब हैं यानि कि न तो काया है और न प्राण है।
बिना कथ्य, बजन, मनन, चिंतन, गहनता, कवित्त के न तो कविता हो सकती है, न ग़ज़ल और न ही गीत की कल्पना।
कुल मिलाकर हमारी कविता में "कविता के अनिवार्य तत्व" ही गायब हैं, तो इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं।
#जराहटके
02/10/2022
माँ गौरी को पूजिए, दिवस आठवें रोज।
शंख औढ़नी नारियल, दें कन्या को भोज।
श्वेत फूल फल नारियल, चूनर शंख पसंद।
माँ गौरी जो पूजते, पाते परमानंद।
जय माता की.....
-प्रदीप पुष्पेन्द्र
आठवें दिवस माँ महागौरी का स्वरूप
दोहा नियम
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