DHeeru Tomar
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Gau Dal #
25/05/2024
बुन्देलखण्ड महान बनाफर राजवंश के क्षत्रिय वीर शिरोमणि #आल्हा जयंती पर सभी भाईयों को बधाई ।
वैभवशाली चंदेल साम्राज्य के महाराज परमर्दि देव ने दस्सराज बच्छराज नामक दो बनाफर शुरवीर भाईयों को एक एक ईलाका देते हुए अपना छोटा भाई मान अपनी सेना की कमान देते हुए सेनापति नियुक्त करते हैं और दोनों भाइयों का विवाह अपनी सालियों जो कि महान प्रतिहार वंश के बासुदेव परिहार की कन्याएं व माहिल परिहार की बहन थी करवाकर अपना भातृत्व धर्म निभाते है ।
महोबा के समृद्धिशालीता के विषय में कहा जाता है ।
पारश पाथर है महोबा में
लोहा छुए सोन होय जाये ।
किला बहोरे कालिंजर के
बैठे सात पुस्त ले खाय ।।
आल्हा खंड में महोबा दरबार के विषय में इस प्रकार से वर्णन है ।
बावन खंभिया कै ओसारा
बावन खंभिया के दलान ।
खंभिया लागे मलयागिरी के
जेहमें शेषनाग लपटाय ।
कूरी छत्तीसों बांग्ला बैठे
कंचन लाग रह्यो दरबार ।
नचे पतुरिया बंगाले की
बैठे ज्वान मस्त होय जाय ।
समय गुजरने के साथ आल्हा का जन्म होता है ।
कहा जाता है कि इनके जन्म के साथ भयंकर भूकंप आया था जिसे कवि ने खंड में लिखते हुए कहा है ।
जेह दिन आल्हा क जन्म भयल ।
धरती धसी अढाई हाथ ।
ज्योतिषियों को महराज परमाल ने बुलाया ज्योतिषियों ने बालक की जन्मपत्रिका बनाते हुए कहा कि
यह बालक की कुंडली सम्राट युधिष्ठिर की तरह है
खंड में कहा गया है कि ।
द्वापर वाले कौरव पांडव
कलयुग में लिन्ह अवतार ।
युद्धिष्टिर जन्मे हैं महोबा में
कहलाये हैं आल्हा मंडरिक अवतार ।।
यह भी कहा जाता है कि आल्हा के बाल्यावस्था में जब जंगल में शिकार करने जाते हैं तो उसी समय मां शारदा एक बुढिया के रूप में दर्शन देती हैं माता मैहर शारदा भवानी ने उन्हें एक खडग व अमरत्व प्रदान करती है
आज भी माता शारदा भवानी की प्रथम पुजा आल्हा जी के द्वारा होती है ।
आल्हा की दृष्टि के बारे में खंड में लिखा है ।
दृष्टि शनिचर उन क्षत्रीन के
जेके देख कालभय खाय ।
रण के डंका बाजन लागे
सज गये आल्हा के सरदार ।
जब जब आल्हा रण में जाये
गजब की मचे हाहाकार ।
एक वार से दो दो शिश काटे आल्हा की तलवार
आल्हा के रण तांडव के बारे में खंड में लिखा है
कट कट मुंडिया गिरे खेतन मे ।
ऊठ ऊठ रुंड करे तकरार ।।
एक के मारे दुइ मर जाय ।
तीजा खौफ खाय गिर जाय ।।
मरे के निचे जिंदा लुक गै
ऊपर लोथ लई लटकाय ।।
बडै लडैया महोबा वाले ।
जिनसे हार गई तलवार ।।
#राजपूत_योद्धा_आल्हाऊदल
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Hajira Char Shahar Ka Naka
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