Ashwamit Gautam Fan

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06/02/2026
28/01/2026

मनीष कश्यप तुम कितना जलील होगे,

मनीष कश्यप की कहानी एक बार फिर चर्चा में है! पहले BJP अपना फायदा उठवाने के बाद अब प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में शामिल होकर अपना फायदा उठवा रहे हैं एक बार बिहार की जनता से भरोसा हार कर क्या मनीष कश्यप इस बार बिहार की जनता का भरोसा जीत पाएंगे? प्रशांत किशोर की रणनीति और मनीष कश्यप की विवादित छवि क्या बिहार के बदलाव की चिंगारी बन पाएगी, या फिर ये एक और असफल प्रयास होगा? चनपटिया जैसे BJP गढ़ से चुनाव लड़ने की तैयारी में मनीष कश्यप का भविष्य क्या होगा?














Politics

27/01/2026

Good night

26/01/2026

I got over 100 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

23/01/2026

Politics













5K

Expose Politics













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Truth

23/01/2026

जन गण मन अधिनायक जय हे,

लाल किले पर तिरंगा लहराने की जगह राहुल गांधी ने बारिश में भीगते हुए अपने ऑफिस के बाहर 'जन गण मन' गाया। लेकिन क्या यह सिर्फ एक तमाशा था? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगान गाना अनिवार्य नहीं, पर सम्मान देना जरूरी है। 'जन गण मन' को 19127 में नेहरू जी की पसंद ने राष्ट्रगान बनाया, पर इसके पीछे की कॉन्ट्रोवर्सी और वंदे मातरम की कहानी भी कम रोचक नहीं! क्या कहता है आपका दिल? आइए, इस बहस में शामिल हों और जानें कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कैसे हो, बिना किसी दबाव के








History

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Anthem



Mataram





History



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Politics

TheAnthem



Jodo









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Culture

21/01/2026

Dharm khatre me hai bacha lo....

धर्म खतरे में है, लेकिन क्यों? मेरे इंस्टाग्राम पोल ने चौंकाने वाले नतीजे दिखाए ! 45% लोग मानते हैं भारत धार्मिक नहीं है, और 52% कहते हैं वे ख़ुद धार्मिक नहीं हैं। आखिर क्यों? ढोंग, कर्मकांड, चढावा, बाबाओं का पाखंड, नेताओं की सियासत और धर्म के नाम पर ठगी ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है। क्या हम सच्चे अध्यात्म को भूल चुके हैं? आओ, इस बहस को आगे बढ़ाएं! अपनी राय कमेंट करें और इस पोस्ट को शेयर करें
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21/01/2026

दिवाली के बाद विदेशी कह रहे हैं हमारा देश छोड़ो।

देश से बाहर जानें के बाद वहां अपनी आदतें थोपना - ये सिर्फ अजीब नहीं, नुकसानदेह भी है। हम अपनी "कल्चर प्राइड" की आड़ लेकर गंदगी फैलाते हैं और दूसरे देशों की सहनशीलता का फायदा उठाते हैं। नदी में कचरा, सड़क पर थूक, पटाखे-अत्याचार - ये सब लोकल कम्युनिटीज़ के लिए चोट है। अगर वाकई अपनापन दिखाना है तो सभ्यता और मर्यादा भी साथ ले कर चली। आप क्या सोचते हैं - क्या संस्कृति का मतलब अपनी आदतों को दूसरों पर थोपना है? कमेंट करी, शेयर करो और फ़ॉलो करो अगर आप साफ-सुथरे व्यवहार के पक्ष में हो।













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