Nisha Pandey

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06/03/2026

जीवन के रिश्ते भी बरनी में भरे हुए आचार की तरह ही होते हैं जितनी शुद्धता से भरी सामग्री से तैयार किये गए होंगे उतने ही लंबे समय तक चलेंगे यदि मिलावट मिलाई गई है तो सड़ने की गारंटी निश्चित है ❣️__________चिंतन कीजिए ❤️

06/03/2026

अति के बाद छती निश्चित है चाहे आप कितने दिग्गज क्यों न हों _______जय राधा माधव 🙏❣️🙇

05/03/2026

❣️

04/03/2026

🌸 जब भक्त के पीछे चल पड़े बांके बिहारी! 🌸

वृंदावन की गलियों में गूंजती राधे-राधे की ध्वनि और कुंज गलियों की वह भीनी खुशबू... इसी पावन धरा पर बहुत समय पहले एक निर्धन ब्राह्मण आया। वह साधारण था, पर उसका हृदय प्रेम से लबालब भरा था। जैसे ही उसने बांके बिहारी जी के विग्रह के सम्मुख कदम रखा, वह सुध-बुध खो बैठा। उनकी टेढ़ी चितवन और वह मंद मुस्कान—ब्राह्मण को लगा जैसे ठाकुर जी सीधे उसी से बातें कर रहे हों।

दिन बीते, हफ्ते बीते, पर वह ब्राह्मण मंदिर की चौखट से टस से मस न हुआ। वह बस टकटकी लगाए अपने प्राणप्रिय 'बिहारी' को निहारता रहता। कभी रोता, कभी मुस्कुराता, तो कभी घंटों मौन खड़ा रहता।

अंततः विदाई की घड़ी आ गई। भारी मन और सजल नेत्रों के साथ वह ब्राह्मण ठाकुर जी के सामने खड़ा हुआ। उसका कंठ रुंध गया और वह सिसकते हुए बोला:

"हे सांवरे! मैं तो जा रहा हूँ, पर यह प्राण यहीं छूट रहे हैं। मेरे घर में न धन है, न वैभव, बस आपके दर्शनों की भूख है। क्या आप इस गरीब के साथ नहीं चलेंगे? क्या मुझे फिर से उस सूनी दुनिया में अकेले छोड़ देंगे?"

कहते हैं कि बिहारी जी 'भाव' के भूखे हैं। भक्त की उस करुण पुकार ने ठाकुर जी के सिंहासन को हिला दिया। करुणा के सागर से मर्यादा का बांध टूट गया। जैसे ही ब्राह्मण ने भारी कदमों से मंदिर की सीमा लांघी, साक्षात् ठाकुर जी एक बालक का रूप धरकर दबे पांव उसके पीछे चल दिए।

अगले दिन जब भोर की बेला में पुजारी ने मंदिर के पट खोले, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सिंहासन खाली था! वह रत्नजड़ित विग्रह, जिसकी सुरक्षा और सेवा में पीढ़ियां बीत गईं, वहां था ही नहीं। पूरे वृंदावन में यह खबर आग की तरह फैल गई।

भक्त विलाप करने लगे, पुजारी फूट-फूट कर रोने लगा— "प्रभु! हमसे क्या भूल हुई? आप हमें अनाथ करके कहाँ चले गए?"

तभी पुजारी को एक दिव्य संकेत (स्वप्न या अंतर्मन की वाणी) प्राप्त हुआ:

"मेरा एक निश्छल भक्त मुझे पुकार कर ले गया है। मैं उसके प्रेम के वशीभूत होकर उसके पीछे-पीछे जा रहा हूँ। वह अभी वृंदावन की सीमा पर है।"

पुजारी और मंदिर के सेवक पागलों की तरह दौड़ते हुए वृंदावन की सीमा तक पहुँचे। वहां का दृश्य देख सबकी आँखें फटी रह गईं। वह वृद्ध ब्राह्मण आगे-आगे चल रहा था और उसके ठीक पीछे एक अत्यंत सुंदर बालक (ठाकुर जी) चुपचाप सिर झुकाए चल रहा था।

पुजारियों ने ब्राह्मण को रोककर सारी बात बताई। जब ब्राह्मण को यह आभास हुआ कि उसके प्रेम ने ठाकुर जी को उनके धाम से दूर कर दिया है और पूरे ब्रज में व्याकुलता फैल गई है, तो वह आत्मग्लानि से भर गया। उसने हाथ जोड़कर प्रार्थना की, तब जाकर बड़े अनुनय-विनय के बाद बिहारी जी पुनः मंदिर लौटने को तैयार हुए।

क्यों डाला जाता है हर दो मिनट में पर्दा?

यही वह ऐतिहासिक कारण है जिसकी वजह से आज भी बांके बिहारी मंदिर में 'झाँकी दर्शन' की परंपरा है। अन्य मंदिरों की तरह यहाँ पट खुले नहीं रहते, बल्कि हर दो मिनट में पर्दा (चीर) लगाया जाता है।

* मान्यता: यदि कोई प्रेमी भक्त बिहारी जी की आँखों में आँखें डालकर उन्हें देर तक निहार ले, तो ठाकुर जी आज भी भक्त के वश में होकर मंदिर छोड़कर उसके साथ चल देते हैं।

* सीख: बिहारी जी केवल पाषाण की मूर्ति नहीं, एक जीवंत सत्ता हैं। वे धन, छप्पन भोग या पांडित्य के नहीं, बल्कि केवल सच्चे 'भाव' के भूखे हैं।

04/03/2026

सभी देशवासियों को होली की अनंत शुभकामनाएं। रंग और उमंग से भरा यह त्योहार सबके लिए खुशियों की बहार लेकर आए। हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता के रंगों की बौछार हो, यही कामना है ____________जय श्री राधे कृष्णा 🍂🫟🫟🫟

04/03/2026

कान्हा अपने सखाओं (ग्वाल-बालों) के साथ मिलकर गोपियों के घरों में छिपकर घुस जाते थे और मटकियों से ताज़ा माखन चुराकर खाते थे।

गोपियाँ माखन बचाने के लिए मटकियों को ऊँचे छींकों (हिंग) पर टांग देती थीं, लेकिन कृष्ण अपने मित्रों की ऊँची मानव-श्रृंखला (पिरामिड) बनाकर या ऊखल पर चढ़कर वहां तक पहुँच जाते थे।

वे न केवल स्वयं माखन खाते थे, बल्कि अपने मित्रों और यहाँ तक कि बंदरों को भी माखन खिलाते थे।🙏🏻🪈

04/03/2026

*रंगों के उत्सव होली की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी वैष्णवों को 🙏💕यह पावन पर्व आपके जीवन में रंगबिरंगी खुशियां लेकर आए 🫟🫟🫟* यही मेरी प्रार्थना है श्री राधा रानी से 🙏🙇💕

03/03/2026

एक ब्राह्मण था रोज पीपल में जल चढ़ावे था। पीपल में से लड़की कहती पिताजी मैं तेरे साथ चलूँगी। ब्राह्मण सूखने लगा। ब्राह्मणी बोली–‘क्यों सूख रहे हो।’

ब्राह्मण बोला–‘पीपल में से एक लड़की कहती है, पिताजी मैं तेरे साथ चलूँगी।’

ब्राह्मणी बोली–‘कल ले आना जहाँ छः लड़की हैं वहाँ सातवीं सही।’ दूसरे दिन ब्राह्मण लड़की को ले आया। उस दिन वह आटा माँगने गया तो थैला भर-भर के मिला। ब्राह्मणी आटा छानने लगी तो लड़की बोली–‘माँ मैं छानूँगी।’

ब्राह्मणी बोली–‘ना बेटी पावनी, धोली-धोली हो जाएगी।’

लड़की बोली–‘ना, छानूँगी।’

उसने छाना, परात भर गई। ब्राह्मणी खाना बनाने लगी तब भी लड़की बोली–‘माँ मैं बनाऊँगी।’

माँ बोली–‘ना बेटी उँगली जल जाएगी।’

लड़की बोली–‘ना मैं ही बनाऊँगी।’

रसोई में गई, छत्तीस प्रकार के भोजन बनाए। सबको पेट भर-भर के खिला दिया और दिन तो भूखे रहे थे उस दिन पेट भर-भर के खाया। सबके खाने के बाद ब्राह्मणी का भाई आया।

भाई बोला–‘जीजी मुझे तो भूख लगी है। रोटी खाऊँगा।’ बहन सोचने लगी। सबने खा लिया अब कहाँ से खिलाऊँगी।

लड़की ने पूछा–‘माँ क्या बात है।

‘तेरा मामा आया है रोटी खाएगा’–माँ ने कहा।

लड़की रसाई में गई। छत्तीस प्रकार के भोजन बनाए, लाकर मामा को जिमा दिया।

भाई बोला–‘जीजी ऐसा भोजन कभी न खाया जैसा आज खाया है।’

‘भाई तेरी पावनी भाँजी है उसने बनाया है’–ब्राह्मणी ने कहा। मामा खा के चला गया।

शाम हुई लड़की बोली–‘माँ चौका लगा के चौका का दीवा जला दिया, मैं कोठे में सोऊँगी।’

‘ना बेटी तू डर जाएगी’–माँ बोली।

‘ना माँ मैं कोठे में सोऊँगी।’ इतना कह कर लड़की कोठे में सो गयी।

आधी रात को उठी, चारों तरफ आँखें झपकायीं, धन ही धन हो गया। फिर लड़की जाने लगी। बाहर एक बूढ़ा ब्राह्मण सो रहा था।

ब्राह्मण बोला–‘बेटी तू कहाँ चली।’

वह बोली–‘मैं तो लक्ष्मी माता हूँ। इसके छः छः बेटी हैं। इसकी दरिद्रता दूर करने आई थी। तैने करवाना हो तू भी करवा ले।’ उसके घर में चारों तरफ आँख फिराई, धन ही धन हो गया।

सवेरे उठके ढूँढ मची पावनी बेटी कहाँ गई। बूढ़ा ब्राह्मण आकर बोला वो तो लक्ष्मी माता थी तेरे साथ-साथ मेरी भी दरिद्रता दूर कर गई।

जैसे लक्ष्मी माता ने उसकी दरिद्रता दूर की, सबकी दरिद्रता दूर करें।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

जय महा लक्ष्मी जी

03/03/2026

दुनिया और हमलोग.. 😂

02/03/2026

एक बार सूरदास जी कहीं जा रहे थे, चलते-चलते मार्ग में एक गढ्ढा आ गया और सूरदास जी उसमें गिर गए और जैसे ही गढ्ढे में गिरे तो किस को पुकारते ? अपने कान्हा को ही पुकारने लगे, भक्त जो ठहरे। एक भक्त अपने जीवन में मुसीबत के समय में प्रभु को ही पुकारता है, और पुकारने लगे की अरे मेरे प्यारे छोटे से कन्हैया आज तूने मुझे यहाँ भेज दिया और अब क्या तू यहाँ नहीं आएगा मुझे अकेला ही छोड़ देगा ?
सूरदास जी ने कान्हा को याद किया तो आज प्रभु भी उनकी पुकार सुने बिना नहीं रह पाए। और उसी समय एक बाल गोपाल के रूप में वहाँ प्रकट हो गए, और प्रभु के पांव की नन्ही-नन्ही सी पैजनियाँ जब छन-छन करती हुई सूरदास जी के पास आई तो सूरदास जी को समझते देर न लगी। कान्हा उनके समीप आये और बोले अरे बाबा नीचे क्या कर रहे हो, लो मेरा हाथ पकड़ो और जल्दी से ऊपर चले आओ। जैसे ही सूरदास जी ने इतनी प्यारी सी मिश्री सी घुली हुई वाणी सुनी तो जान गए की मेरा कान्हा आ गया, और बहुत प्रसन्न हो गए, तथा कहने लगे की अच्छा कान्हा, बाल गोपाल के रूप में आए हो। बाल गोपाल कहने लगे अरे कौन कान्हा ? किसका नाम लेते जा रहे हो, जल्दी से हाथ पकड़ो और ऊपर आ जाओ, ज्यादा बातें न बनाओ।
सूरदास जी मुस्कुरा पड़े और कहने लगे- सच में कान्हा तेरी बांसुरी के भीतर भी वो मधुरता नहीं, मानता हूँ की तेरी बांसुरी सारे संसार को नचा दिया करती है लेकिन कान्हा तेरे भक्तो का दुःख तुझे नचा दिया करता है। क्यों कान्हा सच है न ? तभी तो तू दौड़ा चला आया।
बाल गोपाल कहने लगे- अरे बहुत हुआ, पता नहीं क्या कान्हा-कन्हा किये जा रहा है। मैं तो एक साधारण सा बाल ग्वाल हूँ, मदद लेनी है तो लो नहीं तो मैं तो चला, फिर पड़े रहना इसी गढ्ढे में।
जैसे ही उन्होंने इतना कहा सूरदास जी ने झट से कान्हा का हाथ पकड़ लिया और कहा- कान्हा तेरा ये दिव्य स्पर्श, तेरा ये सान्निध्य, ये सुर अच्छी तरह जानता हूँ। मेरा दिल कह रहा है की तु मेरा श्याम ही है।
इतना सुन कर, जैसे ही आज चोरी पकडे जाने के डर से कान्हा भागने लगे तो सुरदास जी ने कह दिया-

बाँह छुडाये जात हो, निबल जान जो मोहे।
ह्रदय से जो जाओगे, सबल समझूंगा मैं तोहे॥

अर्थात- मुझे दुर्बल समझ यहाँ से तो भाग जाओगे लेकिन मेरे दिल की कैद से कभी नहीं निकल पाओगे।
ऐसे थे महान कृष्ण भक्त सूरदास जी।

Photos from Nisha Pandey's post 01/03/2026

देश की राजधानी दिल्ली मे एक चौकाने वाली और अद्भुत घटना हुई है। 86 साल के रिटायर्ड आर्किटेक्ट आरसी सभरवाल के घर पर एक नौकरानी काम करने आती थी, इसी क्रम मे उसने देखा कि इनके पास बहुत पैसा और महंगे महँगे क़ीमती समान है, तभी उसने अपने भाभी के साथ एक प्लान बनाई की एक ED टाइप Raid करा कर सारे पैसे लेकर भाग चला जाए। बाकायदा इसके लिए वर्दी गाड़ी बैच सबका इन्तेजाम भी किया गया।

25 फरवरी को पुलिस ने रेखा देवी नाम की नौकरानी और उसकी भाभी पूजा राजपूत को पूरी साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है

पुलिस ने बताया कि 11 फरवरी को पुलिस की वर्दी पहने तीन लोग ED अफसर बनकर 86 साल के रिटायर्ड आर्किटेक्ट आरसी सभरवाल के घर में जबरन घुस गए। आरोपियों ने परिवार को धमकाया और तलाशी के दौरान मोबाइल फोन जब्त कर लिए।

सभरवाल के पोते को शक हुआ तो उसने पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद तीनों आरोपी लगभग 3-4 लाख रुपये कैश, सात महंगी घड़ियां और गहने लेकर कार में फरार हो गए। पुलिस ने 24 फरवरी को मामला दर्ज करने के बाद इसकी जांच शुरू की थी।

कार की लोकेशन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस,
नौकरानी की भाभी के घर से वर्दी और लूट का सामान मिला

मोबाइल टावर डंप डेटा और आईएमईआई ट्रैकिंग के जरिए पूजा राजपूत नाम की महिला का पता चला, जिसका फोन दोनों जगहों पर एक्टिव था। जांच की गई तो पता चला कि वह नौकरानी रेखा देवी की भाभी है। पुलिस ने बताया कि रेखा देवी भी अक्सर गाजियाबाद में भाभी के घर पर आती-जाती थी।

01/03/2026

रविवार की सुबह लखनऊ के बीकेटी इलाके में एक खौफनाक वारदात सामने आई. जीसीआरजी कॉलेज गेट के सामने स्थित एक वेज बिरयानी की दुकान के फ्रिज के अंदर एक अज्ञात युवक की लाश बरामद हुई. सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई है.

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