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AYURVED SE BIMARI DABTI NAHI KHATAM HO JATI HAI
HERBAL APNAO JEEVAN BACHAO
06/12/2023
04/12/2023
अकेली स्त्रियों के प्रति कुछ लोगों की तुच्छ मानसिकता..
😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥😥
1. अकेली रहती है! मतलब साथ (सेक्स) की
जरूरत तो होगी ही, ट्राय तो मार मौज़
करने के लिए बेस्ट ऑप्शन है।
2. बाहर रहकर पढ़ी है मतलब घाट-घाट का
पानी पी हुई है। पक्का कैरेक्टरलेस है। हाथ
रखते ही तैयार हो जाएगी। ऐसों का क्या ?
3. दिल्ली में रहती है मतलब खुली होगी।
मेट्रो सिटीज़ में रहने वाली लड़कियां
तो बहुत खुली होती हैं, पता नहीं
कितनों के साथ सो जाए। यहाँ खुली
का मतलब सेक्स के लिए हमेशा आसानी से
उपलब्ध रहने से है।
3. गाँव की है, सीधी होगी। मतलब इसको
आसानी से बेवकूफ़ बनाकर यूज़ कर सकते हैं।
4. ब्रेकअप हो गया है! मतलब रोती लड़की
को विश्वास देकर सेक्स की जुगाड़ की
जा सकती है।
5. पहले बॉयफ्रेंड ने चीट किया है! ओह्ह
बेबी मैं ऐसा नहीं हूँ। दुनिया से अलग हूँ।ठ
यार चीट हुई लड़कियों को यूज़ करना औऱ
आसान है। सिली गर्ल्स......
6. नीच जात की है! यार ये छोटी जातियां
होती बहुत बेवकूफ़ हैं। मैं जाति को नहीं
मानता, शादी करूँगा बस इतने में तो तन-
मन-धन से समर्पित हो जायेंगी।
7. काली है! ओह्ह....यार रंग से कुछ नहीं
होता काला रंग तो बहुत खूबसूरत होता
है। यार उस कलूटी को ऐसे नहीं बोलूंगा
तो बिस्तर तक कैसे आएगी।
8. सेल्फ डिपेंड है! इमोशनल फूल बनाकर
सारी अय्याशी करने का बढ़िया ऑप्शन
है। इंडिपेंडस और बराबरी की बात कर देख
कैसे करती है।
9. तलाकशुदा है ! विधवा है! यार कंधा ही
तो देना है बस वो तैयार मिलेंगी।
10.अभी स्कूल में पढ़ रही है! लगती तो एकदम
माल है, गोटी सेट करनी पड़ेगी।
बातें चाहे जितने तरीके से हों.....केंद्र में बस
" सेक्स" है।
ऐसे ही नहीं हर दिन रेप हो रहे, ये रेप की तैयारी तो हरपल हो रही है।
अगर आपको यह पढने में शर्म आ रही है तो आप भी मानसिक विकृति के शिकार हैं और आप ही ऐसी सोच ( जो ऊपर लिखा गया है) रखने वाले वह पुरुष हैं
इसलिए खुलकर रहिए खुलकर बोलिए सबके सामने बोलिए कोना मत ढूंढिए क्योंकि खुलकर और ज्यादा बोलने वाले लोग चुप रहने और कोना ढूंढने वाले लोगों की अपेक्षा ईमानदार और स्वच्छ चरित्र होते हैं ऐसा प्रकृति का नियम है......
ेटी_मेरी
02/12/2023
घर से भागी हुई बेटियों का पिता हो या ससुराल से भागी पत्नी का पति...इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है,
पहले तो वो महीनों तक घर से निकलता ही नही और फिर जब निकलता है तो हमेशा सिर झुका कर चलता है, आस पास के मुस्कुराते चेहरों को देख उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हों, जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, डरता है कहीं कोई उसकी भागी हुई बेटी का नाम न ले ले, जीवन भर डरा रहता है, अंतिम सांस तक घुट घुट के जीता है, और अंदर ही अंदर रोता रहता है।
जानते हैं भारतीय समाज अपनी बेटियों को लेकर इतना संवेदन शील क्यों है,
भारतीय इतिहास में हर्षवर्धन के बाद तक अर्थात सातवीं आठवीं शताब्दी तक बसन्तोत्सव मनाए जाने के प्रमाण मौजूद हैं, बसन्तोत्सव बसन्त के दिनों में एक महीने का उत्सव था जिसमें विवाह योग्य युवक युवतियाँ अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनती थीं और समाज उसे पूरी प्रतिष्ठा के साथ मान्यता देता था,
आश्चर्यजनक है ना आज उसी देश में कुछ गांवों की पंचायतें जो प्रेम करने पर कथित रूप से मृत्यु दण्ड तक दे देती थी, पता है क्यों? इस क्यों का उत्तर भी उसी इतिहास में है, वो ये कि भारत पर आक्रमण करने आया मोहम्मद बिन कासिम भारत से धन के साथ और क्या लूट कर ले गया था जानते हैं, सिंधु नरेश दाहिर की दो बेटियां... उसके बाद से आज तक प्रत्येक आक्रमणकारी यही करता रहा है.. गोरी, गजनवी, तैमूर सबने एक साथ हजारों लाखों बेटियों का अपहरण किया, प्रेम के लिए...? नहीं... बिल्कुल नही... उन्होंने अपहरण किया सिर्फ और सिर्फ बलात्कार व यौन दासी बनाने के लिए,
जबकि भारत ने किसी भी देश की बेटियों को नहीं लूटा, भारत की बेटियाँ सब से अधिक लूटी गई हैं, कासिम से ले कर गोरी तक, खिलजी से ले कर मुगलों तक, अंग्रेजों से ले राँची के उस रकीबुल हसन ने राष्ट्रीय निशानेबाज तारा सहदेव को, आफताब ने श्रद्धा को, सबने भारत की बेटियों को लूटा;
भारत का एक सामान्य पिता अपनी बेटी के प्रेम से नहीं डरता, वह डरता है अपनी बेटी के लूटे जाने से!
भागी हुई लड़कियों के समर्थन में खड़े होने वालों का गैंग अपने हजार विमर्शों में एक बार भी इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहता कि भागने के साल भर बाद ही उसका कथित प्रेमी अपने दोस्तों से उसके साथ दुष्कर्म क्यों करवाता है, उसे कोठे पर क्यों बेंच देता है या उसे अरब देशों में लड़की सप्लाई करने वालों के हाथ क्यों बेंच देता है, आश्चर्य हो रहा है न, पर सच्चाई यही है..!!
देश के हर रेडलाइट एरिया में सड़ रही प्रत्येक बेटी जिहादियों द्वारा प्रेम के नाम पर फँसा के यहां लाई जाती है,
उन बेटियों पर, उस "धूर्त प्रेम" पर कभी कोई चर्चा नहीं होती, उनके लिए कोई मानवाधिकार वादी, कोई स्त्री वादी विमर्श नहीं छेड़ता।
यही एक पिता की आज्ञा ना मान कर कसाई के साथ भागी हुई बेटियों का सच है,
प्रेम के नाम पर "पट" जाने वाली मासूम बेटियां नहीं जानती कि वे अपने व अपने पिता के लिए कैसा अथाह दुःख का सागर खरीद रही हैं जानता और समझता है तो बस उनका बेबस निरीह पिता।
साभार....
ेटी_मेरी
25/11/2023
पुरुष किसी भी रूप में हो पिता ,भाई,पति,प्रेमी,मित्र या पुत्र एक बात सभी में समान होती है और वो ये कि वो अपने साथ रह रही महिला को हमेशा ही सुरक्षित रखना चाहतें हैं शायद इसीलिए कुछ बातों में वो हमारा विरोध करतें हैं ।
ये भी सही है कि हमें उनका विरोध पसंद नही आता लेकिन कुछ लोगों को छोड़ दिया जाए तो बाकि विरोध के पीछे उनका प्रेम, स्नेह और फिक्र छुपा होता है ।
आप सभी अपने परिवार के प्रति बहुत समर्पित रहतें हैं बहुत मेहनत करतें हैं ।
आप सभी पुरुषों को मेरा नमन 🙏🏼
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई 💐💐💐💐💐💐💐💐
आज की रचना हर एक पुरुष हर एक सम्मानित पिता को समर्पित है नमन है आप सभी को जो पूरी जिंदगी बड़े धैर्य पूर्वक अपना परिवार सम्भालते हैं 🙏🏻
पुरूष होना भी आसान नही होता.......................................
पुरुष का पुरुष होना भी ,
आसान नही होता ,
हालात चाहे कुछ भी हो,
हर हाल में खुद को संभाले रखना ,
आसान नही होता ,
दर्द उसे भी होता है,
तकलीफ उसे भी होती है,
आँख उसकी भी भर आती है ,
फुट कर वो भी रोना चाहता है,
लेकिन आँसू बहाना ,
पुरुषार्थ के दायरे में नही आता ,
पुरुष का पुरुष होना भी ,
आसान नही होता है,
माँ बहन और बेटी ,
दोस्त प्रेमिका और पत्नी ,
इन सब में इनकी दुनियाँ ,
उलझ सी जाती है,
इनकी खुशियों की खातिर ,
हर सुविधा जुटाई जाती है,
चले सुचारू घर गृहस्थी ,
बस इसी में लगे ये रहते हैं ,
अपनी जरूरत का इन्हे ,
है तनिक भी ख्याल नही आता
पुरुष का ...
दो सौ का टी शर्ट खरीदने से ,
इंकार करने वाला पिता,
बच्चो का दो लाख का फिस ,
हँसते - हँसते भर आता है,
पुरी जिंदगी की जोड़ -तोड़ कर ,
की गई जमा पूंजी एक पति ,
अपनी पत्नी की बीमारी में ,
यूँ ही खर्च कर आता है,
और फिर भी अगर कोई ,
गलती से गलती हो जाए तो ,
पुरे समाज की तरफ से ,
कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है,
गलती उसकी है या नही ,
इससे फर्क नही पड़ता ,
समाज की तरफ से इल्ज़ाम ,
उसके सर मढ़ दिया जाता है,
पुरूष का .....।
19/11/2023
Happy chhat puja💐💐💐💐💐💐❤️💕
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Vikrant Khand
Lucknow
15/09/2023