Rohit sir m
Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Rohit sir m, Madhepura.
आज का अनुभव👇
"कहा भी गया है—
'चालबाज़ की चल सकी, यहाँ न कोई चाल।
आज उठाकर ले चला, चालबाज़ को काल।।'
आज यह पंक्तियाँ फिर स्मरण हो आईं।
जो दूसरों को छलकर स्वयं को विजेता समझते हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि समय और काल से बड़ा कोई चालबाज़ नहीं। जिस दिन काल बुलावा देगा, उस दिन न छल काम आएगा, न शक्ति, न धन और न ही कोई सहारा। अंततः हर व्यक्ति को अपने कर्मों का ही सामना करना पड़ता है।"
आज का अनुभव
"दो वक्त की रोटी यदि चापलूसी करने से ही मिल जाए, तो फिर आदमी दूसरा काम क्यों करे?"
आज का अनुभव👇
"अतीत की चोटों को मन में सहेजकर रखना ही वह सबसे बड़ा कारण है, जो आपको बार-बार स्वयं से और अपनों से दूर ले जाता है। जबकि जीवन का सत्य यह है कि परिस्थितियाँ हर क्षण बदल रही हैं। यदि समय बदल सकता है, तो इंसान और रिश्ते भी बदल सकते हैं—बशर्ते हम अतीत की कैद से बाहर निकलकर वर्तमान को देखने का साहस करें।"
बीता हुआ कल कभी लौटकर नहीं आता, लेकिन उसकी चोटें तब तक वर्तमान को घायल करती रहती हैं, जब तक हम उन्हें अपने मन में जीवित रखते हैं। विडंबना यह है कि हम समय को आगे बढ़ने देते हैं, पर अपने मन को अतीत की किसी एक घटना से बाँधकर रख देते हैं।
जीवन का नियम परिवर्तन है। समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, लोग बदलते हैं और हमारी समझ भी बदलती है। लेकिन जो व्यक्ति पुराने घावों को अपनी पहचान बना लेता है, वह हर नए संबंध, हर नए अवसर और हर नए व्यवहार को भी पुराने दर्द की दृष्टि से देखने लगता है। परिणामस्वरूप वह धीरे-धीरे दूसरों से ही नहीं, स्वयं से भी दूर होता चला जाता है।
क्षमा का अर्थ किसी की गलती को सही ठहराना नहीं, बल्कि स्वयं को उस पीड़ा की कैद से मुक्त करना है। अतीत से सीख लेना बुद्धिमानी है, लेकिन उसे ढोते रहना अपने वर्तमान और भविष्य—दोनों के साथ अन्याय है।
जब हम हर क्षण को नई दृष्टि से देखना सीख जाते हैं, तभी रिश्तों में फिर से विश्वास जन्म लेता है, मन में शांति लौटती है और जीवन अपनी सहजता प्राप्त करता है।
**याद रखिए—अतीत को पकड़कर रखने से घाव नहीं भरते, वे केवल गहरे होते जाते हैं। उन्हें छोड़ देने का साहस ही नए जीवन की शुरुआत है।**
आज का अनुभव👇
**"अगर आपकी जीवनशैली किसी व्यक्ति या समाज की स्थापित जीवनशैली, मान्यताओं या स्वार्थों से टकराती है, तो यह संभव है कि वे आपको सहजता से स्वीकार न करें। क्योंकि लोग अक्सर उसी को स्वीकार करते हैं जो उनकी सोच, आदतों और सुविधाओं के अनुकूल हो।"**
यह अस्वीकृति हमेशा इस बात का प्रमाण नहीं होती कि आप गलत हैं या वे गलत हैं। कई बार यह केवल दृष्टिकोण, मूल्यों और जीवन जीने के तरीके का अंतर होता है। इतिहास में अनेक ऐसे लोग हुए हैं जिन्हें अपने समय में विरोध झेलना पड़ा, क्योंकि उनका जीवन और विचार प्रचलित धारणाओं से अलग थे।
इसलिए यदि आपका मार्ग सत्य, विवेक, करुणा और ईमानदारी पर आधारित है, तो केवल स्वीकार किए जाने के लिए अपने मूल्यों से समझौता करना आवश्यक नहीं है। साथ ही, दूसरों के दृष्टिकोण को समझने और संवाद बनाए रखने का प्रयास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आज का अनुभव👇
मैं दुनिया की सारी चतुराई समझता हूँ लेकिन मैं चतुराई नहीं दिखा रहा हूं इसका मतलब ये नहीं कि मैं गलत और कमजोर हूं ।
**मैं दुनिया की सारी चतुराइयों से अनजान नहीं हूँ।**
मैं उन्हें समझता हूँ, पहचानता भी हूँ।
लेकिन हर बात का जवाब चतुराई से देना मैंने नहीं चुना।
मेरी शालीनता को मेरी कमजोरी और मेरे धैर्य को मेरी हार मत समझिए।
चतुर होना और चरित्रवान होना दो अलग बातें हैं।
मैं गलत इसलिए नहीं हूँ कि मैं छल नहीं करता,
और मैं कमजोर इसलिए नहीं हूँ कि मैं हर समय अपनी ताकत का प्रदर्शन नहीं करता।
**सच्ची शक्ति वही है जो सामर्थ्य होते हुए भी संयम बनाए रखे।**
आज का अनुभव👇
तुम लाख पढ़ लिख कर डिग्रियां हासिल कर लो
लेकिन एक जाहिल औरत की politics से कभी जीत नहीं सकते
दूसरे शब्दों में
**"तुम लाख पढ़-लिखकर डिग्रियाँ हासिल कर लो, लेकिन जब कोई व्यक्ति अज्ञान, हठ और चालाकी की राजनीति पर उतर आए, तो केवल शिक्षा से उसे हराना आसान नहीं होता। वहाँ बुद्धि से अधिक चरित्र और विवेक की परीक्षा होती है।"**
आज का अनुभव👇
**"धूर्त लोगों का साम्राज्य किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि धूर्त लोगों के संगठित गिरोह से चलता है। जब स्वार्थ, छल और मौन समर्थन एक साथ आ जाते हैं, तब अन्याय व्यवस्था का रूप ले लेता है। इसलिए किसी भी समाज को बदलने के लिए केवल एक धूर्त व्यक्ति का विरोध पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पूरी मानसिकता और तंत्र को पहचानना आवश्यक है जो उसे शक्ति देता है।"**
आज का अनुभव👇
**"जिस घर में दस लोग रहते हों और दसों की मानसिकता एक जैसी हो, वहाँ यदि किसी एक व्यक्ति द्वारा भी किसी के साथ गलत व्यवहार किया जाता है, तो उसे केवल उस एक व्यक्ति का व्यवहार नहीं माना जा सकता। वह पूरे वातावरण और सामूहिक सोच का परिणाम होता है। इसलिए ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं कि गलती एक की नहीं, बल्कि उस सोच की है जिसे सभी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वीकार और समर्थन देते हैं।"**
आज का अनुभव👇
👉जिस घर में स्त्री की मानसिकता बिगड़ी हुई और गिरी हुई हो , उस घर को पुरुष संभाल लेगा , लेकिन जिस घर में पुरुष की मानसिकता स्री से ज्यादा गिरी हुई हो उस में नरक जैसी यातनाएं हमेशा मिलती रहती है ।
👉जिस घर में स्त्री की मानसिकता विकृत हो, वहाँ भी परिवार को संभालने की कुछ संभावनाएँ बची रह सकती हैं यदि अन्य सदस्य विवेक और संवेदनशीलता से काम लें। परंतु जिस घर में पुरुष की मानसिकता ही अहंकार, अन्याय, असंवेदनशीलता और जिम्मेदारी से पलायन से भरी हो, वहाँ पूरे परिवार का वातावरण विषाक्त हो जाता है।
क्योंकि परिवार में पुरुष अक्सर निर्णय लेने, सुरक्षा देने और दिशा निर्धारित करने की भूमिका में होता है। जब वही व्यक्ति अपने अधिकार का दुरुपयोग करने लगे, भावनाओं का सम्मान न करे, संवाद के स्थान पर भय और दबाव का सहारा ले, तब घर धीरे-धीरे प्रेम का स्थान खोकर संघर्ष और पीड़ा का केंद्र बन जाता है।
वास्तव में समस्या स्त्री या पुरुष होने की नहीं, बल्कि मानसिकता की है। जिस घर में किसी भी व्यक्ति की चेतना गिर जाती है, वहाँ दुख बढ़ता है। और जिस घर में स्त्री और पुरुष दोनों ही आत्मावलोकन, सम्मान, करुणा और जिम्मेदारी को महत्व देते हैं, वहाँ सीमित साधनों में भी शांति और सुख का वातावरण बन सकता है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Address
Madhepura
852128