Journey With Angel's
Rudra Abhi Singh Reiki Grandmaster & Diploma in Master Angelology. Alternative Occult Science, Train Rudra Abhi Singh Founder of DevShakti Healing Hub
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19/02/2026
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Angel Blessings part 1 Angel Blessings part 1Learn Angel Blessings Course register now www.rehas.inWith Reiki Grandmaster & Energy Healing Expert Rudra Aabhi Singh 9517913159 ...
13/02/2026
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Mystical Connection of Hug & Chakra Energy Mystical Connection of Hug & Chakra Energyआलिंगन कितने तरह के होते हैं?रुद्र अभी सिंह (9517913159, 9517973153)Website - www.rehas.inContact with us :- ...
12/02/2026
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Mahashivratri Significance Mahashivratri Significance part 1With Rudra Aabhi Singh 9517913159Contact us : -369 -369Website - Www.rehas.in ...
16/12/2025
रिहास (REHAS): ऑल इन वन - हीलिंग और ट्रेनिंग का अद्वितीय संगम
क्या आप अपने जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने, पुरानी तकलीफों से मुक्ति पाने और नई ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तैयार हैं?
"राहस (REHAS). ऑल इन वन" आपके लिए वह विशेष प्रोग्राम है जो हीलिंग और ट्रेनिंग के उद्देश्यों को एक साथ पूरा करता है। यह सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि स्व-खोज, सशक्तिकरण और समग्र विकास की एक यात्रा है।
🌱 हमारा उद्देश्य: संपूर्ण कल्याण और क्षमता विकास
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हम अक्सर अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। 'राहस' का जन्म इसी आवश्यकता को समझते हुए हुआ है। हमारा प्रोग्राम दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
1. संपूर्ण हीलिंग (Healing):
हमारा फोकस सिर्फ लक्षणों को दबाने पर नहीं, बल्कि आपकी मूल समस्याओं को जड़ से खत्म करने पर है।
मानसिक शांति: तनाव, चिंता और नकारात्मक विचारों से मुक्ति के लिए विशेष तकनीकें।
शारीरिक कायाकल्प: पुरानी दर्द, ऊर्जा की कमी और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के लिए प्राकृतिक और प्रभावी उपाय।
भावनात्मक संतुलन: दबी हुई भावनाओं को पहचानना और उन्हें स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना।
2. उद्देश्यपूर्ण ट्रेनिंग (Training Purpose):
हम आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और मानसिकता से लैस करते हैं।
व्यक्तिगत विकास: आत्मविश्वास बढ़ाना, बेहतर निर्णय लेना, और अपनी वास्तविक क्षमता को पहचानना।
लक्ष्य निर्धारण: स्पष्ट, मापने योग्य और प्राप्त करने योग्य लक्ष्यों को निर्धारित करने की कला।
सकारात्मक दृष्टिकोण: हर चुनौती को अवसर में बदलने की शक्ति और दृढ़ संकल्प।
📣 जिज्ञासु जनों का आह्वान!
हम उन सभी जागरूक और जिज्ञासु व्यक्तियों को आमंत्रित करते हैं जो अब सिर्फ समस्याओं के साथ जीना नहीं चाहते, बल्कि एक स्वस्थ, खुशहाल और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।
चाहे आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाना चाहते हों, करियर में नई ऊँचाइयों को छूना चाहते हों, या अपने अंदर की छिपी हुई शक्ति को जागृत करना चाहते हों—'रिहास (REHAS). ऑल इन वन' आपको सही दिशा और उपकरण प्रदान करेगा।
यह आपके जीवन का वह टर्निंग पॉइंट हो सकता है जिसका आप इंतजार कर रहे थे।
अब और इंतजार न करें। अपनी हीलिंग और ट्रेनिंग की यात्रा आज ही शुरू करें!
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03/12/2025
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Free Healing Sessions Part - 2 Free Healing Sessions Part - 2Contact us :- Rudra Aabhi Singh 9517973153 8102808185
02/11/2025
*“नादरूपिणीं तां ध्यानयेत्तु करणे वासिनीं।*
*पिशाचिनीं तु कर्णे तिष्ठामि इति भावयेत्॥”*
यह श्लोक श्री कर्णपिशाचिनी साधना का अत्यंत गूढ़ और रहस्यमय बीज है —
जो *“नादरूपिणी देवी”* की उपासना का मार्ग दिखाता है।
🌼 पद विच्छेद और उनके अर्थ
*नादरूपिणीम् ताम् ध्यानयेत्* — उस देवी का ध्यान करे जो नाद (आन्तरिक ध्वनि, ओंकार का सूक्ष्म रूप) में स्थित है।
*करणे वासिनीम्* — जो कर्ण (श्रवणेंद्रिय) में निवास करती है।
*पिशाचिनीं तु कर्णे तिष्ठामि इति भावयेत्* — यह भाव करे कि “वह पिशाचिनी देवी मेरे कानों में ही स्थित है।”
*भावार्थ...!*
यह मंत्र साधक को यह स्मरण कराता है कि कर्णपिशाचिनी कोई बाहरी भूत नहीं,
बल्कि हमारे भीतर स्थित श्रवण चेतना की देवी है —
जो नाद, शब्द, और आन्तरिक ध्वनि के माध्यम से अंतरात्मा की वाणी सुनाती है।
साधक जब गहन ध्यान करता है, तो बाह्य शोर लुप्त होकर नाद (आकाशतत्त्व की सूक्ष्म ध्वनि) का अनुभव होता है।
यही कर्णपिशाचिनी की उपस्थिति है — जब भीतर से उत्तर आने लगते हैं, जब बिना बोले भी “श्रवण” होने लगता है।
🔮 महिमा (महात्म्य)
1. नादयोग की अधिष्ठात्री — यह देवी नादब्रह्म की साक्षात् शक्ति है।
2. संकल्प सिद्धि — साधक के मन के संकल्प सीधे सूक्ष्म जगत तक पहुँचते हैं।
3. अंतर्ज्ञान की प्राप्ति — साधक को अदृश्य ज्ञान, संकेत, और दिशा भीतर से मिलने लगती है।
4. मंत्र-सिद्धि और वाणी-सिद्धि — जब यह शक्ति जागृत होती है, तो बोले हुए शब्द सिद्ध होने लगते हैं।
5. श्रवणयोग का परम फल — साधक बाहरी शब्दों से परे, ब्रह्मनाद का अनुभव करता है।
🌕 गूढ़ रहस्य
‘कर्णपिशाचिनी’ = कर्ण (श्रवणेंद्रिय) + पिशाचिनी (अदृश्य चेतना)।
जब साधक का मन स्थिर और निर्विचार होता है, तब वह “आंतरिक पिशाचिनी” — यानी स्व-चेतना का सूक्ष्म स्पंदन —
उसे ब्रह्मनाद सुनाती है।
यह नाद ही साक्षात् देवी है...
*“नादः स्वयं परं ब्रह्म”*
इस नाद के माध्यम से साधक का संपर्क सूक्ष्म जगत से होता है, और यही वाणी-सिद्धि या श्रवण-सिद्धि कहलाती है।
*फलस्वरूप*
यह श्लोक साधक को बाहरी भूत-पिशाच से नहीं,
बल्कि भीतर की दिव्य श्रवण-शक्ति (नादरूपिणी कर्णपिशाचिनी) से जोड़ता है।
जो इस नाद में लीन हो जाता है —
वह “शब्द-ब्रह्म” के पार जाकर “परब्रह्म” का अनुभव कर सकता है।
अगला लेख क्रमशः...
*Rudra Energy Healing Anusandhan Sansthan*
23/10/2025
*।। रुद्र ऊर्जा उपचार अनुसंधान संस्थान।।*
कई साधकों द्वारा एक सवाल बार - बार पूछा जा रहा था, आखिर कर्णपिशाचिनी कौन है?
क्या कर्णपिशाचिनी की साधना करनी चाहिए यदि लक्ष्य कैवल्य हो।
हमारा जबाव था नहीं! यदि आप कर्णपिशाचिनी को साधेंगे तो मुक्ति संभव नहीं होगी।
साधकों इस विषय पर हमने गहन चिंतन और अध्ययन किया।।
कर्णपिशाचिनी दो शब्दों से बना है।
कर्ण अर्थात् - कान
पिशाचिनी अर्थात् एक शक्ति ( रज़ और तम) का अधिष्ठात्री।
हम समझते थे कि यदि साधक रजोगुणी के साथ तमोगुणी हो गए तो मुक्ति से विलग हो जाएंगे।
फिर याद आया है, शाकिनी, डाकिनी ऐसी शक्तियां तो हमारे सप्त चक्रों की शक्तियां है।सप्त चक्र भेदन यात्रा से परम शांति और कैवल्य प्राप्ति होती है तो क्या पिशाचनी का केवल एक ही स्वरूप होगी जो डार्क ऊर्जा, तमस आदि का परिचय है।
तो रुद्रयामल तंत्र में हमने पाया कि... कर्णपिशाचिनी साधना एक गूढ़ तांत्रिक विद्या है जो बाहरी शक्ति नहीं ब्लकि हमारे अन्तःकरण के श्रवण शक्ति की जागरण करने के लिए की जाती है। तो ऐसी साधना करने वाले साधक को कोई हानि नहीं वो कैवल्य के अधिकारी है।
आइए जानते है विस्तार से...!
🔹 कर्ण पिशाचिनी का वास्तविक अर्थ
कर्ण (कान) + पिशाचिनी (गूढ़ चेतना या सूक्ष्म शक्ति)
👉 “कर्णपिशाचिनी” कोई बाहरी डरावनी आत्मा नहीं है।
यह एक आन्तरिक तांत्रिक शक्ति (Inner Auditory Deity) है, जो अन्तःश्रवण — अर्थात् अंदर से सुनने की क्षमता — को जाग्रत करती है।
जब साधक का मूलाधार से आज्ञा तक नाद-प्रवाह निर्मल हो जाता है, तब भीतर एक सूक्ष्म चेतना नादरूपिणी देवी के रूप में प्रकट होती है, जिसे तांत्रिक परम्परा में कर्णपिशाचिनी कहा गया है।
🔱 २. कर्णपिशाचिनी का स्वरूप
इन्हें गूढ़ वाणी की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है।
योगमार्ग में इन्हें “नाददेवी” या “श्रवण-योगिनी” भी कहते हैं।
तांत्रिक रूप में, यह साधक के कान में दिव्य वाणी फूंकती हैं — अर्थात भविष्य, संकेत, मार्गदर्शन या रहस्य का श्रवण कराती हैं।
३. शास्त्रीय उल्लेख
कर्णपिशाचिनी का उल्लेख मिलता है:
रुद्रयामल तंत्र
तंत्रसार, कौलज्ञाननिर्णय, और शाबर तंत्रों के कुछ भागों में।
इन ग्रंथों में इसे “गुप्त वाक् सिद्धि” की साधना कहा गया है।
साधना का उद्देश्य
अन्तःश्रवण (Inner Hearing) — भीतर की आवाज़ सुनना
सूक्ष्म मार्गदर्शन (Intuitive Messages)
वाक्-सिद्धि और नाद-जागरण
दैवी संवाद और चेतन निर्देश प्राप्त करना
---
🔱 ५. साधना की स्थिति (Eligibility)
यह साधना केवल उन्हीं साधकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जो—
ब्रह्मचर्य, संयम, और शुद्ध आहार का पालन करते हैं
ध्यान या मंत्रजप में स्थिर हो चुके हों
भीतरी नाद या “ओंकार” का सूक्ष्म श्रवण अनुभव कर चुके हों
🔹 तांत्रिक दृष्टि से
तंत्र ग्रंथों में “कर्ण पिशाचिनी विद्या” एक गुप्त तंत्र-साधना मानी गई है, जो साधक के भीतर ‘श्रवण-चेतना’ को विकसित करती है ताकि वह सूक्ष्म जगत की आवाजें, मार्गदर्शन या संदेश सुन सके।
परंतु यहाँ “पिशाचिनी” का अर्थ भूत या प्रेत नहीं, बल्कि “सूक्ष्म शक्ति (subtle intelligence)” है — जो केवल अत्यंत संयमी और मनोनिग्रहवान साधक के भीतर जागती है।
🔹 प्रतीकात्मक अर्थ
“कर्ण पिशाचिनी” = मन की गहराइयों में छिपी वह चेतना जो सुनती नहीं, बल्कि जानती है।
यह शक्ति साधक को “भीतर की वाणी” (Inner Voice) सुनना सिखाती है।
यही “दैवी मार्गदर्शन” (Divine Guidance) की शुरुआत है।
🔹 योगिक (नाद-योग) दृष्टिकोण से
कर्ण पिशाचिनी अनुभव तब उत्पन्न होता है जब साधक का मन बाहरी ध्वनियों से मुक्त होकर भीतर के नाद से जुड़ता है — जिसे “अनाहत नाद” या “नाद-ब्रह्म” कहा गया है।
यह अवस्था अंतरश्रवण चेतना (Inner Auditory Awareness) की जागृति है —
जहाँ कानों से नहीं, बल्कि चेतना के माध्यम से सुनना आरंभ होता है।
क्रमशः अगला लेख....
Rudra Aabhi Singh
13/10/2025
*Rudra Energy Healing Anusandhan Sansthan Intoducing to you a New concept The Healing Art of Ta**ra Sadhna*
यह एक हिमालयन साधकों द्वारा दिया गया गुरुओं से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर यह साधना पद्दति है।
*यह साधना पांच चरणों में होती है, यदि आप प्रथम साधना का अनुभूति कर अगले चरण में प्रवेश ले सकते हैं।*
आइए जानते हैं संक्षिप्त में परिचय क्या है यह साधना? क्यों करनी चाहये? लाभ क्या - क्या होंगे इत्यादि...!
*हिमालयन तंत्र साधना* यह अनन्त साधना, ऋषि-मुनियों की तपश्चर्या और अदृश्य ऊर्जाओं का दिव्य केन्द्र है। यहाँ की तंत्र साधनाएँ साधक को गूढ़ रहस्यों की ओर ले जाती हैं, जहाँ साध्य अर्थात् परमात्मा और साधना अर्थात् तंत्र (क्रिया) का अद्भुत मिलन होता है।
🔮 साधना का मूल तत्व
हिमालयन तंत्र साधना का उद्देश्य केवल बाहरी सफलता नहीं है, बल्कि अन्तर्मन के परिवर्तन और ऊर्जा के जागरण से साधक को उसकी उच्चतम अवस्था तक पहुँचाना है।
यह साधना Transformative Practice है – प्रतिदिन आपके जीवन में सूक्ष्म और गहन परिवर्तन लाती है।
साधक के भीतर सोई हुई चेतन शक्तियों को सक्रिय करती है।
आपको साध्य (परमात्मा) से जोड़कर जीवन के रहस्यों को स्पष्ट करती है।
🕉️ दिव्य प्रतीक और ऊर्जा का विज्ञान
इस साधना में कुछ विशेष दिव्य प्रतीक चिह्न प्रयोग किए जाते हैं। ये प्रतीक:
आपके आभामंडल को शुद्ध करते हैं।
आपकी ऊर्जा को ऊँचे स्तर तक पहुँचाते हैं।
नकारात्मक प्रभावों से बचाकर साधना मार्ग में स्थिरता प्रदान करते हैं।
🌌 महामाया का रहस्य
साधना का अन्तिम और सबसे गूढ़ पड़ाव है –
महामाया का प्राचीन गुप्त मंत्र (Secret Ancient Mantra)
यह मंत्र साधक के भीतर अलौकिक शक्ति का जागरण करता है।
साधना को सिद्धि की ओर ले जाने वाला द्वार है।
इसके प्रयोग से साधक जीवन के उच्चतम आध्यात्मिक स्तर तक पहुँच सकता है।
🪔 साधना का प्रथम पड़ाव
स्मरण रहे, यह साधना केवल अभ्यास नहीं, बल्कि एक यात्रा है।
यह तंत्र साधक के लिए प्रथम पड़ाव है –
जहाँ से साधना की राह आरम्भ होती है और साधक धीरे-धीरे अमरत्व, मुक्ति और परमात्मा से एकत्व की ओर अग्रसर होता है।
हिमालयन तंत्र साधना केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन के रहस्यमय द्वार खोलने वाली कुंजी है।
यह साधक को आत्मबोध, ऊर्जा जागरण और दिव्य शक्ति के अनुभव की ओर ले जाती है।
जो इसे अपनाता है, वह जीवन के हर क्षेत्र में – सफलता, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्कर्ष प्राप्त करता है।
*(यह साधना यात्रा में आरोग्यता, धन समृद्धि एवं कुशल हीलर बनने हेतु बनाया गया है।)*
*नोट :- यह साधना individual कराया जाएगा One to One, समूह में वही जानकारी दी जाएगी जो सबों के लिए होगा।*
*Rudra Aabhi Singh 9517973153, 9517913159, 8102808185*
*Thanks Regard Rudra Energy Healing Anusandhan Sansthan*
08/10/2025
*Festival Month October*
10 Oct - Karwa Chauth
13 Oct - Ahoi Ashtami
18 Oct - Dhanteras
*19 Oct - narak Chaturdasi / kali Chaudas*
20 Oct - Diwali (Laxmi Puja)
22 Oct - Govardhan Puja
23 Oct - Bhai Dooj
25 - 28 Oct - Chhath Puja
ॐ नमो नारायण
साथियों हर वर्ष के भाँति इस वर्ष भी - दिवाली धन पोटली और अभिमंत्रित अष्टगंध और मोहिनी अष्टगंध तैयार कर काली चौदस की रात्रि को तैयार की जाएगी।
साथ ही काली चौदस की रात्रि को पंच दशी यंत्र लेखन कर दिवाली के दिन अभिमंत्रित की जाएगी।
*अभिमंत्रित हत्थाजोडी*
*सियारसिंगी*
*अष्टगंध*
*अभिमंत्रित मोती शंख*
*धन पोटली*
*पारद श्री यंत्र*
*यन्त्रराज पंचदशी यन्त्र*
अतः जिन साधकों को कुछ ऑर्डर करना है तो कृपया 15 Oct तक अपना ऑर्डर कन्फर्म कराये।
* इस दिवाली स्पेशल मैं धन - समृद्धि हेतु मनोकामना हेतु एक विशेष प्रकार की साधना कार्यशाला करायी जायेगी जिसमें कई सारे विधाओं का समावेश होगा।।
* साधना उद्देश्य - फलस्वरूप धन प्राप्ति, धन का आकर्षण, समृद्धि पुष्टिवर्धन हेतु भिन्न भिन्न उपाय, मंत्र, यंत्र एवं तंत्र साधना....
* कृष्णकाली साधक के लिए सर्वोतम समय है, जो साधक है वो इन समयों का भरपूर लाभ प्राप्त कर सकते है।
* जो साधक कृष्णकाली साधना करना चाहते हैं वो अवश्य करें...
यदि यह समय गुजर जाएगा तो एक वर्ष तक इंतजार करना होगा ऐसे शुभ मुहूर्त का।।।
दोस्तों साथियों आप सभी जानते हैं कि आने वाला समय सिद्धि की रात्रि है महा रात्रि है।
अतः लाभ जरूर उठायें...
आपकी सेवा में तत्पर....
*Rudra Aabhi Singh 9517913159*
https://chat.whatsapp.com/IkMAw9AthWQ9xlcPeHQSyK?mode=ems_copy_t
05/10/2025
Rudra Energy Healing Anusandhan Sansthan is inviting you to a scheduled Zoom meeting.
*Topic: Full Moon Mantra Meditation live Class*
*Time: Oct 6, 2025 09:00 PM Sharp* Mumbai, Kolkata, New Delhi
Join Zoom Meeting
https://us05web.zoom.us/j/4423020946?pwd=dAyMR7Q6W5QaMNUJzaz7dypeGNshPl.1&omn=89264679382
Meeting ID: 442 302 0946
Passcode: Rehas
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