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Complete Health and Wellness Solutions

30/10/2025
30/10/2025

*घूमना क्यों ज़रूरी है , निम्नलिखित को पढ़ें लिपिड प्रोफाइल क्या है ?*

एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने लिपिड प्रोफाइल को बहुत ही बेहतरीन ढंग से समझाया और अनोखे तरीके से समझाने वाली एक खूबसूरत कहानी साझा की।

`कल्पना कीजिए कि हमारा शरीर एक छोटा-सा कस्बा है। इस कस्बे में सबसे बड़े उपद्रवी हैं -` *कोलेस्ट्रॉल।*

`इनके कुछ साथी भी हैं। इनका मुख्य अपराध में भागीदार है -` *ट्राइग्लिसराइड।*

इनका काम है - गलियों में घूमते रहना, अफरा-तफरी मचाना और रास्तों को ब्लॉक करना।

*दिल* इस कस्बे का सिटी सेंटर है। सारी सड़कें दिल की ओर जाती हैं।
जब ये उपद्रवी बढ़ने लगते हैं तो आप समझ ही सकते हैं क्या होता है। ये दिल के काम में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं।

लेकिन हमारे शरीर-कस्बे के पास एक पुलिस बल भी तैनात है -
*HDL*
वो अच्छा पुलिसवाला इन उपद्रवियों को पकड़कर जेल *(लिवर)* में डाल देता है।
फिर लिवर इनको शरीर से बाहर निकाल देता है – हमारे ड्रेनेज सिस्टम के ज़रिए।

लेकिन एक बुरा पुलिसवाला भी है - *LDL* जो सत्ता का भूखा है।
LDL इन उपद्रवियों को जेल से निकालकर फिर से सड़कों पर छोड़ देता है।
जब अच्छा पुलिसवाला *HDL* कम हो जाता है तो पूरा कस्बा अस्त-व्यस्त हो जाता है।

ऐसे कस्बे में कौन रहना चाहेगा?
क्या आप इन उपद्रवियों को कम करना और अच्छे पुलिसवालों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं?

*चलना* शुरू कीजिए!
हर कदम के साथ *HDL* बढ़ेगा, और *कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड* और *LDL* जैसे उपद्रवी कम होंगे।
आपका शरीर (कस्बा) फिर से जीवंत हो उठेगा।

आपका दिल – सिटी सेंटर – उपद्रवियों की ब्लॉकेज *(हार्ट ब्लॉक)* से सुरक्षित रहेगा।
और जब दिल स्वस्थ होगा तो आप भी स्वस्थ रहेंगे।
इसलिए जब भी मौका मिले – चलना शुरू कीजिए!
*स्वस्थ रहें...* और
*अच्छे स्वास्थ्य* की कामना
*यह लेख HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ाने और LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) कम करने का बेहतरीन तरीका बताता है यानी चलना।*

हर कदम HDL को बढ़ाता है।
इसलिए – *चलो, चलो और चलते रहो।*

`यह चीजें कम करें:-`
1. नमक
2. चीनी
3. ब्लीच किया हुआ मैदा
4. डेयरी उत्पाद
5. प्रोसेस्ड फूड्स

*यह सब रोज खाएं:-*
1. सब्जियां
2. दालें
3. बीन्स
4. मेवे
5. कोल्ड प्रेस्ड तेल
6. फल

*तीन चीजें जिन्हें भूलने की कोशिश करें:*
1. अपनी उम्र
2. अपना अतीत
3. अपनी शिकायतें

*चार जरूरी चीजें जिन्हें अपनाएं:*
1. अपना परिवार
2. अपने दोस्त
3. सकारात्मक सोच
4. स्वच्छ और स्वागत भरा घर

*तीन मूलभूत बातें जिन्हें अपनाना चाहिए:*
1. हमेशा मुस्कराएं
2. अपनी गति से नियमित शारीरिक गतिविधि करें
3. अपने वजन की जांच और नियंत्रण करें

*छः आवश्यक जीवन-शैली जो आपको अपनानी चाहिए:*
1. पानी पीने के लिए तब तक इंतज़ार न करें जब तक आप प्यासे न हों।
2. आराम करने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप थके नहीं।
3. हेल्थ चेकअप के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप बीमार न हों।
4. चमत्कारों की प्रतीक्षा न करें, ईश्वर पर भरोसा रखें।
5. कभी भी अपने आप पर से विश्वास न खोएं।
6. सकारात्मक रहें और हमेशा एक बेहतर कल की उम्मीद रखें।

*यदि आपके दोस्त हैं इस आयु सीमा में (45-80 वर्ष)* *कृपया उन्हें यह जरूर भेजें।*
🌹🙏🌹

30/09/2025

इन नौ औषधियों में वास है माता नवदुर्गा का
औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।
महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।
सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।
बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।
जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।
चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५

मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।

इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।

शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।

१ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़👉 नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।

पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान
हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता)- शिवा यानी कल्याण करने वाली।

२ द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी👉 ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वालीऔर स्वर को मधुर करने वाली है।

इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी कीआराधना करना चाहिए।

३ तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर👉 नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।

यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।

४ चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा👉 नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं।

इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिकरूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ितव्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डादेवी की आराधना करना चाहिए।

५ पंचम स्कंदमाता यानि अलसी👉 नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।

"अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।"
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।

६ षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया👉 नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है।
इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए।

७ सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन👉 दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है।

यह नागदौन औषधि केरूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।

८ अष्टम महागौरी यानि तुलसी👉 नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र।
ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।

"तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।"
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।

९ नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी👉 नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी याशतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है।

सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए। इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सर्व मंगलम मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्रयम्ब्के गौरी नारायणी नमो स्तुते।।

05/09/2025

*ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परंपरा क्यों ?*
रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र निषिद्ध है।
*ब्रह्म* का अर्थ परम तत्व या परमात्मा।
*मुहूर्त* यानी अनुकूल समय।
*रात्रि का अंतिम प्रहर* अर्थात प्रात: 4 से 5.30 बजे का समय *ब्रह्म मुहूर्त* कहा गया है।
*“ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी”*
(ब्रह्ममुहूर्त की निद्रा पुण्य का नाश करने वाली होती है।)
सिख धर्म में इस समय के लिए बेहद सुन्दर नाम दिया गया है *"अमृत वेला"*, जिसके द्वारा इस समय का महत्व स्वयं ही साबित हो जाता है।
ईश्वर भक्ति के लिए यह महत्व स्वयं ही साबित हो जाता है।
भक्ति के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है।
इस समय उठने से मनुष्य को सौंदर्य, लक्ष्मी, बुद्धि, स्वास्थ्य आदि की प्राप्ति होती है। उसका मन शांत और तन पवित्र होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठना हमारे जीवन के लिए बहुत लाभकारी है। इससे हमारा शरीर स्वस्थ होता है और दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है। स्वस्थ रहने और सफल होने का यह ऐसा फार्मूला है जिसमें खर्च कुछ नहीं होता। केवल आलस्य छोड़ने की जरूरत है।
प्रात: काल उठने के पश्चात *हस्त-दर्शन* का भी शास्त्रीय विधान है ।
*कराग्रे वसति लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती*
*कर मूले स्थितों ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्*
भगवान के स्मरण के बाद दही, घी, आईना, सफेद सरसों, बैल, फूलमाला के दर्शन भी इस काल में बहुत पुण्य देते हैं।
*पौराणिक महत्व.....*
वाल्मीकि रामायण के मुताबिक माता सीता को ढूंढते हुए श्रीहनुमान ब्रह्ममुहूर्त में ही अशोक वाटिका पहुंचे। जहां उन्होंने वेद व यज्ञ के ज्ञाताओं के मंत्र उच्चारण की आवाज सुनी।
शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है--
*वर्णं कीर्तिं मतिं लक्ष्मीं स्वास्थ्यमायुश्च विदन्ति*।
*ब्राह्मे मुहूर्ते संजाग्रच्छि वा पंकज यथा*
अर्थात......
ब्रह्म मुहूर्त में उठने से व्यक्ति को सुंदरता, लक्ष्मी, बुद्धि, स्वास्थ्य, आयु आदि की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से शरीर कमल की तरह सुंदर हो जाता हे।
*ब्रह्म मुहूर्त और प्रकृति :--*
ब्रह्म मुहूर्त और प्रकृति का गहरा नाता है। इस समय में पशु-पक्षी जाग जाते हैं। उनका मधुर कलरव शुरू हो जाता है। कमल का फूल भी खिल उठता है। मुर्गे बांग देने लगते हैं। एक तरह से प्रकृति भी ब्रह्म मुहूर्त में चैतन्य हो जाती है। यह प्रतीक है उठने, जागने का। प्रकृति हमें संदेश देती है ब्रह्म मुहूर्त में उठने के लिए।
आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से शरीर में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि इस समय बहने वाली वायु को अमृततुल्य कहा गया है।
इसके अलावा यह समय अध्ययन के लिए भी सर्वोत्तम बताया गया है क्योंकि रात को आराम करने के बाद सुबह जब हम उठते हैं तो शरीर तथा मस्तिष्क में भी स्फूर्ति व ताजगी बनी रहती है।
प्रमुख मंदिरों के पट भी ब्रह्म मुहूर्त में खोल दिए जाते हैं तथा भगवान का श्रृंगार व पूजन भी ब्रह्म मुहूर्त में किए जाने का विधान है।
ब्रह्ममुहूर्त के धार्मिक, पौराणिक व व्यावहारिक पहलुओं और लाभ को जानकर हर रोज इस शुभ घड़ी में जागना शुरू करें तो बेहतर नतीजे मिलेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाला व्यक्ति सफल, सुखी और समृद्ध होता है, क्यों?
क्योंकि जल्दी उठने से दिनभर के कार्यों और योजनाओं को बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इसलिए न केवल जीवन सफल होता है। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने वाला हर व्यक्ति सुखी और समृद्ध हो सकता है। कारण वह जो काम करता है उसमें उसकी प्रगति होती है। विद्यार्थी परीक्षा में सफल रहता है। जॉब (नौकरी) करने वाले से बॉस खुश रहता है। बिजनेसमैन अच्छी कमाई कर सकता है। बीमार आदमी की आय तो प्रभावित होती ही है, उल्टे खर्च बढऩे लगता है। सफलता उसी के कदम चूमती है जो समय का सदुपयोग करे और स्वस्थ रहे। अत: स्वस्थ और सफल रहना है तो ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
वेदों में भी ब्रह्म मुहूर्त में उठने का महत्व और उससे होने वाले लाभ का उल्लेख किया गया है।
*प्रातारत्नं प्रातरिष्वा दधाति तं चिकित्वा प्रतिगृह्यनिधत्तो*
*तेन प्रजां वर्धयमान आयू रायस्पोषेण सचेत सुवीर:* - ऋग्वेद-1/125/1
अर्थात......
सुबह सूर्य उदय होने से पहले उठने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसीलिए बुद्धिमान लोग इस समय को व्यर्थ नहीं गंवाते। सुबह जल्दी उठने वाला व्यक्ति स्वस्थ, सुखी, ताकतवाला और दीर्घायु होता है।
*यद्य सूर उदितोऽनागा मित्रोऽर्यमा। सुवाति सविता भग:॥*
-----सामवेद-35
अर्थात.......
व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले शौच व स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहिए। इस समय की शुद्ध व निर्मल हवा से स्वास्थ्य और संपत्ति की वृद्धि होती है।
*उद्यन्त्सूर्यं इव सुप्तानां द्विषतां वर्च आददे।*
--अथर्ववेद- 7/16/२
अर्थात........
सूरज उगने के बाद भी जो नहीं उठते या जागते उनका तेज खत्म हो जाता है।
*व्यावहारिक महत्व.....*
व्यावहारिक रूप से अच्छी सेहत, ताजगी और ऊर्जा पाने के लिए ब्रह्ममुहूर्त बेहतर समय है। क्योंकि रात की नींद के बाद पिछले दिन की शारीरिक और मानसिक थकान उतर जाने पर दिमाग शांत और स्थिर रहता है। वातावरण और हवा भी स्वच्छ होती है। ऐसे में देव उपासना, ध्यान, योग, पूजा तन, मन और बुद्धि को पुष्ट करते हैं।
*🌹मङ्गलमय सुप्रभात🌹*
*🙏डॉ. कौशल कालरा🙏

👆🏻👆🏻 किसी अन्य चिकित्सा ग्रुप में डॉ. कौशल कालरा जी की अच्छी पोस्ट थी इसलिए यहां शेयर की है मैने।🙏🏻🕉️🙏🏻

05/09/2025

सुबह की शुरुआत करनी है दमदार, तो खाइए ये देसी नाश्ता – जो बनाए आपको जबरदस्त और बीमारियों से फरार।
बांसी रोटी – यानी रात की ठंडी रोटी, जिसे लोग अक्सर बेकार समझते हैं… लेकिन गांव के बुजुर्ग इसे अमृत से कम नहीं मानते! अब सोचिए, जब इस रोटी को गर्म दूध में भिगोया जाए, ऊपर से डाला जाए चम्मचभर देसी घी और कुछ टुकड़ा शुद्ध गुड़ का – तो वो नाश्ता नहीं, ताकत का तूफान बन जाता है!

👉 बांसी रोटी – देती है पाचन को मजबूती और आंतों की सफाई।
👉 गर्म दूध – मांसपेशियों को ताकत और हड्डियों को मजबूती।
👉 देसी घी – नस-नस में ऊर्जा और शरीर को चिकनाई।
👉 गुड़ – खून साफ, हीमोग्लोबिन हाई और शरीर से ज़हर बाहर।

ये संयोजन पेट से लेकर पूरे शरीर का सिस्टम सेट कर देता है। रोज खाइए, तो न कमजोरी रहेगी, न कब्ज़, न थकान।
बल्कि शरीर बोलेगा – "आजा रे दुनिया, मैं तैयार हूं" 💪🔥

🌿 आयुर्वेदिक निष्कर्ष 🌿
बांसी रोटी, दूध, देसी घी और गुड़ का मेल सिर्फ नाश्ता नहीं बल्कि सम्पूर्ण औषधि है। यह पाचन को दुरुस्त, रक्त को शुद्ध और शरीर को ऊर्जावान बनाता है। आयुर्वेद मानता है कि ये संयोजन कमजोरी, थकान और कब्ज़ को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

19/08/2025

हाईवे पर किसी सस्ते ढाबे में खाना खाइये, menu में कम से कम 6 आइटम पनीर के होंगे। 5 स्टार होटल में जाइये, वेजीटेरियन सेक्शन में 60% डिशेज़ पनीर की होती है।
30 रु में 6 पनीर मोमोज मिलते हैं?
50 रु में पनीर पिज़्ज़ा?
100 रु में बटर पनीर ?
40 रु मे पनीर कुलचा?

आइये जानते है की पनीर का अर्थशास्त्र

70 रु में 1 लीटर अमूल का full क्रीम दूध आता है, जिसमे से करीब 200 ग्राम पनीर मिलता है। इस हिसाब से यदि 1किलो पनीर बनाना हो तो आपको 5 लीटर दूध की आवश्यकता पड़ेगी जिसकी कीमत 350 रु होगी। यानी अगर असली दूघ का पनीर बनाया जाए तो उसकी लागत कम से कम 350 रु तो होगी ही, फुटकर रूप में यदि ये मान लिया जाते कि दूध का फैक्ट्री मूल्य 50 रु प्रति लीटर भी हो तो भी 250 रु सिर्फ दूध की लागत होगी। अब यदि इसमें लेबर cost, गैस, ईंधन जोड़ लिया जाए तो ये लागत 60 रु पहुंच जायेगी। अब यदि इसमें सप्लाई chain, लॉजिस्टिक भी जोड़ लिया जाए तो ये लागत 63 रु पहुंच जाती है।

यानी कि कम से कम 315 रु का एक किलो पनीर अब यदि कोई दुकानदार इसे 10% प्रॉफिट पर भी बेचे जो कि इससे कहीं ज्यादा पर बेचता है तो ग्राहक को ये लागत कम से कम 345 से 350 रु प्रति किलो पड़नी चाहिए। अब यदि आप कोई पनीर 200 रु किलो या 250 रु किलो के भाव से खरीदते हैं तो क्या दुकानदार ने दानखाता खोल रखा है जो लागत से भी 25% कम पर आपको पनीर बेचेगा? असली पनीर की कीमत और मात्रा जाननी है तो घर पर पनीर बना कर देखिए अंदाज़ा हो जायेगा। फिर आता है एनालॉग पनीर ...यानी पनीर जैसा दिखने वाला और पनीर के टेक्सचर जैसा पदार्थ जिसके मूल इंग्रेडिएंट्स पाउडर का दूध, वनस्पति फैट, पाम आयल, अरारोट, स्टेबलाइजर और डेवलपिंग एजेंट्स होते हैं। अब चूंकि पाउडर मिल्क में फैट नही होता तो उसके लिए डालडा और पाम आयल मिलाया जाता है जिससे घनत्व बढ़ जाये। ये वही तेल हैं तो आर्टरी में जम जाते हैं ।

ये एनालॉग पनीर आपको बड़े बड़े 5 star होटल में भी मिलता है चाहे आप पनीर टिक्का खा रहे हों या पनीर दो प्याजा.. उससे भी निचली श्रेणी में आता है यूरिया, डिटर्जेंट और मैदे के घोल से बना पनीर.. यानी वो पनीर जिसे आप 30 रु के 6 मोमोज़ में स्वाद लेकर खाते है या फिर 50 रु में पनीर लोडेड पिज़्ज़ा बर्गर में खाते हैं। ये यूरिया सीधे आपकी किडनी और लीवर पर घात लगाता है साथ ही लंबे समय तक खाने पर जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है। भारत मे प्रति दिन दूध का उत्पादन 64 करोड़ लीटर होता है। इस सारे दूध को फाड़कर यदि पनीर बना दिया जाए तो करीब 1 करोड़ 20 लाख किलो पनीर बन सकता है। लेकिन प्रति दिन पनीर की खपत करीब करीब 15000 टन है। क्या ये संभब है कि 1 करोड़ 50 लाख किलो पनीर 64 करोड़ लीटर दूध से बन पाए?

बाजार में मिलने वाला 80% से भी ज्यादा पनीर नकली है।

इसने रोड साइड से लेकर 5 स्टार होटल भी नकली पनीर खिला रहे हैं। क्या वजह है कि पिछले 30 सालों मे लीवर और किडनी की बीमारी में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है?

कभी जाकर देखिए छोटी छोटी गलियों के भीतर उबलते हुए उन भगोनों को जिनमे यूरिया उबल रहा है। जो लोग उसे बना रहे हैं उनसे कहिये की अपने बने पनीर को खाकर दिखाएं।

अगली बार जब आप किसी होटल में पनीर की डिश आर्डर करें तो कहिएगा एक टुकड़ा कच्चा पनीर लाकर आपको दिखाएं।

शर्त लगा सकता हूँ कि वो हज़ार बहाने बनाएंगे। इसे मैं आज़मा कर देख चुका हूँ। एक रेस्टोरेन्ट वाले ने तो ये भी कह दिया कि आपको खाना है तो खाओ वरना जाओ..लेकिन हम सैंपल नही दिखाएंगे।

मिल्क प्रोडक्ट सबसे बड़े scam हैं आज की तारिख़ में दुर्भाग्य से सरकार भी कुछ नही कर पा रही। नकली प्रोडक्ट हर दिन पकड़े जाते हैं लेकिन हमारे कानून में उसके लिए कुछ जुर्माना या छोटी मोटी सज़ा होती है। उनसे होने वाली लाखों इनडाइरेक्ट मौतों का जिम्मेदार उन्हें नही माना जाता। सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग वरना इंसान कीड़े मकोड़ों की तरह मरेंगे ओर कीड़े मकोड़े लंबे जिएंगे।साभार

14/07/2025

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