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26/10/2025

प्रभु हम भी सरनागत 🙏🙏🙏

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Shivam Dubey
Krishnapriya
Bhakti Sagar

07/10/2025

🌺शेयर कीजिये सच से पर्दा हटाइये🌺

🌺एक तस्वीर ने मचाया पति पत्नी के बीच घमासान🌺

झारखंड में जिला पड़ता है गढ़वा जहां के एसपी महोदय का ट्रांसफर होता है किसी अन्य जिले में, वहां के पुलिस लाइन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है संगीत संध्या के नाम से अन्य गायकी के कलाकारों के प्रदर्शन के बाद एक 11 साल का लड़का मंच पर पहुंचता है, भोजपुरी में गाना गाना शुरू करता है जिसके बोल थे "ओढनिया वाली से"...... पुलिस लाइन झूम उठता है स्थानीय पत्रकार अपने कैमरा में वीडियो शूट कर लेता है, आरा जिले के जोकहरी गांव में 6 मार्च 1986 को जन्में उसे 11 साल के लड़के की पहचान होती है नाम होता है पवन सिंह....!!

🌺भोजपुरी उद्योग में पवन सिंह से पावर स्टार का सफ़र🌺

भोजपुरी उद्योग में पवन सिंह कभी उनकी जाति ने आगे नहीं बढ़ाया जहां भोजपुरी में देखने को मिलता है की अधिकांश सिंगर अपने जातियों के दम पर नाम और पहचान बनाते हैं वहीं पवन सिंह ने अपनी गायकी, गले के दम पर अपनी पहचान बनाई, एक से बढ़कर एक गाने गाए कोई 636 मिलियन व्यूज गया, तो किसी का 612 तो किसी का 600 और किसी का 386 मिलियन, यह व्यूज नहीं भोजपुरी का रिकॉर्ड है, पवन सिंह से प्रतिस्पर्धा करने वाले अन्य भोजपुरी गायक पवन सिंह से 200 मिलियन व्यूज पीछे हैं, जहां अन्य किसी सिंगर के गाने तक मशहूर नहीं हो पा रहे हैं तो वहीं पवन सिंह का जलवा बॉलीवुड में भी कायम है और वहां पर भी उनके सिंगिंग करियर की शुरुआत धमाकेदार हो चुकी है| सर्चिंग इंजनों के मुताबिक आज वह भोजपुरी के नंबर वन स्टार है अभिनय में भी गायकी में भी, यह तो हुआ संक्षिप्त में उनके पावर स्टार का सफर...!!

🌺पवन और ज्योति विवाद🌺

5 मार्च 2018 को पवन सिंह की कोर्ट मैरिज होती है और 6 मार्च 2018 को पवन सिंह की एक शादी समारोह में बलिया में शादी होती है, पत्नी का नाम होता है ज्योति सिंह और इस शादी की अगुवाई पवन सिंह और ज्योति के ननिहाल वाले मिलकर किए थे, क्योंकि दोनों लोग का ननिहाल गोरखपुर में है।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे

आरा जिले के फैमिली कोर्ट में 2021 मुकदमा संख्या 354/21 दाखिल किया जाता है, जिसकी मौजूदा स्थिति यह है कि पवन सिंह की तरफ से सारी गवाहियां हो चुकी हैं और ज्योति सिंह की तरफ से दो गवाह है जिसमें से एक मुख्य गवाह स्वयं ज्योति सिंह जी हैं, और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसी 8 अक्टूबर को उनकी गवाही होनी है, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने सहानुभूति बटोरने का अपना कार्ड खेल दिया, और सहानुभूति बटोरने की जरूरत क्यों पड़ी यह आगे पढ़ते जाइये आपको सब चल जाएगा।

🌺गृह मंत्री से मुलाकात गृह क्लेश वाली सियासत🌺

पूर्वांचल के एक बाहुबली और पूर्व सांसद की लिखी पटकथा पर 30 सितंबर 2025 को लगभग 3:30 बजे के करीब पवन सिंह की मुलाकात गृह मंत्री अमित शाह से होती है, 4:15 पर पवन सिंह की और अमित शाह जी की फोटो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दी जाती है, माननीय गृह मंत्री जी के साथ पवन की तस्वीर सियासी गलियारों में आग की तरह फैल जाती है और राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के बीच बेचैनी बढ़ जाती है। मीडिया में कयास लगाए जाने लगते हैं कि पवन सिंह या उनकी माताजी बिहार विधानसभा में चुनाव लड़ सकती हैं, ठीक 52 घंटे 28 मिनट बाद शुक्रवार को 8:43 पर ज्योति सिंह जी का सोशल मीडिया पर पोस्ट घूमने लगता है, उनकी तरफ से दावा किया जाता है की वो लखनऊ स्थित पवन सिंह के आवास जाने वाली है।

🌺पति पत्नी विवाद या शोशल मीडिया ट्रायल🌺

पति-पत्नी के विवाद को सार्वजनिक तौर पर सार्वजनिक मंचों पर लाकर वह भी तब जब उनकी स्वयं की गवाही इसी 8 अक्टूबर को आरा के फैमिली कोर्ट में होनी थी, फिर लखनऊ जाकर हाई बोल्टेज ड्रामा करने की क्या जरूरत आन पड़ी ?

लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचने के बाद वह बार-बार अपने वीडियो में कह रही थी कि वह जनता से पूछ कर आई है पति-पत्नी के विवाद में जनता का क्या काम ? या किसी तीसरे का क्या काम ?

ज्योति सिंह जी इतना आक्रमक तेवर कभी भी अपना सकती थी। पर शादी के 7 वर्ष बाद पवन सिंह के बीजेपी में जाने के बाद ही अचानक से उन्हें ससुराल की याद सताने लगी। आखिर एकाएक उनका रौद्र रूप क्यों देखने को मिला ?

बीते 2 साल से बिहार के रोहतास जिले के एक विधानसभा में वह बार-बार टहल घूम क्यों रही थी अगर उनका मकसद विधानसभा का टिकट था तो वह सार्वजनिक मंच पर बताएं कि वह राष्ट्रीय ज।नता दल के संपर्क में थी या नहीं थी ?

क्योंकि 8 अक्टूबर को उनकी आखिरी गवाही थी क्या इसके पहले ही वह अपना राजनीतिक स्थान फिक्स करने के लिए पवन सिंह को बदनाम करने का सहारा लेकर सहानुभूति या सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए लखनऊ में ड्रामा करना सही समझा क्या उनकी यह सियासी चाल थी या टिकट की चाह में मजबूरी ?

🌺सच जिसे गलत तरीके से परोसा गया🌺

लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी चौकी के अंतर्गत आने वाले सेलिब्रिटी गार्डन में उनकी पवन सिंह जी से डेढ़ घंटे तक मुलाकात हुई और उस मुलाकात के दौरान सिर्फ पवन सिंह और ज्योति सिंह ही थे, ज्योति सिंह के भाई दुर्गेश सिंह और उनकी बहन बाहर खड़े थे, डेढ़ घंटे की मुलाकात के बाद जब पवन सिंह वहां से निकल गए उसके बाद ज्योति सिंह ने हंगामा करना चालू कर दिया और एक भी वीडियो में उन्होंने स्वीकार नहीं किया कि उनकी पवन सिंह जी से डेढ़ घंटे तक मुलाकात हुई हालांकि एक मीडीया फोरम पर बात करते हुए उनके भाई दुर्गेश ने यह स्वीकार किया कि हां ज्योति पवन की डेढ़ घंटे तक मुलाकात हुई थी, इन सब घटनाओं से साफ जाहिर है कि उनका सुनियोजित सहानुभूति पाने का एक पूर्वनियोजित हाई वबोल्टेज ड्रामा था जिसके तार बिहार की सियासी धरातल से जुड़ी थी।

ज्योति सिंह ने कभी यह नहीं बताया कि वह पवन सिंह जी से मिलना चाहती हैं या उनके परिवार से मिलकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग क्यों नहीं करती ? आईए आपको इसकी वजह भी बता दूं, दरसल पवन सिंह और ज्योति के बीच अलगाव की वजह सिर्फ और सिर्फ पवन सिंह का परिवार ही है, ज्योति जी हमेशा पवन सिंह के साथ रहना चाहती हैं लेकिन पवन को उनके परिवार के साथ नहीं रहने देना चाहती और पवन सिंह जी इस जमाने में भी अपने संयुक्त परिवार को एक साथ लेकर चलते हैं, इसलिए ही ज्योति सिंह जी कभी आपको पवन सिंह के परिवार के साथ नहीं दिखाई दी होंगी।

भोजपुरी जगत से जुड़े कई प्रबुद्ध लोगों को पता है की 2018 के बाद से पवन सिंह के कार्यक्रमों की फीस जो कैश में होती थी इसका अधिकांश हिस्सा ज्योति के परिजन जाकर वसूल कर ले आते थे, और अगर यह आरोप गलत है तो कभी इस पर ज्योति सिंह जी ने खंडन क्यूँ नहीं किया ?

बिहार के एक बाहुबली परिवार और बिहार के एक जातिवादी भोजपुरी कलाकार के कहने पर बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी के झांसे में आकर ज्योति सिंह जी ने अपने सियासी करियर को सेट करने के लिए पवन सिंह को सोची समझी रणनीति के तहत सही समय पर टारगेट करना शुरू किया है, एक तरफ वो आरा फैमिली कोर्ट में पचास लाख मासिक गुजारा भत्ता मांग रही है और उनकी गवाही की तारीख भी इसी 8 अक्टूबर की नीयत तिथि है दूसरी तरफ बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह सहानुभूति बटोरने का भी कोई मौका छोड़ना नहीं चाह रही है।
ज्योति जी पेशे से और पढ़ाई से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स की है लेकिन अभी फिलहाल वह अपने सियासी करियर को पवन सिंह के सहारे डिजाइन करने का काम कर रही हैं।

पति-पत्नी का फैसला जब उन दोनों के विवेक से हटकर सामाजिक विवेक पर आ जाता है तो स्वाभाविक सी बात रहती है उसमें कोई निर्णय नहीं बस छीछालेदर ही होता है, ज्योति सिंह जी के वीडियो के मुताबिक वह सोशल मीडिया पर जनता से पूछ पूछ कर अपने निर्णय ले रही हैं पहले तो उन्हें यह तय कर लेना चाहिए की शादी उन्होंने की है या जनता ने ? अच्छा चलिये इन 7 वर्षों में आपको पति और ससुराल की याद सताने लगी तो कमोवेश आपको इस पंचायत में अपने माँ बाप को भी शामिल करना चाहिए था बिना अभिभावक के आप मोबाइल का वीडियो लाइव आन करके ससुराल जाकर ड्रामा करेंगी तो यह सर्वदा अनुचित माना जायेगा यह बात अलग है कि इसके पीछे का हिडेन एजेंडा राजनीति से प्रेरित है। कुल मिलाकर परिणाम सिर्फ इतना कि पवन की अमित शाह जी से मुलाकात पर झल्लाये बिहार के अत्याधुनिक सियासी अभियन्ताओं की राजनीतिक साजिश का शिकार बने पवन सिंह और ज्योति का राजनैतिक इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमे ज्योति की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को नकारा नही जा सकता है।

🌺पवन और शराब🌺

सामाजिक व्यक्ति, अभिनय का व्यक्ति, ज्यूडिशरी सिस्टम का व्यक्ति, प्रशासनिक सेवा का व्यक्ति, राजनैतिक व्यक्ति में कितने प्रतिशत लोग बचे हुए हैं जो शराब का सेवन नहीं करते, शायद 10% या 20% कोई खुलेआम ठेके के करीब खरीद कर पी रहा है, तो कोई गद्देदार सोफे पर बैठकर बर्फ डालकर महंगी कांच की ग्लास में पी रहा है, किसी का चखना ₹5 की पैकेट वाली नमकीन बन रही है, तो किसी का चखना काला नमक तक बन रहा है, कहीं महंगी टेबलों पर हाफ फ्राई किया हुआ पनीर है और डीप फ्राई किया हुआ काजू है बस यही फर्क तो है पीने में, सरकार अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ठेकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी कर रही है कभी किसी ने सरकार से पूछा कि जब दारु पीना गलत बात है तो ठीक है ठेकों की संख्या में इजाफा क्यों हो रहा है ? और कोई भी इंसान अगर अपने परिश्रम से कमाए हुए धन से दारु पी रहा है, अय्याशी कर रहा है, या महंगे कपड़े पहन रहा है, महंगी गाड़ियों का शौक़ीन है, वह अपने कमाए हुए पैसे से कुछ भी करें हम और आप निर्धारण करने वाले कौन होते हैं ? कि वह अपने जीवन में कमाई तो अपनी मेहनत से करे लेकिन हम और आप चाहते है कि वह हमारे और आपके मन से काम करें !
शरीर का कोई भी अंग शराब को पचाने की क्षमता नहीं रखता, शराब 30 ML हो या 60 ML हो वह शरीर के अंदर प्रवेश करने के बाद शरीर में मौजूद पानी को ऑब्जर्व कर लेती है, शराब का पहला पेग लीवर पर अटैक करना शुरू कर देता है, इतना जानने के बाद भी अगर कोई उस पर अपना पैसा खर्च करता है तो स्वाभाविक है यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। पवन सिंह में इतनी इंसानियत तो है ही कि शराब पीकर उन्होंने बड़े से बड़ा मंच साझा किया न कभी पैर फिसली न जबान फिर पवन बेवड़ा है इसको किसी से क्या फर्क पड़ता है...?

🌺पवन सिंह बनाम सुशांत सिंह राजपूत🌺

ज्योति सिंह जी हाई प्रोफाइल सियासी रणनीति के तहत स्टेप बाय स्टेप अपने कदम बढ़ा रही हैं, उनका मुख्य मकसद पवन सिंह के सामाजिक सम्मान करियर को चोट करना नहीं बल्कि उनको मानसिक आघात पहुंचाना है, जिससे वह पवन सिंह को इस कदर मानसिक विक्षिप्त कर दें, कि वह खुद को नुकसान पहुंचा बैठे और सारी संपत्ति पवन सिंह का नाम उनकी सहानुभूति सब लेकर ज्योति सिंह जी बिहार की विधानसभा में बैठ जाएं!

सारी की सारी ड्रामेबाजी सिर्फ और सिर्फ विधानसभा टिकट के लिए है, मुझे एक गहरी राज की बात और भी पता है कि जिस दिन पवन सिंह का मुंह खुला उस दिन ज्योति सिंह जी अपने किसी एक व्यक्तिगत मामले पर जनता के बीच सफाई तक नहीं दे पाएंगी, उस मामले को भी लिख देता लेकिन बेहद निजी मामला है इसलिए उस पर लिखना जरूरी नहीं समझ रहा हूं।

🌺पवन ज्योति विवाद पर मेरा मत🌺

पवन सिंह उतना गलत नही है जितना उन्हें प्रदर्शित किया जा रहा है। पवन और ज्योति दोनो का ननिहाल गोरखपुर है ननिहाल के दबाव में पवन ने यह शादी की थी और ज्योति के परिवार की नजर पवन की संपत्ति पर टिकी रही, पवन की शादी के बाद ज्योति का निर्णय था कि परिवार से अलग होकर रहे। पर पवन ने पत्नी की बातों को अस्वीकार करते हुए पूरे संयुक्त परिवार को साथ लेकर चलने के निर्णय पर अडिग रहे। जिसमे तीन सगे और चचेरे भाई व चाचा व उन सबका पूरा परिवार भी शामिल है। आज के समय मे इससे बड़ी दिलेरी और क्या हो सकती है? पवन के ऐसा न करने पर ज्योति आये दिन कलह करती थी, धीरे धीरे दिन बीता मामला गम्भीर होता गया और एक दिन न्यायालय की चौखट पर चला गया। ज्योति सिंह ने सबसे पहले अक्टूबर 2021 में पवन के खिलाफ आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की, जिसमें मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के तमाम झूठे आरोप लगाए। जबकि खुद मानसिक उत्पीड़न वो पूरे परिवार को देती रही। बाद में 2022 में पवन सिंह ने भी याचिका दायर की। पवन सिंह ने ज्योति के आरोपों का खंडन किया है और 2022 में तलाक की याचिका दायर की। अब जब तलाक के लिए न्यायालय के शरण मे दोनो लोग है तो जो भी निर्णय होगा वह न्यायालय करेगी न कि न्ययालय के किसी आदेश के बगैर बोरिया बिस्तर बांधिए चले जाइये पवन के घर लाइव आकर हाई बोल्टेज ड्रामा करने। पवन के फ्लैट पर जाने की क्या जरूरत थी? जब यही करना था तो कोर्ट नही जाना चाहिए था न? विगत दिनों से पवन इस विचार में थे कि ज्योति को अपनाए पर आज उनके इस असामाजिक कृत्य से इस दुस्साहस से बची खुची सारी गुन्जाईस खतम हो गयी। ज्योति को पवन विरोधी चढ़ा बढ़ा रहे है ये लगातार उनके विरोधियों के सम्पर्क में है। एक महिला को आगे करके पवन के प्रतिद्वंद्वियों को उनकी ब्रांडिंग समाप्त करने का इससे बेहतर मौका और नही मिल सकता। और जब पत्नी पति की बात को रिकॉर्ड करने लगे या खिलाफ एविडेन्स इकट्ठा करने लगे तो समझ जाइये की रिश्ता आईसीयू में जा चुका है। पवन हमारे भी चहेते गायक है मैंने किसी ऐसी व्यक्ति से इन दोनो की पैरवी की थी जिनकी बातों को पवन चाहकर भी नही नकार सकते थे पर सच्चाई जानकर मैं भी पीछे हट गया। आज ज्योति ने जो भी किया वो बारगेनिंग का एकमात्र हिस्सा है। और यह बारगेनिंग राजनीति और अर्थ दोनो से जुड़ी है। ज्योति को पवन सिंह को पाने की चाहत से कही बढ़कर विधायक बनने की इच्छा जागृत हुई है और यह पवन के बिना असम्भव है बस आप सारी बात को समझ गए होंगे। अब इतना कहूंगा कि पवन अब तक रिश्तों को बचा रहा था पर ज्योति सिंह की अग्रसोची दूरदर्शी विचारधारा और पति पत्नी के पवित्र रिश्तों में अतिमहत्वाकांक्षी होना इस रिश्ते को ले डूबा। जरा गौर से सोचिए कि आज पवन आवास पर रहे होते और यह महिला लाइव आकर कितना और बखेड़ा खड़ा करती, क्या क्या आरोप लगाती यह आप सोच भी नही सकते।
यह किसी के परिवार का व्यक्तिगत मामला है मुझे नही बोलना चाहिए था पर जब इसे सामाजिक पटल पर लाया गया है तो मत रखना पड़ा हमे अपना।

पहले मैं भी पवन सिंह को बहुत गलत समझता था लेकिन पवन सिंह के एक बेहद करीबी के माध्यम से जब पवन सिंह को जानने और समझने का मौका मिला तब मेरी समझ में आया कि अगर आपको ही पत्नी के द्वारा यह ऑफर दिया जाए कि या तो मेरे साथ रहिए या तो अपने संयुक्त परिवार के साथ तो आप बताइए आप परिवार को चुनेंगे या पत्नी को ??
बस यही है पवन सिंह का और ज्योति सिंह का विवाद...!!I
सच्चाई से परे सोशल मीडिया पर आप जो कुछ देख रहे जिसमे 50% व्हाटसप यूनिवर्सिटी वाले है, 40% राजनैतिक साजिश से प्रेरित, 8% अंखमुन्नी कॉपी पेस्ट चेप रहे है, 2% सच लिख रहे जिन्हें जानकारी है।
फिर भी कुल मिलाकर बात सिर्फ इतना कि यह किसी के परिवार का व्यक्तिगत मामला है जहां बोलना सर्वथा अनुचित था पर सोशल मीडिया पर गलत ट्रेंडिंग न हो इसके लिए हमने सच लिखने का धूमिल प्रयास किया है पूरे दावे के साथ।
Jyoti P Singh Veer Pratap Singh Karina Pandey Hema Pandey
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