Khota Sikka

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इतनी सुन्दर कहानियों को मुझ तक पहुंचाने के लिए आपका बहुत बहुत आभार @आरव मिश्रा।

आरव मिश्रा द्वारा लिखित "खोटा सिक्का" एक विचारोत्तेजक पुस्तक है जो भारतीय समाज की जटिलताओं पर प्रकाश डालती है। यह पुस्तक 11 लघु कथाओं का संग्रह है जो गरीबी, जातिवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता सहित विभिन्न सामाजिक मुद्दों से निपटती है।

कहानियाँ "हमारे अपने समाज की दर्पण छवियाँ" हैं¹। साथ ही लेखक की लेखन शैली काफी सरल और स्पष्ट है, जो पुस्तक को एक आकर्षक पठन बनाती है।

पुस्तक की कहानियाँ विविध हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के संघर्षों से लेकर सामाजिक असमानता के परिणामों तक कई विषयों को कवर करती हैं। पुस्तक में लिखित  कहानियाँ "मर्मिक" (हार्दिक) हैं और "कई बार आपको सोचने पर मजबूर करती हैं"¹।

कुल मिलाकर, "खोटा सिक्का" एक ऐसी पुस्तक है जो यथार्थवादी और विचारोत्तेजक कथा साहित्य का आनंद लेने वाले पाठकों को पसंद आएगी। यदि आप साहित्य के माध्यम से भारतीय समाज की जटिलताओं को जानने में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक निश्चित रूप से पढ़ने लायक है। 02/04/2025

https://www.instagram.com/p/DH8ntyjv50g/?igsh=dDMzb2VwaHEyOWZx

इतनी सुन्दर कहानियों को मुझ तक पहुंचाने के लिए आपका बहुत बहुत आभार @आरव मिश्रा। आरव मिश्रा द्वारा लिखित "खोटा सिक्का" एक विचारोत्तेजक पुस्तक है जो भारतीय समाज की जटिलताओं पर प्रकाश डालती है। यह पुस्तक 11 लघु कथाओं का संग्रह है जो गरीबी, जातिवाद, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता सहित विभिन्न सामाजिक मुद्दों से निपटती है। कहानियाँ "हमारे अपने समाज की दर्पण छवियाँ" हैं¹। साथ ही लेखक की लेखन शैली काफी सरल और स्पष्ट है, जो पुस्तक को एक आकर्षक पठन बनाती है। पुस्तक की कहानियाँ विविध हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के संघर्षों से लेकर सामाजिक असमानता के परिणामों तक कई विषयों को कवर करती हैं। पुस्तक में लिखित कहानियाँ "मर्मिक" (हार्दिक) हैं और "कई बार आपको सोचने पर मजबूर करती हैं"¹। कुल मिलाकर, "खोटा सिक्का" एक ऐसी पुस्तक है जो यथार्थवादी और विचारोत्तेजक कथा साहित्य का आनंद लेने वाले पाठकों को पसंद आएगी। यदि आप साहित्य के माध्यम से भारतीय समाज की जटिलताओं को जानने में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक निश्चित रूप से पढ़ने लायक है।

आरव मिश्रा द्वारा लिखित "खोटा सिक्का" एक कहानी संग्रह है, जिसमें 11 कहानियाँ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। ये कहानियाँ मध्यम वर्गीय जीवन के संघर्षों, सामाजिक बुराइयों और मानवीय भावनाओं को बड़ी ही संवेदनशीलता से पेश करती हैं। प्रत्येक कहानी अपने आप में एक अलग दृष्टिकोण लिए हुए है, लेकिन सबका सार एक जैसा है—हमारे आसपास घटने वाली वे घटनाएँ, जिन्हें हम या तो सहजता से स्वीकार कर लेते हैं या फिर सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। इस संग्रह में गरीबी, जात-पात, सत्ता का अहंकार, धार्मिक पाखंड, अवैध संबंध, प्रेम, लालसा और सामाजिक भेदभाव जैसे कई गंभीर मुद्दों को लेखक ने अपनी कहानियों में पिरोया है।

इस किताब को पढ़ते समय ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपने ही समाज के दर्पण में झाँक रहे हों। कहानियाँ मार्मिक हैं और कई बार सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कुछ किस्से दिल को छू जाते हैं, तो कुछ अंदर तक झकझोर देते हैं। "सोना" नामक कहानी में स्वर्ण (धातु) और सोने (नींद) के प्रतीकों का प्रयोग शानदार तरीके से किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लालच और मेहनत के बीच की बारीक रेखा कई बार अनदेखी रह जाती है। "कुंडल" जैसी कहानियाँ संवेदनशील पाठकों के लिए भारी पड़ सकती हैं, लेकिन इनका प्रभाव गहरा है। लेखक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने समाज की जटिलताओं को बिना किसी दिखावे के, सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है।

पुस्तक की भाषा और शैली इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कहानियों में व्यर्थ की जटिलता नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की बोली और भावनाओं को बेहतरीन ढंग से उकेरा गया है। यह संग्रह उन लोगों के लिए है जो यथार्थवादी साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं और समाज की असलियत को गहराई से समझना चाहते हैं। हालाँकि, यदि आप हल्की-फुल्की या काल्पनिक कहानियों की तलाश में हैं, तो यह किताब आपको थोड़ी भारी लग सकती है। कुछ कहानियाँ अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली हैं, जबकि कुछ में थोड़ा और विस्तार की गुंजाइश थी।

कुल मिलाकर, "खोटा सिक्का"  एक ऐसा संग्रह है, जो समाज में व्याप्त कुरीतियों और संघर्षों को बिना किसी लाग-लपेट के हमारे सामने रखता है। यह किताब केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सोचने और समझने के लिए भी पढ़ी जानी चाहिए। यदि आप समाज को उसकी सच्चाई के साथ देखना चाहते हैं और यथार्थवादी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह किताब निश्चित रूप से आपके लिए है। 13/03/2025

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आरव मिश्रा द्वारा लिखित "खोटा सिक्का" एक कहानी संग्रह है, जिसमें 11 कहानियाँ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। ये कहानियाँ मध्यम वर्गीय जीवन के संघर्षों, सामाजिक बुराइयों और मानवीय भावनाओं को बड़ी ही संवेदनशीलता से पेश करती हैं। प्रत्येक कहानी अपने आप में एक अलग दृष्टिकोण लिए हुए है, लेकिन सबका सार एक जैसा है—हमारे आसपास घटने वाली वे घटनाएँ, जिन्हें हम या तो सहजता से स्वीकार कर लेते हैं या फिर सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। इस संग्रह में गरीबी, जात-पात, सत्ता का अहंकार, धार्मिक पाखंड, अवैध संबंध, प्रेम, लालसा और सामाजिक भेदभाव जैसे कई गंभीर मुद्दों को लेखक ने अपनी कहानियों में पिरोया है। इस किताब को पढ़ते समय ऐसा महसूस होता है जैसे हम अपने ही समाज के दर्पण में झाँक रहे हों। कहानियाँ मार्मिक हैं और कई बार सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कुछ किस्से दिल को छू जाते हैं, तो कुछ अंदर तक झकझोर देते हैं। "सोना" नामक कहानी में स्वर्ण (धातु) और सोने (नींद) के प्रतीकों का प्रयोग शानदार तरीके से किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लालच और मेहनत के बीच की बारीक रेखा कई बार अनदेखी रह जाती है। "कुंडल" जैसी कहानियाँ संवेदनशील पाठकों के लिए भारी पड़ सकती हैं, लेकिन इनका प्रभाव गहरा है। लेखक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने समाज की जटिलताओं को बिना किसी दिखावे के, सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। पुस्तक की भाषा और शैली इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कहानियों में व्यर्थ की जटिलता नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की बोली और भावनाओं को बेहतरीन ढंग से उकेरा गया है। यह संग्रह उन लोगों के लिए है जो यथार्थवादी साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं और समाज की असलियत को गहराई से समझना चाहते हैं। हालाँकि, यदि आप हल्की-फुल्की या काल्पनिक कहानियों की तलाश में हैं, तो यह किताब आपको थोड़ी भारी लग सकती है। कुछ कहानियाँ अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली हैं, जबकि कुछ में थोड़ा और विस्तार की गुंजाइश थी। कुल मिलाकर, "खोटा सिक्का"  एक ऐसा संग्रह है, जो समाज में व्याप्त कुरीतियों और संघर्षों को बिना किसी लाग-लपेट के हमारे सामने रखता है। यह किताब केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सोचने और समझने के लिए भी पढ़ी जानी चाहिए। यदि आप समाज को उसकी सच्चाई के साथ देखना चाहते हैं और यथार्थवादी कहानियों के शौकीन हैं, तो यह किताब निश्चित रूप से आपके लिए है।

📍पुस्तक- खोटा सिक्का 
📍लेखक- आरव मिश्रा @aarav_mishra25
📍प्रकाशक - @sankalp.publication

📍यह किताब आरव मिश्रा द्वारा लिखित 11 कहानियों का संग्रह है जो हमारे आस पास के ही मध्यम वर्गीय लोगो के इर्द गिर्द घूमती है, इन कहानियों में उनके जीवन की कठिनाइयों को दिखाया गया है और साथ ही साथ हमारे दूषित हो चुके समाज और सामाजिक बुराइयों को भी लेखक ने इन कहानियों में भली भांति हमारे सामने रखा है।

📍सभी कहानियां वैसे तो एक दूसरे से अलग कुछ कहती है पर सबका मर्म लगभग एक सा है,यह सब हम रोज होते देखते है पर हम उसे सहजता से स्वीकारते है या हमे यह सब सामान्य लगता है, कहना मुश्किल है। किसी को अपनी गरीबी खत्म करने के लिए सोने की लालसा, समाज में लोगो की जात पात की भावना, गरीबी में लाचार लड़कियों के चरित्र पर ऊंगली उठाना, धार्मिक गुरुओं का पाखंड, पहली नजर का प्यार, अवैध संबंध और सत्ता प्रभुत्व लोगो का अन्य लोगो के प्रति रूखा रवैया, गरीबी के कारण किसी गरीब के बच्चे की मौत होना, जैसे बहुत ही गंभीर विषयों को इन कहानियो में लेखक ने उजागर किया है।

📍आरव मिश्रा लेखक होने के साथ अभिनय में भी सक्रिय है, इनका कहानी संग्रह ‘कट्टहा ब्राह्मण’ और उपन्यास ‘मीनाक्षी’ प्रकाशित हो चुके है ।

📍लेखक की भाषा सरल है और कहानियो को रोज मर्रा के जीवन में उपयोग की जाने वाली भाषा में लिखा गया है। अगर आप समाज की बुराइयों को थोड़ा और नजदीक से देखना चाहते है तो आप यह कहानियाँ ज़रूर पढ़े।❤️

धन्यवाद❣️

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#books #booklover #book #bookworm #bookstagrammer #reading #bookish #bookaddict #booknerd #bibliophile #instabook #booksofinstagram #readersofinstagram #b #read #bookaholic #booksbooksbooks #bookphotography #bookshelf #booklove #love #bookreview #bookcommunity #bookblogger #instabooks #booklovers #reader #igreads #bookrecommendations 28/09/2024

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📍पुस्तक- खोटा सिक्का 📍लेखक- आरव मिश्रा @aarav_mishra25 📍प्रकाशक - @sankalp.publication 📍यह किताब आरव मिश्रा द्वारा लिखित 11 कहानियों का संग्रह है जो हमारे आस पास के ही मध्यम वर्गीय लोगो के इर्द गिर्द घूमती है, इन कहानियों में उनके जीवन की कठिनाइयों को दिखाया गया है और साथ ही साथ हमारे दूषित हो चुके समाज और सामाजिक बुराइयों को भी लेखक ने इन कहानियों में भली भांति हमारे सामने रखा है। 📍सभी कहानियां वैसे तो एक दूसरे से अलग कुछ कहती है पर सबका मर्म लगभग एक सा है,यह सब हम रोज होते देखते है पर हम उसे सहजता से स्वीकारते है या हमे यह सब सामान्य लगता है, कहना मुश्किल है। किसी को अपनी गरीबी खत्म करने के लिए सोने की लालसा, समाज में लोगो की जात पात की भावना, गरीबी में लाचार लड़कियों के चरित्र पर ऊंगली उठाना, धार्मिक गुरुओं का पाखंड, पहली नजर का प्यार, अवैध संबंध और सत्ता प्रभुत्व लोगो का अन्य लोगो के प्रति रूखा रवैया, गरीबी के कारण किसी गरीब के बच्चे की मौत होना, जैसे बहुत ही गंभीर विषयों को इन कहानियो में लेखक ने उजागर किया है। 📍आरव मिश्रा लेखक होने के साथ अभिनय में भी सक्रिय है, इनका कहानी संग्रह ‘कट्टहा ब्राह्मण’ और उपन्यास ‘मीनाक्षी’ प्रकाशित हो चुके है । 📍लेखक की भाषा सरल है और कहानियो को रोज मर्रा के जीवन में उपयोग की जाने वाली भाषा में लिखा गया है। अगर आप समाज की बुराइयों को थोड़ा और नजदीक से देखना चाहते है तो आप यह कहानियाँ ज़रूर पढ़े।❤️ धन्यवाद❣️ , , , , , #books #booklover #book #bookworm #bookstagrammer #reading #bookish #bookaddict #booknerd #bibliophile #instabook #booksofinstagram #readersofinstagram #b #read #bookaholic #booksbooksbooks #bookphotography #bookshelf #booklove #love #bookreview #bookcommunity #bookblogger #instabooks #booklovers #reader #igreads #bookrecommendations

**पुस्तक का नाम:** खोटा सिक्का 
**लेखक:** आरव मिश्रा 
**समीक्षा:** 

आरव मिश्रा की पुस्तक "खोटा सिक्का" एक प्रभावशाली कहानी संग्रह है, जो जीवन की जटिलताओं और सामाजिक सच्चाइयों का अद्वितीय चित्रण करती है। इस संग्रह में कुल 11 कहानियाँ सम्मिलित हैं, प्रत्येक अपनी विशिष्टता और गहराई के साथ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। मिश्रा जी की लेखनी ने समाज के हर वर्ग, उनके संघर्ष और संवेदनाओं को ऐसी ठहराव के साथ प्रस्तुत किया है कि पाठक गहराई से सोचने पर मजबूर हो जाए।

"खोटा सिक्का" की हर कहानी एक नए दृष्टिकोण से समाज को देखने का अवसर प्रदान करती है। अमीरी और गरीबी के बीच की खाई, मानवीय लालसा और हवस, और सामाजिक धारणाओं की वास्तविकता को इन कहानियों के माध्यम से बखूबी दिखाया गया है। लेखक ने अपनी कहानियों के माध्यम से हमें यह समझने की कोशिश की है कि हर व्यक्ति की अपनी एक वास्तविकता होती है, और यही वास्तविकता समाज के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती है।

पुस्तक की कहानियाँ अपने आप में विशिष्ट हैं। प्रत्येक कहानी का अपना एक अनूठा प्रभाव है, और यह कहना कठिन है कि कौन सी कहानी सबसे अधिक प्रभावशाली है। यह विविधता ही इस संग्रह की खूबसूरती है। हर कहानी में एक नई दृष्टि और विचारधारा है, जो पाठकों को न केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि सोचने और आत्ममंथन की दिशा भी प्रदान करती है।

आरव मिश्रा की लेखनी की ताकत इस बात में है कि वे जटिल सामाजिक मुद्दों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनके शब्द सीधे दिल में उतरते हैं और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक और नैतिक मुद्दों की गहराई इतनी प्रभावशाली है कि यह पाठकों को भीतर से झकझोर देती है। पुस्तक के माध्यम से मिश्रा जी ने समाज के विभिन्न वर्गों को आईना दिखाने का प्रयास किया है, जिससे पाठक स्वयं को और समाज को बेहतर तरीके से समझ सकें।

इस संग्रह की कहानियों में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को बारीकी से दर्शाया गया है। किस प्रकार अमीर और गरीब के बीच एक अपार अंतर होता है, और इस अंतर के बावजूद उनके जीवन में समानताएँ और संघर्ष कैसे होते हैं, यह इस पुस्तक में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वहीं, मानवीय लालसा और हवस का चित्रण इस पुस्तक में इतनी सजीवता के साथ किया गया है कि पाठक इन कहानियों से खुद को जोड़ पाता है और उनके प्रति एक गहरा समर्पण अनुभव करता है। 10/09/2024

https://www.instagram.com/p/C_aLubxBto6/?igsh=enI5cXg0eG1mMzdz

**पुस्तक का नाम:** खोटा सिक्का **लेखक:** आरव मिश्रा **समीक्षा:** आरव मिश्रा की पुस्तक "खोटा सिक्का" एक प्रभावशाली कहानी संग्रह है, जो जीवन की जटिलताओं और सामाजिक सच्चाइयों का अद्वितीय चित्रण करती है। इस संग्रह में कुल 11 कहानियाँ सम्मिलित हैं, प्रत्येक अपनी विशिष्टता और गहराई के साथ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। मिश्रा जी की लेखनी ने समाज के हर वर्ग, उनके संघर्ष और संवेदनाओं को ऐसी ठहराव के साथ प्रस्तुत किया है कि पाठक गहराई से सोचने पर मजबूर हो जाए। "खोटा सिक्का" की हर कहानी एक नए दृष्टिकोण से समाज को देखने का अवसर प्रदान करती है। अमीरी और गरीबी के बीच की खाई, मानवीय लालसा और हवस, और सामाजिक धारणाओं की वास्तविकता को इन कहानियों के माध्यम से बखूबी दिखाया गया है। लेखक ने अपनी कहानियों के माध्यम से हमें यह समझने की कोशिश की है कि हर व्यक्ति की अपनी एक वास्तविकता होती है, और यही वास्तविकता समाज के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती है। पुस्तक की कहानियाँ अपने आप में विशिष्ट हैं। प्रत्येक कहानी का अपना एक अनूठा प्रभाव है, और यह कहना कठिन है कि कौन सी कहानी सबसे अधिक प्रभावशाली है। यह विविधता ही इस संग्रह की खूबसूरती है। हर कहानी में एक नई दृष्टि और विचारधारा है, जो पाठकों को न केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि सोचने और आत्ममंथन की दिशा भी प्रदान करती है। आरव मिश्रा की लेखनी की ताकत इस बात में है कि वे जटिल सामाजिक मुद्दों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनके शब्द सीधे दिल में उतरते हैं और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक और नैतिक मुद्दों की गहराई इतनी प्रभावशाली है कि यह पाठकों को भीतर से झकझोर देती है। पुस्तक के माध्यम से मिश्रा जी ने समाज के विभिन्न वर्गों को आईना दिखाने का प्रयास किया है, जिससे पाठक स्वयं को और समाज को बेहतर तरीके से समझ सकें। इस संग्रह की कहानियों में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को बारीकी से दर्शाया गया है। किस प्रकार अमीर और गरीब के बीच एक अपार अंतर होता है, और इस अंतर के बावजूद उनके जीवन में समानताएँ और संघर्ष कैसे होते हैं, यह इस पुस्तक में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वहीं, मानवीय लालसा और हवस का चित्रण इस पुस्तक में इतनी सजीवता के साथ किया गया है कि पाठक इन कहानियों से खुद को जोड़ पाता है और उनके प्रति एक गहरा समर्पण अनुभव करता है।

🌟किताब का नाम :- खोटा सिक्का

🌟लेखक:- आरव मिश्रा

🌟मेरी रेटिंग :- 10/10

🌟मेरी समीक्षा :-

✍️आरव मिश्रा जी की पुस्तक "खोटा सिक्का" एक अद्वितीय कहानी संग्रह है, जिसमें कुल 11 कहानियाँ शामिल हैं। हर कहानी अपने आप में समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है, जैसे अमीरी-गरीबी, लालसा, हवस, और मानवीय संवेदनाओं के विभिन्न रंग। इस संग्रह की हर कहानी पाठकों को जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित कराती है, और उनके भीतर गहराई से सोचने की प्रेरणा देती है।

✍️पुस्तक की हर कहानी अपने आप में अनूठी है और इस कारण यह कहना कठिन है कि कौन सी कहानी सबसे अधिक पसंदीदा है। हर कहानी का अपना एक अलग प्रभाव है और सभी कहानियाँ अपने-अपने ढंग से उम्दा हैं। आरव मिश्रा जी की लेखनी इतनी सशक्त है कि वे हर कहानी के माध्यम से पाठकों को बांधे रखते हैं और उन्हें अपने जीवन के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं। "खोटा सिक्का" की हर कहानी सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से गहरी और विचारोत्तेजक है। आरव मिश्रा जी ने अपने सरल और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से समाज के हर वर्ग को आईना दिखाने का प्रयास किया है। कहानियाँ समाज के विभिन्न तबकों की सच्चाईयों को उजागर करती हैं और पाठकों को उन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। चाहे वह अमीरी-गरीबी की खाई हो या फिर मानवीय लालसा और हवस, इन कहानियों में हर विषय को बखूबी उठाया गया है।

✍️आरव मिश्रा जी की यह पुस्तक निश्चित रूप से हर पाठक के पुस्तकालय में होनी चाहिए। यह न केवल आपको समाज की सच्चाईयों से रूबरू कराएगी
यह पुस्तक अपने पाठकों के दिल और दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ती है और उन्हें जीवन की वास्तविकता के करीब लाती है। इसे अवश्य पढ़ें और जीवन के विभिन्न रंगों का अनुभव करें।

💫धन्यवाद, पढ़ते रहिये और मुस्कुराते रहिये। 14/08/2024

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🌟किताब का नाम :- खोटा सिक्का 🌟लेखक:- आरव मिश्रा 🌟मेरी रेटिंग :- 10/10 🌟मेरी समीक्षा :- ✍️आरव मिश्रा जी की पुस्तक "खोटा सिक्का" एक अद्वितीय कहानी संग्रह है, जिसमें कुल 11 कहानियाँ शामिल हैं। हर कहानी अपने आप में समाज के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है, जैसे अमीरी-गरीबी, लालसा, हवस, और मानवीय संवेदनाओं के विभिन्न रंग। इस संग्रह की हर कहानी पाठकों को जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित कराती है, और उनके भीतर गहराई से सोचने की प्रेरणा देती है। ✍️पुस्तक की हर कहानी अपने आप में अनूठी है और इस कारण यह कहना कठिन है कि कौन सी कहानी सबसे अधिक पसंदीदा है। हर कहानी का अपना एक अलग प्रभाव है और सभी कहानियाँ अपने-अपने ढंग से उम्दा हैं। आरव मिश्रा जी की लेखनी इतनी सशक्त है कि वे हर कहानी के माध्यम से पाठकों को बांधे रखते हैं और उन्हें अपने जीवन के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं। "खोटा सिक्का" की हर कहानी सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से गहरी और विचारोत्तेजक है। आरव मिश्रा जी ने अपने सरल और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से समाज के हर वर्ग को आईना दिखाने का प्रयास किया है। कहानियाँ समाज के विभिन्न तबकों की सच्चाईयों को उजागर करती हैं और पाठकों को उन पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। चाहे वह अमीरी-गरीबी की खाई हो या फिर मानवीय लालसा और हवस, इन कहानियों में हर विषय को बखूबी उठाया गया है। ✍️आरव मिश्रा जी की यह पुस्तक निश्चित रूप से हर पाठक के पुस्तकालय में होनी चाहिए। यह न केवल आपको समाज की सच्चाईयों से रूबरू कराएगी यह पुस्तक अपने पाठकों के दिल और दिमाग पर एक गहरी छाप छोड़ती है और उन्हें जीवन की वास्तविकता के करीब लाती है। इसे अवश्य पढ़ें और जीवन के विभिन्न रंगों का अनुभव करें। 💫धन्यवाद, पढ़ते रहिये और मुस्कुराते रहिये।

04/04/2024

Aarav, Writers Excellence 2024 is featuring authors across the domains in literature & beyond

With emerging outreach of your book ‘Khota Sikka’
Our team is looking forward to feature your book & endeavours

कहानियों में मार्मिकता तथा समाज का घिनौना रूप बिलकुल वैसे ही हैं जैसे दिन रौशनी और अँधेरा साथ-साथ लिए रहता है। एक युवक जो सोने (स्वर्ण) की लालसा में, जब सारी दुनिया सो रही होती है तब सोने (नींद) के बजाय, अपने सुनहरे सपनों की लालसा में जाग कर सोने (स्वर्ण) के लिए जाता है, और सोने (स्वर्ण) से भरा मटका लिए घर लौटते हुए न सोने (नींद) के कारण गिरकर धाराशायी हो जाता है। सत्ता और प्रभुत्व में लिप्त व्यक्ति यदि घोर पाप भी कर जाएँ तो समाज को फर्क नही पड़ता, पर कमज़ोर व्यक्ति ग़लत न भी हो फिर भी समाज की नज़र में दोषी है और सजा का हक़दार भी। धर्म को जब जीवन यापन का सहारा बना लिया एक दूकानदार ने, तो सत्ता के सेवकों ने माथा टेका। संतान की इच्छा हर वर्ग में होती है पर कुपुत्र संतान के बारे में सोचना भी भयावह है। प्रेमपत्र तो 80-90 के दशक में हर प्रेमी और प्रेमिका के जीवन में कभी सुखदाई रहे होंगे, पर समय बीत जाने पर यादों के झरोखे अचानक सामने आ जाएँ तो कुछ पल के लिए जैसे जीवन ठहर जाता है। अतीत के सारे पन्ने फिर से पलटने लगते है कभी मुस्कराहट और कभी आँखों में नमी का सबब बन जाते हैं। जैसे एक माँ जो अपने बच्चे के जीवन के लिए बिलखती रहे और जैसे मुट्ठी से रेत फिसलती है ऐसे अपनी गोद में माँ के बच्चे का जीवन फिसलता जाए और मानवता शर्मसार हो रही हो
https://play.google.com/store/books/details/Aarav_Mishra_%E0%A4%96_%E0%A4%9F_%E0%A4%B8_%E0%A4%95_%E0%A4%95

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@aarav_mishra25 18/03/2024

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कहानियों में मार्मिकता तथा समाज का घिनौना रूप बिलकुल वैसे ही हैं जैसे दिन रौशनी और अँधेरा साथ-साथ लिए रहता है। एक युवक जो सोने (स्वर्ण) की लालसा में, जब सारी दुनिया सो रही होती है तब सोने (नींद) के बजाय, अपने सुनहरे सपनों की लालसा में जाग कर सोने (स्वर्ण) के लिए जाता है, और सोने (स्वर्ण) से भरा मटका लिए घर लौटते हुए न सोने (नींद) के कारण गिरकर धाराशायी हो जाता है। सत्ता और प्रभुत्व में लिप्त व्यक्ति यदि घोर पाप भी कर जाएँ तो समाज को फर्क नही पड़ता, पर कमज़ोर व्यक्ति ग़लत न भी हो फिर भी समाज की नज़र में दोषी है और सजा का हक़दार भी। धर्म को जब जीवन यापन का सहारा बना लिया एक दूकानदार ने, तो सत्ता के सेवकों ने माथा टेका। संतान की इच्छा हर वर्ग में होती है पर कुपुत्र संतान के बारे में सोचना भी भयावह है। प्रेमपत्र तो 80-90 के दशक में हर प्रेमी और प्रेमिका के जीवन में कभी सुखदाई रहे होंगे, पर समय बीत जाने पर यादों के झरोखे अचानक सामने आ जाएँ तो कुछ पल के लिए जैसे जीवन ठहर जाता है। अतीत के सारे पन्ने फिर से पलटने लगते है कभी मुस्कराहट और कभी आँखों में नमी का सबब बन जाते हैं। जैसे एक माँ जो अपने बच्चे के जीवन के लिए बिलखती रहे और जैसे मुट्ठी से रेत फिसलती है ऐसे अपनी गोद में माँ के बच्चे का जीवन फिसलता जाए और मानवता शर्मसार हो रही हो https://play.google.com/store/books/details/Aarav_Mishra_%E0%A4%96_%E0%A4%9F_%E0%A4%B8_%E0%A4%95_%E0%A4%95 https://www.facebook.com/profile.php https://bookscape.com/product-details/khota-sikka-9788119511440 https://dl.flipkart.com/s/h5dD7suuuN https://amzn.eu/d/4dqjcvp @aarav_mishra25

27/02/2024

आरव मिश्रा भाई एक उम्दा लेखक है और उनके द्वारा लिखी किताब खोटा सिक्का आज मुझे उनके हाथों से मिला ये मेरा सौभाग्य है, इस किताब में लिखी कहनी को मैं जल्द ही पढूंगा और फिर कहनी की समीक्षा करूंगा। वैसे आपलोग भी घर बैठे इस किताब को ऑनलाइन मंगवा सकते है। https://amzn.eu/d/2cO9iOV

Aarav Mishra

26/02/2024

खोटा सिक्का ये मेरे काबिल मित्र आरव मिश्रा जी द्वारा लिखी गई किताब है, ये बहुत ही खूबसूरत कहानियो से गढ़ी गई किताब है, इसको पढ़ते समय आप ख़ुद को इनके इर्द गिर्द पाते हो ये आपको अपने बचपन मे या अपने आस पास के समाज को दिखाती है. कुछ कहानियाँ तो आपको अपने अंदर झाकने पर मज़बूर करती है, आरव की लेखनी की ख़ूबसूरती ये है की बहुत भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल ना करते हुए बहुत ही आसान भाषा मे बहुत ही गहरी बात बोल जाते हैं,
इस किताब मैं मेरा भी नाम आपको दिखेगा थोड़ी बहुत समझ रखते हुए मैंने जो भी सुझाब दिये थे वो लेखक ने माने तो उसके लिये धन्यवाद आपका और बहुत बहुत बधाई इस किताब के लिए तो आप लोग भी पढ़ियेगा ज़रूर कुछ अच्छी कहानियों से रूबरू होइये आपको भी बहुत पसंद आयेंगी
*खोटा सिक्का*

12/02/2024

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