K.Music Uttarakhand
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05/11/2023
https://youtu.be/f5YSVue6eTY?feature=shared
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Kishor Music 🎵 की धमाके दार प्रस्तुति
Song - झुमेलो लगोला
Singer - Manish Rathi & Shivani Negi
Music - Vicky Juyal
Camera - Rajveer Gusain
editing & Lyrics - Manish Rathi
झुमेलो लगोला Latest Garhwali Song. Jhumelo Lagola Manish Rathi & Shiani Negi Kishor Music झुमेलो लगोला|| झुमेलो लगोला || New Garhwali Video 2023 || Kishor MusicSong - झुमेलो लगोलाSinger - Manish Rathi & Shivani NegiMusic - Vicky Juyal ...
27/12/2022
https://youtu.be/K02AKlZbuy0
https://youtu.be/K02AKlZbuy0
https://youtu.be/K02AKlZbuy0
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04/11/2022
उत्तराखंड में सदियों से चले आ रहे इगास-बग्वाल की परम्परा उत्तराखण्ड वासियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आपको बताया दे कि सदियों से गढ़वाल में दीपावली को बग्वाल के रूप में मनाया जाता है। जबकि दीपावली (बग्वाल) के ठीक 11 दिन बाद गढ़वाल में एक और दीपावली मनाई जाती है, जिसे ईगास कहा जाता है। दीपावली से 11 दिन बाद आने वाली एकादशी को इगास मनाया जाता है। इस पर्व के दिन सुबह मीठे पकवान बनाये जाते हैं जबकि रात में स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के बाद भैला जलाकर उसे घुमाया जाता है और ढोल नगाड़ों के साथ आग के चारों ओर लोक नृत्य किया जाता है। दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
एक पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष बाद लंका विजय कर अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने दिये जलाकर उनका स्वागत किया और उसे दीपावली के त्योहार के रूप में मनाया। लेकिन कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में लोगों को इसकी जानकारी 11 दिन बाद मिली। इसलिए यहां पर दीपावली के 11 दिन बाद यह दीवाली (इगास) मनाई जाती है।
वहीं दूसरी और सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी टिहरी के राजा महीपति शाह की सेना के सेनापति थे। करीब 400 साल पहले राजा ने माधो सिंह को सेना लेकर तिब्बत से युद्ध करने के लिए भेजा। इसी बीच बग्वाल (दीपावली) का त्यौहार भी था, परन्तु इस त्यौहार तक कोई भी सैनिक वापिस ना आ सका। सबने सोचा माधो सिंह और उनके सैनिक युद्ध में शहीद हो गए, इसलिए किसी ने भी दीपावली (बग्वाल) नहीं मनाई.
परन्तु दीपावली के ठीक 11वें दिन माधो सिंह भंडारी अपने सैनिकों के साथ तिब्बत से दवापाघाट युद्ध जीत वापिस लौट आए। कहा जाता है कि युद्ध जीतने और सैनिकों के घर पहुंचने की खुशी में उस समय दिवाली मनाई थी। उस दिन एकादशी होने के कारण इस पर्व को इगास नाम दिया गया और उसी दिन से गढ़वाल क्षेत्र में दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाया जाता है।
इगास पर्व के दिन लोग घरों की लिपाई-पुताई कर पारम्परिक पकवान बनाते है। गाय-बैलों की पूजा की जाती और रात को पूरे उत्साह के साथ गाँव में एक जगह इकठ्ठे होकर भैलो खेलते। भैलो का मतलब एक रस्सी से है, जो पेड़ों की छाल से बनी होती है। इगास-बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगा देते हैं और फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते हैं।
इस ईगास के शुभ अवसर पर K.Music आप के लिऐ ले कर आया है एक बहुत ही सुंदर प्रस्तुती
*योग नगरी ऋषिकेश*
कैमरा मैन– सुरेंद्र कोश्यारी
एंकरिंग–किशोर पुसोला
स्क्रिप्ट– राकेश पुंडीर & भावना खत्री
प्रोजेक्ट मैनेजर– संदीप सींग & नैना
लिंक को क्लिक
https://youtu.be/K02AKlZbuy0
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कर के ज़रूर देखें वीडियो और अच्छा लगे तो like share और comment जरूर करे
एक बार फिर से आप सभी लोगों को ईगास की ढेर सारी शुभकामनाए जै हिंद जै उत्तराखण्ड जै मां नंदा देवी 🙏
Yog Nagri RISHIKESH || UTTARAKHAND || Full Tour 2022 Yog Nagri RISHIKESH || UTTARAKHAND || Full Tour 2022
आपको एवं आपके परिवार को प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं !! 🙏समस्त परिवार की ओर से🙏
💫ll शुभ दीपावलीll💫
अंकिता की अन्तिम विदाई
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