ARYA YOGA
We are DELHI (INDIA) based Yoga and Fittness group providing total physical,mental fitness for indiv IT HAS WELL DEFINED STATE OF GOAL.
YOGA
SYSTEMATIC APPROACH TO PHYSICAL, EMOTIONAL SOCIAL, MENTAL, DEVELOPMENT WHICH LEADS TO SPIRITUAL DEVELOPMENT. A STATE FREE FROM CONFLICTS, TENSION, IMPULSES, EGOISTIC-TENDENCIES. SYSTEMATIC METHOD TO HARMONISE THE VARIOUS LAYERS AND TO AWAKEN THE LATENT HIDDEN POWERS WITHIN. MEANS WHICH TELLS AND ADVICE, PRACTICES TO LIVE IN HARMONY, LOVE, AFFECTION, CREATIVITY, ENERGY, EFFICIENCY
SCHOOLS OF
21/06/2022
HAPPY INTERNATIONAL YOGA DAY 2022
05/04/2020
आप सभी का स्वागत है
लॉक डाउन में घर बैठे पाइए स्वस्थ और फिट रहने के टिप्स और जानिए योग करने के तौर तरीके
20/06/2019
भाई अपने तन से मन से, दूर कुरोग करें।
आओ योग करें। आओ योग करें।।
स्वास्थ्य हमारा अच्छा है तो, सारा कुछ है अच्छा।
रोग ग्रसित अब नहीं एक भी, हो भारत का बच्चा।।
सूर्योदय से पहले उठकर, निपटे नित्य क्रिया।
सदा निरोगी काया जिसकी, जीवन वही जिया।।
उदाहरण कोई बन जाए, वह उद्योग करें।।
आओ योग करें। आओ योग करें।।
सांसों का भरना-निकालना, प्राणायाम हुआ।
अपने दिल-दिमाग का भाई, यह व्यायाम हुआ।।
किया भ्रामरी और भस्त्रिका, शुचि अनुलोम-विलोम।
सुन्दर है कपाल की भाती, पुलक उठे हर रोम।।
सांस-सांस द्वारा ईश्वर से, हम संयोग करें।
आओ योग करें। आओ योग करें।।
सभी शक्तियों का यह तन है, सुन्दर एक खजाना।
यौगिक क्रिया-कलापों द्वारा, सक्रिय इन्हें बनाना।।
फल-मेवा-पकवान दूध-घी, सब कुछ मिला प्रकृति से।
हमने निज खाना-पीना ही, किया विकृत दुर्मति से।।
ज्ञान और अपने विवेक से, हम सब भोग करें।
आओ योग करें। आओ योग करें।।
पानी और हवा दूषित हो, कुछ न करें ऐसा हम।
चले संभलकर थोड़ा तो यह, दुनिया बड़ी मनोरम।।
सुख से जिएं और सुख से ही, हम जीने दें सबको।
वेद-पुराण-शास्त्र सारे ही, यह बतलाते हमको।।
ईश प्रदत्त शक्ति-साधन का, हम उपयोग करें।
आओ योग करें। आओ योग करें।।
20/06/2019
Please join tomorrow
कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शाम 6 बजे सीतामढ़ी पेज पर लाईव आ रहे हैं 'आर्य योगा' के नाम से #दिल्ली, एनसीआर में मशहूर, सीतामढ़ी निवासी #योग_गुरु #विजय_आर्य
पिछले पन्द्रह वर्षों से दिल्ली में एक कॉरपोरेट योगा ट्रेनर, योग इंस्ट्रक्टर,पर्सनल ट्रेनर और नेचर क्यूर थेराफिस्ट हैं । योग और मैडिटेशन में परास्नातक डिग्री प्राप्त विजय आर्य दिल्ली के फाइव स्टार होटल शंघृला में योग कंसल्टेंट रह चुके हैं । दिल्ली सरकार के कई कार्यक्रमों, कैम्पों में योग के विशेष ट्रेनर भी रह चुके हैं । वर्तमान में भी दिल्ली के कई होटल,हॉस्पिटल, एनजीओ आदि में योगा थेराफीजिस्ट हैं ।
कल #सीतामढ़ी_पेज पर लाईव आ रहे हैं आपसे लाईव रूबरू होने । फिटनेस और योग के टिप्स भी बताएंगे । अपने सवालों के साथ तैयार रहिये । आप इनके फेसबुक पेज से भी जुड़ सकते हैं : facebook.com/aryayoga.in
इनका ईमेल आईडी है : [email protected]
सीतामढ़ी पेज के सक्रिय सदस्य हैं विजय आर्य जी ।
तो मिलते हैं कल शाम संध्या 6 बजे पेज पर लाईव,
दिल्ली में रह रहे सीतामढ़ी के योग गुरु, योग ट्रेनर और फिटनेस एक्सपर्ट विजय आर्य जी से ।। शुभकामनाएं 💐💐
धन्यवाद ।
21/06/2018
🙏🏻🕉आप सभी मित्रो को विश्व योग दिवसः की बहुत बहुत शुभकामनाएं
आप सदा खुश रहे निरोगी 🕉🙏🏻
21जून 2018 (प्रोटोकॉल)
🙏(1)प्रार्थना =
ऊँ संगच्छध्वं संवदध्वं
सं वो मनांसि जानताम्
देवा भागं यथा पूर्वे
सञ्जानाना उपासते
✒अर्थात =
हम सभी प्रेम से मिलकर चलें मिलकर बोलें और सभी ज्ञानी बने अपने पूर्वजों की भाँति हम सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें !!
🏋♂(2)खड़े होकर शिथिलीकरण =
(क) सीधा खड़े होकर श्वाँस भरते हुए दोनों हाथों को नीचे की तरफ खीचना
(ख) दोनो हाथ फैलाकर श्वाँस भरते हुए खीचना
(ग) दोनों हाथ उठाकर ऊपर की तरफ श्वाँस भरते हुए खीचना
🚴♂संचालन =
(क) ग्रीवा चालन
(ख) स्कन्ध संचालन
(ग) कटि संचालन
(घ) घुटना संचालन
🤸♀(3)खड़े होकर किए जाने वाले योगासन=
(क) ताड़ासन
(ख) वृक्षासन
(ग) पाद-हस्तासन
(घ) अर्द्धचक्रासन
(ड.)त्रिकोणासन
🧘♂(4)बैठकर किए जाने वाले आसन
(क) भद्रासन
(ख) बज्रासन
(ग) अर्ध उष्ट्रासन
(घ) उष्ट्रासन
(ड.) शशांकासन
(च) उत्तान मंडूकासन
(छ) वक्रासन
🤹♂(5)अधोमुख(पेट के बल) लेटकर किए जाने वाले आसन=
(क) मकरासन मे सिर्फ लेटना है
(ख) भुजंगासन का तीसरा भाग हाथ बगल में
(ग) शलभासन
🏊♀(6) उत्तान स्थिति पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन=
(क) सेतुबंधासन
(ख) उत्तानपादासन
(ग) अर्द्धहलासन
(घ) पवन मुक्तासन
(ड.) शवासन
🧘♂(7) प्राणायाम =
(क)कपालभाति प्राणायाम
तीन चक्रों में। प्रत्येक चक्र में 40 बार
(ख) नाड़ी शोधन/अनुलोम विलोम प्राणायाम (5चक्र10बार)
(ग) शीतली प्राणायाम्र (घ)भ्रामरी प्राणायाम बिना हाथ लगाए 3बार
(ड.)) भ्रामरी प्राणायाम हाथ लगाकर 3बार
(च) ध्यान/ ध्यानस्थ मुद्रा में ध्यान (आंखें बंद) 6मिनट
🕴संकल्प दायां हाथ आगे करके =
मै संकल्प लेता हूँ कि सर्वदा अपनी सोच में संतुलन बनाए रखूँगा ऐसी मनः स्थिति मेरे उच्चतम आत्म विकास की असीम सम्भावनाये प्रदान करती है मै अपने कर्तव्य निर्वाह के प्रति कुटुम्ब और कार्य के प्रति तथा समाज व समूचे विश्व में शांति स्वास्थ्य और सौहार्द के प्रसार के लिए कृत संकल्पित हूँ!!
🧘♂(9) शान्ति पाठ =
ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयः सर्वे भद्राणि पश्यनतु मा कश्चिद दुःख भाग्य भव वेद!
🙏सब सुखी हो सब निरोगी हो सब निरामय हो सबका मंगल हो कोई दुःखी न हो
🙏समापन =
ओऽम् शान्ति शान्ति शान्तिःॐ जी
🕉
02/01/2018
04/07/2017
सात चक्र और अपार सिद्धियां, जानिए कैसे होगा संभव
1. मूलाधार चक्र : यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह 'आधार चक्र' है। 99.9 लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।
मंत्र : लं
चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।
प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है।
2. स्वाधिष्ठान चक्र- यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।
मंत्र : वं
कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हो तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी।
3. मणिपुर चक्र : नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो दस दल कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।
मंत्र : रं
कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।
4. अनाहत चक्र- हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है, तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार, इंजीनियर आदि हो सकते हैं।
मंत्र : यं
कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है।
प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है। इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है।
व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता हैं। ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है।
5. विशुद्ध चक्र- कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां विशुद्ध चक्र है और जो सोलह पंखुरियों वाला है। सामान्यतौर पर यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।
मंत्र : हं
कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर सोलह कलाओं और सोलह विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।
6. आज्ञाचक्र : भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में आज्ञा चक्र है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इस बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।
मंत्र : ऊं
कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है।
7. सहस्रार चक्र : सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।
कैसे जाग्रत करें : मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।
प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।
The quality of our Thoughts
determines our own personal
degree of Happiness.🙏
07/01/2017
31/10/2015
OBESITY
First symptom of obesity is increase in weight; body loses its shape, due to accumulation of fats in various parts of body sometimes body balance is affected. The obese person has to spend extra energy for any movement, which results in reduction in overall movements; this reduction in overall activity further increases the weight, also the enthusiasm in any work goes down.
For a regular healthy life the weight has to be in certain limits, there is standard chart, which relates height and weight. If the difference is more than 10 % as mentioned in table then we may say that the person is obese. One can get a brief idea from this chart but not totally correct figures.
This increase in weight is a gradual process. The weight doesn't increase suddenly. We may overlook this, as this increase is not noticeable initially. But beyond certain limits this overweight may become reason for various diseases like Hypertension, Diabetes, Heart problems. So we need to control the weight from the beginning.
For the daily work we spend calories, which we get from the food we eat. But if we take more calories and spend less then the calories are accumulated in the form of fats. Increase in fats reduces body movements, which again increases the weight. So as to reduce the fat one must control the food habits.
Weight can increase because of digestive problems. Useful part of the food is absorbed in blood during the digestion. If there are some problems in this process then it may result in accumulation of fats. If the digestive problem is cured then obesity can reduce.
Endocrine glands control various activities of body. A problem in the functioning of endocrine glands results in various physical problems, obesity can also be because of problems in functioning of endocrine gland system. There is strain on endocrine gland system during childbirth, menopause in case of women. So if proper care is not taken during these transformations, it may result in obesity.
Sometimes because of problems in nervous system, obesity increases and in that case the nervous system problem is to be treated to cure obesity.
Body and mind has complex relations between them, because of mental and emotional imbalance, endocrine gland systems is affected, which may result in obesity.
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29/10/2015
ABOUT YOGA
yogaYoga has its roots in the ancient texts like the Vedas and the Upanishads. Technically speaking it’s a Hindu spiritual discipline though parts of it, like breath control, mediation and other body postures are practised by many for weight loss, better health and to get rid of stress. Yogis claim that treatments have benefited patients of autism, asthma and even cancer as they make the body more receptive to cure and healing. At ARYA YOGA, you’ll find everything you ever needed to know about yoga including the various yoga asanas, asanas for a better s*x life and how it helps battle ailments like diabetes, stress and depression, arthritis, belly fat and even menstrual pain.
Yoga has several interesting health benefits too. Yoga can actually help you deal with a variety of issues, it improves your s*xual health, helps you lose weight, improves your stamina and even beats migraines and insomnia. Sounds interesting, doesn’t it? Well, here are the 13 health benefits of yoga that you must know about.
Yoga shouldn't just be a fitness regime but it should be a way of life.While many of us resort to yoga as weight loss solution, there's much more to it. From helping you lose weight to improving your mental well being,yoga is your one-stop solution for all the problems. If you are a beginner it is ideal to take it slowly and steadily . Ensure that you are equipped with all the proper resources like a proper yoga mat and a right yoga guru and maintain hygiene before attending a yoga class.It is also advised to wear proper clothes while performing yoga.
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