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sugarcare.in is a one stop digital platform for diabetic patients. SugarCare(c) is a one stop platform for complete care for patients suffering from diabetes.

Through this platform patients will be able to get all services related to diabetes care including services from doctor, dietitian, fitness trainer, pharmacy and diagnostic center. More importantly, this platform will act has Electronic Health Record keeper for the patient and assist in sharing the records with various care givers for them to deliver better care to the patient. The platform will a

फेस्टिवल सीजन में डायबिटीज पेशेंट्स स्मूदीज से करें बॉडी को डिटॉक्स! - SUGARCARE.IN 14/11/2018

फेस्टिवल सीजन में डायबिटीज पेशेंट्स को अपने खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए। अगर आप स्मूदीज के शौकीन हैं तो डायबिटीज का ख्याल रखते हुए इसके ऐसे विकल्प ढूंढे जिनसे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहे। साथ ही स्वाद भी अच्छा हो। इस बारे में हमने बात की ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल की चीफ डायटीशियन डॉ. रशिका अशरफ अली से। वे बता रही हैं डायबिटीज पेशेंट्स के लिए खास ऐसे ही 2 स्मूदीज की रेसिपीज। स्ट्रॉबेरी स्मूदी - सामग्री : दूध - डेढ़ कप स्ट्रॉबेरीज - 1 कप केला - 1 अलसी - 2 टी स्पून विधि : दूध को गर्म करके ठंडा होने दें। अब स्ट्रॉबेरीज और केले के छोटे टुकड़े कर लें। इसमें अलसी मिलाएं और सब चीजों को ब्लेंडर में डाल दें। इसे ब्लेंड करने के बाद गिलास में निकालें और बर्फ डालकर पिएं। पालक स्मूदी - सामग्री : केला - 1 सेब - 1/2 पालक - 8-10 पत्ते दही - 2 चम्मच विधि : पालक के डंठल तोड़कर उसे छुरी से काट लें। केले का छिलका अलग हटाकर उसे छोटे टुकड़ों में काटें। अब सेब को भी काट लें और इन तीनों चीजों को ब्लेंडर में डालें। इसमें दही मिक्स करके ब्लेंड कर लें। इसे ब्लेंडर से निकालें और बर्फ डालकर पिएं। अगर मौसम के अनुसार बर्फ न डाल पाएं तो स्वाद के अनुसार नींबू डाल सकते हैं। एवोकेडो पाइनएप्पल स्मूदी - सामग्री : दूध - 1/2 कप चिया सीड्स - 2 टी स्पून एवाेकेडो - 1/2, पका और छिला हुआ पाइनएप्पल - 1/2 कप, छिला हुआ सेब - 1/2, छिला हुआ ब्रोकोली - 1/2 कप पालक - 1/2 कप बर्फ के टुकड़े - 1/2 कप विधि : ऊपर बताई गई सभी सामग्री को ब्लेंडर में डाल दें। इसे अच्छी तरह ब्लेंड करने के बाद ब्लेंडर से निकालें। इसे छानकर सर्व करें। Dr Rashika Ashraf Ali

फेस्टिवल सीजन में डायबिटीज पेशेंट्स स्मूदीज से करें बॉडी को डिटॉक्स! - SUGARCARE.IN फेस्टिवल सीजन में डायबिटीज पेशेंट्स को अपने खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए। अगर आप स्मूदीज के शौकीन हैं तो

ये 10 सेलेब्स डायबिटीज होने के बाद भी रहते हैं एकदम फिट! - SUGARCARE.IN 08/09/2018

डायबिटीज कंट्रोल करने के अब ऐसे कई तरीके मौजूद हैं जिन्हें फॉलो करके इस बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है। इसी बात को आम लोगों के साथ ही लोगों के दिलों पर राज करने वाले कई वे सेलेब्स भी समझ चूके हैं जिन्हें खुद डायबिटीज हैं। इन सेलेब्स ने डायबिटीज को कंट्रोल करने के आसान तरीके सीखें और उन्हें अपनाया भी। अब इनमें से अधिकांश सेलेब्स अपने काम को बखूबी अंजाम देने के साथ ही डायबिटीज पेशेंट्स को अवेयर करने का काम भी करते हैं। हम यहां बता रहे हैं ऐसे ही दस सेलेब्स के बारे में : 1. सोनम कपूर सोनम कपूर का वजन बचपन से ज्यादा था। टीन एज की उम्र तक आते-आते उन्हें डायबिटीज के बारे में पता चला। दरअसल सोनम को टाइप 1 डायबिटीज है जिसे कंट्रोल रखने के लिए वे इंसुलिन लेती हैं। साथ ही इस बीमारी को काबू में करने के लिए वे पॉवर योगा, वेट ट्रेनिंग और पायलेट्स जैसे वर्कआउट करती हैं। वे कहती हैं इस तरह के वर्कआउट से उन्हें डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है। फिट रहने के लिए वे स्क्वेश खेलना पसंद करती हैं। 2. फहाद खान फिल्म खूबसूरत में सोनम कपूर के को स्टार और पाकिस्तान के मशहूर एक्टर फहाद खान को डायबिटीज है। फहाद को इस बीमारी का पता महज 17 साल की उम्र में ही लग गया था। इस बीमारी का सामना करने के लिए फहाद हेल्दी डाइट जैसे दालें, अंडे और नींबू पानी लेना पसंद करते हैं। फहाद चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हो लेकिन रोज दो घंटे जिम में कसरत जरूर करते हैं। 3. सुधा चंद्रन सुधा चंद्रन एक कार एक्सीडेंट में अपने पैर गंवाने के बाद भी एक्टिंग से लेकर डांस में खुद को साबित करने में सफल रही हैं। जब उन्हें डायबिटीज होने का पता चला तो वे घबराई नहीं बल्कि उन्होंने इस बीमारी से जीतने की योजना बनाई। वे रोज दवा लेती हैं। साथ ही एक्सरसाइज करके अपनी फिटनेस को बनाए हुए हैं। बढ़ती उम्र में उनकी हिम्मत तारीफ के काबिल है। 4. सलमा हायेक सलमा हायेक को गर्भावधि डायबिटीज थी। डायबिटीज की यह स्थिति आमतौर पर प्रेग्रेंसी के दौरान सामने आती है। उन्होंने एक अमेरिकन बेबी मैगजीन को दिए इंटरव्यू में बताया कि यह बीमारी उनके परिवार में पीढिय़ों से चली आ रही है। डायबिटीज की इस कंडिशन से बचने के लिए सलमा प्रेग्रेंसी में अनहेल्दी फूड न खाने की सलाह देती हैं। सलमा कहती हैं अगर वक्त रहते गेस्टेशनल डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाए तो गर्भपात, बर्थ डिफेक्ट या डिलीवरी के दौरान उलझन के चांस बढ़ सकते हैं। 5. वसीम अकरम अपनी फिटनेस के लिए मशहूर क्रिकेटर वसीम अकरम को जब डायबिटीज के बारे में पता चला तो यह बात उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। लेकिन इस बीमारी ने उन्हें कमजोर नहीं किया बल्कि सामने आई परेशानी से पूरे जोश के साथ लडऩा सीखाया। वसीम डायबिटीज कंट्रोल करने का मूलमंत्र मेंटल डिसीप्लीन को मानते हैं। वसीम डायबिटीज होने के पहले के उन दिनों को याद करते हैं जब वे रोज बिरयानी, नान और कुल्चा खाते हैं। लेकिन डायबिटीज होने के बाद वे ऐसी चीजें अवॉयड करते हैं। वे रात को भारी भोजन नहीं खाते और एक बाउल सलाद लेना पसंद करते हैं। वसीम कहते हैं इससे मेरा शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। 6. कमल हासन कमल हासन दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपर हिट अभिनेता है। उन्हें भी डायबिटीज है। डायबिटीज होने के बाद भी वे इस बीमारी से हार माने बिना फिल्मों के साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं। साथ ही वे डायबिटीज के बारे में लोगों को जागरूक करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। अपनी फिटनेस को मेंटेन करने के लिए वे स्मोकिंग और अल्कोहल से दूर रहते हैं। 7. गौरव कपूर गौरव वीजे और आईपीएल एक्स्ट्रा इन्निंग्स के मेजबान हैं। गौरव को टाइप 1 डायबिटीज हैं जिसके बारे में उन्हें महज 22 साल की उम्र में पता चला। गौरव मानते हैं कि डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए स्ट्रेस फ्री लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है। वे दिन में दो बार खाना खाने के बजाय कम मात्रा में कई बार खाना पसंद करते हैं। साथ ही मेडिटेशन करके अपने फिटनेस को मेंटेन करते हैं। उनके फिजिकल सेशन में जॉगिंग, लाइट जिम सेशन जैसी एक्सरसाइज शामिल हैं। 8. सामंथा रुथ प्रभु दक्षिण भारत की इस खूबसूरत अभिनेत्री को डायबिटीज है। सामंथा के अनुसार आज के दौर में डायबिटीज एक कॉमन डिसीज है। हालांकि इसे कंट्रोल करने के लिए अनुशासन बद्ध जिंदगी जीना जरूरी है। सामंथा रोज पांच बजे उठती हैं। वे अपने वर्कआउट रूटीन को कभी मिस नहीं करती। जॉगिंग उनकी फेवरेट एक्सरसाइज है। साथ ही वे मार्शल आर्ट भी करती हैं। वे बॉडी को हाइड्रेट रखने के लिए रोज नारियल पानी पीती हैं। साथ ही ताजे फलों का रस और प्रोटीन बेस्ड डाइट लेना पसंद करती हैं। 9. शेरॉन स्टोन हॉलीवुड एक्ट्रेस शेरॉन स्टोन को टाइप 1 डायबिटीज है। वे डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक् शन लेती हैं। काम के अतिरिक्त दबाव और लंबी वर्किंग शिफ्ट होने के बाद भी वे इस बीमारी को कंट्रोल करके हेल्दी लाइफस्टाइल लीड कर रही हैं। 10. बिली जिन किंग अमेरिका की इस पूर्व टेनिस खिलाड़ी को डायबिटीज होने का पता 2006 में चला। इस बीमारी से लडऩे के लिए सबसे पहले उन्होंने अपना वजन लगभग 15 किलो कम किया। बिली को इस बात की खुशी है कि उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर डायबिटीज को कंट्रोल कर लिया।

ये 10 सेलेब्स डायबिटीज होने के बाद भी रहते हैं एकदम फिट! - SUGARCARE.IN डायबिटीज कंट्रोल करने के अब ऐसे कई तरीके मौजूद हैं जिन्हें फॉलो करके इस बीमारी की गंभीरता को कम किया

रोज अलसी खाकर कंट्रोल करें डायबिटीज ! - SUGARCARE.IN 26/07/2018

ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक कैनेडियन स्टडी के अनुसार चार हफ़्ते तक 50 ग्राम अलसी खाने वाले लोगों में इसे खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल 27 प्रतिशत कम होता देखा गया। अलसी खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। यह टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क को कम करती है। अलसी के फायदों को देखते हुए डॉक्टर्स डायबिटीक पेशेंट को रोज अलसी खाने की सलाह देते हैं। नानावटी हॉस्पिटल, मुंबई की चीफ डायटीशियन डॉ. उषा किरण सिसोदिया कहती हैं रोज अलसी खाने से वजन कंट्रोल रहता है। इससे कब्ज की प्रॉब्लम दूर होती है। अलसी से बॉडी की इम्युनिटी इम्प्रूव होती है। फाइबर रिच फूड होने की वजह से यह ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद करता है। उषा के अनुसार डायबिटीज पेशेंट को दिन में तीन बार एक चम्मच अलसी को गर्म पानी के साथ लेना चाहिए। आप चाहें तो अलसी को दरदरा पीस कर रख लें। रोज दो चम्मच अलसी को गर्म पानी के साथ लें। अगर अलसी को इस तरह खाना पसंद न हो तो इसे पीसकर आटे में मिला लें। इस आटे से बनी रोटी भी खा सकते हैं। महर्षि आयुर्वेद हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा के अनुसार अलसी में फाइबर्स, अल्फा लिनोलेनिक एसिड और जरूरी फैटी एसिड्स होते हैं जो डायबिटीज पेशेंट को कब्जियत से बचाताे हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अलसी की तासीर गर्म होती है। इसलिए गर्मी में इसे नहीं खाना चाहिए। जबकि अलसी को सीमित मात्रा में किसी भी मौसम में खा सकते हैं। दुनिया के 127 हेल्दी फूड में से एक अलसी में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल एलिमेंट्स होते हैं। अलसी खाने से बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ती है। अलसी को पीसकर इसका पाउडर बना लें। इसे वेजिटेबल या फ्रूट जूस में मिलाकर ले सकते हैं। डॉ. भानु शर्मा कहती हैं कि साबुत अलसी अधिक समय तक घर में रखने पर भी खराब नहीं होती है लेकिन अगर आप इसका पाउडर बनाकर रखते हैं, तो वो जल्दी खराब हो सकता है। इसलिए जरूरत के मुताबिक की अलसी को पीसें। कुछ लोगों को ज्यादा सिकी हुई अलसी पसंद होती है। जबकि कई लोग अलसी को घी में भुनकर भी खाते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो याद रखें ज्यादा भुनने या देर तक फ्राई करने से अलसी में मौजूद प्रॉपर्टीज कम हो जाती है। इससे इसका टेस्ट भी खराब होता है। ऐसे भी खा सकते हैं अलसी : 1. राज नाश्ते में कॉर्नफ्लेक्स के साथ अलसी और दूध मिलाकर खाएं। 2. स्मूदी में अलसी का पाउडर मिलाकर लेना भी डायबिटीज पेशेंट के लिए फायदेमंद माना जाता है। 3. दही में फलों के साथ अलसी का पाउडर मिलाकर ले सकते हैं। 4. सलाद में अलसी को कूटकर मिला लें। इसे सलाद की टॉपिंग के लिए भी यूज किया जा सकता है। 5. अगर आप सूप के शौकीन हैं तो सूप पीने से पहले उसमें अलसी को पीसकर मिला लें। इससे सूप का टेस्ट बढ़ेगा और अलसी के फायदे भी आपको मिलेंगे। ऐसे बनाएं अलसी का रायता : सामग्री : लौकी (कद्दूकस की हुई) - 1 कप दही - 1 कप पुदीना (कटा हुआ) - आधा कप जीरा (पिसा हुआ) - 1/ 4 टी स्पून काला नमक - 1/ 4 टी स्पून अलसी का पाउडर - 1 टी स्पून नमक - स्वादानुसार बनाने का तरीका : कद्दूकस की हुई लौकी को कम आंच पर पांच मिनट तक उबालें। इसे छलनी में निथार लें। ऊपर बताई गई सारी सामग्री को दही में मिला लें। इसे एक घंटे तक फ्रिज में रखने के बाद सर्व करें। Usha Kiran Sisodiya

रोज अलसी खाकर कंट्रोल करें डायबिटीज ! - SUGARCARE.IN ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक कैनेडियन स्टडी के अनुसार चार हफ़्ते तक 50 ग्राम अलसी खाने वाले लोगों

एेलोवेरा से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय! - SUGARCARE.IN 26/07/2018

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज न किया जाए तो हार्ट अटैक के चांस बढ़ सकते हैं। इससे नर्व डैमेज और आंखों की रोशनी जा सकती है। डायबिटीज के खतरे को देखते हुए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट इसके इलाज के लिए एलोवेरा को फायदेमंद मानते हैं। इसीलिए हजारों सालों से एलोवेरा का यूज ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में होता है। एलोवेरा में इमोडिन एलिमेंट्स होता है। यह बॉडी में मौजूद ग्लूकोज के लेवल को कम करने में मदद करता है। रोज एलोवेरा जूस पीने से म्युसिलेज और ग्लूकोमेनन फाइबर्स मिलते हैं। इससे भूख कम लगती है और वजन कंट्रोल रहता है। इसमें पाए जाने वाले एलिमेंट्स जैसे क्रोमियम और मैगनीज बॉडी में इंसुलिन का लेवल बनाए रखते हैं। राजस्थान आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी, जोधपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरुण दधीच डायबिटीज के पेशेंट को रोज दो चम्मच एलोवेरा जूस पीने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार एलोवेरा जूस लिवर से संबंधित बीमारियों को दूर करता है। साथ ही यह इंसुलिन लेवल को कम करने में फायदेमंद है। डायबिटीज मरीजों द्वारा एलोवेरा जूस पीने के साथ ही इसे जेल के रूप में घाव पर लगाना भी इफेक्टिव होता है। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को एक बार चोट लग जाने के बाद घाव जल्दी नहीं भरते। ऐसे में अगर घाव पर एलोवेरा जूस लगा लें तो घाव जल्दी भरने लगता है और दर्द भी दूर होता है। एलोवेरा में डायटरी फाइबर ग्लूकोमेनन होता है। यह पानी में आसानी से घुल जाता है जो बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कम करता है। यह हेमीसेल्यूलोज कंपोनेंट ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है। एलोवेरा में एंथ्रोक्विनोंस और लेक्टिन्स जैसे एलिमेंट्स होते हैं। यह ब्लड में ग्लूकोज के लेवल को कम करते हैं। एक महीने तक एलोवेरा जूस पीने से डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल 50 तक कम हो सकता है। ऐलोवेरा से बॉडी के टॉक्सिन्स दूर होते हैं। इस तरह यह ब्लड में मौजूद ग्लूकोज की अधिक मात्रा को कम करने में भी फायदेमंद है। एलोवेरा में मौजूद फाइबर्स डाइजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। डायबिटीज पेशेंट्स को अगर कब्ज की प्रॉब्लम है तो उसे ट्रीट करने में एलोवेरा फायदेमंद होता है। जोड़ों के दर्द और दांत दर्द ठीक करने में एलोवेरा को इफेक्टिव माना जाता है। एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। यह डायबिटीज के दौरान होने वाली कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम जैसे अल्सर, वाउंड्स और इन्फेक्शन से बचाता है। एलोवेरा बॉडी में इंसुलिन के सिक्रीशन को बढ़ाता है। एलोवेरा में पाए जाने वाले नैचुरल एलिमेंट्स की वजह से इसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। महर्षि आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा के अनुसार डायबिटज के मरीजों को शुरूआत में सिर्फ एक चम्मच एलोवेरा जूस पीना चाहिए। कुछ दिनों तक जूस पीने के बाद इसकी मात्रा दो से तीन चम्मच तक बढ़ा सकते हैं। अगर आपको एलोवेरा जूस का टेस्ट पसंद न हो तो इसमें शहद मिलाकर पी सकते हैं। अपने टेस्ट के अनुसार एलोवेरा जेल को अन्य जूस और स्मूदी में मिलाकर भी पी सकते हैं। कई लोगों को एलोवेरा लेने का यह तरीका ज्यादा पसंद आता है। कैसे बनाएं एलोवेरा जूस : आवश्यक सामग्री : एलोवेरा की पत्ती - 1 चाकू छोटा बाउल - 1 ब्लेंडर पानी - आधा कप बनाने का तरीका : एलोवेरा की पत्तियों को धोकर सबसे पहले उसके किनारे के कांटों को चाकू की सहायता से निकाल कर अलग कर दें | इसकी पहली लेयर को चाकू की मदद से अलग कर लें। एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे ब्लेंडर में डालें और पानी मिला लें। इसे ब्लेंड करके गिलास में निकाल लें। एलोवेरा जूस का टेस्ट बढ़ाने के लिए इसमें नींबू या अदरक का रस मिला सकते हैं। चाहें तो इसे अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं। Dr. Arun Dadhich

एेलोवेरा से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय! - SUGARCARE.IN डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज न किया जाए तो हार्ट अटैक के चांस बढ़ सकते हैं।

भोज्य फाइबर -उच्च रक्त शर्करा स्तर का एक उपचार - SUGARCARE.IN 13/07/2018

भोज्य फाइबर जिसे चारा के रूप में भी जाना जाता है, पौधों का वह हिस्सा होता है जो हमारे शरीर पचा नहीं सकते हैं। दो प्रकार के भोज्य फाइबर होते हैं: घुलनशील भोज्य फाइबर और अघुलनशील भोज्य फाइबर। हम कह सकते हैं कि घुलनशील भोज्य फाइबर नरम फाइबर हैं जो रक्त ग्लूकोज (शर्करा) को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। है। घुलनशील फाइबर ओट ब्रैन, दलिया, फलियां (सूखे बीन्स और दालें ) और सेब, अमरूद, सपोटा (चीकू) जैसे फलों में मिल सकते हैं। अघुलनशील भोज्य फाइबर भारी फाइबर होते हैं जो मूलत: कब्ज रोकने में मदद करता है, पेट को साफ करने में। यह पाया जा सकता है गेहूं की भूसी, साबुत अनाज की रोटी, और अनाज, फल और सब्जियों में। कई खाद्य पदार्थों में घुलनशील भोज्य फाइबर और अघुलनशील भोज्य फाइबर दोनों शामिल होते हैं। भोज्य फाइबर का महत्व भोज्य फाइबर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसके कुछ फ़ायदों में शामिल हैं: शर्करा स्तर पर नियंत्रण रक्तचाप का प्रबंधन रक्त कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए भोजन तृप्ति वजन प्रबंधन आँतों की गतिशीलता बनाए रखना मधुमेह टाइप 2 में उच्च भोज्य फाइबर डाइट ओट ब्रैन, फलियों, सभी प्रकार के सूखे बीन्स, मटर, और दाल, और सेब जैसे फल एवं मूल वाली सब्जियों जैसे गाजर में पाया जाने वाला घुलनशील भोज्य फाइबर, मधुमेह वाले लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक माना जाता है। घुलनशील भोज्य फाइबर से पेट खाली होने में देर होती है जिससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि रक्त प्रवाह में ग्लूकोज देर से प्रविष्ट होता है और भोजन बाद की रक्त शर्करा में वृद्धि कम हो सकती है। किसी व्यक्ति में रक्त ग्लूकोज या चीनी के स्तर में हमेशा बढ़ोतरी से टाइप 2 मधुमेह हो सकता है, जो आम तौर पर 40 की उम्र के बाद होता है और स्ट्रोक तथा हृदय रोग का जोखिम दोगुना करता है। घुलनशील फाइबर के कोलेस्ट्रॉल-कम करने वाले प्रभाव से मधुमेह वाले लोगों को दिल की बीमारी का जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है। फाइबर सेवन बढ़ाने के लिए युक्तियाँ फाइबर सेवन बढ़ाने के लिए यहां हमारे आहार विशेषज्ञ द्वारा कुछ सुझाव दिए गए हैं: सब्जियां और फल छिलके सहित खाएं अधिक साबुत अनाज वाली रोटी, पास्ता, सीरीयल, क्रैकर्स और चावल खाएँ। अपने दैनिक आहार में साबुत अनाज के आटे का प्रयोग करें। सूप और सलाद में जौ, सेम, और मसूर मिलाएँ रस के बजाए ताजे फल अधिक खाएं। फ्लेक्स बीज खाएँ। भीगे हुए सूखे मेवे खाएँ।

भोज्य फाइबर -उच्च रक्त शर्करा स्तर का एक उपचार - SUGARCARE.IN Importance of Dietary Fibre intake for Diabetes patients and handy tips to increase fiber without much efforts or life style changes.

मधुमेह का निदान - सही रास्ता, सही समय! - SUGARCARE.IN 13/07/2018

मधुमेह दुनिया की सबसे आम पुरानी बीमारियों में से एक है तथा कई प्रमुख और गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों का प्रमुख कारण भी। इसीलिए इसके समय पर निदान की आवश्यकता है। यह बहुत स्पष्ट है कि अगर आप मधुमेह के विभिन्न संकेतों और लक्षणों का अनुभव करते हैं, या, यदि आप मधुमेह होने की उच्च जोखिम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, तो आपको इसके प्रारंभिक नियंत्रण के लिए जल्द से जल्द जांच या परीक्षण करवाना चाहिए। आमतौर पर यह सलाह दी जा सकती है कि 35 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के हर व्यक्ति को मधुमेह का परीक्षण करवाना चाहिए, और यदि परिणाम सामान्य हैं, तो हर तीन साल में फिर से परीक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन, जो लोग जोखिम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं उनके लिए किसी भी प्रकार की संभावना से बचने के लिए उम्र में पहले ही अपने चिकित्सक से मिलना चाहिए। परीक्षण करने और कितने बार किया जाए इसका निर्णय लेने में आपका चिकित्सक सबसे सही व्यक्ति होगा और आपको एक निश्चित निदान देने के लिए सबसे उपयुक्त परीक्षण का चयन करेगा। मधुमेह का निदान करने में कौन से परीक्षण आपकी मदद कर सकते हैं? आप पूर्वमधुमेह, सीमा रेखा मधुमेह या मधुमेह की श्रेणी में आ सकते हैं। समय पर निदान आवश्यक है ताकि इसकी रोकथाम या नियंत्रण के लिए जल्द कार्रवाई की जा सके। इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए और अन्य आवश्यक कारकों के आधार पर, आपका चिकित्सक निदान के लिए निम्न परीक्षणों का सुझाव दे सकता है: अ. प्लाज्मा ग्लूकोज परीक्षण (एफपीजी) उपवास: ययह परीक्षण खाली पेट आपके रक्त शर्करा स्तर को मापता है। इस परीक्षा से गुजरने का सबसे अच्छा समय सुबह में होता है जब आपको कुछ भी खाए बिना कम से कम 8 घंटे हो चुके होते हैं। यह परीक्षण मधुमेह या पूर्वमधुमेह का पता लगाने में सहायक है (यानी आपमें टाइप 2 मधुमेह विकसित करने की अधिक संभावना है लेकिन अभी तक यह हुआ नहीं है)। ब. एक मौखिक ग्लूकोज सहिष्णुता परीक्षण (ओजीटीटी):यह कम से कम आठ घंटे तक उपवास के बाद और ग्लूकोज युक्त पेय पीने के दो घंटे बाद भी आपकी रक्त शर्करा स्तर मापता है। इस परीक्षण का उपयोग मधुमेह या पूर्वमधुमेह रोग का निदान करने के लिए किया जा सकता है। पूर्वमधुमेह का निदान करने के लिए एफपीजी परीक्षण की तुलना में यह अधिक संवेदनशील परीक्षण है। स. आकस्मिक प्लाज्मा ग्लूकोज परीक्षण: इस परीक्षण में रक्त शर्करा को दिन के किसी भी समय चेक किया जा सकता है, भले ही आपने अपना अंतिम भोजन किसी भी समय खाया हो। इस परीक्षण का प्रयोग मधुमेह का निदान करने के लिए किया जा सकता है लेकिन पूर्वमधुमेह के निदान के लिए नहीं। यदि आपका आकस्मिक रक्त ग्लूकोज स्तर 200 मिलीग्राम / डीएल या उससे अधिक है, तो डॉक्टर आपको मधुमेह के निदान की पुष्टि करने के लिए किसी अन्य दिन एफपीजी या ओजीटीटी का उपयोग कर अपने रक्त ग्लूकोज स्तर की जांच करने की सलाह दे सकता है। द. ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन (एचबीए 1 सी) परीक्षण: इस रक्त परीक्षण की सलाह आमतौर पर उन लोगों को दी जाती है जिनमें मधुमेह का निदान हो चुका है। यह परीक्षण पिछले दो से तीन महीनों के दौरान आपकी औसत रक्त शर्करा का स्तर इंगित करता है और जानने में सहायता करता है कि आपके मधुमेह को कितनी अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा रहा है। महत्वपूर्ण: कुछ प्रयोगशालाएं इस परीक्षण के लिए अन्य संख्याओं का उपयोग कर सकती हैं। यदि उपर्युक्त परीक्षणों में से किसी एक में आपके परिणाम मधुमेह का संकेत दें; तो सलाह दी जाती है कि हमेशा एक अन्य दिन परीक्षण दोहरा कर अपने आँकड़ों की पुष्टि करें। चूंकि, उपचार मधुमेह के प्रकार पर निर्भर करता है, इसलिए यह जानना बहुत जरूरी होता है कि आपको किस प्रकार का मधुमेह है! हालांकि, ऊपर वर्णित परीक्षण यह पुष्टि कर सकते हैं कि आपको मधुमेह है, लेकिन, यह पहचानने के लिए कि यह किस प्रकार का है, कुछ अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है। इनमें रक्त परीक्षण शामिल हैं जिसमें कुछ ऑटोएंटीबॉडीज़ का उपयोग किया जाता है जैसे कि जीएडी ऑटोएंटीबॉडी परीक्षण या सी-पेप्टाइड परीक्षण। मधुमेह के एक या अधिक विशिष्ट प्रकार के ऑटोएंटीबॉडी की उपस्थिति टाइप 1 मधुमेह को इंगित करती है। यदि टाइप 1 मधुमेह का संदेह है, तो कीटोन की उपस्थिति की जांच के लिए मूत्र परीक्षण भी किया जा सकता है। ये फ़ैट के टूटने से उत्पन्न होते हैं। इसलिए, टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के बीच अंतर करने के लिए इन अतिरिक्त परीक्षणों का उपयोग भी निदान के हिस्से के रूप में भी किया जा सकता है। "एक बार मधुमेह का निदान होने के बाद, यह देखने के लिए सख्त निगरानी महत्वपूर्ण है कि उपचार योजना कितनी अच्छी तरह से काम कर रही है। इसलिए, यह जानना सुनिश्चित करें कि आपके कौन से परिणाम बहुत ऊँचे हैं और कौन से बहुत कम। यह जानने के लिए अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से परामर्श करें कि आपके परिणाम लक्ष्य सीमा से बाहर हों तो क्या क़दम उठाए जाएँ।" लेखक: कवलजीत कौर: कवलजीत हेल्थकेयर ऑपरेशंस में 15 से अधिक वर्षों के अनुभव वाली एक हेल्थकेयर पेशेवर है। उनका अंतिम कॉर्पोरेट पद सेंटर फॉर साइट में वाइस प्रेसिडेंट -संचालन था। एक लेखक के रूप में, उन्हें चिकित्सा सामग्री में विशेषज्ञता हासिल है। साथ ही वे वर्तमान स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्यों से संबंधित विषयों पर स्वास्थ्य देखभाल कंपनियों, वेब स्वास्थ्य पोर्टल, अस्पतालों आदि विभिन्न मंचों के लिए लिखती हैं तथा वर्तमान में हेल्थकेयर पत्रिका का नेतृत्व कर रहीं हैं।

मधुमेह का निदान - सही रास्ता, सही समय! - SUGARCARE.IN मधुमेह दुनिया की सबसे आम पुरानी बीमारियों में से एक है तथा कई प्रमुख और गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों का प्रमुख

मधुमेह - गर्भावस्था के दौरान एक अनचाहा अतिथि - SUGARCARE.IN 03/07/2018

गर्भावस्था के दौरान विभिन्न चिकित्सा स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जिनमें मधुमेह की वजह से होने वाली जटिलताओं का अपना ही महत्व है। गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह गर्भावधि मधुमेह के रूप में जाना जाता है। टाइप 1 मधुमेह (जहां पैंक्रियाज कम इंसुलिन उत्पन्न करता है या बिलकुल भी उत्पन्न नहीं करता ), और टाइप 2 मधुमेह (जहां शरीर इंसुलिन का सही ढंग से उपयोग नहीं करता है) की तरह, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह तब हो जाता है जब आपका शरीर स्वाभाविक रूप से गर्भावस्था के कारण अधिक इंसुलिन-प्रतिरोधी बन जाता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि आपके बच्चे को पोषण देने के लिए अधिक ग्लूकोज उपलब्ध हो। अगर गर्भावस्था के दौरान पैंक्रियाज इंसुलिन की बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, तब परिणामस्वरूप रक्त शर्करा का स्तर ऊँचा हो जाता है। अन्य प्रकार के मधुमेह के विपरीत, गर्भावस्था का मधुमेह स्थायी नहीं होता है। एक बार बच्चे का जन्म हो जाए, तो प्रसव के बाद रक्त शर्करा आम तौर पर सामान्य हो जाती है। लेकिन, इसे पहचानने और शीघ्रतापूर्वक इलाज करने की आवश्यकता है क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। डॉ. नीता गुप्ता (एमडी, एम.आर.सी.ओ.जी. , फेलो प्रजनन चिकित्सा और वर्तमान में फोर्टिस नोएडा में बांझपन सलाहकार) आगे व्याख्या करती हैं: यदि कोई महिला गर्भवती होने की कोशिश कर रही है, या पहले ही गर्भधारण कर चुकी है, उस दौरान मधुमेह का इलाज करना गर्भवती मां और बच्चे , दोनों के लिए आवश्यक है। गर्भावस्था का मधुमेह आमतौर पर गर्भावस्था के सप्ताह 24 और सप्ताह 28 के बीच शुरू होता है। आपके रक्त में फैलती शर्करा आपके बच्चे के विकास में मदद करती है। इंसुलिन आपके रक्त में बढ़ने वाले ग्लूकोज या चीनी से निपटने का काम करता है। जब शरीर में पर्याप्त इंसुलिन (हार्मोन जो शर्करा को ऊर्जा को परिवर्तित करने में मदद करता है) उत्पन्न नहीं होता है तब गर्भावस्था का मधुमेह हो जाता है। मधुमेह के कारण दोनों को होने वाले जोखिम ध्यान देने योग्य है: बच्चे के लिए जोखिम - समयपूर्व प्रसव (बच्चा बहुत जल्दी पैदा हो सकता है), भारी वजन, या सांस लेने की समस्या या प्रसव के तुरंत बाद कम रक्त ग्लूकोज । -गर्भपात या अचानक आईयूडी (गर्भावस्था के दूसरे भाग के दौरान गर्भ में बच्चा मर जाता है) - जन्म दोष: बच्चे के मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और फेफड़े जैसे अंग गर्भावस्था के पहले 8 सप्ताह के दौरान बनाना शुरू होते हैं। उच्च रक्त ग्लूकोज का स्तर हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे जन्म दोष होने का मौका बढ़ सकता है, जैसे हृदय दोष या मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में दोष। - बिग बेबी (मैक्रोसोमिया नामक एक स्थिति) यह प्लेसेंटा को पार करने वाले अतिरिक्त इंसुलिन के कारण होती है। यह प्रसव में अवरोध का कारण बनता है और जन्म प्रक्रिया के दौरान योनि प्रसव मुश्किल बना सकता है जिससे बच्चे को घातक चोटों के खतरे बढ़ सकते हैं। बड़े आकार का होने के कारण जन्म के समय बच्चे में उच्च रक्त शर्करा स्तर तथा बाद में बचपन में मोटापा भी हो सकता है। -पीलिया भी गर्भावस्था के दौरान मधुमेह का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। माँ के लिए जोखिम - प्रिक्लेम्प्शिया (उच्च रक्तचाप आमतौर पर मूत्र में प्रोटीन के साथ जिसे टाक्सीमिया कहा जाता है )। प्रिक्लेम्प्शिया गंभीर या जीवन-घातक समस्याओं का कारण बन सकती है। - मधुमेह से होने वाली आँख और गुर्दे की समस्याओं का बिगड़ना - मूत्राशय और योनि क्षेत्र में संक्रमण -मुश्किल प्रसव या सीज़ेरियन सेक्शन अब सवाल यह है कि गर्भावस्था के दौरान मधुमेह को कैसे रोकें? डॉ. नीता गुप्ता बताती हैं कि दो स्थितियां होती हैं यानि गर्भावस्था से पहले एक महिला को मधुमेह है या गर्भावस्था के दौरान उसे मधुमेह होता है, समाधान मुख्य रूप से दोनों के लिए समान होता है; -गर्भावस्था के मधुमेह के लिए आपके पारिवारिक (आनुवांशिक) बीमारी और / या आधिक उम्र में माँ बनना है, तो यह रोग विकसित होने की संभावनाएँ रोकने के लिए आप आधिक कुछ नहीं कर सकती हैं। लेकिन, गर्भावस्था के दौरान या गर्भावस्था से पहले , सक्रिय रहने, स्वस्थ आहार खाने और वज़न पर नियंत्रण रखने से टाइप 2 मधुमेह और गर्भावस्था के मधुमेह -दोनों के विकास के प्रति आपके जोखिम को कम करने में बड़ा प्रभाव पड़ सकता है । मधुमेह की स्थिति को दूर करने का एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आप अपने मधुमेह के प्रबंधन में अपनी स्वास्थ्य देखभाल (हेल्थकेयर) टीम को शामिल करें। आपकी हेल्थकेयर टीम में निम्न को शामिल करने की दृढ़ता से सिफ़ारिश की जाती है: -एक चिकित्सक डॉक्टर जो मधुमेह की देखभाल में माहिर हैं, जैसे एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या मधुमेह विशेषज्ञ - एक प्रसूतिज्ञानी जिसे मधुमेह से पीड़ित महिलाओं के इलाज का अनुभव हो -एक पंजीकृत आहार विशेषज्ञ जो आहार योजना में मदद करे रक्त ग्लूकोज के स्तर का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने, और आपके तथा आपके बच्चे के स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिए आपको अक्सर इन विशेषज्ञों तक जाने और सलाह मशविरे की आवश्यकता हो सकती है। इसके अतिरिक्त, आपको उन विशेषज्ञों की आवश्यकता हो सकती है जो मधुमेह से संबंधित समस्याओं का निदान और उपचार करते हैं, यदि आपको समस्याएं आती हैं जैसे कि; दृष्टि की समस्याएं, गुर्दे की बीमारी और हृदय रोग। अच्छी खबर यह है कि हालाँकि गर्भावस्था के मधुमेह की संभावित जटिलताएँ गंभीर हैं, लेकिन स्थिति को आसानी से आपकी हेल्थकेयर टीम की मदद से प्रबंधित किया जा सकता है। लेकिन समस्या के जल्दी निदान के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण कुछ बातें हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए। गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के 24 वें और 28 वें सप्ताह के बीच रक्त शर्करा परीक्षण किया जाना चाहिए। आपके डॉक्टर द्वारा पूर्व -गर्भावस्था परीक्षा में आमतौर पर शामिल होता है आपका एचबीए 1 सी स्तर (कुछ सप्ताहों / महीनों की अवधि में औसत रक्त शर्करा का स्तर) मापना ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि रक्त ग्लूकोज का स्तर नियंत्रण में हैं। एक ग्लूकोज स्क्रीनिंग टेस्ट, जहां आपको एक मीठा तरल पीना पड़ता है और एक घंटे बाद आपका रक्त निकाला जाता है। वह आपकी स्थिति अच्छी तरह से दर्शा सकता है। यदि आपके स्तर ऊँचे निकलते हैं, तो डॉक्टर आपका तीन घंटे का ग्लूकोज सहिष्णुता टेस्ट लेंगे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि आपको गर्भावस्था का मधुमेह है अथवा नहीं। गर्भावस्था के मधुमेह का निदान होने पर क्या करना चाहिए? दिन में कई बार अपने रक्त शर्करा के स्तर की जाँच करें। सुबह सबसे पहले अपनी उपवास शर्करा दर जाँचें और फिर प्रत्येक भोजन के एक घंटे बाद, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी रक्त शर्करा स्वस्थ सीमा में रहती है। अपने आहार विशेषज्ञ से आहार योजना प्राप्त करें। कई महिलाओं को बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद भी गर्भावस्था के मधुमेह वाले कम कार्बोहाइड्रेट, कम-मीठे खाद्य पदार्थों वाले आहार नियंत्रण में रहना पड़ सकता है। खाद्य विवरण रखना भी एक अच्छा विचार है जिससे समझ आए कि कौन से खाद्य पदार्थ आपकी रक्त शर्करा बढ़ा रहे हैं। व्यायाम करें और सक्रिय रहें। आपको अपनी तीसरी तिमाही में अतिरिक्त भ्रूण निगरानी से गुजरना पड़ सकता है ताकि बच्चे की हृदय गति और गतिविधि सामान्य है यह सुनिश्चत किया जा सके। आपको मधुमेह का प्रबंधन करने में मदद के लिए मधुमेह की दवाएं लेने के लिए कहा जा सकता है। अधिक संभावना है कि गर्भधारण से 3 महीने पहले, और गर्भधारण के बाद भी, आपको विभिन्न विटामिन और फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाएगी जिससे आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिले। - कई महिलाएं गर्भावस्था में मधुमेह से अच्छे परिणामों के साथ निकल आने में सक्षम होती हैं। एकमात्र मंत्र है अपने ग्लूकोज के स्तर का प्रबंधन करना, उचित पोषण और व्यायाम को प्राथमिकता देना और अपनी स्वास्थ्य देखभाल टीम से जुड़े रहना। लेखक: कवलजीत कौर: कवलजीत हेल्थकेयर ऑपरेशंस में 15 से अधिक वर्षों के अनुभव वाली एक हेल्थकेयर पेशेवर है। उनका अंतिम कॉर्पोरेट पद सेंटर फॉर साइट में वाइस प्रेसिडेंट -संचालन था। एक लेखक के रूप में, उन्हें चिकित्सा सामग्री में विशेषज्ञता हासिल है। साथ ही वे वर्तमान स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्यों से संबंधित विषयों पर स्वास्थ्य देखभाल कंपनियों, वेब स्वास्थ्य पोर्टल, अस्पतालों आदि विभिन्न मंचों के लिए लिखती हैं तथा वर्तमान में हेल्थकेयर पत्रिका का नेतृत्व कर रहीं हैं।

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कलौंजी से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय - SUGARCARE.IN 19/06/2018

डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज, किडनी प्रॉब्लम और अल्जाइमर जैसी बीमारियों की संभावना रहती है। आमतौर पर इसे कंट्रोल करने के लिए लोग एलोपैथिक दवाएं लेते हैं। लेकिन इस बीमारी का अगर आयुर्वेदिक इलाज भी किया जाए तो बेहद फायदेमंद साबित होता है। डायबिटीज में फायदेमंद ऐसी ही आयुर्वेदिक दवा है कलौंजी जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टर भी रिकमेंट करते हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सी आर यादव के अनुसार आज कल लोगों की डाइट से कलौंजी जैसी कड़वी चीजें जैसे गायब हो चुकी हैं। वे यह नहीं जानते कि लिवर और पेनक्रियाज को पूरी तरह काम करने के लिए इन चीजों की खास जरूरत होती है। वह बता रहे हैं डायबिटीज में कलौंजी को किस तरह लेने से फायदा होता है। कलौंजी को दरदरा पीस कर एक मर्तबान में रख लें। रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच कलौंजी खाने से डायबिटीज कंट्रोल रहती है। जिन लोगों को कलौंजी का कड़वा टेस्ट पसंद न हो, वे इसे शहद के साथ ले सकते हैं। कलौंजी को पीसकर इसका पाउडर बना लें और इसे नींबू के रस के साथ लें। इसके अलावा एक चम्मच कलौंजी को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर पीने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है। किसी भी लेवल पर होने वाली शुगर में यह प्रयोग कारगर साबित होता है। रोज सुबह एक कप काली चाय में आधा चम्मच कलौंजी के तेल को मिलाकर सुबह और शाम पीना भी डायबिटीज में फायदेमंद होता है। दरअसल कलौंजी में फिक्स्ड ऑयल्स, अल्केलॉइड्स, थायमोक्विनॉन और थायमोहाइड्रोक्विनोन जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। जर्नल ऑफ एथनोफॉर्मेकॉलॉजी में प्रकाशित स्टडी के अनुसार कलौंजी आंतों में ग्लूकोज के अब्जॉर्बशन में मदद करती है। यह पेनक्रियाज में बीटा सेल्स को डैमेज होने से बचाती है। इन्हीं बीटा सेल्स से इंसुलिन का प्रोडक्शन होता है। इस तरह कलौंजी से टाइप 1 डायबिटीज का खतरा कम होता है। जर्नल ऑफ एंडोक्रायोनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक कलौंजी में पाए जाने वाला थायमोक्विनोन टाइप 1 डायबिटीज के रिस्क को कम करने में मदद करता है। यह लिवर की सेल्स में इंसुलिन की सेंसेटिविटी को बढ़ाता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज की संभावना कम होती है। कलौंजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स के हार्मफुल इफेक्ट से पेनक्रियाज की सेल्स को बचाती हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट कलौंजी की तरह इसके तेल को भी डायबिटीज में इफेक्टिव मानते हैं। यह तेल डायबिटीज के साथ ही किडनी प्रॉब्लम और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इफेक्टिव है। इसके तेल में थायमोक्विनोन के अलावा आइसोक्लिनोलिन अल्केलॉइड्स, पायरेजॉल अल्केलॉइड्स जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। डॉ. सी आर यादव कहते हैं कि कलौंजी के आधा चम्मच तेल में कलौंजी के दाने, राई, अनार के छिलकों का पाउडर बनाकर लेने से भी शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इसे रोज सुबह खाली पेट खाना ज्यादा फायदेमंद है। कब न खाएं कलौंजी : वैसे तो कलौंजी डायबिटीज में फायदेमंद होती है लेकिन कुछ खास कंडिशंस में इसे अवॉयड करना चाहिए जैसे - प्रेग्नेंसी में : प्रेग्नेंट महिलाओं को कलौंजी अवॉयड करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स यूटेरस के कॉन्ट्रेक्शन को कम कर सकते हैं। साथ ही ब्रेस्ट फिडिंग करवाने वाली महिलाओं को कलौंजी नहीं खाना चाहिए। इससे मिल्क प्रोडक्शन कम हो सकता है। लो ब्लड प्रेशर होने पर : लो ब्लड प्रेशर होने पर कलौंजी न खाएं। मेडिसिन के साथ : कुछ दवाएं जैसे वारफेरिन, कोमेडिन और एस्पिरीन खा रहे हैं तो कलौंजी अवॉयड करें। पीरियड्स प्रॉब्लम होने पर : कलौंजी से ब्लड पतला होता है। इसलिए अगर आपको पीरियड्स प्रॉब्लम है तो कलौंजी न खाएं। इससे प्रॉब्लम बढ़ सकती है। सर्जरी होने पर : अगर आपकी सर्जरी हुई है तो कलौंजी न खाएं। इससे ब्लड पतला होता है जिससे डायबिटीक पेशेंट की प्रॉब्लम बढ़ सकती है।

कलौंजी से कैसे करें डायबिटीज का इलाज, जानिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय - SUGARCARE.IN डायबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट

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