Shiv Shankar
shiv Shankar
शिव ही इस ब्रह्मांड का परम सत्य हैं। वे आदि हैं और अंत भी। बाकी सब कुछ नश्वर है, बदलता रहता है, लेकिन शिव तत्व हमेशा स्थिर और शाश्वत रहता है।
हर हर महादेव! 🙏
शिव शंकर, भोलेनाथ, देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार है। वे अनादि और अनंत हैं—वही सृष्टि के कण-कण में वास करते हैं।
महादेव के चरणों में एक सुंदर स्तुति:
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
अर्थ: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, इस संसार के सार हैं और जो अपने गले में सर्पों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता पार्वती सहित मेरे हृदय में सदा निवास करें। उन्हें मेरा प्रणाम है।
भगवान शिव, जिन्हें हम महादेव, नीलकंठ और भोलेनाथ जैसे अनंत नामों से जानते हैं, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के केंद्र हैं। वे त्याग, वैराग्य और शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।
शिव के स्वरूप से जुड़ी कुछ खास बातें:
अर्धनारीश्वर: शिव और शक्ति का मिलन, जो बताता है कि सृष्टि में पुरुष और प्रकृति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
नीलकंठ: विष को गले में धारण करना सिखाता है कि बुराइयों को समाज में फैलने से रोकने के लिए संयम और धैर्य की आवश्यकता होती है।
त्रिनेत्र: तीसरा नेत्र केवल विनाश का नहीं, बल्कि अज्ञान के नाश और ज्ञान के उदय का प्रतीक है।
भोलेनाथ: उनकी सरलता ऐसी है कि वे मात्र एक लोटा जल और भक्ति से प्रसन्न हो जाते हैं।
हर हर महादेव! भगवान शिव की कृपा आप पर सदा बनी रहे।
भगवान शिव, जिन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है, कल्याण और मोक्ष के अधिपति हैं। उनके स्मरण मात्र से ही मन को अपार शांति और शक्ति का अनुभव होता है।
भगवान शिव, जिन्हें हम महादेव, नीलकंठ और भोलेनाथ जैसे अनंत नामों से जानते हैं, शक्ति और शांति का अद्भुत संगम हैं। उनके स्वरूप और महिमा के कुछ मुख्य पहलू यहाँ दिए गए हैं:
महादेव का स्वरूप: उनके मस्तक पर चंद्रमा शीतलता का, जटाओं में गंगा पवित्रता का और गले में नाग काल (समय) पर नियंत्रण का प्रतीक है।
अर्धनारीश्वर: शिव और शक्ति का यह रूप पुरुष और प्रकृति के संतुलन और समानता को दर्शाता है।
भोलेनाथ: उन्हें 'भोले' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे मात्र एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न हो जाते हैं।
महामृत्युंजय: वे मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले देव हैं, जो अपने भक्तों को भय और अज्ञानता के अंधकार से मुक्त करते हैं।
जय श्री महाकाल! उज्जैन के राजा, देवाधिदेव महादेव की महिमा अपरंपार है। क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जाग्रत स्थान है।
भगवान शिव के इस स्वरूप और उज्जैन की महिमा के कुछ खास पहलू यहाँ दिए गए हैं:
महाकालेश्वर की विशेषताएँ
दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग: महाकालेश्वर एकमात्र ऐसा प्रमुख ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। तंत्र शास्त्र में दक्षिणमुखी होना विशेष फलदायी माना जाता है।
भस्म आरती: यहाँ की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती भगवान शिव को जगाने और उनका श्रृंगार करने के लिए की जाती है, जो वैराग्य और जीवन की नश्वरता का प्रतीक है।
कालों के काल: "आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम्। भूलोके च महाकालो लिंगत्रय नमोस्तुते।।" अर्थात आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर और पृथ्वी पर महाकाल ही पूजनीय हैं।
ॐ जय ॐ करा
🍀🍁जीवन से बड़ा कोई विद्यालय नही,
कठिनाइयों से बढ़कर कोई परीक्षा नही
और समय से बड़ा कोई शिक्षक नही🍂🌿
🙏🙏 जय महादेव 🙏🙏
महादेव: देवों के देव, जिनसे ऊपर कोई नहीं।
नीलकंठ: जिन्होंने सृष्टि को बचाने के लिए विष का पान किया।
Devghar wale हर हर महादेव महादेव प्रभु महादेव प्रभु
तेरे द्वार से कोई भी खाली नहीं लौटता मेरे महादेव
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पावन स्थल है। यहाँ की महिमा निराली है और भक्तों की अपार श्रद्धा इसे "कामना लिंग" के रूप में पूजती है।
बाबा बैद्यनाथ धाम की विशेषताएं
शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग का संगम: यह दुनिया का इकलौता ऐसा स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ (हृदय पीठ) दोनों एक साथ स्थित हैं।
रावण की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, दशानन रावण शिव जी को लंका ले जाना चाहता था, लेकिन भगवान की माया से यह लिंग यहीं स्थापित हो गया।
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